महीना: अप्रैल 2018

AYURVEDA NEW AND ORIGINAL CONCEPT BASES ON THE SCIENTIFIC EVALUATIONS ; BOOKS WRITTEN BY DR.D.B.BAJPAI ; AVAILABLE FREE ONLINE ; UPLOAD BOOKS IN P.D.F. FORM IN HINDI & ENGLISH LANGUAGE


Dr Desh Bandhu Bajpai has written some books on Ayurveda – Ayush subjects, which are related to hi-profile research in different aspects of the Ayurveda Medical system.

The Books are in P.D.F. Form and can be downloaded free from the following link;

http://www.slideshare.net/drdbbajpai/documents

The first book is related to the ”TRIDOSHA THEORY” which is correlated to other sciences and tried to establish a scientific remarks to the theory of Ayurveda established by our ancestors. The second book is a introductory to newly invented diagnosis technology in AYURVEDA, known as ETG AyurvedaScan system title “An Introduction to ETG AyurvedaScan “.

Both Books are in Hindi language.

The Third book is a hi-profile Ayurveda invented technology related to Human Blood Serum for diagnosis of chemical chemistry and TRIDOSHA and SAPTADHAU evaluation, how test are performed , it is given in this book. The Book is in Bi-lingual Hindi and English both.

Readers are requested to go through the books and comments on the book are always welcome.

डा० देश बन्धु बाजपेयी द्वारा आयुर्वेद के वैज्ञानिक पक्ष को आधुनिक वैज्ञानिक विधाओं यथा मौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र,  प्रकृति विज्ञान, स्पेस साइन्स, अनरिक्ष विज्ञान की शाखाओ आदि आदि के साथ समन्वयन करके पुस्तक स्वरूप मे  रचित की गयी है /

प्रथम पुस्तक का विषय शीर्षक “आयुर्वेद के सिध्धान्तों का आधुनिक हाई-टेक्नोलाजी इलेक्ट्रो-त्रिदोषो-ग्राफ : ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित वैज्ञानिक अध्ध्य्यन” है जिसमे आयुर्वेद के सिध्धान्तों का यथा वात और पित्त और कफ के अलावा चरक और सुश्रुत मे बताये गये आयुर्वेद के सिध्धान्तों का स्टेटस क्वान्टीफिकेशन करने की विधियों का सूचनात्मक वैज्ञानिक विवेचना दी गयी है / यह पुस्तक हिन्दी भाषा मे रचनाकार डा० देश बन्धु बाजपेयी द्वारा लिखी गयी है /

दूसरी पुस्तक का शीर्षक “आयुर्वेदिक निदान के लिये ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक का परिचय ”  है इस पुस्तक मे डा० डेश भन्धु बाजपेयी द्वारा आविष्कार की गयी निदान ज्ञान और आयुर्वेद के  पूर्व मानकीकरण किये जा चुके विषयो को आधुनिक मशीन के द्वारा विकसित किये गये टेक्नोलाजिकल सिस्टम को बताने का प्रयास किया गया है / पुस्तक मे आधुनिक बिज्ञान  के विभिन्न आयामों को लेकर इसे स्मयोचित बताने का प्रयास किया गया है / यह पुस्तक हिन्दी भाषा मे लिखी गयी है / 

तीसरी पुस्तक  का शीर्षक ’’ AYURVEDA FUNDAMENTALS STATUS QUANTIFICATION BY BLOOD SERUM EXAMINATION THROUGH USING COLORIMETER ”  “कलरीमीटर द्वारा रक्त सिरम को टेस्ट करके आयुर्वेद के सिध्धान्तों का स्टेटस क्वान्टीफिकेशन आन्कलन”  है, यह पुस्तक डा० देश बन्धु बाजपेयी द्वारा आविष्कार की गयी तकनीक के बारे मे बताने के लिये हिन्दी और ENGLISH दोनो भाषाओं में लिखी गयी है / यह तकनीक आयुर्वेद मे लैबोरेटरी सन्स्कृति को बढावा देने मे मील का पथ्थर साबित होगी /

इन सभी पुस्तको को मुफ्त डाउन लोड कर सकते है और इसका लिन्क ऊपर बताया जा चुका है /

जिन लोगो के पास डाउन लोड करने या कम्प्यूटर की सुविधा नही है , ऐसे लोग चार सौ रूपये   Rs Four Hundred  हमारे खाते मे जमा करके कूरियर द्वारा मन्गा सकते है /  इसके लिये डा० अनुराग बन्धु बाजपेयी से मोबाइल नम्बर 08604629190 पर सम्पर्क कर ले और जानकारी प्राप्त  कर लें / 

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PARKINSON’S DISEASE ; LONG-LASTING DISEASE CONDITION ; AYURVEDA AND AYUSH REMEDIES TREATMENT AND MANAGEMENT RELIEVES DISORDERS


PARKINSON’S DISEASE is a mal-functioning conditions of the combination of few body systems at a time, if it is observed carefully.

The condition is mainly seems neuro-musculo-skeletal pathophysiology or pathology of the systems involved with this disorder. Brain and its related functionaries when comes in physiological impression changes. this causes the abnormal behavior of the functionaries. As it is already known that each and every function of the human body is controlled by the many interconnected phenomenon which is yet to be understand by the medical scientist. Brain have five main parts divided in two separate interconnected mediums.

Brain faculties are controlled itself by the existing chemical chemistry equilibrium inside the cells and tissues which together makes an organic structure. Below is the given structure of the Autonomic nervous system which controls the entire body mainly specially internal organs.

Muscles of the body is controlled by the nervous system in active and passively. Almost every function of the limbs muscles are control by the brain information system and accordingly orders.

When this normal function phenomenon changes by the human body due to obvious reasons, the functions of the control becomes a disorder and thus it causes anomalies.

Parkinson’s disease is in my opinion, caused by the release of the  uncertain and irregular  and in different interval the electrical waves emmissions.

CERVICAL SPONDYLITIS; SPINAL RELATED DISEASE ; SHOULD NOT BE TAKEN CARELESSLY ; AYURVEDA-AYUSH TREATMENT CURE THE CONDITION ; सरवाइकल स्पान्डिलाइटिस ; रीढ की हड्डियों की बीमारियां ; इलाज मे लापरवाही करने से और ज्यादा बढती है ; आयुर्वेद और आयुष के इलाज से यह बीमारी ठीक हो जाती है


गर्दन यानी गले के पीछे के हिस्से की रीढ की सात यानी seven  हड्डियों के मन्कों को सरवाइकल हड्डियो के नाम से जानते है / यह सभी सातों हड्डिया एक दूसरे के ऊपर कुतरती  तौर पर बडे ही एहतियात से रखी हुयी होती हैं / जब इन हड्डियो के बीच के हिस्सों मे भरा हुआ पदार्थ कम हो जाता है तो इन हड्डियो के बीच का गैप कम होता है और हड्डिया सिकुड़ कर आप्स मे रगड़ने लगती है / इस रगडन के कारण हड्डियो को जोड़ने वाले लीगामेन्ट्स और मान्शपेशियां तथा खून की नलिकाओ पर प्रभाव पड़ता है जिससे दर्द इत्यादि तकलीफे पैदा हो जाती है /

कभी कभी गर्दन की हड्डियो के लोच कम होते है / इससे गरदन मे अकड़ाहट आदि पैदा होती है /

जिनको सरवाइकल स्पान्डिलाइटिस होती है उनको नीचे लिखे लक्षण होते हैं /

  • उठने बैठने और लेटने के समय अचानक बहुत जोर से चक्कर आ जाना / चक्कर आने से ऐसा लगता है कि सारा सिर घूम गया है या सभी चीजे चक्कर काट रही है / जिसको यह चक्कर आते है वह घबराकर चिल्लाने लगता है और आन्खे मून्द लेता है /
  • किसी किसी को गरदन घुमाने मे भी चक्कर आने लगते हैं /
  • गरदन मे दर्द और अकड़न पैदा हो जाती है जिससे गर्दन घुमाने मे तकलीफ होती है / गर्दन ऊपर नीचे या दाये बाये घुमाने मे दिक्कत होती है /
  • गरदन का दर्द कभी कभी सीने मे होता है और CHEEST MUSCLES  दर्द करने लगती है इससे यह भ्रम पैदा हो जाता है कि कही यह हार्ट अटैक का दर्द न हो /
  • दोनो हाथो मे या एक हाथ मे कम्पन या झनझनाहट और सुन्नपन होने लगता है
  • दोनो हाथ अथवा एक हाथ मे दर्द होने लगता है यह दर्द कभी तेज अथवा कभी कम होता है /
  • सोते समय करवट बदलने मे गर्दन मे तकलीफ होती है /

यह बहुत खराब बीमारी है इससे उम्र बढने के साथ साथ शारीरिक काम्पलीकेशन्स बढने लगते है, किसी किसी को इस बीमारी से मानसिक तनाव की और ब्लड प्रेशर हाई होने की भी शिकायत हो जाती है /

जिस किसी को यह बीमारी हो जाय उसको आयुर्वेद अथवा होम्योपैथी अथवा यूनानी द्वाओ से इलाज कराना चाहिये क्योन्कि इस बीमारी का इलाज आधुनिक चिकित्सा शास्त्र मे नही है /

बीमारी के निदान के लिये X-Ray  परीक्षण कराना चाहिये इससे पता चल जाता है कि बीमारी है या नही और किस तरह की है / CTScan और ंMRI  परीक्षण से भी पता चल जाता है / इसलिये निदान के लिये इन विधाओ का उपयोग करना चाहिये /

आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन से भी सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस का निदान हो जाता है और पता चल जाता है कि बीमारी किस लेवल की है / अगर सरवाइकल स्पान्डिलाइटिस का इलाज ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण कराकर किया जाता है तो बीमारी शत प्रतिशत ठीक होती है /

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WORLD HOMOEOPATHY DAY:10th APRIL ; ” SUPPRESSED ERUPTIONS” OR ”SUPPRESSED ILLNESSES” OR ”SUPPRESSED DISORDERS” OR ”SUPPRESSED DISEASES” ARE MAIN CAUSES OF MAJOR ILLNESSES IN HUMANS ; AS IS NARRATED BY HAHNEMANN, THE FATHER OF HOMOEOPATHY ; IN SUPPORT OF STATEMENT GIVEN IN ”ORGANON OF MEDICINE” ;


Every year at our research center at KANAK POLYTHERAPY CLINIC OUTDOOR HOSPITAL,KANPUR, INDIA , we have opportunity to treat a large number of Incurable disease conditions andChronic Diseases and Life Long suffering disorders and those disorders which are un-diagnosed and Allopathic treating physician declares that this condition is incurable and have no treatment in this world.

In our opinion, this is a wrong concept, which Allopathic physician have in their minds and they should correct their notions and should go to the reality, otherwise they will be counted as ”quacks” because they do not understand the reality of other medical systems.

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In our observations, we have found that the statement and doctrine perceived by Dr. Samuel Hahnemann about ”suppression disorders” are true and perfect as is written by him in his book “ORGANON OF MEDICINE”. Later , after years, Dr. Hering introduces a law , which is termed as  Herring’s Law of Cure” in Homoeopathic Medical system. This seems important in the view of biological investigation that something is changes in biological system equilibrium , when one system of body behaves pathophysiologically , when disturbed by any invasive agents, which could be chemical substance introduced in body as remedies or bacterial infections or some other means.

We should try to understand that Dr Samuel Fredric Hahnemann, the Father of Homoeopathy, was an Allopathic Practitioner and with this he was a CHEMIST and knows well about the Chemistry an chemical substances.

The idea of Homoeopathy did not come all of sudden. The birth of Homoeopathy is based on the long term experiments done by the Hahnemann on chemistry bases tests. Even Hahnemann did not knows that he will have to do experiment for Homoeopathy. It was the last life phase of Dr Hahnemann when homoeopathy doctrine came in existence in the world.

However the doctrine of suppression given by the Hahnemann can be compared similarly to actions of Anti-biotic in human body. When antibiotics are introduced in human body, their actions are not yet well studied. Researchers times to times tell about the antibiotics this and that effects on human body, which is not well clear, but one thing is true that antibiotics are hazardous to health and body because the antibiotic ability can change the normal physiology into pathophysiology and finally pathological conditions.

Hahnemann’s perception about suppression is that when strong doses of chemical substances are given for treatment they do not capable to eliminate the original disorders , reversely interrupt the process of cure and inhibit the natural physiological actions which goes to the path of cure.

No research, not a single research, have been done globally yet on this doctrine of”SUPPRESSION”, therefore WORLD HEALTH ORGANISATION and NATIONAL GOVERNMENT of their respected countries should come forward without any prejudice and program of research on this line should be encouraged. This is important to save the human life from upcoming future hazards to health and to improve the best quality of treatment.

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बीमारियों मे परहेज करना भी जरूरी है / क्या भोजन करना है और कौन सा भोजन नही लेना है ?? जीवन शैली से जुडे़ रोगो मे जीवन -चर्या किस तरह से होना चाहिये यह कितना आवश्यक है ??


जन साधारण को यानी बीमारियो से जूझ रही पब्लिक को यह पता ही नही है कि उसे किस बीमारी मे क्या भोजन खाना चाहिये या क्या भोजन नही खाना चाहिये ? यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है , इसे समझना बहुत जरूरी है /

आयुर्वेद मे इसे परहेज करना कहते है यानी खान पान और जीवन का रहन सहन ऐसा हो जो रोग को दूर करने मे सहायता करे / यानी दिन मे कैसा आचरण खान पान मे और रहन सहन मे और रात मे चर्या किस तरह की होना चाहिये इसे रोगी की जानकारी मे होना चाहिये /

मेरा मानना है कि आयुर्वेद ही अकेला ऐसा चिकित्सा शास्त्र है जो मानव समाज को हिदायत देता है कि ्जब उसे बीमारी हो तो उसे पहला- यह ध्यान देना चाहिये कि उसे क्या खाना पीना लेना चाहिये जो उसकी बीमारी को दूर करने मे मदद करे और उसकी बीमारी बढे नही

 

11 YRS OLD MALE BOY SUFFERED FROM ” SEVERE NEPHRITIS” ; A KIDNEY DISORDER ;AYURVEDA AND AYUSH COMBINATION AND INTEGRATED TREATMENT SUCCESSFULLY


An 11 yrs old boy , who is suffering from SEVERE NEPHRITIS / NEPHROTIC SYNDROMES JUVENILE ,came for treatment from a  local area of Kanpur, Uttar Pradesh. The boy was treated by Allopathic super specialist doctors  of Kanpur in a prominent Hospitals with Allopathic remedies since few years without any result. His condition was worsen day by day and this was the point of anxiety for parents. At last one of parent’s friend suggested to our concerns for treatment.

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MODEL OF KIDNEY

The boy was primarily examined and the disease is established that he is suffering with NEPHROTIC SYNDROMES. In our research center, many cases of NEPHROTIC SYNDROMES  of many age groups were treated in past successfully and with total cure and presently are treated successfully with AYURVEDA AND HOMOEOPATHIC AND UNANI MEDICATIONS simultaneously and integrated and and in combination way very successfully with the merit.

Below  see the face of boy, who have swelling on face and around the eyes. In nephrotic syndromes this is a cardinal diagnosis point of  sufferings.

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Over all Four angles are taken for study purposes.

Below is given the report of the PHOTOMETRIC  URINE ANALYSIS. In this report some electrolytes are  showing either  high or low. So is of the minerals.

Above report shows the presence and evaluation of AYURVEDA BASIC FUNDAMENTALS , which is essential for guide lines for accurate treatment. The above report shows that the boy is suffering with the combination doshas of PITTA and KAPHA. This diagnosis eases the task of accurate treatment.

The Physical parameters are recorded and it shows that  patient have fever and tendency of High Blood pressure and rapid heart rate.

Over all analysing the case in view of Ayurvda, a few remedies are prescribed.

Our experience is very positive in NEPHROTIC SYNDROMES cases that cases responses well to Ayurveda and Homoeopathic and Unani combination and integrated treatment and management. We have not seen any relapse case  after the treatment.

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