FISTULA CURABLE WITHOUT OPERATION BY AYURVEDA AND AYUSH COMBINED TREATMENT AND MANAGEMENT ; फिस्टुला / फिश्चुला / भगन्दर आयुर्वेद और आयुष इलाज से भी ठीक होता है


फिश्चुला / फिस्टुला / भगन्दर / RECTAL FISTULA की बीमारी आयुर्वेद और आयुष इलाज से ठीक हो सकती है और वह भी बिना आप्रेशन कराये / बड़ी सन्ख्या मे भगन्दर के रोगियो का इलाज करने के बाद मुझे जिस तरह का अनुभव हुआ है , वह आप सभी से शेयर करना चाहता हूं /

१- फिस्चुला जिस तरह की बीमारी है , उसे साधारण किस्म की आम बीमारियो जैसा नही समझा जाना चाहिये , यह एक तरह की अति गम्भीर किस्म की बीमारी है और इसका इलाज सन्जीदगी के साथ और गम्भीरता के साथ करना चाहिये / इसे हल्के मे नही लेना चाहिये / ऐसा मेरे अनुभव मे आया है जैसा कि मरीजो के रोग इतिहास से पता चला कि मरीज भगन्दर की बीमारी को बहुत हल्के मे लेते चले गये और बाद मे यह बीमारी बहुत खतर्नाक स्तर तक पहुन्च गयी / इसलिये इलाज करने मे देरी अथवा लापरवाही ऐसे मरीजो को बहुत भारी पड़ी है /

इसलिये रोगी को जिसको भगन्दर की बीमारी है जैसे ही पता चले फौरन इलाज करना शुरू कर देना चाहिये /

२- आम तौर पर देश और विदेश की जनता यानी GENERAL Public को पता नही होता है कि भगन्दर जैसी बीमारियों में किस तरह का इलाज किया जाय / क्योन्कि सही चिकित्सा और सही रोग निदान और सही दवाओ के द्वारा ही इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है / इसलिये सही चिकित्सा का चयन करना जरूरी होता है / आयुर्वेद और होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा के साथ साथ प्राकृतिक और योग चिकित्सा के कम्बाइन्ड और इन्टीग्रेटेड इलाज के द्वारा fistula को ठीक किया जा स्कता है /

मरीजों से प्राप्त जानकारी के आधार से यह पता चला कि 99.99 percent यानी ९९.९९% रोगियों को पता ही नही है कि आयुर्वेद या होम्योपैथी अथवा यूनानी या योग चिकित्सा द्वारा इस बीमारी का इलाज किया जाता है / कहने का मतलब यह को प्रति १००० व्यक्ति मे से केवल एक को ही इस बात का पता है कि आयुर्वेद या होम्योपैथी या यूनानी या प्राकृतिक चिकित्सा मे इस रोग को ठीक करने का मुकम्म्ल इलाज है /

जानकारी का अभाव केवल जनता यानी public मे ही नही है , बहुत से DOCTORS यानी इलाज करने वाले चिकित्सको को ही नही पता है कि वे जिस बीमारी को लाइलाज बताये दे रहे है उसका इलाज भले ही उनके चिकित्सा विग्यान मे न हो लेकिन आयुष चिकित्सा विग्यान मे मौजूद है / ऐसे डाक्टर रोगी को आप्रेशन OPERATION कराने की सलाह देते है /

३- सर्जरी / OPERATION आपरेशन कराने के बाद भी बहुत से मरीजों का फिष्चुला नही ठीक हुआ है / ऐसे रोगी बड़ी सन्ख्या मे आये है जिन्होने एक बार और दो बार और कई बार से लेकर १० या ११ बार आपरेशन करा चुके थे लेकिन उनका फिस्चुला नही ठीक हुआ और उनको आपरेशन कराने के बाद भी फिस्चुला फिर से  हो गया वह भी पहले से ज्यादा, इस्से से यह पता चलता है कि भले ही दावा किया जाता हो कि आपरेशन कराने के बाद फिस्चुला ठीक हो जाता है लेकिन बड़ी सन्ख्या मे आपरेट किये गये फिस्चुला न ठीक होने और कई कई बार फिर से दुबारा हो जाने अथवा  होने की पुष्टि करता है कि आपरेशन कराने के बाद भी फिस्चुला नही ठीक होता और आपरेशन द्वारा इलाज कराने के बाद दुबारा फिर  हो जाता है , ऐसी धारणा बनती है /

मेरे यहा तीन साल पहले एक ऐसा ही मरीज आया था जिसने ११ बार फिस्चुला का आपरेशन कराया था लेकिन उसके बाद भी वह नही ठीक हुआ / यह मरीज दिल्ली के नजदीक के एक जिले का रहने वाला है इसका इलाज चल रहा है /

ऐसे आपरेशन कराये हुये और आपरेशन कराकर फिस्चुला नही ठीक होने वाले मरीजों का इलाज आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक और यूनानी और प्राकृतिक चिकित्सा के मिलेजुले इलाज से अवश्य ठीक हुये है /

४- क्षार सूत्र चिकित्सा आयुर्वेद विग्यान का विषय है / ऐसे बहुत से मरीज मिले जिन्होने बताया कि क्षार सूत्र चिकित्सा से उनका भगन्दर /फिस्चुला ठीक हो गया लेकिन ऐसे भी मरीज मिले जिन्होने बताया कि उन्होने क्षार सूत्र चिकित्सा की लेकिन उनको कोई भी फायदा नही मिला / यानी कहने का यह मतलब कि क्षार सूत्र की चिकित्सा से कुछ प्रतिशत फिस्चुला के रोगी ठीक हुये है / आयुर्वेद के शोधार्थियों को इस पर रिसर्च करना चाहिये और इसके परिणामो को सार्वजनिक तौर पर बताना चाहिये / ऐसा मानना है कि क्षार सूत्र पर रिसर्च की गयी होगी और इसके परिणाम भी प्रकाशित किये गये होन्गे लेकिन यह आभास होता है कि यह केवल एकाडेमिक अतर पर ही रह गया और सार्वजनिक / जन्ता के बीच इसका कोई प्रसार नही हुआ है /

हमारे केन्द्र मे ऐसे बहुत से मरीज आये है जिन्होने क्षार सूत्र चिकित्सा करायी लेकिन उनको किसी तरह का फायदा नही मिला और उनकी तकलीफ जस की तस बनी रही है / ऐसे लोगो की चिकित्सा ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित परीक्षणों  के परिणाम का अध्ध्य्यन करने के बाद कम्कीबाइन्ड / इन्टीग्रेटेद एप्रोच के साथ  आयुर्गवेदिक और होम्यीयोपैथिक और यूनानी और प्राकृतिक चिकित्सा आधारित जीवन शैली और खान पान आधारित मैनेज्मेन्ट के द्वारा की गयी जिसके अपनाने से रोगी ठीक हुये है /

५- फिस्चुला के रोग मे डाय्जेस्टिव सिस्टम के साथ साथ इन्डोक्राइन और इन्टेगुमेन्टरी सिस्टम और लिम्केफैटिक सिस्टम के  अलावा कई तरह की ब्लड केमिस्ट्री एनोमेलीज पैदा हो जाती है / महत्व पूर्ण अन्गो की पैथो-फीजियोलाजी को समझना होता है / इसके अलावा एक बात सबसे महत्व पूर्ण है कि हर मरीज की बीमारी के समीकरण एक जैसे हमेशा नही होते है इसलिये हर मरीज का INDIVIDUALISED ANALYSIS AND STUDY  बहुत आवश्यक होती है / तभी आयुर्वेदिक दवाओ / आयुष दवाओ का चुनाव और उसके अनुसार मैनेज्मेन्ट करने से फिस्टुला की बीमारी अवश्य ठीक होती है /

हमारे रिसर्च सेन्टर मे इसी तरह से इलाज करने की व्यवस्था है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के साथ साथ अन्य दूसरे  परीक्षण करने की व्यव्स्था हमारे केन्द्र मे है / हमारे रिसर्च केन्द्र मे हमारी स्वय्म की  अपनी पैथोलाजिकल लैब है जिसमे सभी तरह के जरूरी परीक्षण करने की व्यव्स्था है / हमारा उद्देश्य रोग की जेनेसिस और उसके पाथ-वे को ढून्ढना है जहा से रोग की उतपत्ति होती है / हम इसी जेनेसिस यानी ROOT CAUSE OF DISEASE   का इलाज करते है और यही कारण है कि कई रोगो के इलाज मे हमे शत-प्रतिशत सफलता हासिल हुयी है, जो वास्तव के आश्चर्य जनक लगता है /

फिस्चुला लाइलाज बीमारी नही है और अधिकान्श्तया यह आयुष इलाज करने से ठीक हो जाती है /

 

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