एच० आई०वी० पाजिटिव रोगी का रिपोर्ट आयुर्वेद और आयुष के इलाज के बाद निगेटिव हो गयी ; H.I.V. POSITIVE CASE ; CURED AND TURNED NEGATIVE BY AYURVEDA – AYUSH TREATMENT AND MANAGEMENT ON THE BASIS OF THE FINDINGS OF E.T.G. AYURVEDASCAN AND AYURVEDA BLOOD SERUM TEST AND CHEMICAL CHEMISTRY.


२७ / २८ साल की एक महिला को एच०आई०वी० का इन्फेक्शन उसके पति द्वारा लगभग डेढ साल पहले मालूम हुआ था / इससे पहले इस महिला के वजन मे कमी और बुखार रहना तथा शारीरिक बीमारिया हि गयी थी जिसके इलाज के लिये यह महिला दिल्ली के अस्पतालों में डाक्टरो से सलाह लेकर इलाज करती रही / जब इसकी बीमारी नही ठीक हुयी तब इसके खून की तथा अनय जान्चे की गयी जिससे पता चला कि इसे एच०आई०वी० का इन्फेक्शन हो गया है /

नीचे दी गयी रिपोर्ट से इस बात की जानकारी हुयी कि महिला को एच०आई०वी० का इन्फेक्शन है /

इस महिला का इलाज एन्टी एच०आईवी० दवाओं द्वारा किया गया / यह महिला नई दिल्ली के पास एन०सी०आर० मे रहने वाली है / महिला को किसी तरह का तकलीफ मे आराम नही मिला / दुबारा जान्च कराने से यह पता चला कि इसके CD4 count   पहले की रिपोर्ट की तुलना मे कम हो गये हैं /

यह देखकर किदिया जा रहा  एन्टी एच०एच०आई०वी० इलाज का असर नही हो रहा है  और महिला का वजन तथा अन्य तकलीफे बढ रही है , महिला के परिवार वालों को चिन्ता हुयी कि क्या किया जाय / परिवार के लोग बेहतर इलाज के डाक्टर की तलाश करने लगे /

इसी सर्च के दरमियान महिला के परिवार वालो को कनक पालीथेरापी क्लीनिक और रिसर्च सेन्टर कानपुर उत्तर प्रदेश  के बारे मे पता चला कि यहा एच०आई०वी० के रोगियो का इलाज आयुर्वेदिक और आयुष चिकित्सा द्वारा किया जाता है और बहुत से रोगियों को लाभ मिला है /

महिला रोगी लगभग आठ महीना पहले आयी थी / इसका ई०टी०जी० आयुर्वेदा स्कैन परीक्षण के साथ साथ आयुर्वेद खून की जान्च और केमिकल केमिस्ट्री की जान्च भी की गयी / सारी जान्च हो जाने के बाद शरीर के अन्दर की कमियों का पता चला /

रोगी को १२० दिन के लिये आयुर्वेद और आयुष की दवाये प्रेस्क्राइब की गयी / रोगी से कहा गया कि १२० दिन दवा खाने के बाद  वह फिर से अपने खून क वही टेस्ट कराये ्जो वह पहले करा चुकी है /

१२० दिन आयुर्वेद और आयुष की दवा खाने के बाद मरीज को FOLLOW UP  के लिये आना था / हमारे केन्द्र मे आने से पहले मरीज ने अपने रक्त की जान्च करायी है जो नीचे की रिपोर्ट मे देखा जा सकता है /

ऊपर की रिपोर्ट की तुलना करने से यह स्पष्ट हो गया कि महिला के CD4 count   मे बढोतरी हुयी है लेकिन यह काउन्ट सामान्य से कम है और सामान्य लेवल के नही है / यह टेस्ट बहुत sensitive  टेस्ट माने जाते है / इससे यह पता चला कि अभी इस महिला के नदर एच०आई०वी० के वाइरस मौजूद है /

बहर्हाल महिला का FOLLOW-UP पहला टेस्ट किया गया और जो भी anomalies  थी उसके आधार पर आयुर्वेद और आयुष कि दवाये १२० दिन खाने के लिये प्रेस्क्राइब की गयी / मरीज से कहा गया कि वह जब आगे होने वाले FOLLOW-UP TEST  के लिये आये तो दुबारा यही जान्च करा कर आये /

१२० दिन आयुर्वेद और आयुष कि दवाये खने के बाद महिला को FOLLOW UP SECOND   के लिये हमारे रिसर्च सेन्टर मे आना था / हमारे यहा आने से पहले महिला की जान्च की गयी /

रिपोर्ट मे सब कुछ सामान्य है / इसका मतलब यह हुआ कि महिला एच०आई०वी० रोग से मुक्त हो चुकी है / महिला का स्वास्थय और वजन बधा है / महिला प्रसन्न चित्त है / परिवार के लो इस बात से खुस है कि जिसे लाइलाज बीमारी बताया जाता है वह बीमारी इलाज योग्य है /

FOLLOW-UP SECOND के लिये महिला के परीक्षण किये गये और उसी के अनुसार महिला को हिदायत दी गयी कि अभी SIX MONTHS आयुर्वेद आयुष की दवाये खायें ताकि पलट कर बीमारी न हो / पति सम्पर्क सावधानी के साथ अतहवा न करने की सलाह दी गयी /

हमारे रिस्र्च सेन्टर मे एच०आई०वी० के रोगियों का इलाज आयुर्वेद और आयुष के जान्च पध्ध्यति ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और आयुर्वेद की रक्त सिरम फॊटोमेट्रिक जान्च करने के बाद ही किया जाता है / इन जान्चो से शरीर के अन्दर की सिस्टम की कमिया और बेसिक केमिकल केमिस्ट्री का पता चल जाता है / इन सबका गहन अध्ध्य्यन करने के बाद मरीज की व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार इलाज और मैनेज्मेन्ट की व्यव्स्था की जाती है /

एच०आइ०वी० के सभी रोगियो के आयुर्वेद और आयुष की  दवायें  और उनके प्रेस्क्रिप्शन्स एक जैसे नही होते है , इनके मैनेज्मेन्ट भी एक जैसे नही होते है / सभी मरीजों के प्रेस्क्रिप्शन्स उनकी individuality  के आधार पर प्रेस्क्राइब किये जाते है / अगर १०० एच०आई०वी० के मरीज होन्गे तो सबकी द्वाये और उनके मैनेज्मेन्ट अलग अलग होन्गे और इनके प्रेस्क्रिप्शन्स में विविधता होगी / यही कारण है कि सभी मरीजो को आयुर्वेद और आयुष दवाओ से लाभ मिलता है /

above report shows all parameters are within normal limit. Her SECOND FOLLOW-UP test was done and it is found that chemical chemistry level is almost within normal limit or little below or higher than normal limit.

Her ETG AyurvedaScan and other examinations are within normal limit.

It is advised to patient that she should take at least six months continuous AYURVEDA-AYUSH prescribed remedies , in between she should check her blood test as is earlier done.

In our research center,it is experienced after treating large number of H.I.V. POSITIVE patient that patient responds with AYURVEDA-AYUSH treatment and accordingly management. Some patient responds quickly and some responses slowly. It is depend upon the intensity level of infection, which patient have.

ETG AyurvedaScan and other blood tests leads the treatment criteria and thus decides what to do with each and every patient. Every patient is differs in chemical chemistry level and ETG Ayurvedascan findings. No two patient have equal problems and intensity level. All have their individual features. In our center , the peculiarities are detected and treated accordingly.

 

 

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