महीना: अक्टूबर 2017

पैरो के नी-ज्वायन्ट knee joints ,घुटने अथवा कमर के femur joints ज्वायन्ट के दर्दों और इन सभी ज्वायन्ट्स से जुड़ी तकलीफों का सटीक इलाज आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा मे श्रेष्ठ है


पैरों के ज्वायन्ट यानी knee joints अथवा फीमर ज्वायन्ट्स femur joints यानी कमर के जोड़ो की तकलीफें बढती हुयी उम्र के साथ साथ

बीमारी का स्वरूप लेनी लगती है /

अजकल लोग पैदल कम चलते है और स्कूटर अथवा मोटर साइकिल अथवा कार या दूसरे चार पहिया वाहन का उपयोग करने लगे हैं / कम पैदल चलने या शारीरिक मेहनत कम करने के कारण य आ अधिक समय तक बैठने का काम करने से भी यह बीमारी जोर पकड़ लेती है /

फीजियोलाजी के हिसाब से यह बीमारी शरीर के केमिकल अस्न्तुलन के कारण धीरे धीरे वियर और टियर के कारण होती है जो जोड़ो के आर्टीकुलेशन मे आ रही विकृति की वजह से हो जाती है /

इस विकृति के होने के बहुत से कारण होते है / जिन्हे समझना बहुत जरूरी है / बिना कारण को समझे हुये चिकित्सा करने से हमेशा रोगी की तकलीफ बढती है /

अक्सर साधारण लोग इस बीमारी को बहुत मामूली समझते है  जो खतरनाक  है / शरीर के किसी भी हिस्से मे दर्द हो , यह इस बात का इन्डीकेशन होता है कि शरीर का जो हिस्सा दर्द कर रहा है , उस हिस्से मे कोई प्राब्लम है / यह प्राब्लम उस हिस्से की बनावट या अन्ग या हड्डियो या मान्शापेशियो य़ा रक्त के बहाव से सम्बन्धित हो सकती है /

सामान्य तौर पर लोग  और आम जन जिनको इस तरह की तकलीफ होती है , वे पेन किलर्स का उपयोग करने लगते है , जो उनको दर्द से कुछ मिनटॊ मे फायदा पहुन्चा देता है / चून्कि इसके अलावा उनको कुछ दूसरा सूझता नही है इसलिये वे इस तरह के इलाज के आदी हो जाते है /

पेन किलर्स से पहला फायदा यही होता है कि रोगी के दर्द से राहत मिल जाती है , यह शुरुआत की बात होती है , लम्बे समय तक पेन किलर्स खाने से पेन किलर्स की डोज बढानी पड़ जाती है, जिसका असर लीवर के खराब होने जिसमे लीवर का काम न करना अथवा लीवर का साइज बढ या घट जाना , तिल्ली का काम कम कर्ना अथवा काम अधिक बढ जाना जिससे खून की कमी या प्लेट्लेट्स या खून के सफेद रक्त कणो की सन्ख्या मे बदलाव आना अथवा किडनी खराब होना थवा हृदय या मष्तिष्क के रोगो का जन्म लेना शामिल है /

एक बीमार के दर्द को कम करने के लिये कितनी और अधिक बीमारिया जो गम्भीर किस्म की होती है कैसे पैदा हो रही है , यह समझने की बात है /

ठीक इसके विपरीत यदि दर्द का कारण समझ कर अथवा दर्द क्यो और किस कारण से पैदा हो रहा है यह बुनियादी बात समझ कर अग्र इलाज करते है तो तो जोड़ो से सम्बन्धित सभी तरह की बीमारिया अवश्य ठीक होती है /

इस तरह की बीमारियो के इलाज के लिये आयुर्वेद  और आयुष थेरेपी चिकित्सा अत्यधिक कारगर होती है / जोड़ो की बीमारिया जैसे एवैस्कुलर नेक्रोसिस, गाउट, रियुमेटिक आर्थराइटिस अथवा रियुमेटोइड आर्थराइटिस, साइनोवाइटिस, सरवाइकल अथवा लम्बर अथवा एन्काइलोजिन्ग स्पान्डिलाइटिस अथवा रीढ के जोड़ो के दर्द से सम्बन्धित बीमारी हो  या  ऐसे रोगी जिनके शरीर के सभी जोड़ चाहे वे छोटे हो या बड़े हो सभी दर्द करते है और यह बीमारी लाइलाज स्टेज पर पहुन्च जाती है /

यहा कह्ना उचित समझता हू कि हमारे चिकित्सा सन्स्थान मे साधारण से जोड़ो के दर्द की तकलीफो से लेकर विचित्रता से भरे जोड़ो के दर्द के मरीजो का इलाज किया जा चुका है /

यहा कहना अनुचित न होगा कि लगभग सभी मरीजो को उनकी बीमारियो मे आराम मिली है, जिनकी बीमारी एक साल पुरानी हो चुकी है, वे स्वस्थय है और अपना सारा काम कर रहे है / यानी कहने का तात्पर्य यह कि जिन रोगियो की तकलीफ जल्दी हुयी और इलाज के लिये जल्दी आ गये और उन्होने किसी तरह का इन्तजार नही किया वे सव्भी बहुत शीघ्रता से ठीक हुये /

दूसरी तरफ वे मरीज जिनका रोग पुराना हो चुका था और खूब तगड़ी से तगड़ी एलिपैथिक की द्वा खा कर इलाज के लिये अये उनको उनकी तकलीफ और समय के अनुपात मे आराम उतने ही धीरे धीरे आनुपातिक स्वरूप मे मिला है / लेकिन एक बात यह जरूर रही कि सभी रोगियो को आराम मिला और वे अपना जीवन यापन सुख पूर्वक कर रहे है /

यह सब सम्भव होता है हमारे यहा के विशेष शारीरिक परीक्षणो के द्वारा  जो मशीनो द्वारा किये जाते है /

पहले पता किया जाता है कि बीमारी की जड़ क्या है और यह पैदा कहा से हो रही है / इसके लिये इलेक्ट्रिकल स्कैन सारे शरीर का कई अवस्थाओं मे  करते है /

रक्त – सिरम की जान्च द्वारा  शरीर की पैथोलाजी और पैथोफीजियोलाजी का आंकल्न करते है और फिर कोरिलेट किया जाता है कि असल मे बीमारी किस वजह से पैदा हुयी है /

शरीर के परीक्षण करने मे अन्य मशीनी उपकरणों का सहारा लेते है ताकि पिन-पाइन्ट डायग्नोसिस हो सके /

“सन्क्षेपत: क्रिया योगो परिवर्जनम ” आयुर्वेद का यह सूक्त वाक्य हमेशा फल्दायी होता है / इसका मतलब यह है कि ” कारण का निवारण करना ही सूच्छ्म  चिकित्सा है / हमारे सन्स्थान मे यही किया जाता है / इसीलिये चिकित्सा कर्य मे सफलता अवश्य मिलती है /

 

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