आयुर्वेद

डिजिटल आयुर्वेद त्रिदोषों स्कैनर, दुनिया का पहला और अकेला आयुर्वेदिक चिकित्सा विज्ञान का सारे शरीर की जांच करने वाला ‘’आरटीफीशीयल इंटेलीजेंस’’ यंत्र


डिजिटल आयुर्वेद त्रिदोषों स्कैनर, दुनिया का पहला और अकेला आयुर्वेदिक चिकित्सा विज्ञान का सारे शरीर की जांच करने वाला ‘’आरटीफीशीयल इंटेलीजेंस’’ यंत्र है , जिससे आयुर्वेद के मूल फंडामेंटल्स का पता चलता है और यह भी पता लगाने मे मदद मिलती है कि शरीर का कौन सा अन्ग  कितना बीमार अथवा स्वस्थय है /

इस स्कैनर का निर्माण होम्योपैथी और आयुर्वेद के चिकित्सक डा०  देश बंधु बाजपेयी MBS, Ayurvedacharya BAMS, MD,Ph D, Diplom-Hom-Phy (Germany) etc etc द्वारा किया गया है / आपको बताते चले की आयुर्वेद की दुनिया की पहली और अकेली निदान ज्ञान चिकित्सा तकनीक ईलेक्ट्रो त्रिदोषा ग्राफी का आविष्कार डा ० देश बंधु बाजपेयी के द्वारा किया गया है जिसे भारत सरकार आयुष मंत्रालय द्वारा सन 2007 मे  जांचा और परखा जा चुका है / आयुर्वेद की यह तकनीक इन्ही सिदधानतों पर आधारित है और 1978 से लेकर वर्तमान तक इसका लगातार जारी रिसर्च परीक्षण हमारे रिसर्च केंद्र मे किये जा रहे है /

आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान के मूल फंडामेंटल्स के अलावा आयरवेद के महर्षियों यथा चरक सुश्रुत वागभठठ आदि आचार्यों  ने कितने ही अन्य मूल फंडामेंटल्स बताए है, उन सबका स्टेटस क्वाण्टीफिकेशन इस मशीन द्वारा किया जा सकता है और इनकी माप की जा सकती है और यह पता लगाया जा सकता है कि यह शरीर के अंदर कितने स्तर पर मौजूद है /

जिन फंडामेंटल्स का पता लगता है वे नीचे श्रेणी मे दिए गए है /

  • वात 
  • पित्त
  • कफ 
  • वात-पित्त
  • वात-कफ
  • पित्त-कफ
  • वात-पित्त-कफ
  • रस धातु 
  • रक्त धातु
  • मान्स 
  • मेद
  • अस्थि
  • मज्जा
  • शुक्र 
  • ओज
  • सम्पूर्ण ओज / इम्यूनिटी

इसके अलावा शरीर के अंदर के सिस्टम्स के बारे मे जानकारी प्राप्त होती है / ये सिस्टम्स जिनका ‘’स्टेटस क्वान्टीफाई’’ होकर मिलता है , ये उत्तर श्रेणी मे बताए गए है ;

*आटोनामिक नरवस सिस्टम

* सिर खोपड़ी गरदन ऊपरी पीठ

* आँख कान नाक गला मुख आदि

* श्वसन संस्थान

* सर्कुलेटरी सिस्टम हृदय आदि

* लीवर पैंकरियाज गाल बलैडर स्पलीन

* डायाजेसटिव सिस्टम

* किडनी यूरेटर बलैडर

* गैस्ट्रो इंटेसटाइनल ट्रैक्ट

* मांशपेशी अस्थि लीगामेंट्स टेंडन्स

* जेनाइटों-रीप्रोडकटिव यूरीनरी ट्रैक्ट सिस्टम

* पेलविक बैक स्पाइन लिम्बस

* एक्सक्रीटरी सिस्टम

* हारमोन्स्  और एंडोक्राइन्स

* स्किन त्वचा इंटेगुमेन्टरी सिस्टम

* वाइटेलिटी विगेरिटी

यह स्कैनर सभी आयुर्वेदिक  डाकटर्स के लिए उपयोगी है जो वैज्ञानिक विचारधारा को तर्क-सन्गत और Evidence Based मेडिसन के दायरे मे लाकर आयुर्वेद  चिकित्सा को अधिक सटीक और सफल चिकित्सा विधि का स्तर देना चाहते है / आधुनिक युग मे मैंन  एंड मशीन का कन्सेप्ट इससे पूरा होता है /

इस स्कैनर मशीन के दो वर्जन है /

  1. पहला वरजन ‘’डिस्प्ले वरजन’’ माडल  है / इस वरजन माडल  मे सारा डाटा ‘’डिस्प्ले’’ मे ही देखने को मिलता है , जिसे  डाक्टर अपने हाथों से कागज की शीट पर लिखकर रिकार्ड रख सकते है /
    1. दूसरा वरजन ‘’ मेमोरी कार्ड विद डिस्प्ले’’ वर्जन है / इस बिजनेस माडल मे मेमोरी कार्ड को साकेट मे प्रवेश करते है और इस कार्ड मे डाटा ‘’कापी’’ हो जाता है / इस मेमोरी कार्ड को कंप्यूटर यू ० एस ० बी ०  के द्वारा जोड़कर प्रिंटर से पाँच पेज की रिपोर्ट छाप कर उपयोग कर सकते है /

यह दोनों माडल हमारे यहा से उपलब्ध है इनकी कीमत नीचे अंकित की गयी है ;

* आयुर्वेद के डिस्प्ले माडल की कीमत रुपया २२ हजार सात सौ Rupees Twenty Two  Thousand Seven Hundred मे उपलब्ध है / इसमे जीएसटी टैक्स शामिल है /

* दूसरे माडल मेमोरी कार्ड डिस्प्ले स्कैनर की कीमत रुपया चौबीस हजार पाँच  सौ है / इसमे जी.  एस.  टी.  शामिल है /

Technical Specification;

  • operated 12 volt battery / 12 volt 1 Am SMPS power supply
  • safe in operation and can be used anywhere and in any condition , any weather any circumstances inside clinic or outside
  • it takes 6 minutes for whole recording time
  • instant results can be seen on display board

स्कैनर मंगाने के लिए हमारे संस्थान

कनक आयुष ईक्विपमेंट्स कानपुर भारत

KANAK AYUSH EQUIPMENTS KANPUR INDIA से संपर्क करे /

प्रस्तुत वीडियो मे इसकी कीमत और इसके बारे मे समझने का प्रयास करे /  

अधिक जानकारी के लिए हमे इ-मेल भेजे या whatsapp पर हमसे सीधे बात करे;

Email; drdbbajpai@gmail.com+

Whatsapp ;  8604629190

इस स्कैनर के बारे मे अधिक जानकारिया हमारे चैनल पर जाकर देखे /

www. Youtube.com/drdbbajpai

www.ayurvedaintro.wordpress.com

www.etgayurveda.com

डिजिटल होम्योपैथी स्कैनर, दुनिया का पहला और अकेला होम्योपैथी चिकित्सा विज्ञान का सारे शरीर की जांच करने वाला यंत्र


डिजिटल होम्योपैथी स्कैनर, दुनिया का पहला और अकेला होम्योपैथी चिकित्सा विज्ञान का सारे शरीर की जांच करने वाला यंत्र है , जिससे होम्योपैथी के मूल फंडामेंटल्स का पता चलता है और यह भी पता लगाने मे मदद मिलती है कि शरीर का कौन सा अन्ग  कितना बीमार अथवा स्वस्थय है /

इस स्कैनर का निर्माण होम्योपैथी और आयुर्वेद के चिकित्सक डा०  देश बंधु बाजपेयी द्वारा किया गया है / आपको बताते चले की आयुर्वेद की दुनिया की पहली और अकेली निदान ज्ञान चिकित्सा तकनीक ईलेक्ट्रो त्रिदोषा ग्राफी का आविष्कार डा ० देश बंधु बाजपेयी के द्वारा किया गया है जिसे भारत सरकार आयुष मंत्रालय द्वारा सन 2007 मे  जांचा और परखा जा चुका है / होम्योपैथी की यह तकनीक इन्ही सिदधानतों पर आधारित है और 2015 से लेकर वर्तमान तक इसका लगातार जारी रिसर्च परीक्षण हमारे रिसर्च केंद्र मे किये जा रहे है /

होम्योपैथी चिकित्सा विज्ञान के मूल फंडामेंटल्स के अलावा होम्योपैथी के जनक ड़ा० सेमूअल हैनीमेन ने कितने ही अन्य मूल फंडामेंटल्स बताए है, उन सबका स्टेटस क्वाण्टीफिकेशन इस मशीन द्वारा किया जा सकता है और इनकी माप की जा सकती है और यह पता लगाया जा सकता है कि यह शरीर के अंदर कितने स्तर पर मौजूद है /

जिन फंडामेंटल्स का पता लगता है वे नीचे श्रेणी मे दिए गए है /

  • सोरा
  • सायकोसिस
  • सिफलिस
  • सोरा-सायकोसिस
  • सोरा-सिफलिस
  • सायकोसिस-सिफलिस
  • सोरा -सिफलिस-सायकोसिस
  • आइडियोंसिक्रेसी
  • सेंसीटिविटी
  • ससेपटीबिलिटी
  • विंड टेम्पेरामेंट
  • बिलियस टेम्पेरामेंट
  • फलेगमेटिक टेम्पेरामेंट
  • इम्यूनिटी
  • वाइटल फोर्स
  • आदि आदि

इसके अलावा शरीर के अंदर के सिस्टम्स के बारे मे जानकारी प्राप्त होती है / ये सिस्टम्स जिनका ‘’स्टेटस क्वान्टीफाई’’ होकर मिलता है , ये उत्तर श्रेणी मे बताए गए है ;

*आटोनामिक नरवस सिस्टम

* सिर खोपड़ी गरदन ऊपरी पीठ

* आँख कान नाक गला मुख आदि

* श्वसन संस्थान

* सर्कुलेटरी सिस्टम हृदय आदि

* लीवर पैंकरियाज गाल बलैडर स्पलीन

* डायाजेसटिव सिस्टम

* किडनी यूरेटर बलैडर

* गैस्ट्रो इंटेसटाइनल ट्रैक्ट

* मांशपेशी अस्थि लीगामेंट्स टेंडन्स

* जेनाइटों-रीप्रोडकटिव यूरीनरी ट्रैक्ट सिस्टम

* पेलविक बैक स्पाइन लिम्बस

* एक्सक्रीटरी सिस्टम

* हारमोन्स्  और एंडोक्राइन्स

* स्किन त्वचा इंटेगुमेन्टरी सिस्टम

* वाइटेलिटी विगेरिटी

यह स्कैनर सभी होम्योपैथिक डाकटर्स के लिए उपयोगी है जो वैज्ञानिक विचारधारा को तर्क-सन्गत और Evidence Based मेडिसन के दायरे मे लाकर होम्योपैथी चिकित्सा को अधिक सटीक और सफल चिकित्सा विधि का स्तर देना चाहते है / आधुनिक युग मे मैंन  एंड मशीन का कन्सेप्ट इससे पूरा होता है /

इस स्कैनर मशीन के दो वर्जन है /

  • पहला वरजन ‘’डिस्प्ले वरजन’’ है / इस वरजन मे सारा डाटा ‘’डिस्प्ले’’ मे ही देखने को मिलता है , जिसे  डाक्टर अपने हाथों से कागज की शीट पर लिखकर रिकार्ड रख सकते है /
  • दूसरा वरजन ‘’एस० डी ० कार्ड विद डिस्प्ले’’ वर्जन है / इस माडल मे मेमोरी कार्ड को साकेट मे प्रवेश करते है और इस कार्ड मे डाटा ‘’कापी’’ हो जाता है /
  • इस मेमोरी कार्ड को कंप्यूटर यू ० एस ० बी ०  के द्वारा जोड़कर प्रिंटर से पाँच पेज की रिपोर्ट छाप कर उपयोग कर सकते है /

यह दोनों माडल हमारे यहा से उपलब्ध है इनकी कीमत नीचे अंकित की गयी है ;

  • डिस्प्ले माडल की कीमत रुपया २१ हजार पाँच सौ दश Rupees Twenty One Thousand Five Hundred & Ten only मे उपलब्ध है /इसमे जीएसटी टैक्स शामिल है /
  • दूसरे माडल एस-डी-कार्ड डिस्प्ले स्कैनर की कीमत रुपया तेईस हजार छह सौ सतत्तर और तिहत्तर पैसे है / इसमे जी एस टी शामिल है /
  • स्कैनर मंगाने के लिए हमारे  

प्रस्तुत वीडियो मे इसकी कीमत और इसके बारे मे समझने का प्रयास करे /  

अधिक जानकारी के लिए हमे इ-मेल भेजे या whatsapp पर बात करे;

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इस स्कैनर के बारे मे अधिक जानकारी हमारे निम्न चैनल मे अंकित वीडियो मे देखे ;

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आयुर्वेद मे अनुसंधान करने की बहुत बड़ी जरूरत


कोविद 19 की वजह से आयुर्वेद और अन्य चिकित्सा विधिया लोगों के सामने आई है / मै बहाऊत पहले से कहता चला या रहा हू की इस तरह की बीमारियों का कोई सटीक इलाज आधुनिक चिकित्सा विज्ञान मे नहीं है / इसके बारे मे मै अपने चैनल wwwyoutube.com/drdbbajpai channel  मे बौट विस्तार के साथ कह चुका हु / ले दे कर केवल  आयुर्वेद  ही ऐसी  विधि है जिससे इसका इलाज संभव है और सटीक तरीके से किया जा सकता है / इतना सब होते हुए भी आज हालात यह है की आयुर्वेद को कोई पूछता तक नहीं है / इसका कारण है की आयुर्वेद के लिए पिछली सरकारों ने  ईमानदारी से कोई काम नहीं किया बलकि इसके प्रति जिस तरह की उदासीनता दिखाई गयी यह उसी का परिणाम है की बाबा रामदेव जैसे व्यक्ति को लोग यह समझने लगे की वही आयुर्वेद और योग के पुरोधा साबित हुए है / इसमे दो राय नहीं की जा सकती की   बाबा रामदेव का नाम देश मे आयुर्वेद और योग के पुनरोधधार के लिए और देश के रजत शर्मा  का टी  वी चैनल इंडिया टी वी का आयुर्वेद के प्रचार और प्रसार के लिए देश और दुनिया मे आयुर्वेद के लिए किया है वह जग जाहिर है /

आयुर्वेद मे अनुसंधान करने की बहुत बड़ी जरूरत है / खेद की बात यह है की आयुर्वेद मे जिस तरह की अपेक्षित अनुसंधान होने चाहिए थे वे नहीं हुए और जो भी हुए है वे बहुत ही निम्न स्तर के है / हमारा संस्थान आयुर्वेद के अनुसंधान से जुड़ा हुआ है और इसी कारण हमारी नजर हर तरह के आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा से जुड़े हुये  अनुसंधानों की तरफ हमेशा अटेंटीवाली बना रहता है / विडंबना यह है की सरकारी स्तर पर और निजी स्तर पर जीतने भी अनुसंधान हुए है वे सबके सामने है / सरकारी स्तर पर अनुसंधान आपके सामने है /

विभिन्न क्षेत्रो  से अब यह आवाज उठने की शुरुआत हो रही  है की आयुर्वेद को रास्ट्रीय  चिकित्सा घोषित करना चाहिए / अभी यह आवाज बहुत कमजोर स्तर की है और इसका कोई असर सरकारों पर पड़ेगा इसमे मुझे संदेह लगता है / जिधर से यह आवाजे आ रही है उनमे सिवाय राजनीति के अलावा कुच्छ दूसरा नजर नहीं आता है / इसके पीछे बहुत से कारण हो सकते है और उनका जिक्र मै समय समय पर अवश्य करूंगा/

फिलहाल आयुर्वेद मे अनुसंधान की अभी बहुत बड़ी और अनंत संभावनाए छिपी हुई है और आयुर्वेद को दुबारा डिस्कवर करना और एक्सप्लोर करना आयुर्वेद से जुड़े लोगों के हाथ मे है / यह इनको ही करना होगा / अकेले सरकार के बूते का यह काम नहीं है /

यह सही है की कोविद महामारी के साथ अब सारी दुनिया को जीना होगा और यह ठीक उसी तरह से मैनेज की जानी चाहिए जैसे की मलेरिया बीमारी के लिए मैनेज करते है / एक बात आप सभी याद रखे कि जैसे मलेरिया की कोई वैक्सीन नहीं बनी है उसी तरह कोविद की वैक्सीन भी नहीं बन पाएगी / अगर बन भी गयी तो यह उसी तरह नाकाम होगी जैसे की इंफ्लुएंजा की वैकसींन  का हश्र हुआ है / इसका सबसे बड़ा कारण यह है की वायरस अपने जीनॉमस को बार बार बदल रहा है और इन्सटेबिल है /

Research in Ayurveda latest machines are being used at our research center at KANPUR UP IN


Several machines in Ayurveda Diagnosis have been innovated and Invented and introduced on the line of perfection with AYURVEDA treatment and management according to the rules framed by the masters of Ayurveda in past .

At our research center we have innovated and invented latest and ultra modern technology fully automated report produces in AYURVEDA and HOMOEOPATHY and in UNANI respectively.

Videos on these innoventions are available at our youtube channel

http://www.youtube.com/drdbbajpai

go and view and know the latest innovations and much more genuine informations about the AYURVEDA and AYUSH therapies repectively

Interface of Ayurveda Tridosha Scanner

AYURVEDA TRIDOSHA SCANNER
AUTOMATIC PULSE EXAMINER EXAMINING DOSHA AND INTERNAL EXTERNAL DISEASES
NEWLY INVENTED MACHINE BY INVENTOR OF E.T.G. AYURVEDASCAN FULLY COMPUTERISED, PRINTS REPORTS BY COMPUTER AFTER DATA TRANSFER

SEE LIVE PROGRAM DAILY AT FACE BOOK IN MORNING AND YOU TUBE IN EVENING HOSTED BY Dr. D.B. BAJPAI, JOIN US DAILY


We daily broadcast our live program in
Face book in
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You tube channel LIVE STREAM
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after 07.00 PM
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Watch daily our programmes

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VIDEOS LATEST OF MARCH 2019


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उपवास कोरने के दरम्यान क्या सावधानियां रखना चाहिये


फिस्चुला का सटीक उपचार

OSTEOPOROSIS SOFT BONES DISEASE AND AYURVEDA AYUSH TREATMENT

CURED CASE OF CHRONIC PANCREATITIS

EPILEPSY SEIZURES CURES BY AYURVEDA AND AYUSH
THERAPIES INTEGRATED TREATMENT

UNDERSTAND AYURVEDA FUNDAMENTALS


LISTEN LIVE STREAMED VIDEOS BY DR D.B.BAJPAI BROADCASTER CHANNEL


हमारे चिकित्सा संस्थान कनक पालीथेरेपी क्लीनीक व्दारा हर रोज आयुर्वेद होम्योपैथी यूनानी नेचर क्योर आदि चिकित्सा विधियों पर प्रोग्राम प्रसारित किये जाते हैं ।

प्रसारित किये गये कार्यक्रमों की रिकार्डिंग यहां प्रस्तुत की गयी है ।

आप सभी इसे सुनें और ज्ञान प्राप्त करें ।

 

Seizures An Acute Emergent condition ; अचानक बेहोश हो जाना और सुध बुध खोना


दिमाग के अन्दर और अन्दरूनी हिस्से से उठनें वाली अचानक हल-चल या उत्तेजित कार्य कलापों की वजह से अचानक बेहोश हो जाना या सुध-बुध खोकर खब्तुल हवासी या होशो-हवाश खोने की हालत हो जाना जैसे हालात हों तो इसे सीजर कहते हैं

उत्तेजित दिमाग की अ-समानुपातिक कार्य करने की वजह से अनचाहे शारीरिक भाव-भंगिमायें जैसे हाथ या पैर या मुख या गर्दन या पीठ का कठोरता के साथ मुड़ना या ऐंठना और इसके साथ बेहोश हो जाना और दांत का कस कर बन्द कर लेना, जिसके कारण जीभ का कट जाना, मुख से गाढ़े थूक का निकलना, पाखाना या पेशाब का अनियंत्रित होकर निकलना आदि लक्षण देखनें में आते हैं

जैसा कि बताया जा चुका है कि बेहोशी का होना दिमाग यानी मष्तिष्क अथवा यह कहा जाय कि सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम से संबंधित बीमारी है और यह सिस्टम बीमारी के मूल में कारक है, लिहाजा वह क्या कारण हो सकते हैं जो ऐसी बीमारी पैदा होती है

अगर बहुत तेज बुखार किसी को होता है तो शरीर में बुखार की तेज गरमी या तापमान का अधिक बढ़नें का दबाव शरीर नही बर्दाश्त कर पाता है जिसके कारण बेहोशी की स्थिति बन जती है, इसे फेब्राइल सीजर कहते हैं,

बेहोशी इन्फेक्शन से भी होती है , इन्फेक्शन के कारण होने वाली बेहोशी अघिकतर कई तरह के मिक्सड यानी मिले जुले इन्फेक्शन के शरीर में पड़नें वाले प्रभाव से होती है

अगर मलेरिया का इन्फेक्शन सीवियर स्तर तक पहुंच जाय और इलाज करनें में  लापरवाही की जाय तो बेहोशी की तकलीफ पैदा हो जाती है

मेनिन्जाइटिस यानी दिमागी बुखार हो जाये तो बेहोशी की बीमारी पैदा हो जाती है , यह मेनिन्गो कोक्कल बैक्टीरया के इन्फेक्शन के कारण होता है 

इसी से संबंघित एक बीमारी दूसरी होती है , इसे मेनिन्गो-इन्सेफेलाइटिस कहते हैं , यह होने पर बेहोशी की बीमारी पैदा हो जाती है, दिमाग में सूजन आ जाने के कारण ऐसी समस्या होती है, ऐसा बैक्टीरिया के कारण होता है 

सेरेब्रल टाक्सोप्लाज्मोसिस Cerebral toxoplasmosis एक तरह से दिमागी बुखार की तरह के सिंड्रोंम्स वाली बीमारी है और इसमें सभी लक्षण मेनिन्जाइटिस जैसे पाये जाते हैं , एड्स अथवा एच.आई.वी. की बीमारी के कारण सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम यानी दिमाग पर इन्फेक्शन का असर पड़ता है लेकिन ऐसा असर हमेंशा एड्स की बीमारी के अन्तिम अवस्था में ही देखनें में आता है

सिस्टीसेरकोसिस बीमारी सुअर का गोश्त सेवन करनें वालों को या सुअर के सम्पर्क में रहनें वालों को ही होनें की अधिक संभावना होती है , पोर्क टेपवर्म, टीनिया सोलियम के लार्वा द्वारा इन्फेक्शन होनें से यह लार्वा दिमाग में पहुंच जाते हैं और सीजर की बीमारी पैदा करते हैं . जानवरों के द्वारा फैलाये गये इन्फेक्शन से मनुष्यों में यह बीमारी पैदा होती है        

मेटाबालिक कारण Metabolic causes से भी सीजर या बेहोशी की बीमारी हो जाती है , लेकिन ऐसी अवस्था उनको ही होती है जिनको रक्त में सूगर कम होनें की बीमारी अचानक हो जाती है . इसके अलावा जिनको हाइपोग्लाइसीमिया Hypoglycaemia की तकलीफ होती है , उनको अचानक बेहोशी की बीमारी पैदा हो जाती है

इयाटरोजेनक कारण Iatrogenic causes से भी बेहोशी की बीमारी पैदा हो जाती है, अगर कोई बेहोशी को दूर करनें के लिये दवा का सेवन लगातार कर रहा है और वह रोगी दवा को अचानक बन्द कर देता है तो दवा बन्द करते ही बेहोशी होने लगती है

इपीलेप्सी यानी मिर्गी और हिस्टीरिया यानी अपस्मार इन दोनों बीमारियों में बेहोशी या सीजर आ जाते हैं  

इक्लैंम्प्सिया , महिलाओं में गर्भावस्था होनें के दरमियान बेहोशी की बीमारी पैदा हो जाती है , यह नर्वस सिस्टम के दबाव के कारण होता है

यहां संदर्भित और वर्णित की गयी सभी बीमारी ठीक हो जाती हैं, अगर इनका इलाज शुरूआत की अवस्था और बीमारी की पहली और दूसरी अवस्था में ही पूरी शिद्दत के साथ बिना किसी लापरवाही के और बिना समय गंवाये किया जाये

आयुर्वेद और होम्योपैथी और यूनानी दवाओं के सम्मिलित और इन्टीग्रेटेड उपचार और औषधि व्यवस्था के अलावा खान-पान और जीवन शैली के बदलाव और अन्य वैकल्पिक साधनों को अपना कर इलाज करनें से बतायी गयी बीमारियों में अवश्य लाभ होता है





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Dr. Desh Bandhu Bajpai
B.M.S. [Lucknow
] Ayurvedacharya [Delhi
]
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Diplom-Homoeopathy [Germany
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M.I.C.R. [Mumbai] C.R.C. [Cardiovascular]
Inventor & Chief E.T.G. AyurvedaScan Investigator &
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CLINIC & RESEARCH
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67 / 70, Bhusatoli Road
, Bartan Bazar,  KANPUR
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अचानक होनें वाली अप्रत्यासित बीमारियां CLINICALLY OBSERVED SHOCKED CONDITION


अचानक होनें वाली बीमारियां और इन सब बीमारियों से प्रभावित लोगों को यह समझनें की जरूरत है कि क्लीनिकल शाक्ड कंडीशन ऐसी अवस्था है जो किसी भी पुरानी तकलीफ के घीरे धीरे बढ़ते हुये

और इस धीरे धीरे बढ़ाव को बिना किसी तकलीफ का अहसास कराते हुये अचानक एक दिन विस्फोटक स्वरूप में प्रकट होकर शरीर को गंभीर हालत में ला देने की स्थिति है

जब शाक की स्थिति पैदा होती है तो इस बात की संभावना सबसे अधिक होती है कि एक्यूट सर्कुलेटरी सिस्टम कहीं फेल न होनें लगे ।

ऐसा देखा गया है कि अगर शीघ्र ही प्रारंभिक निदान और उचित उपचार नही किया गया तो शाक की तकलीफ की मृत्यु दर अधिक होती है।

शाक की कुछ स्थितियां होती हैं ।

  1. हाइपोवोलेमिक शाक
  2.  सेप्टिक शाक
  3. कार्डियोजेनिक शाक

हाइपोवोलेमिक शाक दो भागों में बट जाता है ।

  1. एब्सोल्यूट हाइपोवोलेमिया – यह स्थिति तब पैदा होती है जब इंट्रावैस्कुलर फ्लूड क्षीण हो जाता है यानी नसों के अन्दर बहनें वाला रक्त-सिरम में कोई कमी हो  जाय ।

उदाहरण के लिये – खून का किसी बाहरी या आन्तरिक कारण से अत्यधिक मात्रा में  बह जाना, डिहाइड्रेसन, शरीर से अत्यधिक मात्रा में पानी की कमी हो जाना, आग से जल जाना

और

  • रिलेटिव हाइपोवोलेमिया – एनाफिलैक्टिक रियक्शन, किसी वजह से एलर्जी पैदा हो जाना, विषैली दवाओं का उपयोग, एन्टीबायोटिक का अत्यधिक  प्रयोग, मलेरिया और कैंसर जैसे असाध्य रोगों की श्रेणी

सेप्टिक शाक – इसमें कई रोग एक साथ जुड़कर शरीर की स्थिति नाजुक बना देते हैं जैसे किडनी फेल होने के साथ साथ दमा की बीमारी और ढायबिटीज रोग का एक साथ पैदा हो जाना

कार्डियोजेनिक शाक – हृदय और हृदय रोग के विभिन्न प्रकारों से ग्रसित रोगी, जहरीले पदार्थों का हृदय की गतिविधियों पर असर, गंभीर किस्म की प्राणलेवा चोट

शाक के सामान्य लक्षणः

शरीर का पीला दिखाई देना, Mottled  Skin, हाथ पैर ठन्डे हो जाना, पसीना अधिक आना, प्यास का अघिक लगना, हृदय की घड़कन का अघिक चलना, कम ब्लड प्रेशर, सांस लेने में तकलीफ, शरीर का नीला पड़ना, पेशाब का बंद हो जाना, दिमाग में भ्रम पैदा होना

जैसे ही शाक से ग्रसित रोगी में इस तरह के लक्षण दिखाई दे, तीमरदारों को सावघान हो जाना चाहिये और स्थिति को समझते हुये अस्पताल या चिकित्सक की सलाह लेना चाहिये ।

शाक की कुछ स्थितियां घर पर ही मैनेज की जा सकती हैं लेकिन यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है । बहुत सी स्थितियों में चिकित्सक को रोगी के रोग को मैनेज करनें के लिये विशेष सुविधाओं की आवश्यकता होती है जो केवल अस्पताल में ही संभव है ।

ऐसी स्थिति जीवन में न आये इसके लिये लोगों की जागरूकता और कोई भी बीमारी होनें पर समयानुकूल तुरन्त इलाज करनें का इरादा हो तो ऐसी परिस्तिथियों से बचा जा सकता है ।

बहुत सी स्थितियों पर आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक और यूनानी दवाओं द्वारा तुरत फुरत इमरजेंसी लाइन के तौर पर इलाज शुरू कर दिया जा सकता है और घर अथवा क्लीनिक में ही इलाज की व्यवस्था की जा सकती है ।







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