औषधियां सामान्यतया टाक्सिक यानी विषैले प्रभाव वाली होती है


मानव शरीर में जब किसी तरह का रोग होता है , तब उसको दूर करनें के लिये औषधियों का सहारा लिया जाता है ।

आम तौर पर यह दवायें वनस्पतियों और केमिकल या रासायनिक पदार्थों अथवा जीव-जन्तुओं के अंगों से प्राप्त की जाती हैं । प्राप्त किये गये द्रव्यों से फार्माकोपिया के अनुसार दवाओं का निर्माण करते हैं

दवाओं का उपयोग रोग के अनुसार और पूर्व प्राप्त अनुभव और ग्यान के अनुसार करते हैं, जैसा कि चिकित्सा के ग्रन्थों में बताया गया है । रोगी की बीमारी के अनुसार डाक्टर अथवा चिकित्सक दवाओं का चयन या यह चुनाव करते हैं कि कौन सी दवा रोगी के रोग के हिसाब से फ़ायदेमंद साबित होगी

यह जान लेना जरूरी है कि दवायें सामान्य भोजन की तरह की वस्तु नही होती है । औषधियां सामान्यतया टाक्सिक यानी विषैले प्रभाव वाली होती है और यह रोज़मर्रा के खानें में उपयोग की वस्तु नही होती है

कुछ अपवाद छोड़कर जिसमें ऐसी वस्तुयें हैं जो खानें में भी काम आती हैं और दवाओं में भी । उदाहरण के लिये केसर , जायफल, जावत्री, अदरख, हरड़, लौंग, इलायची, काली मिर्च, पीपल, हल्दी आदि आदि

जितनी भी दवायें होती हैं वे सभी केमिकल से युक्त होती है । मिनरल्स से बनी दवायें स्वयं केमिकल होती हैं क्योंकि यह इसी ओरीजनल स्वरूप में पायी जाती हैं । वनस्पतियों से प्राप्त दवायें फ़ाइटो-केमिकल कही जाती है । जीव-जन्तुओं से प्राप्त दवाओं को बायो-केमिकल कहते हैं ।

सभी तरह के जीव-जन्तुओं और वनस्पतियों में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट और फैट और मिनरल्स- विटामिन और पानी जैसे तत्व पाये जाते हैं ।

इनमें कुछ खास किस्म के ऐसे विषम तत्व अथवा पदार्थ पैदा हो जाते हैं जो मानव शरीर के अनुकूल नही होते हैं ।

उदाहरण के लिये घास एक तरह का चारा है जो जानवरों के लिये अनुकूल है लेकिन मानव इसे नही खाता क्योंकि यह मनुष्य के लिये प्रतिकूल असर वाला पदार्थ है ।

इसी तरह बहुत से जहरीले जानवर दूसरे जानवरों व्दारा खा लिये जाते है, लेकिन इस जहर का असर खाने वाले जानवर पर नही होता है ।

तात्पर्य यह है कि इन्हीं टाक्सिक मैटेरियल के असर शरीर में पड़ते हैं, जो पूरे शरीर में अथवा शरीर के विशेष अथवा किसी खास अंग को प्रभावित करनें की क्षमता रखते हैं ।

उदाहरण के लिये पोटैसियम सायनायड एक सबसे तेज असर करनें वाला जहर है । कहते हैं कि इसका स्वाद आज तक कोई बता नही पाया है ।
जीभ पर रखते ही फ्रैक्सन आँफ सेकेन्डस में मृत्यु हो जाती है ।

लेकिन पोटैसियम सायनायड से बनाई गयी होम्योपैथिक फार्माकोपिया के अनुसार पोटेन्टाइज्ड तरीके से बनाई गयी होम्योपैथिक दवा पोटैसियम सायनाइड 30 या अधिक शक्ति के उपयोग करनें से जीभ के कैंसर, कैंसर के दर्द, सायटिका, मिर्गी, न्यूरेल्जिया, फेफड़े के रोगों के अलावा दूसरी बीमारियों में आराम पहुंचाया जा सकता है ।

दवायें किस तरह शरीर में असर करती हैं, इसके लिये बायो-केमिस्ट्री, केमिकल केमेस्ट्री, फीजियोलाजी, फार्माकोलाजी इत्यादि विषयों के सामूहिक अध्ययन से पता करनें का प्रयास किया जा सकता है ।

शरीर में दवायें प्रवेश करनें के कुछ रूट अथवा रास्ते हैं, सामान्य तौर पर दवायें मुख के द्वारा दी जाती हैं, लेकिन इन्जेक्शन व्दारा और त्वचा के व्दारा और नाक के व्दारा भी दवायें शरीर की जरूरत के अनुसार प्रयोग कराई जाती हैं ।

जैसा कि बताया जा चुका है कि दवाये एक तरह के टाक्सिक सब्सटेंस होते हैं, इसलिये इनके असर की तेजी सब्सटेस की टाक्सिक लेवल ओर मात्रा पर निर्भर करता है ।

उदाहरण के लिये सल्फाज की गोली का मानव शरीर पर असर किस तरह से होता है । सल्फाज टेबलेट का उपयोग कृषि उत्पाद और अनाज को कीड़ों से सुरक्षित करनें के लिये किया जाता है ।

अगर भूल-चूक से यह मानव या जानवरों के शरीर में पहुंच जाय तो उसको कोई दवा या इलाज बचा नही सकता है । यहां यह सब बतानें का उद्देश्य यही है कि टाक्सिक सब्सटेंस का हल्का और गंभीर असर के लेवल कैसे और किस तरह हैं, यह समझना है ।

औषधियों में निहित या समाहित या सम्मिलित या संग्रहित तत्व जब शरीर में पहुंचते हैं तो सबसे पहले दवाओं का पाचन होता है और तब जाकर इसके औषधीय तत्व रक्त में जाकर मिलते हैं, यह ठीक उसी तरह होता है जैसा कि भोजन पचकर इसके तत्व रक्त में मिलते हैं ।

Digestion डाइजेशन और Carbohydrate Metabolism कार्बोहाड्रेट मेटाबालिज्म और Protein Metabolism प्रोटीन मेटाबालिज्म और & Lipid Metabolism लाइपिड मेटाबालिज्म & Nucleic Acid Metabolism न्यूक्लाइक एसिड मेटाबालिज्म और & Biological Oxidation बायोलाजिकल आक्सीडेशन & Enzyme Kinetics एन्जाम काइनेटिक्स & Immunology इम्यूनोलाजी आदि

प्रक्रियायों से गुजरकर खायी गयी औषधियों के मूल तत्व रक्त में मिलते हैं और अपने विशेष प्रभाव से बीमार अंग अथवा दर्द के स्थान अथवा सारे शरीर में असर डालते हैं ।

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Inventor & Chief E.T.G. AyurvedaScan Investigator &
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