KIDNEY STONE ; RENAL STONE ; TOTAL CURE BY AYURVEDA & AYUSH TREATMENT AND MANAGEMENT


KIDNEY STONES AND RENAL STONES are totally curable by Ayurveda and Ayush treatment. In general and particular cases of Renal stones are curable by Ayurveda and Ayush combination and integrated treatment. Yet there is no need of any kind of Surgical interventions up to the size of Calculus beginning from tiny to 15 millimeters and above and in numbers. The phyto-chemicals and Chemical substances containing anti-calculus properties remedies of Ayurveda and Homoeopathy and Unani works against the formation of calculus and melting them slowly and gradually with inhibiting the HYDRONEPHROSIS and renal pain.

In Ayurveda and in Homoeopathy and in Unani a large number of remedies persists to cure the condition. It is often seen that after removal of ..Calculus by Surgical interventions, calculus again reappears. By allowing Ayurveda and Ayush treatment repetition of the formation of calculus is not seen often…Once it is cured , it is been cured for all time…………..

किडनी यानी गुर्दा यानी रीनल स्टोन्स यानी पथरी अथवा ज्यादा सन्ख्या की छोटी अथवा बड़ी पथरियां जो गुर्दे के अन्दर हो जाती है ऐसी पतहरियों का इलाज आयुर्वेद और होम्योपैथी औए यूनानी दवाओं के काम्बीनेशन अथवा इन्टीग्रेटेद स्वरूप मे किया जाता है तो सभी प्रकार की गुर्दे की पथरिया धीरे धीरे मेल्ट होकर निकल जाती है /

गुर्दे की पथरियों का पता अल्ट्रासाउन्ड अथवा एक्स-रे अथवा सी०टी०स्कैन अथवा एम०आर०आई० से पता चलता है / हाइड्रोनेफ्रोसिस और पथरियो का पता आयुर्वेद की नई तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन से पता चल जाता है लेकिन नई तकनीक मे पथरियों का साइज ठीक ठीक नही पता चल पाता है इसलिये अल्ट्रासाउन्ड पथरियो के साइज को जानने के लिये सबसे बेहतर तरीका है /

यहां इसका उल्लेख इस्लिये कर रहा हू कि आयुर्वेद और आयुष  के इलाज के लिये ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन सबसे बेहतर डायग्नोसिस विधि है / जब पथरी का इलाज करते है तो पथरी की जेनेसिस और उसका पाथ-वे जानना जरूरी होता है / लेकिन इलाज करते रहने के दरमियान मानीटरिन्ग के लिये यानी इलाज करने के कुछ हफ्ते बाद अल्ट्रासाउन्ड द्वारा यह पता लगाना जरूरी होता है कि पथरियो के साइज मे क्या और किस तरह के परिवर्तन आये हैं / इसी पर द्वाओ की डोज और अन्य बाते निर्भर करती है /

गुर्दे के अन्दर और मूत्राशय मे कुछ मरीजो मे एक्स रे और अल्ट्रा साउन्ड कराने के बाद पता चलता है कि उनके गुर्दे और मूत्राशय मे बहुत बड़ी बड़ी पथरिया मौजूद है / कभी कभी इस तरह की तकलीफ गलत साबित होती है / ऐसा इसलिये क्योन्कि गुर्दे अथवा मूत्राशय के अन्दर कैल्सियम और दूसरे मिनरल्स अन्दरूनी दीवार मे एक मोटी पर्त बना देते हैं जो एक मिलीमीटर से लेकर २ या ३ या अधिक मिलीमीटर की मोटाई की परत जमा देते है / एक्स रे मे यह अन्कित हो जाता है क्योन्कि एक्स रे की किरणे इस पर्त के कारण रुकती है जिससे एक भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है / यही अल्ट्रासाउन्ड मे भी होता है / जब अल्ट्रासाउन्ड को प्रोब के द्वारा  गुर्दे की ओर छोड़ते है तो इन पर्तो से टकरा कर आने वाले ध्वनि सन्केत पथरी का सन्केत देते है / इसलिये भ्रम की स्तिथि बनती है /

गुर्दे की पथरी एक पुरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है / ई०टि)जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज और आयुर्वेद के मूत्र और रक्त परीक्षण आधारित इलाज कर्ने से यह बीमारी शत प्रतिशत ठीक हो जाती है / इस बीमारी मे आनन फानन मे आपरेशन नही करना चाहिये / आपरेशन अति इमर्जेन्सी की अवस्था मे ही कराना ठीक होता है /

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