लेखक: Dr.D.B.Bajpai

Born 01 SEPTEMBER 1947. Graduate in Ayurveda, Homoeopathy and Modern western medicine, Inventor of "Electro-Tridosha-Graphy" i.e. ETG Ayurvedascan and "Electro-Homoeo-graphy". Over 50 years Medical practice experience of Homoeopathy, Ayurveda, Herbal and Modern western medicine etc etc, Research and development of newly invented technology Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan system is under taken still with new establishment of parameters for status quantification of the AYURVEDA PRINCIPLES and disease diagnoses for whole body in holistic views and theories of AYUSH therapies.

FREE e-BOOK DOWNLOAD ; TITLE ; आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तो का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित अध्ध्य्यन और वैग्यानिक विवेचना ; IN HINDI LANGUAGE ; FIRST EDITION 2017


We are offering free e-book on ETG AyurvedaScan technology with the commentary on the Ayurveda Principles in view of scientific evaluation’s correlation, written and compiled by Dr. D.B.Bajpai, the inventor of ETG AyurvedaScan technology.

You can find the book in PDF form from the below links ;

The book is free for distribution and can be download by any one who wish to read the book. The book is in the Hindi Language and in easy Hindi explanations.

An English version of the same book will be available soon and preparations are being made to bring the same as soon as possible.

”आयुर्वेद सिध्धान्तों का आधुनिक हाई टेक्नोलाजी इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित वैग्यानिक अध्ध्य्यन” शीषक से डा० देश बन्धु बाजपेयी द्वारा लिखी गयी पुस्तक आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तो और आधुनिक चिकित्सा विग्यान के अलावा अन्य दूसरे विग्यान को लेकर समवयन करते हुये आयुर्वेद के सिध्धान्तो का विवेचन किया गया है /

प्रस्तुत पुस्तक मे आयुर्वेद का वैग्यानिक स्वरूप को बताया गया है कि किस प्रकार से आयुर्वेद के विद्वानो यथा चरक और सुश्रुत और अन्य विद्वानों ने हजारो साल पहले से इन्फ्रास्ट्रक्चर न होने के बावजूद उनके पास जिस तरह के साधन थे उनका उप्योग करते हुये इन विद्वानो ने आयुर्वेद के सिध्धान्तों की रचना की और उनका मूल रूप बताया / आधुनिक आयुर्वेद की टेक्नोलाजी ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के आविष्कार के बाद अब आयुर्वेद के सिध्धान्तो का वैग्यानिक स्वरूप सामने आ गया है /

इस पुस्तक मे डा० डी०बी० बाजपेयी ने आयुर्वेद के आधुनिक स्वरूप का अध्ध्य्यन ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक के साथ लेकर आयुर्वेद के सिध्धान्तो को वैग्यानिक स्वरूप देने का प्रयास किया गया है /

पुस्तक का यह प्रथम सन्सकरण आयुर्वेद के प्रेमियो और विद्यार्थियो और गुरुजनो के लिये नि:शुल्क उपलब्ध है / आप सभी पाठक जन निम्न यू०आर०एल० पर जाकर पुस्तक को डाउन-लोड करे और पाठ करे /

https://www.slideshare.net/drdbbajpai/documents/आयुर्वेद सिध्धान्तों का आधुनिक हाई टेक्नोलाजी इलेक्ट्रि त्रिदोष ग्राफ ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित वैग्यानिक अध्ध्य्यन

आप सभी पाठको के सुझाव और आलोचनाये स्वीकार है /

आप अपने सुझाव और आलोचनाये हमारे ई-मेल पर भेज सकते है , आपका सहर्ष स्वागत है /

e-mail; drdbbajpai@gmail.com

महान गायिका लता मन्गेशकर की आवाज़ हम सबको क्यों मधुर और मन और आत्मा को रन्जन करने वाली लगती है


लता मन्गेशकर, हिन्दुस्तान की आवाज , इनको तो सभी जानते है / बच्चे बच्चे तक / इनकी अवाज ही पहचान है / अब तो भारत रत्न है /

रेडियो और टेलेविजन और अन्य सन्चार माध्यमो मे हमेशा लता दीदी छाई हुयी है / मै तो पैदा भी नहि हुआ हून्गा और जब से होश सम्हाला है और समझने लगा तब से लेकर अब तक लता दीदी की आवाज सुनता चला आ रहा हू / ऐसा नही है कि मुझे दूसरे महिला गायको की गायकी नही पसन्द है , मुझे लता दीदी के अलावा नूरजहा और अमीर बाई कर्नाटकी और शमशाद बेगम और सुरैय्या और उमा देवी और आशा भोसले और सुमन कल्याणपुरे और सम कालीन महिला गायको के गायकी बहुत पसन्द है / लेकिन जब मै इन सब आवाजो को ध्यान से सुनता हू और लता की आवाज से  एक दूसरे का कमपरीजन करता हू तो मुझे लगता है कि लता दीदी की आवाज वास्तव मे यूनिक है और एकदम सबसे अलहदा है जो  सुनने के समय ही मन और आत्मा को छू लेती है और एक ऐसे रूहानी संसार मे पहुचा देती है जहां कुछ समय के लिये मन वास्तविक सन्सार से दूर हो जाता है /

ऐसा क्यो होता है ? यह बड़ा पेचीदा सवाल है / हलाकि यह मेडिकल साइन्स के फीजियोलाजी से जुड़ा हुआ सबजेक्ट है और विग्यान उतना ही समझ और समझा सकता है जितना कि वह सब्जेक्ट आन्खो के सामने होता है /

मेर समबन्ध चूकि मेडिकल साइन्स के निदान ग्यान से जुड़ा हुआ है जिसमे कई सबजेक्ट्स एक साथ शामिल हो जाते है / लिहाजा मै इस गुथ्थी को समझने का प्रयास मात्र कर रहा हू , इस विषय को लेकर कि “”लता दीदी की आवाज इतनी मन मोहक क्यो है ?”” 

मै इसकी ज्यादा विषद विवेचना न करके सन्क्षिप्त मे अनालाइसिस  करता हू  और समझाने का प्रयास करून्गा

चिकित्सा विग्यान के हिसाब से जब हम बोलते है और शब्दो का उच्चारण करते है तो इस प्रक्रिया मे शरीर के निम्न अन्ग और सिस्टम इन्वोल्व हो जाते है /

१- मष्तिष्क और नर्वस सिस्टम ; इसमे ब्रेन और ब्रेन के हिस्से और इससे सम्बन्धित नसे और नाडियां

२- श्वसन सन्स्थान ; इसमे फेफड़े और ट्रैकिया और ळरिन्ग्स और फैरिन्ग्स और स्वर यन्त्र यानी वोकल कार्ड

३; मान्शपेशी सन्स्थान ; इसमे गले और चेस्ट और शरीर की दूसरी सपोट करने वाली मान्श्पेशियो का समूह

४- गला और जीभ और मुख और ओठ और नाक और नैज़ल पैसेस और ऊपरी डाय्जेस्टिव सिस्टम के कुछ हिस्से

जब इन सब अन्गो और इनसे जुड़े सन्स्थानो का बेहतर ताल्मेल बैठता है तब जाकर कही सुरीला सन्गीत सुनने को मिलता है /

यह सभी सन्स्थान स्वर यन्त्र  यानी वोकल कार्ड जिसकी झन्कार या वाइब्रेशन से आवाज निकलती है या आवाज पैदा होती है , यह पैदा हुयी आवाज जब लैरिग्स और फैरिन्ग्स जैसी पाइपनुमा बनावट से मुख तथा नैज़ल पैसेस और जीभ से टकराते हुये अथवा टच करते हुये मुख से बाहर निकलती है तो सुनने वाले को इन शब्दो की वाइब्रेशन की फ्रीक्वेन्सी से पता चलता है कि आवाज मधुर है या नही /

 

 

[मैटर लोड करना बाकी है ]

SPINAL DISEASES / SPINAL PROBLEMS / SPINAL ANOMALIES ; PAINFUL CONDITION WELL TREATED BY AYURVEDA-AYUSH COMBINED INTEGRATED TREATMENT AND MANAGEMENT


SPINAL PROBLEMS can be well treated by AYURVEDA-AYUSH COMBINED AND INTEGRATED treatment and management.

Scientist warns not to take much painkillers in these spinal problems, as these painkillers are harmful for the health.

Below published report in DAILY JAGARAN, a Hindi language newspaper published from KANPUR CITY , UP state, India reports like below, which is alarming to those peopel who are using painkillers in spinal treatment.

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रीढ की हड्डियों के इलाज मे अन्ग्रेजी अथवा एलोपैथी की दवाओं का उपयोग मरीज के लिये हानिकारक हो सकता है , ऐसा बैग्यानिको का मानना है / उपर दी गयी रिपोर्ट के अनुसार पीठ के दर्द मे होने वाली दर्द की तकलीफ मे दर्द दूर करने वाली दवा शरीर को हानिकार्क साबित हो सकती है /

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रीढ की हड्डियो से पास होने वाली आर्टेरीज से शरीर के अन्गो का कार्य करने की क्षम्ता भी जुड़ी हुयी होती है /

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रीढ की हड्डियो की रचना एक joint जैसी होती है, जो छोटे आकार मे होती है , इसे ऐसे समझना चाहिये / यह एक तरह के जोड़ो का कालम  कह सकते है /

 

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स्पाइनल कार्ड की बहुत सी बीमारिया होती है इनमे सबसे जयादा कामन बीमारियां नीचे लिखी गयी हैं /

१- स्पान्डिलाइटिस ; यह बहुत कामन बीमारी है और अब तो यह लगता है कि शत प्रतिशत लोगो को यह बीमारी अगले कुछ सालो मे अपने गिरफ्त मे ले लेगी , ऐसा मेरा अनुमान है / स्पान्डिलाइटिस दो तरह की होती है एक- सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस और दूसरी लम्बर स्पान्डिलाइटिस

२- एन्कोलाइजिन्ग स्पान्डिलाइटिस ; इसमे पूरी रीढ की हड्डी inflammatory  condition  मे आ जाती है और इसके कारण प[ऊरी की पूरी पीठ और उसकी मान्शपेशिया सूजन की स्तिथि मे आ जाती है / इसकी वजह से रोगी का movement रुक जाता है / नीचे दिये गये चित्र मे इसी स्पान्डिलाइटिस के रोगी को दिखया गया है /

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आयुर्वेद  और आयुष चिकित्सा पध्ध्यतियो मे   रीढ की बीमारी का इलाज पूरी तरह से सम्भव है , चाहे वह कोई भी हो और उनका कोई भी नाम दिया गया हो अथवा बताया गया हो /  आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक और यूनानी अथवा योग और प्राकृतिक चिकित्सा के समन्वित और कम्बाइन्ड इलाज से इस बीमारी को बढने से रोका जा सकता है और मरीज की हालत को स्थिर अवस्था मे रखा जा सकता है, अगर बीमारी की अवस्था लापरवाही के कारण या गलत इलाज के कारण अनियन्त्रित होकर ऐसी अवस्था मे हो गयी हो , जब या लाइलाज हो जाय, ऐसी अव्स्था मे combined and integrated treatment and management  की सहायता लेकर SPINAL DISEASE CONDITIONS AND DISORDERS   को इलाज करके दूर किया जा सकता है /

अगर SPINAL DISORDERS   का इलाज आयुर्वेद की आधुनिक निदान ग्यान की तकनीक E.T.G. AYURVEDA SCAN परीक्षण कराकर इलाज करते है तो रीढ के सभी तरह के रोगो पर नियन्त्रण और क्योर किया जा  सकता है /

रीढ की बीमारी का असर सारे शरीर मे पड़्ता है / रोगी के शरीर मे तरह तरह के syndromes  पैदा हो जाते है जिससे रोग निदान मे बहुत गलतफहमियां पैदा हो जाती है और इलाज भी गलत तरीके से किये जाने लगते है , इसलिये इस तरह की बीमारियो मे रोग निदान का सही होना अति आवश्यक है / गलत इलाज करने से एक बीमारी तो ठीक नही होती है उलटे कई तरह की नई बीमारिया और पैदा हो जाती है /

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CHRONIC AND INCURABLE DISEASE CONDITIONS CAN BE WELL TREATED AND MANAGED BY AYURVEDA AND AYUSH THERAPIES TREATMENT ; आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा विधियों द्वारा लाइलाज बता दी गयी बीमारियों का इलाज करने से अवश्य ठीक होती है


लाइलाज बीमारियो के इलाज के बारे मे एक तरफ आधुनिक चिकित्सा विग्यान के जानकार डाक्टर उनके पास आये हुये रोगियों से यह कह देते है कि जिस बीमारी के इलाज के लिये वे उनके पास आये है , उन बीमारी का इलाज कहीं है ही नही / इस तरह की बात सुनकर मरीज भटकते है और ऐसी बीमारी लेकर जीने वाले मरीजो को यह नही सूझ पाता कि वे करे क्या और कहा इलाज के लिये जायें ?इस तरह के प्रश्न मुझसे फोन द्वारा या ई-मेल के द्वारा पूचे जाते है या व्यक्तिगत तौर पर मेरे आउट डोर अस्पताल मे आकर लोग पूछते है / 

यह सवाल मेरे यहां कनक पालीथेरापी क्लीनिक और रिसर्च सेन्टर कानपुर मे लाइलाज बीमारियो के इलाज के लिये आने वाले रोगी बताते है ? ऐसे रोगी पूछते है कि डाक्टर क्यो ऐसा कहकर घबरा देते है कि अगर मरीज न मर रहा हो तो भय खाकर मर जाये या मौत के मुह मे चला जाय ? हमारे यहा आने वाले रोगी यह सवाल पूछते है / ऐसे रोगी जानना चाहते है कि एलोपैथी के डाक्टर मरीजो को क्यो भयभीत कर देते है कि जिस बीमारी से वे ग्रस्त है वह लाइलाज है और उसका कोई इलाज इस दुनिया मे समभव नही है / 

अब मै सोचता हू कि  इस तरह के सब सवालो का उत्तर क्या दूं ? सवाल पूचने वालो से मै यही कहता हू कि आपको ऐसा बताने वालों और ऐसा समझने वालो दोनो को ही सूचना का अभाव है / यह एक तरफ का मसला नही है / यह दोनो तरफ का मसला है /

चिकित्सा व्यव्साय अब सेवा नही रह गयी है , यह एक बहुत बड़ा बिजनेस हो गया है और इसीलिये जब सेवा भावना समाप्त हो गयी है तो  शाक्टर भी व्यवसायी हो गये है / अब वह समय नही रहा जब चिकित्सक सेवा भवना से काम करते थे / वह समय बीत गया जब डाक्टर मिशन की भावना से काम करते थे और सर्विस टू ह्यूमिनिटी उनके दिमाग मे रहती थी / अब यह फिलॊसोफी गुजरे दिन की बात हो गयी है /

वर्तमान मे जब हर बात और हर सेवा व्यवसाय का सवरूप धारण कर चुकी है तो चिकित्सा क्षेत्र भी इस व्यवसायीकरण से नही बच सका है / जाहिर है व्यवसाय का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाना है / आज हालात यह है कि डाक्टरो को अपना क्लीनिक चलाने के लिये काफी धन की जरूरत होती है / जब डाक्टर धन लगायेगा तो वह किसी तरह की चैरिटी करेगा, ऐसा सोचना बेव्कूफी होगी / डाक्टर जब पैसा लगाकर नर्सिन्ग होम खोलेगा और उसको चलाने के लिये सुविधाये उपलब्ध करायेगा तो यह सब विना पैसा खर्च किये होगा नही / जब डाक्टर पैसा खर्चा करेगा तो वह चाहेगा कि नर्सिन्ग होम या इन्डोर अस्पताल से उसकी इतनी इन्कम हो कि उसके अस्पताल चलाने के सभी खर्चे  मय कर्मचारियो के वेतन के  और उसके प्राफिट के सुगमता से निकल आवे /

डाक्टरो के सामने बहुत सी समस्याये होती है विशेष तौर पर एलोपैथी के चिकित्सको की / आम्तौर पर प्रायवेट नर्सिन्ग होमे चलाने वाले डाक्टर्स प्रायवेट मेडीकल कालेज के पढे हुये होते है / अनुमान यह है कि आज की तारीख मे अगर कोई लड़्का एम्बीबीएस की पढाई करता है तो साढे पान्च साल मे उसके लगभग डेढ करोड़ रुपये कोर्स को पूरा करने मे खर्च हो जाते है / अगर यही लड़्का पोस्ट ग्रेजुयट करता है तो लग्भग इतना ही पैसा उसका और खर्चा होगा लेकिन यदि वह किसी सर्जिकल कोर्स मे दाखिला लेता है तो उसका तीन करोड़ रुपया खर्चा होगा / यानी मोटे रूप मे यह समझिये कि लग्भग पान्च करोड़ रुपया एक उस लड़्के का खर्चा होगा जो जनरल सर्जरी का कोर्स करके पास करके बाहर आयेगा / इसके बाद अस्पताल बनाने और चलाने का खर्चा अलग होग / यह जो भी हो /

क्या आप ऐसे डाक्टर से उम्मीद करेन्गे कि यह सेवा भावना से काम करेन्गे ?

समस्या यह है कि एलोपैथी के डाक्टरो को बीमारियो के बारे मे उतनी ही जानकारी है जितना कि अमेरिकन डाक्टरो या ब्रिटिश डाक्टरो द्वारा लिखित प्रैक्टिस आफ मेडिसिन की किताबों में बताया गया है / एलोपैथी के डाक्टर उतना ही ग्यान रखते है जितना कि उप्रोक्त बतायी गयी किताबो मे लिखा गया है / एक बात और है कि हर साल यह किताबे या कई कई साल बाद इन किताबो मे बतायी गयी जानकारी के बारे मे बदलाव होते रहते है / इन पुस्तको के अलावा एलोपैथी के डाक्टरो को किसी दूसरे चिकित्सा विग्यान का ग्यान नही होता है और न ही उनको कोई दिचस्पी होती है कि वे किसी दूसरे चिकित्सा विग्यान को समझने का प्रयास करें / इसका कारण यह है कि अमेरिका और ब्रिटिश और दुनिया के अन्य सभी देशो मे आयुर्वेद अथवा होम्योपैथी अथवा यूनानी अथ्वा योग जैसी चिकित्सा सुविधा कही पर भी नही है सिवाय भारत देश मे /

भारत और नेपाल छोड़्कर अन्य देशो से आये रोगियो से मैने जानने की कोशिश की वहा अगर लाइलाज बीमारी किसी को हो जाती है तो वे क्या करते है ? सभी का जवाब था कि लाइफ स्टाइल बदलने के अलावा कुछ नही किया जाता और सिम्पटोमेटिक इलाज करते है / मैने उनको बताया कि भारत मे आयुर्वेद के अलावा होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा विग्यान और योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा भी उपलब्ध है इसलिये भारत मे लाइलाज कही जाने वाली बहुत सी बीमारियो का इलाज सम्भव है /

अच्छी बात यह है कि आयुर्वेद अथवा होम्योपैथी अथवा यूनानी अथ्वा योग और प्राकृतिक चिकित्सा के मेडिकल कालेजों में इन्टीग्रेटेड कोर्स ्पढाये जाते है / यानी जो विषय एलोपैथी के मेडिकल कालेज मे पढाये जाते है वही सब विषय आयुर्वेद – होम्योपैथी – यूनानी और योग चिकित्सा के पाठ्य क्रमों मे भी पढाये जाते है और इनके साथ सम्बन्धित आयुर्वेद – होम्योपैथी- यूनानी के विषय भी पढाये जाते है / इससे होता यह है कि छात्र को दोनो चिकित्सा विग्यान का ग्यान हो जाता है और वह कम्पेरेटिवे स्टडी करके समझने लगता है कि बीमारियो का इलाज किस तरह से कर सकते है /

यही फर्क एलोपैथी के डाक्टरों और आयुर्वेद आयुष डाक्टरो का है / एलोपैथी के डाक्टरो ने केवल एलोपैथी पढी हुयी होती है इसलिये उनका नजरिया एकल दृष्टि का है जब्कि दूसरे चिकित्सा विग्यान के ग्याता डाक्टर का बहुल नजरिया होता है / यह डाक्टर की दृष्टि मे बीमारी लाइलाज की ष्रेणी मे आती है तो दूसरे डाक्टर के हिसाब से यह बीमारी का इलाज किया जा स्कता है और उसका इलाज मौजूद है /

मेरा सभी से निवेदन है कि अगर किसी डाक्टर ने किसी रोगी को यह बता दिया है कि उसकी बीमारी लाइलाज है तो उसे यह नही समझना चाहिये कि उसकी बीमारी का कोई इलाज नही है /

यहां मै उन रोगियो की बात नही शामिल कर रहा हू जिनके रोग अन्तिम अवस्था मे पहुन्च चुका है या वे आपरेशन करा चुके है और अपने अन्गों को कटवाकर शरीर से बाहर करा चुके है /

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इलेक्ट्रो-लाइटिक इम्बैलेन्सेस ELECTROLYTIC IMBALANCES यानी शरीर की केमिकल केमिस्टरी CHEMICAL CHEMISTRY मे बदलाव का निदान ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण E.T.G. AYURVEDASCAN EXAMINATIONS के जरिये करने के बाद आयुर्वेद अथवा आयुष चिकित्सा करने से शत प्रतिशत सफलता प्राप्त होती है ; आयुर्वेद की इस हाई-टेक निदान ग्यान के अनुसन्धान का परिणाम


आयुर्वेद की हाई टेक्नोलाजी ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्वारा शरीर के अन्दर व्याप्त रोगो के रोग निदान और आयुर्वेद के मूल भूत सिध्धान्तो का शरीर के अन्दर व्याप्त निदान ग्यान द्वारा मानव शरीर के अन्दर हो रहे आन्तरिक शरीर के सिस्टम के कार्य विकृति  / pathophysiology ; pathology / के बदलाव अथवा अन्ग विकृति / pathology /  के बदलाव को पहचान लेता है और तदनुसार रिपोर्ट के स्वरूप मे बताता है कि शरीर के किन किन अन्गो मे किस तरह के बदलाव हो रहे है जिनके परिणाम स्वरूप शरीर के नदर बीमारिया पैदा हो रही है या होने की सम्भावना है /

ई०टी०जी०  आयुर्वेदास्कैन मूल रूप से आयुर्वेद का स्कैन है और इसका डेवलप्मेन्ट आयुर्वेद के सिध्धान्तो को लेकर ही किया गया है यह कई भागो मे विभाजित है क्योन्कि यह सारे शरीर का एक साथ परीक्षण करता है इसलिये इसके परीक्षण से प्राप्त डाटा बई पेज के होते है / जितने भी अभी तक शोध करके  डाटा प्राप्त किये गये  है वे  सब इसमे रिपोर्ट के रूप मे मरीजो को उपलब्ध करा दिये जाते है / यह एक इलेक्ट्रिकल स्कैन है जो कई पोजीशनो मे किया जाता है / इसीलिये इसके परीक्षण मे कई घन्टे का समय लगता है /

इस तकनीक के द्वारा जैसा कि हमने पहले ही सारी दुनिया को बताया है कि  HYDROMUSCULOSIS  यानी पेशी जन्य शोथ क्या होती है और किस तरह से इसे मोटापा या शोथ से निदान / diagnosis करने मे  चिकित्सको से गलती हो जाती है जिससे गलत इलाज होने की सम्भावना बनी रहती है /

इसी तरह से यह तकनीक बताती है कि शरीर मे इलेक्ट्रोलाइटिक इम्बैलेन्सेस ELECTROLYTIC IMBALANCES से कौन कौन सी तकलीफे हो जाती है और जब तक यह इम्बैलेन्सेस नही ठीक होन्गे बीमारी शरीर से नही ठीक होगी /

हमने अध्ध्य्यन मे पाया है कि इलेक्ट्रोलाइटिक इम्बैलेन्सेस से मानसिक रोग यथा अनाव्श्यक चिन्ता करना डिप्रेशन, टेन्शन, कम्पल्सिव आब्स्ट्रक्टिव डिसार्डर्स जैसे गम्भीर मानसिक रोग पैदा हो जाते है / मिर्गी जैसे रोग भी हो सकते है / शरीर के अन्य रोग भी इसकी वजह से होते है /

अध्ध्य्यन मे यह बात भी सामने आयी है कि इलेक्ट्रोलाइटिक इम्बैलेन्सेस आन्तो या गैस्ट्रो इन्टेसटाइनल ट्रैक्ट डिसाअर्डर्स और आन्तो के विभिन्न हिस्सो के अनियमित काम करने अथवा लीवर या पैन्क्रियाज या गाल ब्लैडर या स्प्लीन या बोन मैरो या रक्त या मेटाबालिज्म या एसीमिलेटिव डिसार्डर्स या शरीर के दूसरे  अन्य किसी सन्स्थान की गड़्बड़ी के कारण एलेक्ट्रोलाइट्स प्रभावित होते है / इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी अथवा अधिक होने से ही बीमारिया होती है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की जान्च से चार आयामी डाय्ग्नोसिस होने से सटीक रूप से पता चल जाता है कि बीमारी के मूल कारण क्या  है ? इसके अनुसार आयुर्वेदिक और आयुष चिकित्सा करने से बीमारिया अव्श्य ठीक होती है चाहे उनका कोई भी नाम क्यो न  दिया गया हो ?

आयुर्वेद मे इलेक्ट्रोलाइटिक इम्बैलेन्सेस की बहुत अच्छे किस्म की दवाये है इनके उपयोग से बीमारिया अव्श्य ठीक होती है /

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Electrolytic imbalances causes many kinds of physical and mental problems both alone or at a time. They damages the systems one by one and then make a path of distal or remote  part of the body, which nobody can think over because of linking of metastatical approach from one system to another system.

For example according to ETG AyurvedaScan approach of diagnosis, when patient came to doctor and tell his main complaints. In this point, the complaint for which patient came to doctor belongs to number 3 and the concomitants complaints are counted number 4. For effective treatment and to root out the problems it is necessary to find out the main cause of the disease which is hidden in number 2 and number 1.

According to ETG AyurvedaScan the disease for which the patient came is concluded number three and number four and by this technology it is to be found the number one which is the actual cause of disease and number two is the path-way which goes to number three and produce a complaint, which could be mental or physical. ETG AyurvedaScan helps to find out the all four dimensions of the disease condition and produce a picture of disease whatever they may be or their nomenclatures.

In our study it is found that MENTAL DISORDERS OF VARIOUS TYPES, PSYCHOLOGICAL / PSYCHOSOMATIC DISORDERS AND PHYSICAL DISORDERS LIKE VARIOUS TYPES OF ARTHRITIS INCLUDING SPINAL AND AVASCULAR NECROSIS AND GOUT AND ARTHRITIS, SKIN AILMENTS LIKE PSORIASIS, VITILIGO, ALLERGY AND OTHER KINDS OF SKIN DISORDERS,CARDIAC RISKS, MUSCULOSKELETAL AND CIRCULATORY PROBLEMS AND OTHER ANY PHYSICAL / MENTAL PROBLEMS ARE BELONGS AND BASE TO ELECTROLYTIC IMBALANCES.

Electrolytes are basic chemical substances like Sodium, Chlorides, Potassium and others. Imbalances like higher or below range of normal level causes disorders. AyurvedaScan reports the imbalances in Toto and then the system which is involved in producing this cause. Ayurveda and Ayush remedies are selected to correct the cause and causative factor which producing the complaints or disease condition. In this way whenelectrolytes becomes within normal range the disease / disorders / physical problems becomes within normal level / normal limit. Thus cures the conditions.

Bio-chemic system of HOMOEOPATHIC treatment bases on the theory of electrolytic imbalances and gives a picture of disease condition in MATERIA MEDICA of BIOCHEMIC REMEDIES. Our study about electrolytes confirms the efficiency of Biochemic salts, which are used in treatment.

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Dr. Desh Bandhu Bajpai, the Inventor and chief ETG AyurvedaScan Investigator visited at Major S.D. Singh Memorial Ayurvedic Medical College and allied hospital, Farrukhabad, U.P. and met to the students and college staff on 16th November 2016 and shared experiences about his invention E.T.G. AyurvedaScan hi-technology in practice


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On 16th November 2016 , Dr Desh Bandhu Bajpai , the Inventor and Chief E.T.G. AyurvedaScan Investigator visited at Major S.D. Singh memorial Ayurvedic Medical College and allied Hospital, Bevar Road, District Farrukhabad, Uttar pradesh.

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Dr D.B.Bajpai shared his experiences about his invention E.T.G. AyurvedaScan , the only available Ayurveda SAcan scanning whole body and presents in many features like Ayurvedic fundamntals and body disorders etc etc .

Students of the Ayurveda Medical college listened Dr Bajpai carefully and asked many questioned in relation to the newlt invented technology.

Below are the photographs of the collection.

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आत्म हत्या करने के लिये मत सोचिये ; यह बहुत बुरा है ; आपके पास हजारो दरवाजे खुले है ; जिस बात को लेकर आत्म हत्या कर रहे है उसका समाधान अपके पास अगले सेकन्ड मौजूद है ; इस तरह की बेवकूफी मत करिये और जिन्दगी और अपने पूरे परिवार के साथ इस तरह का खिलवाड़ मत करिये


CURE / RELIEVE OF H.I.V. POSITIVE PATIENT BY AYURVEDA / AYUSH COMBINATION TREATMENT ON THE BASES OF E.T.G. AYURVEDASCAN FINDINGS


This year in MAY 2016 one HIV infected patient came for treatment to our research center.

As mandatory , we done the patient examination of ETG AyurvedaScan and other related examinations with all those essential tests.

We prescribed Ayurbeda / Ayush combination for four [4] months

The reports shows the progress of cure / relief of HIV syndromes and its viral presence.
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CURED CASE OF FISTULA WITHOUT SURGERY / OPERATION ; फिश्चुला / भगन्दर के एक रोगी के बिना आपरेशन के हमारे यहा से ठीक हो चुके व्यक्ति से सीधे हमारे इलाज के बारे मे जानकारी करे


फिश्चुला यानी भगन्दर एक लाइलाज बीमारी समझी जाती है / ऐसा आधुनिक यानी एलोपैथी के डाकटर समझते है /

लेकिन आयुर्वेद की आधुनिक निदान ग्यान की तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदा स्कैन और इसके अन्य समबन्धित परीक्षणो तथा आयुर्वेदिक रक्त और मूत्र परीक्षणो के परिणामो के बाद प्राप्त डाटा का अध्ध्य्यन करने के बाद आयुर्वेद और होम्योपैथी और यूनानी और अन्य चिकित्सा विधियो के दवाओ और मनेज्मेन्ट तथा जीवन शैली के आपनाने से यह बीमारी बिना आपरेशन के जड़ मूल से समाप्त हो जाती है /

हमारे रिसर्च सेन्टर मे जितने भी फिस्चुला के रोगी इलाज के लिये आये है सभी के सभी ठीक हुये है और उनको तकलीफ मे आराम मिली है /

हमारे यहा से इलाज कराकर ठीक हो चुके फिस्चुला के रोगी श्री कुमार ्से मोबाइल नम्बर 09919477058 पर फोन करके हमारे इलाज के बारे मे पूछ सकते है / कृपया इस रोगी से जानकारी प्राप्त करे और इनको अनावश्यक परेशान मत करे /

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