”मस्कुलर डिस्ट्राफी” के रोगियों मे बीमारी के कारणो मे सब कुछ एक जैसा नही होता है / मस्सकुलर डिस्ट्राफी के सभी मरीजो मे बीमारियों के कारण उनके ”इन्डिवीजुएलाइजेशन” के कारण अलग अलग होते हैं / इसलिये मस्कुलर अट्राफी या मस्कुलर डिस्ट्राफी के मरीजो की बीमारी के कारण पहचान कर उनका इलाज करने से सफलता प्राप्त होती है /


मस्कुलर डिस्ट्राफी के मरीजो के इलाज करने से इस बात का मन्तव्य सत्य के निकट लगता है , जैसा कि आयुर्वेद के मनीषियों ने अथवा यूनानी के हकीमो ने अथवा होम्योपैथी के स्तरीय चिकित्सकों ने अपने विचार बताये है /

अगर निष्कर्ष स्वरूप देखा जाय तो इसे ”इन्डिवीजुअल इन्टेरनल पैथोफीजियोलाजिकल डिसाअर्डर” ही समझा जाना चाहिये / मस्कुलर डिस्ट्राफी के मरीजों के सारे शरीर का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण यथा तीनो अवस्थाओं में यानी पहली अवस्था रेस्टिन्ग पोजीशन resting position और दूसरी अवस्था एक्सर्साइजीन्ग पोसीशन exercising position और तीसरी अवस्था लम्बे समय तक आराम और हिलने डुलने की अवस्था long term rest and movement position के साथ साथ कई तरह के मरीज की आव्श्यकतानुसार शारीरिक टेस्ट के साथ साथ रक्त परीक्षण और मूत्र परीक्षण भी किये जाते है / इसके अलावा अन्य जरूरी टेस्ट रोग की पहचान के लिये किये जाते है /

इस तरह के टेस्ट करने का मक्सद और उद्देश्य यह होता है कि मरीज के सारे शरीर का और उसके सिस्टम्स का अध्ध्य्यन करना होता है / सारे शरीर की जान्च इसीलिये की जाती है कि रोगी के शरीर मे कहां और किस तरह की कार्य विकृति अथवा विकृति शरीर के अन्गों मे मौजूद है / यह निर्धारण कर्ना आसान नही होता क्योन्कि इसमे समय बहुत लगता है /

लाक्षणिक उपचार मे कोई समय नही लगता है / उदाहरण के लिये सिर दर्द के लिये कोई भी दर्द नाशक दवा खा लीजिये , तुरन्त आराम मिल जायेगी / लेकिन सिर दर्द क्यो हो रहा है और बार ्बार किस कारण से हो रहा है यह जानना जरूरी होता है / तभी स्थायी फायदा हो सकेगा /

मस्कुलर डिस्ट्राफी के मरीजो मे थकान जल्दी होना, मान्शपेशियो का अकड़ाना थवा खिचाव होना, बुखार के साथ साथ मान्शपेशियो मे दर्द होना और सूजन आ जाना , यह सब लक्षण पैदा हो जाते है / इन सबके अलावा दूसरी तकलीफे हो जाती हैं /

आयुर्वेद के निदान ज्ञान की आधुनिक तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्वारा मस्कुलर डिस्ट्राफी के मरीजो का इलाज करने के बाद पता चला है कि हर मरीज के शरीर के फीजियोलाजिकल फन्क्शन्स अलग अलग होते है और उनमे निदान ज्ञान की विविधता होने के कारण आयुर्वेद -आयुष के इलाज और मैनेजमेन्ट करने मे हर मरीज को उसके इन्डिवीजुअलाइजेशन के कारण दवाओ की व्यवस्था और पथ्य का निर्देश उसी अनुसार देने से मरीजो की तकलीफ मे आराम मिल और धीरे धीरे उनके स्वास्थय मे सुधार हुआ/

आयुर्वेद के रक्त सिरम परीक्षण ्से भी वातादिक दोषों के ज्ञान होने से निदान और चिकित्सा मे बहुत सहायता मिलती है / सात वातादि दोष और सात सप्त धातुओं के अलावा मलादि कैटाबालिक द्रव्यो का स्टेटस क्वान्टीफाई हो जाने से आयुर्वेद और आयुष की चिकित्सा करने से चिकित्सक को सहूलियत मिल जाती है /

प्रत्येक मरीज का परीक्षण डाटा एक जैसा नही होता है / हर मरीज के व्यक्तिगत लक्षण होते है /

आयुर्वेद की अथवा आयुष की चिकित्सा करने मे इन्ही व्यक्तिगत डाटा का महतव होता है और तभी इन डाटा के उपयोग से मस्कुलर डिस्ट्राफी का इलाज करने से सफलता मिलती है /

आयुर्वेद की नवीन आविष्कार की गयी तकनीक रोगी के खून अथवा रक्त के सिरम के परीक्षण करने से आयुर्वेद के सिध्धान्तों की  डायग्निसिस हो जाने से मस्कुलर अट्राफी या मस्कुलर डिस्ट्राफी दोनो ही बीमारियो का सटीक कारण पता चल जाने से आयुर्वेद और आयुष का इलाज करन्मे मे सटीकता आ जाती है /

इलेक्ट्रोलाइट और मिनरल्स की कमी क्ला पता चल जाने से इन कमियो का इलाज आयुर्वेदिक और आयुष दवाओं के आधार पर करने से बीमारी के इलाज और मैनेज्मेन्ट को करने मे बहुत सहायता मिलती है /

हमारे रिसर्च केन्द्र मे आधुनिक आयुर्वेद की दोनो तकनीको के कई सवरूप प्रयोग किये जाते है जिनसे लाइलाज बीमारियो का इलाज करना और ऐसी सभी बीमारियो को मैनेज करना रोगियो के हित के लिये अति आवश्यक सिध्ध हो रहा है /

 

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