दिन: मार्च 3, 2018

होली के सीजन मे वायरस अटैक से बचने की जरूरत


्मकर सन्क्रान्ति के बाद से जब बसन्त रितु की तरफ मौसम बढता जाता है और ठन्ड तापक्रम से गरम तापक्रम की तरफ मौसम का रूझान होता है , इस समय का मौसम जब बदलाव की तरफ बढता है तब इसी सीजन मे वायरस और बैक्टीरियल बीमारिया पैदा होती है /

आज से प्चास साल पहले जैसे जिसी बीमारिया जिन्हे बैक्टीरिया से प्रभावित बताया जाता था , आज के वर्तमान मे उनका लोप हो गया है और वे बीमारिया अब दिखाई नही देती है लेकिन उनके स्वरूप बदल गये है /

टेक्स्ट बुक आफ मेडिसिन मे जिस तरह के फीचर्स टायफायड बुखार के बताये गये है वे आज दिखाई नही देते , इनका रूप और स्वरूप बदल कर हर साल अजीब से नये नये फीचर्स दिखने लगे है / डेविडसन की और प्राइस की मेडिसिन या हैरिसन की मेडिसिन मे जिस तरह के बीमारियो के फीचर्स दिखाई देते है वे अब कतई नही मिलते है /

अब तो कई बीमारियो के सम्मिलित प्रभाव वाली बीमारिया सामने आने लगी है /

मकर सन्क्रान्ति के यानी मध्य जनवरी मे ऐसे मरीज मिले जिनमें न्य़ूमोनिया + इन्फ्लुएन्जा + सोर थ्रोट+ भयानक खान्सी+  फैरिन्जाइटिस + मलेरिया बुखार के सम्मिलित लक्श्गणो वाले रोगी देखने को मिले /  इन सभी रोगियो मे एक बात सामान्य दिखी कि १०२ से लेकर १०४ तक बुखार रहने के बाद भी मरीज को महसूस नही होता था कि उसको बुखार है जब तक कि उसका बुखार थर्मामीटर से न नापा जाय / हलाकि बुखार COMBIFLAME TABLET  की आधी गोली से उतर जाता था और साथ मे आयुर्वेद की द्वाये यथा महा सुदर्शन घन वटि और महा ज्वरान्कुश रस अथवा आनन्द भैरव रस आदि की गोलिया चार चार घन्टे के अन्तर से देने पर बुखार के साथ साथ दूसरे सभी विकार लक्षणो का शमन हो जाता है / लेकिन इसमे पूरी तरह ठीक होने मे १५ से ३० दिन का समय लग जाता है /

हमारे यहा आये सभी मरीज सुख पूर्वक ठीक हुये है और सभी जीवित रहे है , इसलिये यह कहा जा स्कता है कि इस सीजन का वायरस फैटल किस्म का नही है / सभी मरीज खाना पीना वैसे ही करते रहे जैसे के आम दिनो मे होता है /

कुछ ऐसे मरीज दिखाई दिये है जिनको चिकन पाक्स जैसे इरप्शन सारे शरीर मे होने वाले दिखाई दिये, इन मरीजो को बुखार बहुत हल्का आया यही लगभग ९९.५ डिग्री के आसपास , वह भी एक आध दिन, लेकिन उनके इरप्षन  कई दिनो तक बने रहे / इन मरीजो के फीचर बिल्कुल चिकन पाक्स जैसे थे / इन्हे भी प्रहेज नही करया गया और सामान्य भोजन दिया गया / चमडी पर निकले हुये इन दानो मे खुजली बहुत होती थी, इसके लिये नारियल के तेल मे कपूर गलाकर लगाने के लिये बताया गया , जिससे उनकी खुजली मे तुरन्त आराम मिला /

बहुत से मरीजो का मुख का स्वाद करेले जैसा हो गया था / रोटी , सब्जी , दाल आदि खाने  मे उनको स्वाद नही मिलता था / ऐसा लगता था कि वे करेला खा रहे है या नीम की पत्ती चबा रहे है / लेकिन इन मरीजो को दूध और सेव फल या अनार फल का स्वाद सामान्य लगता था / इसलिये बहुतो को स्लाह दी गयी कि अगर वे चाहे तो दूध और फल पर रह सकते है /

मुझे लगभग  54  साल प्रैक्टिस करते हो चुके है / मेरे सीनियर और मोस्ट सीनियर डाक्टरों के साथ उनकी प्रैक्टिस को देखकर और उनके मरीजो के ट्रीटमेन्ट और मैनेग्जमेन्ट को देखकर बहुत अनुभव प्राप्त हुआ है /

टायफायड के इलाज के लिये क्लोरोमाय्सेटीन दवा मेरे सामने इन्ट्रोड्यूस हुयी थी / यह कालकोता की डेज  DEYS  कम्पनी की बनी दवा थी / यह द्वा पान्च या छह दिन मे टायफायड बुखार ठीक कर देती थी लेकिन किसी किसी को यह द्वा बन्द करने के बाद फिर बुखार आने लगता था इसलिये अधिक दिनो तक कैप्सूल खाने होते थे /

इसके बाद टेरामायसिन दवा आयी / यह दूसरी अन्टी बायोटिक द्वा इन्ट्रोड्यूस हुयी थी / इसके बाद टी०बी० के इलाज के लिये दायक्रिस्टीसिन का इन्जेक्शन और स्ट्रेप्टॊमायसीन इन्जेक्शन आने लगे / बाद मे सल्फा ग्रुप की दवाये  आने लगी / मैने करीब करीब सभी एन्टी बायोटिक का उपयोग किया है और इनके नुकसान और फायदे को भी देखा है /

हलान्कि मैने इन सभी एलोपैथिक एन्टी बायोटिक दवाओ का उपयोग आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक और यूनानी दवाओ के साथ किया और यह प्रैक्टिस शुरू से ही करता चला आ रहा हू ्क्योन्कि मुझे लगता था कि केवक एन्टी बायोटिक देने से रोग दूर नही होते है उल्टे कुछ काम्प्लीकेशन बढ जाते है जैसा कि मैने सीनियर एलोपैथिक डाक्टरो की प्रैक्टिस मे देखा था /

उदाहरण के लिये कानपुर के एक सीनियर डाक्टर टायफायड का इलाज कर रहे थे , एन्टि बायोटिक देने से उसकी आन्तो मे घाव होकर रक्त रिसने लगा जिसके लिये सर्जरी करनी पड़ी /

एक दूसरे सीनियर चिकित्सा शास्त्र के एलोपैथिक डाक्टर टेरामायसिन द्वा का उपयोग कर रहे थे जिससे मरीज को ब्लड कैन्सर पैदा हो गया /

ये सब आज से चालिस / पैतालिस साल पहले का वाकया है / यह सब देखकर ही मैने एन्टी बायोटिक का उपयोग सुरक्षित और कारगर और सटीक बनाने के लिये साथ मे आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक या यूनानी दवाओं  का उपयोग करता हू और बेहतर रिजल्ट प्राप्त करता हू / सभी मरीज सुरक्षित होते है और जल्दी ठीक होते है /

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