कैन्सर के रोगियों का आयुर्वेदिक और आयुष और इन्टीग्रेटेड / काम्बीनेशन इलाज के परिणामों का अध्ध्य्यन ; STUDIES OF THE COMBINATION / INTEGRATED AYURVEDA AND AYUSH TREATMENT OF THE CANCER AFFECTED PATIENTS ;


कैन्सर के मरीजो का इलाज लम्बे समय से करते रहने से मुझे जिस तरह का अनुभव हुआ है वह सब मै आप सभी से शेयर करना चाहता हू /

बहुत बड़ी सन्ख्या मे मुझे कैन्सर के रोगियो का इलाज करने का मौका नही मिला है , लेकिन जितने भी मरीजो का इलाज किया है , भले ही उनकी सन्ख्या कम रही हो, ऐसे मरीजो की चिकित्सा करने से यह धारणा बनी है कि आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा के साथ साथ अलोपैथी के पैन किलर्स और विटामिन मिनरल्स का यदि प्रयोह साथ साथ करते है तो कैन्सर के मरीजो को दर्द और घाव और रक्त श्राव को रोकने मे बिना केमोथेरापी और बिना रेडियेशन और बिना सर्जरी के सफलतापूरवक इलाज किया जा सकता है /

लेकिन यह आसान काम नही है और इसे हल्के मे नही लेना चाहिये / कैन्सर के मरीजो के इलाज के लिये और इस तरह की चिकित्सा व्यवस्था के लिये बहुत ही skilled Doctor की जरूरत होती है जिसमे इस बात की स्पेशियलाइज समझ हो जिसे आयुर्वेद के अलावा होम्योपैथी और यूनानी और प्राकृतिक चिकित्सा और इन सबके साथ एलोपैथी चिकित्सा के बारे मे स्पेशियलाइज जान्कारी और ग्यान हो / क्योन्कि दवाओ का आपस मे इन्टिग्रेट करना भी एक तरह की कला है और रोगी मे किस तरह से दवाओ का ताल्मेल बैठाना होगा और किस मात्रा मे देना होगा यह किसी समीकरण बैठाने की कला से कम नही है /

रोगी को कैन्सर की तकलीफ से हलाकि बहुत तरह के सिन्ड्रोम्स से गुजरना होता है / सब रोगियो के सिड्रोम्स अलग अलग किस्म के होते है जो उनके व्यक्तिगत कैन्सर अन्गो के प्रभावित होने के कारण से होते है / लेकिन इनमे कुछ बाते काम्न होती है जो सभी मरीजो मे पायी जाती है /

इसमे पहला सिन्ड्रोम दर्द है जो सबसे ज्यादा दुख दायी होता है / कुछ मरीजो को दर्द नही होता है ऐसा भी देखा गया है लेकिन यह दर्द बहुत भीषण होता है और दर्द से रोगी बहुत परेशान होता है / इस तरह के दर्द के मैनेज्मेन्ट मे आयुर्वेद की की दवाये कुछ सीमा तक कारगर साबित हुयी है, इनके सेवन करने से दर्द मे कमी होती है लेकिन दर्द ठीक नही होता है लेकिन दर्द की इन्टेन्सिटी लेवल कम हो जाती है और राहत बनी रहती है ऐसा अनुभव किया गया है /

दूसरा घाव अथवा व्रण का है / कैन्सर का घाव ठीक नही होता है यह सही है, इसमे सड्न और बदबू आने लगती है, क्रैक्स के कारण खून बहने लगता है जो रुकता नही है और यह बढता चला जाता है इसके रोकने के उपाय भी कम्जोर पड़ जाते है / कम्बाइन्ड और इन्टीग्रेटेद इलाज करने से घाव का बढने की टेन्डेन्सी कम हो जाती है लेकिन यह बाहर के घावो तक ही सीमित है जहा बाहर से यानी external remedies को apply किया जा सके / घाव अगर अन्दर है तो भी सीमित स्तर की राहत हो सकती है /

तीसरा सूजन की तकलीफ होने लगती है / यह सारे शरीर मे या शरीर के कुछ हिस्सो मे हो सकती है / कैन्सर एक तरह से मेटास्टेसिस की बीमारी है जो लिम्फैटिक सिस्टम के काम करने की वजह से सारे शरीर मे फैलने की आशन्का को बढा देती है / इसलिये स्प्लीन और थाइमस ग्लैन्ड्स को सम्भालने की जरूरत होती है / आयुर्वेद मे इस सिस्टम को काबू मे रखने के लिये बहुत सी द्वाये है और इस अवस्था का इलाज समभव है /

कैन्सर के रोग का इलाज बहुत महन्गा है इसलिये इस बीमारी के इलाज के लिये धन की जरूरत होती है / साधारण दवाओ से काम न चलने पर महन्गी दवाओ की जरूरत होती है जो हर मरीज के लिये सम्भव नही होता है /

इस बीमारी से बचने का एक ही उपाय है कि स्वास्थय के बारे मे सतर्कता बरती जाय और स्वास्थय बनाये रकहने के लिये जितने उपाय है वे सभी किये जांय / कहा भी गया है कि PREVENTION IS BETTER THAN CURE यानी ऐसे स्वास्थय रक्षा के उपाय किये जाय कि यह बीमारी ही न हो /

हमारे यहा आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के परीक्षण के आधार पर कैन्सर के रोगियो का इलाज किया जाता है / जैसा कि इस तकनीक की विशेषता हि कि यह सभी सिस्टम के बारे मे किस तरह के बदलाव होते है यह पता चल जाता है और उसी के आधार पर इलाज करने से सफलता मिलती है / जैसा कि मै हमेशा कह्ता हू /

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