लेखक: Dr.D.B.Bajpai

Born 01 SEPTEMBER 1947. Graduate in Ayurveda, Homoeopathy and Modern western medicine, Inventor of "Electro-Tridosha-Graphy" i.e. ETG Ayurvedascan and "Electro-Homoeo-graphy". Over 50 years Medical practice experience of Homoeopathy, Ayurveda, Herbal and Modern western medicine etc etc, Research and development of newly invented technology Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan system is under taken still with new establishment of parameters for status quantification of the AYURVEDA PRINCIPLES and disease diagnoses for whole body in holistic views and theories of AYUSH therapies. Some books have been written on Ayurveda in view of modern sciences and is available free in pdf format.

VIDEOS LATEST OF MARCH 2019


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उपवास कोरने के दरम्यान क्या सावधानियां रखना चाहिये


फिस्चुला का सटीक उपचार

OSTEOPOROSIS SOFT BONES DISEASE AND AYURVEDA AYUSH TREATMENT

CURED CASE OF CHRONIC PANCREATITIS

EPILEPSY SEIZURES CURES BY AYURVEDA AND AYUSH
THERAPIES INTEGRATED TREATMENT

UNDERSTAND AYURVEDA FUNDAMENTALS


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हमारे चिकित्सा संस्थान कनक पालीथेरेपी क्लीनीक व्दारा हर रोज आयुर्वेद होम्योपैथी यूनानी नेचर क्योर आदि चिकित्सा विधियों पर प्रोग्राम प्रसारित किये जाते हैं ।

प्रसारित किये गये कार्यक्रमों की रिकार्डिंग यहां प्रस्तुत की गयी है ।

आप सभी इसे सुनें और ज्ञान प्राप्त करें ।

 

Seizures An Acute Emergent condition ; अचानक बेहोश हो जाना और सुध बुध खोना


दिमाग के अन्दर और अन्दरूनी हिस्से से उठनें वाली अचानक हल-चल या उत्तेजित कार्य कलापों की वजह से अचानक बेहोश हो जाना या सुध-बुध खोकर खब्तुल हवासी या होशो-हवाश खोने की हालत हो जाना जैसे हालात हों तो इसे सीजर कहते हैं

उत्तेजित दिमाग की अ-समानुपातिक कार्य करने की वजह से अनचाहे शारीरिक भाव-भंगिमायें जैसे हाथ या पैर या मुख या गर्दन या पीठ का कठोरता के साथ मुड़ना या ऐंठना और इसके साथ बेहोश हो जाना और दांत का कस कर बन्द कर लेना, जिसके कारण जीभ का कट जाना, मुख से गाढ़े थूक का निकलना, पाखाना या पेशाब का अनियंत्रित होकर निकलना आदि लक्षण देखनें में आते हैं

जैसा कि बताया जा चुका है कि बेहोशी का होना दिमाग यानी मष्तिष्क अथवा यह कहा जाय कि सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम से संबंधित बीमारी है और यह सिस्टम बीमारी के मूल में कारक है, लिहाजा वह क्या कारण हो सकते हैं जो ऐसी बीमारी पैदा होती है

अगर बहुत तेज बुखार किसी को होता है तो शरीर में बुखार की तेज गरमी या तापमान का अधिक बढ़नें का दबाव शरीर नही बर्दाश्त कर पाता है जिसके कारण बेहोशी की स्थिति बन जती है, इसे फेब्राइल सीजर कहते हैं,

बेहोशी इन्फेक्शन से भी होती है , इन्फेक्शन के कारण होने वाली बेहोशी अघिकतर कई तरह के मिक्सड यानी मिले जुले इन्फेक्शन के शरीर में पड़नें वाले प्रभाव से होती है

अगर मलेरिया का इन्फेक्शन सीवियर स्तर तक पहुंच जाय और इलाज करनें में  लापरवाही की जाय तो बेहोशी की तकलीफ पैदा हो जाती है

मेनिन्जाइटिस यानी दिमागी बुखार हो जाये तो बेहोशी की बीमारी पैदा हो जाती है , यह मेनिन्गो कोक्कल बैक्टीरया के इन्फेक्शन के कारण होता है 

इसी से संबंघित एक बीमारी दूसरी होती है , इसे मेनिन्गो-इन्सेफेलाइटिस कहते हैं , यह होने पर बेहोशी की बीमारी पैदा हो जाती है, दिमाग में सूजन आ जाने के कारण ऐसी समस्या होती है, ऐसा बैक्टीरिया के कारण होता है 

सेरेब्रल टाक्सोप्लाज्मोसिस Cerebral toxoplasmosis एक तरह से दिमागी बुखार की तरह के सिंड्रोंम्स वाली बीमारी है और इसमें सभी लक्षण मेनिन्जाइटिस जैसे पाये जाते हैं , एड्स अथवा एच.आई.वी. की बीमारी के कारण सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम यानी दिमाग पर इन्फेक्शन का असर पड़ता है लेकिन ऐसा असर हमेंशा एड्स की बीमारी के अन्तिम अवस्था में ही देखनें में आता है

सिस्टीसेरकोसिस बीमारी सुअर का गोश्त सेवन करनें वालों को या सुअर के सम्पर्क में रहनें वालों को ही होनें की अधिक संभावना होती है , पोर्क टेपवर्म, टीनिया सोलियम के लार्वा द्वारा इन्फेक्शन होनें से यह लार्वा दिमाग में पहुंच जाते हैं और सीजर की बीमारी पैदा करते हैं . जानवरों के द्वारा फैलाये गये इन्फेक्शन से मनुष्यों में यह बीमारी पैदा होती है        

मेटाबालिक कारण Metabolic causes से भी सीजर या बेहोशी की बीमारी हो जाती है , लेकिन ऐसी अवस्था उनको ही होती है जिनको रक्त में सूगर कम होनें की बीमारी अचानक हो जाती है . इसके अलावा जिनको हाइपोग्लाइसीमिया Hypoglycaemia की तकलीफ होती है , उनको अचानक बेहोशी की बीमारी पैदा हो जाती है

इयाटरोजेनक कारण Iatrogenic causes से भी बेहोशी की बीमारी पैदा हो जाती है, अगर कोई बेहोशी को दूर करनें के लिये दवा का सेवन लगातार कर रहा है और वह रोगी दवा को अचानक बन्द कर देता है तो दवा बन्द करते ही बेहोशी होने लगती है

इपीलेप्सी यानी मिर्गी और हिस्टीरिया यानी अपस्मार इन दोनों बीमारियों में बेहोशी या सीजर आ जाते हैं  

इक्लैंम्प्सिया , महिलाओं में गर्भावस्था होनें के दरमियान बेहोशी की बीमारी पैदा हो जाती है , यह नर्वस सिस्टम के दबाव के कारण होता है

यहां संदर्भित और वर्णित की गयी सभी बीमारी ठीक हो जाती हैं, अगर इनका इलाज शुरूआत की अवस्था और बीमारी की पहली और दूसरी अवस्था में ही पूरी शिद्दत के साथ बिना किसी लापरवाही के और बिना समय गंवाये किया जाये

आयुर्वेद और होम्योपैथी और यूनानी दवाओं के सम्मिलित और इन्टीग्रेटेड उपचार और औषधि व्यवस्था के अलावा खान-पान और जीवन शैली के बदलाव और अन्य वैकल्पिक साधनों को अपना कर इलाज करनें से बतायी गयी बीमारियों में अवश्य लाभ होता है





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अचानक होनें वाली अप्रत्यासित बीमारियां CLINICALLY OBSERVED SHOCKED CONDITION


अचानक होनें वाली बीमारियां और इन सब बीमारियों से प्रभावित लोगों को यह समझनें की जरूरत है कि क्लीनिकल शाक्ड कंडीशन ऐसी अवस्था है जो किसी भी पुरानी तकलीफ के घीरे धीरे बढ़ते हुये

और इस धीरे धीरे बढ़ाव को बिना किसी तकलीफ का अहसास कराते हुये अचानक एक दिन विस्फोटक स्वरूप में प्रकट होकर शरीर को गंभीर हालत में ला देने की स्थिति है

जब शाक की स्थिति पैदा होती है तो इस बात की संभावना सबसे अधिक होती है कि एक्यूट सर्कुलेटरी सिस्टम कहीं फेल न होनें लगे ।

ऐसा देखा गया है कि अगर शीघ्र ही प्रारंभिक निदान और उचित उपचार नही किया गया तो शाक की तकलीफ की मृत्यु दर अधिक होती है।

शाक की कुछ स्थितियां होती हैं ।

  1. हाइपोवोलेमिक शाक
  2.  सेप्टिक शाक
  3. कार्डियोजेनिक शाक

हाइपोवोलेमिक शाक दो भागों में बट जाता है ।

  1. एब्सोल्यूट हाइपोवोलेमिया – यह स्थिति तब पैदा होती है जब इंट्रावैस्कुलर फ्लूड क्षीण हो जाता है यानी नसों के अन्दर बहनें वाला रक्त-सिरम में कोई कमी हो  जाय ।

उदाहरण के लिये – खून का किसी बाहरी या आन्तरिक कारण से अत्यधिक मात्रा में  बह जाना, डिहाइड्रेसन, शरीर से अत्यधिक मात्रा में पानी की कमी हो जाना, आग से जल जाना

और

  • रिलेटिव हाइपोवोलेमिया – एनाफिलैक्टिक रियक्शन, किसी वजह से एलर्जी पैदा हो जाना, विषैली दवाओं का उपयोग, एन्टीबायोटिक का अत्यधिक  प्रयोग, मलेरिया और कैंसर जैसे असाध्य रोगों की श्रेणी

सेप्टिक शाक – इसमें कई रोग एक साथ जुड़कर शरीर की स्थिति नाजुक बना देते हैं जैसे किडनी फेल होने के साथ साथ दमा की बीमारी और ढायबिटीज रोग का एक साथ पैदा हो जाना

कार्डियोजेनिक शाक – हृदय और हृदय रोग के विभिन्न प्रकारों से ग्रसित रोगी, जहरीले पदार्थों का हृदय की गतिविधियों पर असर, गंभीर किस्म की प्राणलेवा चोट

शाक के सामान्य लक्षणः

शरीर का पीला दिखाई देना, Mottled  Skin, हाथ पैर ठन्डे हो जाना, पसीना अधिक आना, प्यास का अघिक लगना, हृदय की घड़कन का अघिक चलना, कम ब्लड प्रेशर, सांस लेने में तकलीफ, शरीर का नीला पड़ना, पेशाब का बंद हो जाना, दिमाग में भ्रम पैदा होना

जैसे ही शाक से ग्रसित रोगी में इस तरह के लक्षण दिखाई दे, तीमरदारों को सावघान हो जाना चाहिये और स्थिति को समझते हुये अस्पताल या चिकित्सक की सलाह लेना चाहिये ।

शाक की कुछ स्थितियां घर पर ही मैनेज की जा सकती हैं लेकिन यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है । बहुत सी स्थितियों में चिकित्सक को रोगी के रोग को मैनेज करनें के लिये विशेष सुविधाओं की आवश्यकता होती है जो केवल अस्पताल में ही संभव है ।

ऐसी स्थिति जीवन में न आये इसके लिये लोगों की जागरूकता और कोई भी बीमारी होनें पर समयानुकूल तुरन्त इलाज करनें का इरादा हो तो ऐसी परिस्तिथियों से बचा जा सकता है ।

बहुत सी स्थितियों पर आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक और यूनानी दवाओं द्वारा तुरत फुरत इमरजेंसी लाइन के तौर पर इलाज शुरू कर दिया जा सकता है और घर अथवा क्लीनिक में ही इलाज की व्यवस्था की जा सकती है ।







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औषधियां सामान्यतया टाक्सिक यानी विषैले प्रभाव वाली होती है


मानव शरीर में जब किसी तरह का रोग होता है , तब उसको दूर करनें के लिये औषधियों का सहारा लिया जाता है ।

आम तौर पर यह दवायें वनस्पतियों और केमिकल या रासायनिक पदार्थों अथवा जीव-जन्तुओं के अंगों से प्राप्त की जाती हैं । प्राप्त किये गये द्रव्यों से फार्माकोपिया के अनुसार दवाओं का निर्माण करते हैं

दवाओं का उपयोग रोग के अनुसार और पूर्व प्राप्त अनुभव और ग्यान के अनुसार करते हैं, जैसा कि चिकित्सा के ग्रन्थों में बताया गया है । रोगी की बीमारी के अनुसार डाक्टर अथवा चिकित्सक दवाओं का चयन या यह चुनाव करते हैं कि कौन सी दवा रोगी के रोग के हिसाब से फ़ायदेमंद साबित होगी

यह जान लेना जरूरी है कि दवायें सामान्य भोजन की तरह की वस्तु नही होती है । औषधियां सामान्यतया टाक्सिक यानी विषैले प्रभाव वाली होती है और यह रोज़मर्रा के खानें में उपयोग की वस्तु नही होती है

कुछ अपवाद छोड़कर जिसमें ऐसी वस्तुयें हैं जो खानें में भी काम आती हैं और दवाओं में भी । उदाहरण के लिये केसर , जायफल, जावत्री, अदरख, हरड़, लौंग, इलायची, काली मिर्च, पीपल, हल्दी आदि आदि

जितनी भी दवायें होती हैं वे सभी केमिकल से युक्त होती है । मिनरल्स से बनी दवायें स्वयं केमिकल होती हैं क्योंकि यह इसी ओरीजनल स्वरूप में पायी जाती हैं । वनस्पतियों से प्राप्त दवायें फ़ाइटो-केमिकल कही जाती है । जीव-जन्तुओं से प्राप्त दवाओं को बायो-केमिकल कहते हैं ।

सभी तरह के जीव-जन्तुओं और वनस्पतियों में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट और फैट और मिनरल्स- विटामिन और पानी जैसे तत्व पाये जाते हैं ।

इनमें कुछ खास किस्म के ऐसे विषम तत्व अथवा पदार्थ पैदा हो जाते हैं जो मानव शरीर के अनुकूल नही होते हैं ।

उदाहरण के लिये घास एक तरह का चारा है जो जानवरों के लिये अनुकूल है लेकिन मानव इसे नही खाता क्योंकि यह मनुष्य के लिये प्रतिकूल असर वाला पदार्थ है ।

इसी तरह बहुत से जहरीले जानवर दूसरे जानवरों व्दारा खा लिये जाते है, लेकिन इस जहर का असर खाने वाले जानवर पर नही होता है ।

तात्पर्य यह है कि इन्हीं टाक्सिक मैटेरियल के असर शरीर में पड़ते हैं, जो पूरे शरीर में अथवा शरीर के विशेष अथवा किसी खास अंग को प्रभावित करनें की क्षमता रखते हैं ।

उदाहरण के लिये पोटैसियम सायनायड एक सबसे तेज असर करनें वाला जहर है । कहते हैं कि इसका स्वाद आज तक कोई बता नही पाया है ।
जीभ पर रखते ही फ्रैक्सन आँफ सेकेन्डस में मृत्यु हो जाती है ।

लेकिन पोटैसियम सायनायड से बनाई गयी होम्योपैथिक फार्माकोपिया के अनुसार पोटेन्टाइज्ड तरीके से बनाई गयी होम्योपैथिक दवा पोटैसियम सायनाइड 30 या अधिक शक्ति के उपयोग करनें से जीभ के कैंसर, कैंसर के दर्द, सायटिका, मिर्गी, न्यूरेल्जिया, फेफड़े के रोगों के अलावा दूसरी बीमारियों में आराम पहुंचाया जा सकता है ।

दवायें किस तरह शरीर में असर करती हैं, इसके लिये बायो-केमिस्ट्री, केमिकल केमेस्ट्री, फीजियोलाजी, फार्माकोलाजी इत्यादि विषयों के सामूहिक अध्ययन से पता करनें का प्रयास किया जा सकता है ।

शरीर में दवायें प्रवेश करनें के कुछ रूट अथवा रास्ते हैं, सामान्य तौर पर दवायें मुख के द्वारा दी जाती हैं, लेकिन इन्जेक्शन व्दारा और त्वचा के व्दारा और नाक के व्दारा भी दवायें शरीर की जरूरत के अनुसार प्रयोग कराई जाती हैं ।

जैसा कि बताया जा चुका है कि दवाये एक तरह के टाक्सिक सब्सटेंस होते हैं, इसलिये इनके असर की तेजी सब्सटेस की टाक्सिक लेवल ओर मात्रा पर निर्भर करता है ।

उदाहरण के लिये सल्फाज की गोली का मानव शरीर पर असर किस तरह से होता है । सल्फाज टेबलेट का उपयोग कृषि उत्पाद और अनाज को कीड़ों से सुरक्षित करनें के लिये किया जाता है ।

अगर भूल-चूक से यह मानव या जानवरों के शरीर में पहुंच जाय तो उसको कोई दवा या इलाज बचा नही सकता है । यहां यह सब बतानें का उद्देश्य यही है कि टाक्सिक सब्सटेंस का हल्का और गंभीर असर के लेवल कैसे और किस तरह हैं, यह समझना है ।

औषधियों में निहित या समाहित या सम्मिलित या संग्रहित तत्व जब शरीर में पहुंचते हैं तो सबसे पहले दवाओं का पाचन होता है और तब जाकर इसके औषधीय तत्व रक्त में जाकर मिलते हैं, यह ठीक उसी तरह होता है जैसा कि भोजन पचकर इसके तत्व रक्त में मिलते हैं ।

Digestion डाइजेशन और Carbohydrate Metabolism कार्बोहाड्रेट मेटाबालिज्म और Protein Metabolism प्रोटीन मेटाबालिज्म और & Lipid Metabolism लाइपिड मेटाबालिज्म & Nucleic Acid Metabolism न्यूक्लाइक एसिड मेटाबालिज्म और & Biological Oxidation बायोलाजिकल आक्सीडेशन & Enzyme Kinetics एन्जाम काइनेटिक्स & Immunology इम्यूनोलाजी आदि

प्रक्रियायों से गुजरकर खायी गयी औषधियों के मूल तत्व रक्त में मिलते हैं और अपने विशेष प्रभाव से बीमार अंग अथवा दर्द के स्थान अथवा सारे शरीर में असर डालते हैं ।

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फरवरी 2019 के कुछ वीडियो


डा. देश बन्धु बाजपेयी व्दारा आयुर्वेद और होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा विधियों के विभिन्न दृष्टि कोणो को सम्मिलित करके आम और खास लोगों को जानकारी करानें के लिये चिकित्सा कार्य से जुड़े समस्या और उनके समाधान के लिये सभी चुनौती पूर्ण विषयों पर समयानुकूल वीडियो तैयार किये जाते हैं । आइये और देखिये कुछ नये वीडियो , कुछ नयी जानकारी के साथ ….

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”AYURVEDA PARV” 20 JANUARY 2019 AT KANPUR : आयुर्वेद पर्व 20 जनवरी 2019 को कानपुर में मनाया गया


20 जनवरी 2019 को कानपुर शहर में आयुर्वेद पर्व 2019 मनाया गया । इसकी झलकियां आप सबके लिये प्रस्तुत हें ।

AYURVEDA PARV 2019 was celebrated at KANPUR on19 & 20 January 2019 . We are giving here glimpses of 20 January 2019


The first part of the Video o AYURVEDA PARV 2019



वीडियो लेटेस्ट यू ट्यूब से…….


डा. देश बन्धु बाजपेयी की हमेशा कोशिश रहती है कि वह अपने चिकित्सकीय अनुभव से सबको अवगत कराते रहें, ताकि सभी को लाभ प्राप्त हो । इसी क्रम में कुछ लेटेस्ट वीडियो यहां प्रस्तुत हैं ।

टी.बी. की बीमारी का आयुर्वेदिक उपचार

असाध्य रोगोँ के इलाज का एकमात्र स्थान
कनक पालीथेरेपी क्लीनिक एवँ रिसर्च सेन्टर
67/70,भूसाटोली रोड बर्तन बाजार
कानपुर उ.प्र. भारतमोबाइल  08604629190




DROPSY ; ASCITES ; WHOLE BODY SWELLING ; सारे शरीर की सूजन का आयुर्वेदिक इलाज
CONTACT
DR DESH BANDHU BAJPAI
MOBILE NO 08604629190


ACNE & FACIAL ERUPTIONS ; फेसिअल एन्ड एक्ने इरप्शन्स ; आयुर्वद और आयुष उपचार
मुख पर और चेहरे पर छोटी फुंसियां निकलती है इनको एक्ने कहते है लेकिन इनके अलावा दूसरे तरह के दाने निकलने लगते हैं जिससे भ्रम होता है की यह क्या है ?
इस वीडियो में यही बताने का प्रयास किया गया है , देखिये

याद रखें और भूलिये नही…..

असाध्य रोगोँ के इलाज का एकमात्र स्थान

डा. देश बन्धु बाजपेयी

कनक पालीथेरेपी क्लीनिक एवँ रिसर्च सेन्टर

67/70,भूसाटोली रोड बर्तन बाजार

कानपुर उ.प्र. भारत

मोबाइल  08604629190

LATEST VIDEO ON AYURVEDA SUBJECTS


Dr Desh Bandhu Bajpai produces videos on very simple English and Hindi language on different aspects of Ayurveda and Homoeopathy and Unani systems of medicine including other systems, who can help in management of the patient problems.

Last month and this month so many videos are presented to entire readers on many subjects. Listen and get benefits of the contents.


अस्थमा और रिस्पायरेटरी सिस्टम से सम्बंधित बहुत सी व्याधियां है जिनका उपकार न करने से जीवन के लिए खतरा बन जाने वाली सांस से सम्बंधित तकलीफे पैदा हो जाती है / इन तकलीफों मे नाक का बंद हो जाना सांस लेने और बाहर निकालने में समस्या , नाक के अंदर एलर्जी होकर सूजन हो जाना और नाक द्वारा सांस न ले पाने की शिकायत , गले की अंदरूनी खराश , खांसी, विकट खांसी , ऐसी खांसी जो दिन रात चैन न लेने दे , बढे हुए टांसिल्स , पके हुए टांसिल्स, बार बार गला खराब होना , लेरिन्जाइटिस , फैरिन्जाइटिस , ट्राइकियल इन्फ्लेमेशन , फेफड़ों में आ गयी खराबियाँ , सांस की नाली की सूजन आदि तमाम तरह की बीमारिया घर कर लेती है / स्तिथि तब और अधिक खराब होती है जब इन सभी बीमारियों का ठीक से निदान न हो पाए और बिमारी का सही निदान न होने के कारण जब इलाज की दिशा भी गलत साबित हो , तब यह स्तिथि मरीज के लिए बहुत खतरनाक सिद्ध हो जाती है / ऐसी सभी बीमारियों का इलाज आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा में संभव है। आयुर्वेद की आधुनिक निदान ज्ञान की तकनीक ई ० टी ० जी ० आयुर्वेदास्कैन द्वारा जांच करने और आयुर्वेद के मूत्र तथा रक्त परिक्षण करने से प्राप्त रिजल्ट और अन्य परीक्षणों के द्वारा रोग का सही निदान होने के पश्चात आयुर्वेद और होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा करने से सभी तरह की सांस से सम्बंधित रोग अवश्य ठीक होते है /प्रस्तुत वीडियो में इसी के बारे में चर्चा की गयी है / वीडियो सुनिए और जानिये उपचार का तरीका /
Contact ; Dr D.B.BajpaiDr A.B.Bajpai
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EVERY WEEK, WE do transmission in Hindi language , right from the Monday to Saturday on AYURVEDA and AYUSH subjects. Every day , we take a new subjects of any cardinals of Ayurveda and Homoeopathy and Unani and pther related helpful medical systems, beneficial for human health, for discussions and produce or reproduce it to entire Hindi understanding public. But we care for the entire global public to customize with the Ayurveda and Homoeopathy and Unani and others and therefore we have special transmission on these subjects matters in English to sum up what have been done in all the six days in nutshells.Those who are interested in any subject they can go to the related video and can see the clips of the recording, so that they can well understand the descriptions which are already given here.
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DISCUSSIONS on Homoeopathic medical system with analysis of its doctrines in scientific view is done by Dr Desh Bandhu Bajpai.The First episode is here in Hindi but the discussion will also be available in English also.Listen it and understand, how HOMOEOPATHY can be helpful for treating any disease condition. Dr Desh Bandhu Bajpai is graduate in Homoeopathy and Ayurveda both with Modern western medicine and Unani approach, will give you a scientific explanation of the related therapy.Listen Video and observe the contents.

Digestive tract यानी पाचन संस्थान हमारे शरीर का एक सबसे बेहतरीन अंग है जिसके बिना कुछ दिन तो जिया जा सकता है लेकिन एक सिमित समय तक / जब यह अंग ठीक से काम नहीं करता है तो फिर तमाम तरह की शारीरिक और मानसिक व्याधिया आ घेरती है /

प्रस्तुत वीडियो में इसी पाचन संस्थान से समबन्धित बाते डा देश बंधू बाजपेयी द्वारा आप सबको बताने का प्रयास किया जा रहा है /पाचन संस्थान की विकृति से बहुत तरह की तकलीफे शरीर के दूसरे अंगो तक में जाकर फैल जाती है / जिससे गंभीर किस्म की तकलीफों को पनपने का मौक़ा मिलता है /

आयुर्वेद और होम्योपैथी और यूनानी तथा अन्य चिकित्सा विधियों के उपयोग से सभी तरह की पाचन संस्थान से समबन्धित तकलीफे दूर हो जाती है / वीडियो देखिये समझिये /

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OUR ADDRESS;
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मस्कुलर डिस्ट्राफी आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के दृष्टिकोण से एक तरह की लाइलाज बिमारी माना गया है और ऐसा माना जाता है की इस बिमारी का कोई इलाज नहीं है / हलाकि ऐसा मानना सही नहीं होगा क्योंकि इस बिमारी का पूर्ण अथवा आंशिक इलाज आयुर्वेद और होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा के इंटीग्रेटेड इलाज द्वारा संभव है /

हमारे चिकित्सा केंद्र में मस्कुलर डिस्ट्राफी के जितने भी मरीज आये है और उनका परिक्षण करके जितने भी निष्कर्ष निकल कर सामने आये है , उनमे यह पाया गया है की सभी मरीजों के बीमार होने की वजहें हरेक में अलग अलग होती है और एक जैसी सबके कभी नहीं होती है /

आयुर्वेद और होम्योपैथी और यूनानी दवाओं के सम्मिलित इलाज तथा आयुर्वेद के रक्त परिक्षण और आयुर्वेद के मूत्र परिक्षण से प्राप्त परिणामो के आधार पर विशेष रूप से तैयार की गयी आयुर्वेद की केमिकल केमेस्ट्री आधारित दवाओं के परिणाम बेहतर स्वरूप में सामने आये है / यह एक पूर्ण तथा आंशिक रूप में ठीक होने वाली बिमारी है /

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आयुर्वेद और होम्योपैथी और यूनानी तथा अन्य चिकित्सा विज्ञान का सहारा लेकर इंटीग्रेटेड उपचार करने से यह बीमारी अवश्य ठीक होती है /

प्रस्तुत वीडियो को देखे और समझिये /

एचआईवी यानी ह्यूमेन इम्म्यून वाइरस के रोगी का आयुर्वेद और होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा विधियों द्वारा इंटीग्रेटेड विचार करके करने से अवश्य ठीक होते है ऐसा हमने अपने रिसर्च सेंटर में बडी संख्या में एचआईवी के मरीजों का इलाज एवं उनके रोग मुक्त होने की दशा देखकर , ऐसा मानना है की आयुर्वेद तथा होम्योपैथी और यूनानी के संयुक्त चिकित्सा व्यवस्था से यह बिमारी ठीक की जा सकती है /

प्रस्तुत वीडियो में एक मरीज की सीडी ४ और सीडी ३ और सीडी ८ काउंट तथा वायरल लोड का अध्ध्य्यन करके उसको समझाया जा रहा है की उसे कितना फायदा हुआ है /

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मिर्गी के रोग से परेशान एक बच्चे का इलाज हमारे रिसर्च केंद्र द्वारा किया जा रहा है /

इस बच्चे की जांच ई ० टी ० जी ० आयुर्वेदास्कैन और अन्य रक्त और मित्र परीक्षणों के आधार पर किया जा रहा है /

प्रस्तुत है मरीज के पैरेंट्स से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया आप सबको जानकारी देने के लिए यह वीडियो प्रस्तुति /

हमारे संस्थान में मिर्गी रोग से ग्रसित सभी तरह के रोगियों का इलाज आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक आयुर्वेदास्कैन द्वारा परिक्षण करके किया जाता है / यह सर्व विदित है /

ANEMIA is a wide disease manifestation in all age groups. There are so many reasons responsible for appearance of this disease condition. In this video Dr DBBajpai is discussing on this condition and suggesting that AYURVEDA and HOMOEOPATHY and UNANI remedies can cure this condition with safety.