अचानक होनें वाली अप्रत्यासित बीमारियां CLINICALLY OBSERVED SHOCKED CONDITION


अचानक होनें वाली बीमारियां और इन सब बीमारियों से प्रभावित लोगों को यह समझनें की जरूरत है कि क्लीनिकल शाक्ड कंडीशन ऐसी अवस्था है जो किसी भी पुरानी तकलीफ के घीरे धीरे बढ़ते हुये

और इस धीरे धीरे बढ़ाव को बिना किसी तकलीफ का अहसास कराते हुये अचानक एक दिन विस्फोटक स्वरूप में प्रकट होकर शरीर को गंभीर हालत में ला देने की स्थिति है

जब शाक की स्थिति पैदा होती है तो इस बात की संभावना सबसे अधिक होती है कि एक्यूट सर्कुलेटरी सिस्टम कहीं फेल न होनें लगे ।

ऐसा देखा गया है कि अगर शीघ्र ही प्रारंभिक निदान और उचित उपचार नही किया गया तो शाक की तकलीफ की मृत्यु दर अधिक होती है।

शाक की कुछ स्थितियां होती हैं ।

  1. हाइपोवोलेमिक शाक
  2.  सेप्टिक शाक
  3. कार्डियोजेनिक शाक

हाइपोवोलेमिक शाक दो भागों में बट जाता है ।

  1. एब्सोल्यूट हाइपोवोलेमिया – यह स्थिति तब पैदा होती है जब इंट्रावैस्कुलर फ्लूड क्षीण हो जाता है यानी नसों के अन्दर बहनें वाला रक्त-सिरम में कोई कमी हो  जाय ।

उदाहरण के लिये – खून का किसी बाहरी या आन्तरिक कारण से अत्यधिक मात्रा में  बह जाना, डिहाइड्रेसन, शरीर से अत्यधिक मात्रा में पानी की कमी हो जाना, आग से जल जाना

और

  • रिलेटिव हाइपोवोलेमिया – एनाफिलैक्टिक रियक्शन, किसी वजह से एलर्जी पैदा हो जाना, विषैली दवाओं का उपयोग, एन्टीबायोटिक का अत्यधिक  प्रयोग, मलेरिया और कैंसर जैसे असाध्य रोगों की श्रेणी

सेप्टिक शाक – इसमें कई रोग एक साथ जुड़कर शरीर की स्थिति नाजुक बना देते हैं जैसे किडनी फेल होने के साथ साथ दमा की बीमारी और ढायबिटीज रोग का एक साथ पैदा हो जाना

कार्डियोजेनिक शाक – हृदय और हृदय रोग के विभिन्न प्रकारों से ग्रसित रोगी, जहरीले पदार्थों का हृदय की गतिविधियों पर असर, गंभीर किस्म की प्राणलेवा चोट

शाक के सामान्य लक्षणः

शरीर का पीला दिखाई देना, Mottled  Skin, हाथ पैर ठन्डे हो जाना, पसीना अधिक आना, प्यास का अघिक लगना, हृदय की घड़कन का अघिक चलना, कम ब्लड प्रेशर, सांस लेने में तकलीफ, शरीर का नीला पड़ना, पेशाब का बंद हो जाना, दिमाग में भ्रम पैदा होना

जैसे ही शाक से ग्रसित रोगी में इस तरह के लक्षण दिखाई दे, तीमरदारों को सावघान हो जाना चाहिये और स्थिति को समझते हुये अस्पताल या चिकित्सक की सलाह लेना चाहिये ।

शाक की कुछ स्थितियां घर पर ही मैनेज की जा सकती हैं लेकिन यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है । बहुत सी स्थितियों में चिकित्सक को रोगी के रोग को मैनेज करनें के लिये विशेष सुविधाओं की आवश्यकता होती है जो केवल अस्पताल में ही संभव है ।

ऐसी स्थिति जीवन में न आये इसके लिये लोगों की जागरूकता और कोई भी बीमारी होनें पर समयानुकूल तुरन्त इलाज करनें का इरादा हो तो ऐसी परिस्तिथियों से बचा जा सकता है ।

बहुत सी स्थितियों पर आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक और यूनानी दवाओं द्वारा तुरत फुरत इमरजेंसी लाइन के तौर पर इलाज शुरू कर दिया जा सकता है और घर अथवा क्लीनिक में ही इलाज की व्यवस्था की जा सकती है ।







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Presented by ;




Dr. Desh Bandhu Bajpai
B.M.S. [Lucknow
] Ayurvedacharya [Delhi
]
M.D. [Medicine] Ph.D. [E.T.G. AyurvedaScan]
Diplom-Homoeopathy [Germany
]
M.I.C.R. [Mumbai] C.R.C. [Cardiovascular]
Inventor & Chief E.T.G. AyurvedaScan Investigator &
Ayurveda Blood & Ayurveda Urine Test Developer
 
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