एच०आई०वी० का एक और केस जिसे हमारे यहा से आयुर्वेदिक और आयुष इलाज से फायदा हुआ ; ONE OTHER H.I.V. CASE WHO GOT RELIEF FROM OUR CENTER BY AYURVEDA -AYUSH COMBINED TREATMENT


हमारे केन्द्र मे एक एच०आई०वी० का मरीज पिछले साल इलाज के लिये अगस्त २०१६ मे आया था / इसके बाद यह एच०आई०वी० का मरीज फालो-अप के लिये हमारे यहा दिसम्बर मे आया था जिसमे कुछ परीक्षण करके उसकी दवाये परिवर्तित कर दी गयी थी /

नीचे दी गयी आधे भाग की  ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की रिकार्डिन्ग दिनाक 19 August 2016  की है और दूसरे आधे भाग की रिकार्डिन्ग दिनान्क 19 June 2017  की है /

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ऊपर दी गयी सभी रिकार्डिन्ग का अवलोकन करने पर यह पता चल जाता है कि शरीर का इलेक्ट्रिकल बिहेवियर पहले से ज्यादा ठीक है और इम्प्रूवमेन्ट दिखता है / यह इम्प्रूवमेन्त करीब  60 %  फीसदी तक समझ मे आता है /

जब मरीज इलाज के लिये  हमारे पास आया था तब उससे कहा गया था कि वह अपना CD3 / CD4/CD8 Count  करा ले, यह इसलिये जरूरी होता है ताकि भविष्य मे इलाज शुरू होने से पहले की स्तिथि का स्तर क्या था यह establish किया जा सके / मरीज की इलाज शुरू होने से पहले की जान्च रिपोर्ट नीचे दी गयी है / इसे ध्यान से देखिये ताकि आगे वाली रिपोर्ट से इसका मिलान करके प्ता कर ले कि कहां कहां क्या क्या ठीक हुआ है /

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नीचे दी गयी रिपोर्ट ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की रिपोर्ट का एक हिस्सा है जिसमे आयुर्वेद के दोष -धातु के हिसाब से निदान किया गया है कि रोगी के शरीर मे किस दोष की प्रधान्ता है और उसकी कौन कौन सी धातुये प्रभावित हो गयी है / ”H” का मतलब high level है और यह नीचे तक यानी Down level तक आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तो को shorting करके बताता है कि शरीर को किस तरह की व्याधि है और इसका उपचार करने के लिये क्या क्या आवश्यक होगा /

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नीचे दी गयी रिपोर्ट RESTING POSITION जान्च के समय की है / इस जान्च मे क्या क्या रोग के सिन्ड्रोम्स मिले है यह बताया गया है , इन सभी से यह पता चलता है कि किस तरह की अनियमितताये शरीर के अन्दर बन रही है / आयुर्वेद और आयुष की चिकित्सा मे इसका बहुत महत्व है / चून्कि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा विधियो को लेकर डेवलप किया गया है इसलिये यह आयुर्वेद  और आयुष चिकित्सा विधियों के इलाज मे बहुत सटीक काम करता है /

 

लगभग आठ महीना आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक और यूनानी दवाओं का मिलाजुला  इलाज करने के बाद इस मरीज का दुबारा CD3 / CD4 / CD8 COUNT  दुबारा कराया गया / इसकी रिपोर्ट नीचे दी गयी है /

अगस्त 2016  मे कराये गये रक्त परीक्षण और जून 2017  जिसमे लगभग १० महीना इलाज करने के बाद किस तर्ह के परिवर्तन इन सभी काउन्ट मे आये है , आप सभी इसको तुलनात्मक विवेचना करने के बाद देखेन्गे कि मरीज करीब करीब क्योर की स्तिथि मे आ गया है / क्योन्कि इसके सभी काउन्ट ठीक है सिवाय CD3 + के  /

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हमारे रिसर्च सेन्टर की पैथोलाजी  लैब मे इस मरीज के पैथोलाजिकल परीक्षण किये गये है / जिसमे इसका ई०एस० आर० Erythrocyte sedimentation rate   अधिक निकला है , जिसका मतलब है कि अभी शरीर मे inflammatory condition  मौजूद है, यह किस कारण से है , यह भी पता चल गया क्योन्कि सीरोलाजी टेस्ट मे H.I.V. 1 test POSITIVE निकला है / H.I.V. 2 test NEGATIVE निकला है / हलान्कि यह E.I.V. 1 test  weak positive  है / इससे यह माना जायेगा कि अभी रोगी के शरीर मे एच०आई०वी के वायरस उपस्तिथि हैं /

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………………आप सभी आयुर्वेद प्रेमियो और चिकित्सको ने इस केस के बारे मे introductory रिपोर्ट पढी होगी, इससे आप सभी को यह आन्दाजा अवश्य महसूस हुआ होगा कि आयुर्वेद और आयुष के इलाज द्वारा एच० आई० वी० जैसी लाइलाज कही जाने वाली बीमारियां भी ठीक हो सकती है /

हलांकि  हमारे रिसर्च केन्द्र मे वह सभी परीक्षण की सुविधाये मौजूद है , जो मरीज की जान्च और इलाज के लिये आवश्यक है / एच० आई० वी० के बहुत से रोगियो का इलाज हमारे यहा से चल रहा है और सभी को फायदा है / समय समय पर रोगियो से permission लेकर उनके केसेस आपके सामने प्रस्तुत किये जायेंगे /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज से एच०आई०वी० के रोगी ठीक होते है , यह जरूर है, लेकिन इसके लिये मरीज को भी सतर्क रहना बहुत जरूरी है / मेरा अनुभव यही रहा है कि जिस रोगी ने दवा करने मे कोताही बरती या लापरवाही की , उसको इस बीमारी के परिणामो से बहुत गम्भीरता से जूझना पड़ा है /

इस बीमारी के रोगियो को जैसे ही शक हो कि उनको एच० आई०वी० इन्फ़ेक्शन होने की सम्भावना है उन्हे बिना इन्तजार किये हुये इलाज शुरू कर देना चाहिये / यह इन्तजार करना कि रोग का पता 6 से एक साल के बाद खून की जान्च कराने के बाद पता चलेगा, तब तक शरीर के अन्दर वायरस बहुत mature अवस्था मे पहुच जाते है और फिर उनको कम करना बहुत मुश्किल हो जाता है / इसलिये सबसे बेहतर तरीका यही है कि जैसे ही इस बात का शक हो कि एच० आई०वी० का इन्फेक्शन होने की सम्भावना है , बचाव के लिये आयुर्वेद और आयुष का इलाज शुरू कर देना चाहिये/

 

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