आयुर्वेद मे अनुसंधान करने की बहुत बड़ी जरूरत


कोविद 19 की वजह से आयुर्वेद और अन्य चिकित्सा विधिया लोगों के सामने आई है / मै बहाऊत पहले से कहता चला या रहा हू की इस तरह की बीमारियों का कोई सटीक इलाज आधुनिक चिकित्सा विज्ञान मे नहीं है / इसके बारे मे मै अपने चैनल wwwyoutube.com/drdbbajpai channel  मे बौट विस्तार के साथ कह चुका हु / ले दे कर केवल  आयुर्वेद  ही ऐसी  विधि है जिससे इसका इलाज संभव है और सटीक तरीके से किया जा सकता है / इतना सब होते हुए भी आज हालात यह है की आयुर्वेद को कोई पूछता तक नहीं है / इसका कारण है की आयुर्वेद के लिए पिछली सरकारों ने  ईमानदारी से कोई काम नहीं किया बलकि इसके प्रति जिस तरह की उदासीनता दिखाई गयी यह उसी का परिणाम है की बाबा रामदेव जैसे व्यक्ति को लोग यह समझने लगे की वही आयुर्वेद और योग के पुरोधा साबित हुए है / इसमे दो राय नहीं की जा सकती की   बाबा रामदेव का नाम देश मे आयुर्वेद और योग के पुनरोधधार के लिए और देश के रजत शर्मा  का टी  वी चैनल इंडिया टी वी का आयुर्वेद के प्रचार और प्रसार के लिए देश और दुनिया मे आयुर्वेद के लिए किया है वह जग जाहिर है /

आयुर्वेद मे अनुसंधान करने की बहुत बड़ी जरूरत है / खेद की बात यह है की आयुर्वेद मे जिस तरह की अपेक्षित अनुसंधान होने चाहिए थे वे नहीं हुए और जो भी हुए है वे बहुत ही निम्न स्तर के है / हमारा संस्थान आयुर्वेद के अनुसंधान से जुड़ा हुआ है और इसी कारण हमारी नजर हर तरह के आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा से जुड़े हुये  अनुसंधानों की तरफ हमेशा अटेंटीवाली बना रहता है / विडंबना यह है की सरकारी स्तर पर और निजी स्तर पर जीतने भी अनुसंधान हुए है वे सबके सामने है / सरकारी स्तर पर अनुसंधान आपके सामने है /

विभिन्न क्षेत्रो  से अब यह आवाज उठने की शुरुआत हो रही  है की आयुर्वेद को रास्ट्रीय  चिकित्सा घोषित करना चाहिए / अभी यह आवाज बहुत कमजोर स्तर की है और इसका कोई असर सरकारों पर पड़ेगा इसमे मुझे संदेह लगता है / जिधर से यह आवाजे आ रही है उनमे सिवाय राजनीति के अलावा कुच्छ दूसरा नजर नहीं आता है / इसके पीछे बहुत से कारण हो सकते है और उनका जिक्र मै समय समय पर अवश्य करूंगा/

फिलहाल आयुर्वेद मे अनुसंधान की अभी बहुत बड़ी और अनंत संभावनाए छिपी हुई है और आयुर्वेद को दुबारा डिस्कवर करना और एक्सप्लोर करना आयुर्वेद से जुड़े लोगों के हाथ मे है / यह इनको ही करना होगा / अकेले सरकार के बूते का यह काम नहीं है /

यह सही है की कोविद महामारी के साथ अब सारी दुनिया को जीना होगा और यह ठीक उसी तरह से मैनेज की जानी चाहिए जैसे की मलेरिया बीमारी के लिए मैनेज करते है / एक बात आप सभी याद रखे कि जैसे मलेरिया की कोई वैक्सीन नहीं बनी है उसी तरह कोविद की वैक्सीन भी नहीं बन पाएगी / अगर बन भी गयी तो यह उसी तरह नाकाम होगी जैसे की इंफ्लुएंजा की वैकसींन  का हश्र हुआ है / इसका सबसे बड़ा कारण यह है की वायरस अपने जीनॉमस को बार बार बदल रहा है और इन्सटेबिल है /

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