Here is a case of Maggots and Worms and VERMICULITE INFESTATIONS THAT CAME FROM ANIMAL TO MAN ‘ the example is given below .

The case belongs to a 76 years Christian Old lady, living in Kanpur shahar area.

I am treating this lady since 14 years, for the problems she have off and on during change of weather every year several times. She is bulky in body get up and is heavy in weight.

Last year at beginning of Winter she suffered very badly by Spasmodic Asthamatic attacks several times a day and her condition was very poor at that when I went to see her.

Earlier she was treated by Allopathic remedies but without any result and one day she refused to take the Allopathic remedies. This was the point when her husband call me to see and check her.

I went and all exminations which was possible at bed side, I done and wrote a prescription of HOMOEOPATHIC REMEDIES.

After two days treatment she got tremendous response from Homoeopathic prescribed remedies and after one week HOMOEOPATHIC REMEDIES treatment see got alright.

In January 2015 she again got an attack of Asthama this time I again examined her and one day I examined her by ETG AYURVEDASCAN VISUAL MONITOR system . She was almost OK except HIGH BLOOD PRESSURE and POOR OXYGENATION.

I examined her LUNGS by HD FONO device, which gave me some unusual interpretations which I never seen and observed before. While I was examining her chest I saw inflammatory condition of upper chest skin as you are seeing in  below photos. At this time of examination her grandson was with me and was helping me to open the chest area where I want to examine.

Seeing condition of skin I thought that she might have asked to her family members about the complaints and therfore I was in confusion that every member of her family knows about the skin problem she have. I  never asked about the skin problem from patient or her family members.

This was the time when it came this problem in the notice of whole family members that she is suffering with another problems of skin.

She have two daughters living with her. Grandson told about the probelm when I went from patient house.

In evening patients husband phoned me and ask me to come immediately and check her whole chest including Mammmery glands. Her one of Son in Law is a pathologist  and the massage of the problem conveyed to the son in law.

I went again to patient.s house with all my armaments / machines  of diagnoses , which I have with me and I checked her chest and related organs . They were suspected for CANCER but after examining in primery level , I declared that it is not Cancerous problem , but it could be some other one, which I have to detect.

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Meanwhile I advised her family to go for entire Bloos examinations TLC, DLC, Hb percentage, ESR, SGPT, Alkaline Phosphates, Serum Bilirubin, SGOT , Creatinine, sodium, pottasium and other examinations.

To my surprise, when I received report , all parameters were within normal limits. Xray was done and this was also not showed any abnormal.

In between I started treatment by HOMOEOPATHIC REMEDIES.

An external use  combination of Homoeopathic remedies CALENDULA MOTHER TINCTURE and CANTHERIS MOTHER TINCTURE  and HYDRASTIS MOTHER TINCTURE  and  ECHINESIA MOTHER TINCTURE prepared and instructed  to apply on the wounded / Ulcer areas / parts. The similar combination is instructed to use as a washing lotion to clean the skin affected several times a day for healing purposes.


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A combination of Homoeopathic medicines prescribed to take internally for curing purposes. Some symptomatically selected Homoeopathic remedies was prescribed in appropriate interval and repetition timings.

Patient improved day by day and her attacks of Asthma minimizes day by day and improved.

Her Oxygen level was down to 72 percent. which improved after 15 days treatment upto 92 percent Skin Ulcers healed and pus was almost siezed. The inflammation area which was spread earlier 8″ to 10 inch area, shortens to 6″ by 8″. Thick scabs automatically removed as dead skin. Fresh skin crops up secondary, Inflammation somehow present but the actual reason was not known still.

Slowly and gradually patient was improving. At the commencements of Summer season, her Respiratory problems gone because of Heat atmosphere.

AYURVEDA tells that KAPHA  which is accumulated during winter season due to cold / severe cold and causes bodily ailments , relieved in Summer Heat due to PITTA, which aggravates in Summer Heat.

This was the season which relievs the Asthama problem of the aged lady.

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[matter will be loaded soon]





Mr  DANISH KHAN – sufferred from dreaded disease condition AVASCULAR NECROSIS, is now  fully  cured by our  AYURVEDA and AYUSH  treatment and management.

Mr DANISH   mobile number is


Danish Khan is living in LUCKNOW State capital of Uttar Pradesh . He assured me that he will response to all persons who is willing to knaow about the treatement and our procedures.

We always believes and prefers evidence based Ayurveda and Ayush medical practice and as an example producing here the cured persons oral versions to all of you.

We always face problems from patient’s side. Large number of Incurable disease conditions are treated successfully at  our research center of Epilepsy, Leucoderma, Paralysis, Diebetes, Heart disorders, Arthritis, Necrosis and many many disease conditions, cured patient are not willing to say or convey to others and avoide to talk to others. They want to hide waht have happened in past.

This is one of the problem, which we faces all the times.

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DEV ANAND AND SURRAIYA INDIAN SUPER FILM STAR’S LOVE AFFAIRS MENTAL ANALYSIS ; ंमश्हूर फिल्म स्टार देवानन्द और सुर्रैया के बीच के हुयी कुछ बातो की मानसिक विवेचनामै

देवानन्द मेरे प्रिय सिने स्टार है / मैने उनकी फिल्मे बचपन से ही देखना शुरु किया था / उनके प्रेम के किस्से मै जवान जहान युवक और युवतियो के वारतालाप को छुप छुप कर सुना करता था / स्कूलिन्ग के दिनो मे मै उन्ही की स्टाइल मे बाल रखता था / उन्ही की स्टाटाइल मै  फिल्मो मे बोले जाने वाले डायलाग बोलने के अन्दाज मे अपने दोस्तो के साथ    उनकी नकल  करके बोला   करता था और उनकी स्टाइल मे ही चलता था / कपडे भी उन्ही की तरह के पहनता था और देबानन्द की तरह की अल्हड़्ता मन मे चौबीस घन्टे भरी रहती थी / लड़्कियो को मै उन्ही के अन्दाज मे ” है अपना दिल तो आवारा न जाने किस पे आयेगा ” या ” उफ यूम्मा ये आन्खे उफ यूम्मा ये धड़कन” या ” सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार था आज भी है और कल भी रहेगा ” जैसे गानो को सुनाकर लड़्कियो ्से फ्लर्ट किया करते थे / उनको देवा नन्द के डायलाग सुनाया करते थे / हीरोइनो मे मुझे श्यामा के अलावा कोई दूसरी हीरोइन अच्छी नही लगी / मै श्यामा की गेट अप और उनकी अदाओ का बहुत और बेहद हद   तक  दीवाना रहा / मुझे श्यामा के अलावा रूपहले   पर्दे की किसी       दूसरी हीरोइन ने प्रभावित नही किया /

इसलिये मै कह सकता हू कि मेरे पूरे जीवन मे देवानन्ड और श्यामा का बहुत प्रभाव पड़ा है / जो आज तक बरकरार है और आगे भी जब तक जिन्दा हू ऐसा क्रेज इन अभिनेताओ के प्रति   बना रहेगा /


मेरा आज भी चलने का कुछ स्टाइल देवानन्द से मिलता जुलता है / इसी कारण जब मे सड़क पर चलता हू तो लोग मेरे हाथो और चलने के स्टाइल पर कहते है देखो देवानन्द की चाल वाला आ रहा है /

सामने से आ रही लड़्किया और देवानन्द के जमाने की महिलाये मुझे सड़्क पर चलते हुये देखकर हंसने लगती है और किशोर या जवान उम्र की लड़्किया मेरे चलने के स्टाइल को देखकर  देवानन्द की चाल की नकल करने लगती है और वे  अपने दोनो हाथ को आगे की तरफ फेन्क कर क्रास बनाने लगती है और गर्दन  हिलाकर   देवानन्द की तरह नकल करने लगती है और फिर   हन्सने लगती है /

मे यह सब देखकर चिढता न्बही हू बल्कि खुश होता हू और बहुत खुश होता हू कि चलो मेरे चलने के स्टाइल पर अगर इस देश के लोग देवानन्द जैसी महान कलाकार हस्ती को मेरे चलने के बहाने याद करते है तो यह मेरे लिये बहुत फक्र की बात है / मै जिस शहर मे  या कस्बे या गांव मे जाता हू  या किसी जगह  जाता हू  तो यही हाल होता है / मेरे बोलने का तरीका भी कभी कभी लोगो को समझाते समय देवानन्द की डायलाग दिलीवरी की तरह हो जाता है /

मुझे बीते जमाने की हीरोइन श्यामा का बहुत क्रेज था / मैने १० साल की उम्र मे  सबसे पहली फिल्म “नास्तिक” देखी थी / एइ दिल मुझे बता दे तू किस पे आ गया है गाना गाते हुये श्यामा को जब रूपहले पर्गे पर देखा तो मै उनकी श्क्ल सूरत देखकर इतना मन्त्र मुग्ध हो गया कि उअन्के जैसी गेट अप वाली लड़्की और शोख अदाओ वाली लड़्किया मुझे बहुत पसन्द आने लगी /

अचानक एक दिन मुझे कालेज जाते समय एक लड़्की दिखी जिसे देखकर मुझे उसमे श्यामा का अक्स नजर आया / दिन बीतते गये स्कूल आते जाते रास्ते मे उससे बाते होने लगी / उस समय मेरी उम्र १७ साल की थी / मै उससे बेहस प्यार करने लगा और वह भी /  मै इस  समय कछा ११ का छात्र था / गर्मियो की छुट्टि मे मैने उससे वादा किया था कि मै उससे जरूर मिलता रहून्गा / लेकिन उसके बाद वह मुझे कभी भी नही मिली / मैने उसके बारे मे  बहुत पता किया उनके पिअता जी सरकारी सेवा मे थे / उसे ढून्ढने की कोशिश की लेकिन कुछ पता नही चला /

मै फूट फूट कर रोया / मुझे कुछ अच्छा नही  लगता था और मेरी मनो दशा अन्दर से बहुत बरी हो गयी / हर लड़्की दूर से मुझे वही नजर आती थी /

धीरे धीरे समय के साथ थोड़ा मरहम लगा / लेकिन पहला प्यार क्या होता है ? यह धीरे धीरे समझ मे आने लगा /  मन मे जब तृप्ति का भाव नही होता तो हमेशा एक कसक बनी रहती है कि जिस चीज को पाना चाहता था वह नही मिला/ जिसे सबसे ज्यादा दुनिया मे चाहता था और न जाने कितने सपने बुने थे वह सब के सब चकना चूर हो जाते है / जब दिल टूटता है तो ऐसा ही होता है /

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मेरे स्वभाव मे खिलन्दड़ा पन आने लगा /  अल्हड़्ता आने लगी और यही खिलन्दडा पन और अलःअड़ता अभी तक बनी हुयी है क्योन्कि जीने के लिये गम की नही और न फिक्र की जरूरत होती है / जीने के लिये बस यही एक रास्ता था / देवा नन्द और सुर्रैया की कहानी सुनकर मुझे लगा कि मै अकेला नही हू मेरे जैसे इतने महान लोग भी है /

बस तब से देवानन्द मेरे दिल और दिमाग मे घुस गये  और फिर जिन्दगी जीने का का रास्ता आसान हो गया / मै कुछ रचनात्मक कार्य करना चाहता था / अपना दुख भुलाने के लिये मैने सोचा कि ऐसा काम करन चाहिये जो जन सेवा से जुड़ा हुआ हो /

एक मैगजीन मे मैने पढा कि IF YOU CAN NOT BE A KING , BETTER YOU BE A PHYSICIAN.

मैने इन्टर्मीडियट साइन्स से परीक्षा पास की और उसके बाद ग्रेजुएशन करने के लिये एड्मीशन लेने वाला था कि मेरे मन मे यह विचार आया कि अगर सेवा करना है तो डाक्टर या चिकित्सा से समबन्धित कोर्स किया जाये / मैने आयुर्वेद मे एड्मीशन ले लिया / मै अपने को बिजी रखना चाहता था /

मेरे मन मे चोट लगी थी और मेरी इच्छा थी कि  कुछ ऐसा करू कि लोग मुझे याद रखें /आज मै ७० साल का हू लेकिन मेरा दिमाग मुझे २० साल का बनाये रखना चाहता है / और मै अपने को २० साल का ही समझता हू / यह एक विचित्र सी बात है / इसीलिये मेरी सारी एक्टीविटीज बिस साल वालो जैसी है /

मेरी प्रेमिका मुझे कभी भी   नही मिली / यह खलिश मेरे दिल मे आज तक मौजूद है / अभी भी उसकी याद करके मेरे मन की पीड़ा ताजा हो जाती है /


यह सही है और बिल्कुल सही है , हर सफल और शीर्ष व्यक्ति के पीछे एक औरत जरूर होती है जैसे राज कपूर के पीछे नर्गिस, जैसे प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी के पीछे उन्की पत्नी जसोदा बेन मोदी , जैसे बिल क्लिन्टन के पीछे उनकी पत्बी हिलेरि क्लिन्टन जैसे अमिताभ बच्चन के पीछे जया बच्चन  / कहने का मतलब यह कि कोई न कोई स्त्री या महिला हर सफल व्यक्ति के पीछे अवश्य  होती  है /

देवानन्द के पीछे सुरैय्या का नाम क्या  जुड़ा , देवानन्द की फिजा बन गयी / सुरैया उस समय की सबसे मशहूर हीरोइन थी और देवानन्द जैसा कि सभी कहते है , एक नये कलाकार थे /इनकी प्रेम कहानी लगभग चार साल तक चली /

जैसा कि लोग बताते है कि सुरैया की शादी उन्की नानी के अवरोध  के   कारण नही हो पायी / यह सही है क्योन्कि अवरोध इस बात का जरूर होगा कि देवानन्द हिन्दू थे और सुरैया मुस्लिम / उस समय देश की सोसायटी बहुत कनजर्वेटिव किस्म  थी / वह यह सब नही बर्दाश्त किसी कीमत पर नही कर सकती थी कि एक मुस्लिम लड़्की किसी हिन्दू से शादी करे / मैने वह जमाना देखा है जिसमे धार्मिक कट्टरता और जातीय कट्टरता अति चरम सीमा मे लोगो के अन्दर   भरी ्होती थी और यह कट्टर पीढी किसी कीमत पर इस तरह के व्वयहार की इजाजत देना तो दूर सोच भी नही सकती थी / इसलिये कुछ भी कहा जाय नानी का कट्टर धार्मिक होना सुरैया की शादी मे बाधक बना / हलान्कि कुछ लोगो का कहना है कि देवानन्द सुरैया के प्यार को पाने के लिये मुसलिम धर्म स्वीकार करने को तैयार थे / फिर  बात मे रोड़ा क्या अटका यह बात समझ से परे है / केवल यही समझ मे आया है कि सुरैया की नानी को शाय्द लोग उल्टा सीधा समझा कर गुमराह कर रहे थे और नानी बहकावे मे आकर शादी के खिलाफ की ढाल बन गयी और नानी के कन्धे पर बन्दूक धर कर वे लोग अपना उल्लू सीधा करने मे कामयाब हो गये तो नही चाहते थे कि सुरैया की शादी देवानन्द से हो /

एक बात मुझे याद आ रही है कि ऐसा बताया गया कि जब सुरैया से आखरी बार  मिलने देवानन्द पहुन्चे और इन दोनो की मुलाकत हुयी तो जो खाका मेरे दिमाग मे बन रहा है उसके मुताबिक जब देवानन्द  चलने को हुये तो वे सुरैया के गले मिलकर बहुत फूट फूट करे रोये / बाद मे जब वह घर आये तो अपने बड़े भाई चेतन आनन्द के गले मिले और फूट फूट कर रोये /

फूट फूट कर और दहाड़े मार कर कोई भी वयक्ति तभी रोता है जब उसकी मन कॊ अवस्था किम्करतव्य विमूढ वाली हो जाती   है / यह हाई लेवल शाक HIGH LEVEL SHOCK POSITION की स्तिथि होती है जिसमे व्यक्ति को अपने प्रयासो का  अनुकूल नतीजा न मिलने के कारण  ADVERSE REACTION    प्रतिक्तिया स्वरूप होता है /

देवानन्द के लिये यही वह TURNING  POINT बना  जिसने देव कुमार पीरामल आनन्द को “देवानन्द” बना दिया /

एक और बात की अनालाइसिस करता हू / वह यह कि काम  न करने के लिये या बात बिगाड़ने के लिये या जिस कार्य को करना नही होता है उसके लिये सौ और हज़ार तरह के बहाने होते है / आप्को काम नही करना है तो आप सौ बहाने बनायेन्गे / मुझे मरीज को नही देखना ऐसा मैने सोच लिया है तो मै सौ तरह के बहाने बताकर उसको नही देखता /यही हाल देवानन्द के साथ हुआ होगा / नानी ने एक बार ठान लिया कि शादी नही करनी है तो नही करनी है उसके लिये सौ बहाने ढ्ण्ढे गये  और इसके पीछे शतरन्ज की बाजी लगाये लोग दूसरे के कन्धे पर बन्दूक धर कर निशाना किसी और पर साध रहे थे /

देवानन्द की फिल्मो मे  देव  कुमार पीरामल आनन्द  के मन की स्तिथि और उनके मन की पीडा बहुत जगह पर अयां हुयी है उनके मन की पीड़ा का expression अगर उनकी फिल्मो लो ध्यान से देखा जाय तो ऐसे बहुत से वाकये उन्होने फिल्मो मे फिल्माये है जो उन्होने सुर्रैय के साथ बिताये होन्गे / एक कलाकार बहुत कुछ अपने जीवन के बिताये गये पलो को मूर्त रूप देकर नये स्वरूप मे लोगो को देता है जो उसक व्यक्तिगत होता है /

ज्वेल थीफ  फिल्म मे  एक  गाना ” ये दिल न होता आवारा ”  के बीच मे एक सीन आता है जिस मे तनूजा  कार से उतर कर एक बड़ा सा डन्डा हाथ मे लेकर कार का दरवाजा खोलकर बाहर सड़क पर उतर कर खड़ी हो जाती है और फिर देवानन्द को  एक लम्बी सी छड़ी दिखाती है जिसे देखकर देवानन्द भागते है और घूमकर भागते है / मुझे लगता है कि ऐसा ही देवानन्द और सुरैया के बीच मे हुआ होगा /

 [अभी मैटर लिखना बाकी है ’

मानसिक रोगो के साथ मिर्गी के अटैक के रोगी का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित अध्ध्य्यन और आयुर्वेदिक उपचार ; MENTAL DISORDERS with EPILEPSY / SIEZERS ATTACK AYURVEDIC TREATED ON THE FINDINGS AND CONCLUSION OF E.T.G. AYURVEDASCAN AND ITS SUPPLEMENTARY EXAMINATIONS


क्या भूत प्रेत का अस्तित्व आप मानते है ? क्या इस अखिल विश्व मे भूतो को किसी ने देखा है ? क्या बास्तव मे भूत होते है ?और क्या वास्तव मे हकीकत  मे भूत किसी को परेशान करते है ?

आप सभी पाठको को शायद मेरी बातो का यकीन न हो / आप मे से कुछ यकीन भी कर सकते है और आप मे से कुछ नही भी करते होन्गे /

बहरहाल अभी कुछ दिन पहले एक लड़्की जिसकी उम्र २६ साल की थी आसाम राज्य से इलाज के लिये कानपुर अपने शरीर की जान्च के लिये आयी /   लड़्की के  अभिभावको ने बताया कि इसे एक साल से मिर्गी का दौडा पद रहा है और इसको भूत भी चढ जाते है /

तमाम एलोपैथी की दवा कराने के बाद और अच्छे से अछ्छॆ डाक्टरो का इलाज कराया पर इसकी बीमारी नही ठीक हुयी है / आप्के बारे मे पता चलने कि आप मिर्गी और भूत प्रेत  वालो की बीमारी का इलाज करते है यह जानकरके आपके पास इलाज के लिये आये है /

मैने उनको बताया कि आप अगर विश्वास करते है कि इस दुनिया मे भूत होते है तो जरूर होते होन्गे और अगर आप यह समझते है कि भूत नही होते है ति फिर भूत नही होते होन्गे / यह तो मन के विश्वास की बात है /

हलान्कि दुनिया का कोई भी चिकित्सा विग्यान यह नही मानता है कि भूतो के द्वारा किसी तरह की बीमारी पैदा हो सकती है , लेकिन आयुर्वेद यह जरूर मानता है कि ग्रह बाधा और परालौकिक शक्तियो के कारण शारीरिक बीमारिया हो सकती है /

प्राचीन काल से यह विश्वास करीब करीब हर देश मे प्रचिलित है कि कुछ शक्तियो के दवारा बीमारिया पैदा की जाती है जिनसे एक विपदा का रूप लेकर देश के देश और उनके नागरिको का बीमारी के कारण सफ़ाया हो जाता है जैसे प्लेग, कालरा और इसी तरह की अन्य बीमारिया /

किसी जमाने मे इस तरह की बीमारियो को ईश्वर का परकोप माना जाता थाअ लेकिन MICROSCOPE    के आविष्कार के बाद यह पता चला कि यह जीवाणुओ के द्वारा फैलायी जाने वाली बीमारी है /  इस्का पता चलने के बाद लोगो के दिमाग से यह बात साफ हो गयी कि यह बीमारी किसी भूत या प्रेत या चुडैल द्वारा नही फैलायी जाती है बल्कि प्रकृति के द्वारा ही यह सब परिस्तिथियो वश पैदा हो जाने वाली बीमारी है /

लौट के आते है फिर उस लडकी की बीमारी के बारे मे / लडकी के पिता ने बताया कि उन्होने लदकी का बहुत झाद़्फून्क कराया . जिसने जहा बताया वहा जादू टोना करने वालो के दरवाजे गया और मजरो मे मन्दिरो मे जाकर गन्डा ताबीज लाकर पहनाया गया लेकिन लड़्की की तबियत नही ठीक हुयी  और दिन पर दिन उसकी हलात खराब होती चली / मै बहुत परेशान हो गया और घर के सन्ही लोग इस लड़की की बीमारी के कारण टेन्शन मे आ गये  कुछ सूझ नही रहा था कि करे क्या > किससे इलाज कराये और क्या करे ?

इसी उहापोह के बीच मे मेरे किसी मरीज से समपर्क हुआ जो मेरे यहा से मिर्गी रोग का इलाज करा चुका था और सामान्य जीवन बिता रहा था / उसने सलह दी कि वह मेरे यहा आकर इलाज कराये /

मैने उनको समन्जाया कि भूत प्रेत होते होन्गे जैसा कि सभी विश्वास करते है , लेकिन भूत हमारे आपके सबके पूर्वज है  / भू्त हमारे आपके सबके बाबा और लकड़ बाबा और आदि पूर्वज है / हम सभी भूतो की पीढिया है / हमे यह मान्ना चाहिये कि हमारे बाबा पर्बाब और लकड़ बाबा हमारा क्यो नुकसान करेन्गे / बाबा को अपने पोते और पड़्पोते  और लकड़ पोते  बहुत बहुत प्यार करते है / बह क्यो हमारा नुकसान करेन्गे उलटे वह हमारी रक्षा करेन्गे /

यझ बात सुनकर मरीज और मरीज के सभी साथ मे आये परिवार के लोग  सन्युष्ट हुये / मैने उनको बताया कि सारे शरीर की जब जान्च होगी तब पता चलेगा कि  शरीर के किन अन्गो की गड़बडी से यह बीमरी पैदा हो रही है ?

ऎ०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके अन्य परीक्षण करने से पहले मेरे दिमाग का स्तर जीरो लेवल का होता है  क्योन्कि मै कोई prejudice  होकर कोई मरीज की बीमारी के बारे मे opinion  नही बनाता हू /

मैने मरीज का परीक्षण करना शुरू किया / जैसे जैसे एक परीक्शण से दूसरे परीक्षण और दूसरे से तीसरे परीक्षण के बाद चौथे और पान्चवे परीक्षण के नतीजे आये  मरीज की बीमारी के बारे मे पता चलना शुरु हो गया कि इसे क्यो तकलीफ मिर्गी की और भूत प्रेतो की हो रही है / यह सब परीक्षण करने मे एक दिन पूरा बीत गया / अभी चार परीक्षण और करने थे /

मैने मरीज से कहा कि वह दूसरे दिन सबेरे  परीक्षण के बाकी बचे जान्च के लिये सुबह आये दिन की जान्च मे मरीज के दिमाग के कुछ हिस्सो के साथ कार्डियक रितम मे अनियमितता तथा आटोनामिक नरवस सिस्टम की पैथोफीजियोलाजी आब्जर्व की गयी / इससे यह पता चल गया कि श्रीर की केमिकल केमिस्ट्री मे अनियमितताये है / इसके साथ उसके यूटेरस और रिप्रोडक्टिव सिस्टम मे कार्य विकृति का नकल्न सामने आया /

इन आनकडो के आने से यह सुनिश्चित हो गया कि इसे आटोनामिक सिस्टम की विकृति है और इसके अलावा कुछ भी नही है / दूसरे दिन सुबह मरीजा आ गयी  / मेरा आउट्डोर अस्पयाल है / मैने मरीज से कहा कि वह बेड पर लेटकर थोडा सा विष्राम कर ले /







[ Above Photo in actual not belonging to the LADY patientwhich was examined , this for the introduction of the newlt inventedprocedure of ETG AyurvedaScan ;  show another patient ; the process is beneficial for examining patient according to the rules and timings of  Ayurveda Vata and Pitta and Kapha



BIO-MATRIX EVALUATION WITH E.T.G. AYURVEDASCAN SYSTEM  की  जान्च से सारे शरीर का कई तरह का बहुत और अतिआवश्यक डाटा fraction of seconds  का मिलता हुआ चला जाता है / यह हमारे सन्स्थान द्वारा डेवलप की गयी आयुर्वेद की उच्च कोटि की तकनीक है /

मरीजा को कम से कम दो घन्टे के लिये  इसका परीक्षण कराना था / मैने उअसको बेड पर आराम करने को कहा / फिर बाद मे उसके श्रीर मे सभी तरह के आवश्यक सेन्सर लगा दिये गये  /

तुरन्त ही मरीज के   शरीर के सभी  डाटा मिलना शुरू हो गये /

तभी कुछ चौकाने वाले तथ्य सामने आये / पीछले दिन जब परीक्षण किये गये थे तो इस लड्च्की  का हार्ट रेट ७३ बीट पर मिनट सामान्य था / लेकिन सुबद उसका हार्ट रेट १०३ प्रति मिनट मिला / पहले मै समझा कि शायद पैदल चल कर आयी है इसलिये ऐसा होगा / लेकिन जब अन्य पैरा मीटर्स देखे गये तो बात समझ मे आयी /

लड़्की के रिस्पाइरेशन रेट और पल्स रेट और शरीर का तापमान बढा हुआ था / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन ट्रेसेज मे असामान्यता देखी गयी /

मै करीब आधे घन्टे तक बायो मैट्रिक्स मानीटर को देखता रहा / देख्ते देखते लड़्की की पलस रेट और अन्य पैरा मीटर्स अधिक की तरफ बढने लगे / ब्ल्ड प्रेशर भी असामन्य होने लगा और बुखार आधे घन्टे बाद १०३ के पास हो गया /



ठीक उसी समय लड़्की के ऊपर भूत आ गये / वह बड़बड़ाने लगी / साथ आये मरीजा के माता पिता बताने लगे  कि इसके ऊपर भूत का परकोप हो गया है और भूत चढ गया है /

यह तो अच्छा हुआ कि मेरे सामने ही इस लड़्की की समस्या सामने आ गयी / मैने लड़्की से पूछा कि क्या है  ? तो वह भी मुझसे पूछने लगी कि कया है ? मैने अपनी आन्खे चढाकर उससे पूछा की क्या है ? तो उसने भी अपनी आन्खे चढाकर पूचा कि क्या है ? मैने कहा कि क्या भूत  प्रेत परेशान कर रहे है ? उसने वही सवाल दोहराया कि क्या भूत प्रेत परेशान कर रहे हैं ?

मैने कहा नही ? वह भी बोली नही ?

मैने कहा भूत प्रेत और शैतान कुछ भी नही होते है ?लड़्की ने भी यही दोहर दिया कि भूत प्रेत नही होते है /

मेरी निगाह बराबर मानीटर पर लगी हुयी थी और इस वार्तालाप का शरीर पर क्या असर हो रहा है यह सब बराबर आटो रिकार्ड हो रहा था / यह करीब कुछ मिनट का दौरा था / इसके बाद मरीजा चुप हो गयी और पीने के लिये पानी मान्गा /

मरीजा के पिता ने बताया कि आपके यहां तो इसका दौरा बहुत कम  इन्टेन्सिटी का  और  बहुत कम समय का आया है / इससे पहले उसको लगन्हग घन्टे से अधिक तक का दौर और मिर्गी का दौरा पड़ जाता था /

मनीटर ने बताया कि इसका बुखार १०३ से  कुछ घटकर १०२.५ तक आ गया है /  इसके बाद मरीजा शान्त हो गयी और फिर सामन्य वयवहार करने लगी /

मेरे पास तमाम जान्चो की रिपोर्ट   बन कर आ  चुकी थी /

 चार आयामी डायग्नोसिस से पता चला कि तीसरे और चौथे स्तर की तकलीफ  के लिये मरीजा इलाज के लिये आयी है /

अभी पहला और दूसरा शरीर के अन्दर छिपा हुआ वह शरीर का हिस्सा ट्रेस करना  बाकी था जिसके कारण रोगी को मिर्गी के दौरे आ रहे थे और साथ मे भूत प्रेत आ गये थे /

मैने मरीजा के परिजनो से पूछा कि इसे जब यह तकलीफ हुयी थी तो उससे पहले क्या हुआ था /

मरीजा के पिता ने बताया कि इसको जब से यह तकलीफ हुयी है उससे पहले लगभग १५ दिन पहले बुखार आया था / इलाज के बारे मे बताया कि  पास मे ही अन्ग्रेजी डाक्टर से दवा दिलायी गयी थी और तीन चार दिन के इलाज से यह ठीक हो गयी थी और उसके एक सप्ताह बाद ही इसको मिर्गी का दौरा पड़ गया और भूत भी चड़ गये /


आपके यहा आने से पहले इसका एक साल से अधिक हो गये है इलाज करा रहे है लेकिन यह ठीक नही हुयी / बुरी तरह से प्रेशान हो गये तब आपके पास आये .

मुझे समझते देर नही लगी और फौरन ही समझ मे आगया कि इसे SUPPRESSIVE DISORDERS  के कारण यह बीमारी पैदा हो गयी है /

SUPPRESSIVE DISORDERS वास्तव मे है क्या ?  इसे समझने की जरूरत है / जब समझेन्गे तो फायदा होगा /

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होम्योपैथी के  जनक डाक्टर सैमुअल हाहनेमान ने अपनी पुस्तक ORGANON OF MEDICINE  मे बताया है कि SUPPESSIVE AILMENTS  कैसे  शरीर मे पैदा होये है और किन कारणो से ऐसे शरीर के विकार बहुत बड़ी किस्म की बीमारी पैदा कर देते है / और इस बीमारियो के कारण कैन्सर और दूसरे वाइटल आर्गेन्स प्रभावि होकर मृत्यु तुल्य कष्ट वाली बीमातियां पैदा कर देते है /

मै समझ गया कि इसे सप्रेसिव डिसार्डर्स पैदा हो गये है / मैने मरीजा का लगभग चार घन्टे तक BIO-MATRIX  parameter एकत्र किये और उसके बाद जब स्ब रिपोर्ट आ गयी तब पता चला कि इसे क्यो और कैसे बीमारिया डेवलप होकर भूत प्रेत तक आ पहुन्ची /

मरीजा को दवाये  पा प्रेस्क्रोप्शन लिखकर दी गयी जो उसके शरीर की बीमाती के हिसाब से प्राप्त डाटा के ऊपर आधारित थी /

दवाये खाने से और पथ्य परहेज करने से मरीजा के भूत उसे छोड़्कर चले गये है और उसके मिर्गी के दौरे भी ठीक हो गये है / मैने पहले भी कहा है कि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके अन्य समबन्धित परीक्षणो से शरीर के अन्दर व्याप्त कोई भी बीआरी हो ऐसी सभी   बीमारिया अवश्य ठीक होती है



Dr D.B. Bajpai invired to participate in discussion pannel organised by K NEWS SATELLITE TV NEWS Channel  KANPUR 21 st June 2015.



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After the invention of AYURVEDA only existing Diagnosis and monitoring of whole body scanning systems , now presently in EIGHT sections, it is possible now to measure and monitor the current effects of YOGA exercises impacts falling on the body and its systems, working during the exercises of YOGA done at anywhere.

In our research center we are using the latest and highest equipments for examining whole body in AYURVEDA views. We are practicing the tech

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योग और योग दिवस पर ; २१ जून २०१५

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सन १९७३ मे मै होम्योपैथी के अध्ध्य्यन के लिये जरमनी देश के म्यूनिख शहर मे मी के महीने मे पहुन्चा था / मै अपने साथ होम्योपैथी की मटेरिया मेडिका और अन्य जरूरी किताबे लेकर गया था /
मेरे पास पैसा नही था लेकिन विदेशो मे जाकर शिक्षा प्राप्त करने का हौसला जरूर था / सन १९७२ मे बेचलर आफ मेडिसिन अन्ड सर्जरी का  कोर्स पूरा करने के बाद मेरे मित्र ने कहा कि जरमनी जाकर होम्योपैथी पढना चाहिये और / कुछ छात्रो का सन्गम बना और एद्मीशन लेने के लिये मेरे ऊपर जिम्मेदारी डाल दी गयी /

मैने कई देशो से समपर्क किया / इन्ग्लन्ड ने एद्मीशन देने से मना कर दिया और कहा कि हमारे यहा केवक एम०डि० या इसके समक्छ डिग्री वाले ही प्रवेश पा सकये है /

कुछ देशो मे भाषा की समस्या थी /

अन्त मे जरमनी के म्यूनिख शहर मे होम्योपैय्ही जहा पढाई जाती है वहा एड्मीशन मिल गया /  जरमन भाश्गा मे पढाई के लिये बताया ग्या / इसलिये कानपुर मे जर्मन भाषा पढना शुरू किया / मैक्स मूलर भवन दिल्ली से एक वर्ष मे छह माह के दो कोर्स किये /  अब मै जरमन भाषा बहुत फर्राटे से बोलने लगा /

मेरे पास धन नही था लेकिन हौसला बहुत था / इसलिये फैसला किया कि दिल्ली से अम्रत्सर होते हुय्ये काबुल चला जाय और फिर वहा से  अफगानिस्यान  और ईरान और टर्की को पार करते हुये यूरोप इस्ताम्बूल होते हुये पहुन्चा जाय /

मैने अपनी जाने की योजना अपने साथ जाने वाले दोस्भातो और साथियो को बतायी / लेकिन एक एक करके सभी दोस्त जो पहले साथ जाकर पढाई करने का वादा कर रहे थे एक एक करके सब पीछे हट गये . अब मै अकेला रह गया /

मैन्र पास्पोर्ट का आवेदन किया / मुझे कुछ महीनो मे पास्पोर्ट मिल गया . मैने फैसला किया कि कोई जाये या न जाये मै अवश्य जाउन्गा / पिआ जी ने ब-मुश्किल मुझे तीन हजार रुपये दिते और कहा कि इसी से ज्यादा नही दे सकता .

मेरी किसी ने भी मदद नही की यह बदे अफ्सोस की बात थी / अपने ही दोस्त और रिश्ते दार पीछे हट गये  / किसी तरह से एक पुराना स्लीपिन्ग बैग और एक रैक सैक का इन्ताम किया /  और कुच लोगो ने  मुझे यह सलाह दी कि योग का जर्मनी मे नडा क्रेज है इसलिये अगर आप योग सीखकर जाते है और योग जानते है यो यह आपके लिये नहुत लाभकारी होगा /

मै बचपन से अखाडे जाता था पहलवानी करता था और इसके साथ योगाभ्यास भी करता थ जो मैने आपने एक रिश्तेदार से सीखा था /

मै अकेला ही जरमनी जाने के लिये कमर कसे बैठा था / तभी मुझे एक सज्जन मिल गये जो मेरे छोटे भाई के परिचित थे / उन्होने यूरोप घूमने का कई साल पहले प्लान बनाया था लेकिन किसी कारण से नही जा पाये थे / अचानक मेरी मुलाकत उनसे हुयी मैने अपनी सारी व्यथा उनको बतायी / वह सज्जन भी घूमने जाना चाहते थे मै पढने के लिये जाना चाहता था / म्यूनिख यक साथ साथ जाने का कार्यक्रम तय हो गया /  एक से भले दो हो गये /

उन्होने अपना पास्पोर्ट अप्लायी किया . कुछ दिनो की दौड धूप के बाद उनको पास्पोर्ट मिल गया /

हम दोनो ने  म्यूनिख तक जाने का प्लान बनाया कि किस तरह से जयेन्गे /

उनके पास पैसा थ मेरे पास पैसा नही था / अन्त मे मैने उनसे कहा कि अच्छा यही होगा कि इसी कसम्कस मे एशिया के देशो को पार करके यूरोप तक पहुन्च्र्न्गे और फिर यूरोप के देशो को लान्घते हुये जरमनी पहुन्चेन्गे फिर वहा देखा जायेहा /

अच्छि बात यह हुयी कि इन सज्जन के कई जानने वाले जरमनी और यूरोप के देशो मे पहले से ही मौजूद थे / इसलिये हमारी एक चिन्ता यह दूर हुयी कि  हमारी जान पहचान नही है .

दिल्ली से वीसा की सभी औपचारिकताये पूरी करने के बाद हम लोग दिल्ली से अमृत्सर गये  और वहा से राजा सान्सी एयर्पोत्य़ से काबुल के लिये रवाना हुये /

एरियाना अफगान अयर्लाइन की इस फ्लाईट से जब लाहोरे हवाई अड्डे पहुचे तो हमे वहा बाहर उतरने की इजाजत नही दी गयी / हमरा प्लेन लाहोरे एयर्पोर्ट की बिल्डिन्म्ग के सामने खड़ा था ताकि पाकिस्तान के यात्रियो को वहा से जहाज पर क्प्बोर्ड किया जा सके / अवानक मेरी निगाह एहत्पोर्ट की बिल्डिन्ग के बगल के हिस्से मे पड़ी जहा भारतीय झन्डा के निशान वाला एक फोकर फ्रेन्डशिप जहाज खडा था . पहले तो मै चौन्का कि यह जहाज कैसे यहा आ गया ?

फिर तुरन्त मेरी समझ मे आया कि यह वही हई जैक करके लाया गया जहाज है तिसे आतन्कवादी लाहोरे ले आये थे और जिसमे एक महिला भारतीय अयर हिस्टेस मारी गयी थी /

यहा से  काबुल आ गये /  लेकिन जगह जगह टैन्क और लम्बे लम्बे सलवार कुर्ताधारी अफगान सैनिको को देखकर मै तो घबरा गया / जगह जगह टैन्क लगे हुते थे  और मिलिय़री मार्च कर रही थी /

दरासल कु हफ्ते कहले वहा सरकार बदली थी / अच्छायी यह रही कि भारत ने सबसे पहले इस सरकार को मन्यता दी थी इसलिये प्रधान मन्त्री इन्दिरा गन्धी  को वहा समान से  देखा गया था . इसीकारण हम भारतीयो के  लो उदारता दे समझ रहे थे / ःओटल अटलान्टिक  मे हम ठरे थे  जो अफघान न्यूज सर्विस के कार्यालय के सामने थी / पास मे ही काबुल नदी बहती थी और वही पर पोस्ट आफिस था /  पोस्ट आफिस जाकर वहा से मैने घरो को मस्सगे किये /

काबुल्से  से कन्धार और हैरात होते हुये इस्लाम किला बार्डर पार करके ईरान के बार्डर को पार करके मशद  होते हुये तेअहरान की तरफ बढ चले / मशद वह शहर है जहा से नादिर शाह भारत की तरफ  लूटने के इरादे से आया था /  तेहरान से  तुर्की की तरफ चक्ले  और तुर्की के इर्ज रुम  बार्डर को पार करके अन्कारा होते हुये हैदर पाशा  रेलवे स्टेशन की तरफ बढे यहा से काला सागर जहाज से पार करके इस्ताम्बूल आ गये जहा तुर्की का यह हिस्साअ यूरोप मे आता है / बुल्गारिया और यूगोस्लोवियाहगरी पार करके जर्मनी  पहुब्चे और फिर यहा से म्यूनिख शह्र / म्यूनिख मे एक परिचित थे उनको पहले सूचना देदी थी / सुबह भोर का समय था हम पूछते हुये फाली स्ट्रासे पहुचे  जहा हमारे परिचित मिल गये /

कानपुर से म्यूनिख का सफर ५० दिन मे पूरा हुआ / मै हवाइ जहाज और ऊन्ट गाड़ी और घोडा गाड़ी और गधा गाड़ी और साइकिल और तानगा और टैक्सी और गस और रेल  यानी जितने भी साधन आने जाने के हो सकते है सबका उपयोग करके यहा तक पहुन्चा था /

अब जो कुछ हुआ सो हुआ / योग की बात कर रहे थे तो अब योग के बारे मे बताता  हू /

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एक दिन मेरे एक जानकार मुझे म्यूनिख के किसी उपनगर मे जहां योग सिखाने के लिये सापताहिक कछाये लगती थी वहां ले गये / यह रविवार का दिन था / / कोई जरमन जो भारत आकर योग सीख गया था वही वहां योग की कछाये चलाता था / मेरे जानकार कई सालो से जरमनी मे रह रहे थे  उहोने मुझे सुबह योग करते हुये देखा  था / एक दिन उन्होने मुझसे उस योग केन्फ़्र मे आने के लिये निमन्त्रित किया / मै उनके साथ गया था /

जरमनी मे योग को YOGA PRAXIS  योगा प्राक्सिस  के नाम से ज्यादा जानते है /

सुबह ९ या १० के आस पास का समय था . जरमन लड़्के और लड़्किया योग क्र रहे थे / उनका इन्स्ट्रक्टर उनको समझा रहा था /

जरमन लोगो के ह्सारीरिक बनावट के मुकाबले मै बहुत दुबला पतला था / तुलनात्मक्ता मे मै दुगला ही कहा जाऊन्गा /

वे सभी शुरुआत के ही साधारण वाले आसन कर रहे थे /

मुझसे निवेदन किया गया कि मै उनको कुछ आसन बताऊ और उनको कुछ टिप्स दूं /

मैने कठीन आसन जैसे मयूरासन और मत्सयेन्द्रासन और सर्वान्गासन  और  कन्द पीडासन  और दूसरे आसन दिखाये /

मयूरासन  देखकर सब लोगो ने तालिया बजायी / बाद  मे कई लोगो ने मयूरासन करने की कोशिश की लेकिन सफल नही हुये /

मैने उनको जिस तरह की टिप्स दी थी वह इस प्रकार थी /

१- योग के आसन जो भी किये जाये वे शरीर की बनावट के हिस्सो की कसरत के साथ जुडे होने चाहिये / २- कोशिश करके योग के आसनो का चुनाव इस तरह होना जिससे  रीढ से जुडे  मान्स पेशियो और नसि तथा नाडियो और इस सबसे जुड़ने वाले लीगामेन्ट्स और टेन्डन्स की भी कसरत हो /

३- आसन अगर एक बार सामने झुकने वाले किजाते है तो इसके उलट पीछे झुक कर करने वाले  आसन करने चाहिये , यह इसलिये जरूरी है कि शरीर की माश्पेशियो का बैलेन्स बराबर बना रहे अन्यथ मान्श्पेशियो और जोदओ मे दर्द होने की सम्भावना होती है / वहां उपस्तिथि कुछ लोगो ने इसकी शिकायत की थी कि आसन करने के बाद उनको पीठ या कमर मे दर्द होने लगता है /

४-अधिकतर आसन रीढ की हड्डी के आगे और पीछे यानी सामने और पीछे की तरफ करने वाले होते है /श्रीर मे पूर्णता बनाये रखने के लिये रीढ के हड्डी के दाये और बाये और दाहिने या बाये शरीर को मोड़ने वाले आसन करने चाहिये  / इससे शरीर मे मान्श्पेशियो का बैलेन्स और रक्त सन्चार मे एक तूपता बही होती है /

५- जब आसन करते है तब शरीर की स्तिथि अधिकतर  लम्बवत अथवा वर्टिकल स्तिथि मे होती है / शरीर जब वर्टिकल स्तिथि मे होता है ब  शरीर के विसेराज सुकड़ते है और ग्रेवीटेशन के कारण लम्बे होते है / इनके आकार मे  परिवर्तन होता है /  इसलिये जब सभी आसन समाप्त हो जाये तब “शवासन” अवश्य करे / शवासन करने से शरीर के लम्बवत स्तिथि के होने से  जो असर शरीर के बिसेराअ मे पड़ता है वह शवासन करने से ठीक होता है और उनके  अन्दर की रक्त सन्चार प्रणाली अधिक सक्रिय होती है /  शवासन करने से शरीर का आकार “लम्बवत” यानी हारीजेन्टल पोजीशन मे हो जाता है और ग्रेवीटेशन के कारण शरी के विसेरा लम्बवत फैलते है / इस यरह से वरटिकल और हारीजेन्टल पोजीशन का स्मन्वय शरीर के लिये लाभ कारी सिध्ध होता है /

मै प्रतिदिन और आज भी योग करता हू  और इस वात का ध्यान रखता हू कि शरीर के सभी अन्गो का व्यायाम हो जाते /

६- प्राणायाम अथवा गहरी गहरी सान्से लेना बहुत लाभकारी है / जिन्हे सान्स की तकलीफ हो या फेफड़ो से समब्नधित रोग हो वे केवल खुली हवा मे बैठे और जितनी गहरी ताकत के अनुसार सान्स ले सकते हो करे /

७= आसन की शुरुआत तडासन से करे फिर पश्चिमोत्तानासन करे फिर चन्द्रासन करे  फिर ताडासन करे और बाद मे शवासन करे / इतने सरल आसन करने से शरीर की अधिकान्श मान्स पेशियो और रीध का व्याम तथा शरीर के विसेर का व्यायाम हो जाता है /  इसमे कुल १० मिनट लगये है /

सासन अपने शरीर की क्षमया के अनुसार करना चाहिये /

मेरी इस तरह की टिप्स से जरमन लोग प्रभावित हुये /  जब उनको पता चला कि मै एक डाक्टर हू और उनको बता रहा हू तो वे सभी बहुत प्रभावित हुये /

मैने उनको आयुर्वेद के बारे मे बताया / मै अपने साथ कुछ चूर्ण यथा लवण भासकर और हिग्वास्टक चूर्ण का स्वाद चखाया / महायोग्राज गूगल  और दूसरी आयुर्वेदिक दवओ के बारे मे बताया / उनमे से किसी को भी नही पता था कि आयुर्वेद क्या है और इसकी द्वाये देखने मे कैसी होती है और उनका स्वाद कैसा है ?

जहां मै होम्योपैथ्य़ी  पढता था यह जगह harlaching  मे  ISSAR RIVER  के किनारे बना अस्पताल KRANKENHAUSE FUER NATURHEILWEISSEN [ [HOSPITAL FOR NATURE CURE METHODS] था /

मुझे डा० अब्बी  इन्स्ट्रक्ट करते थे / इस अस्पताल मे होम्योपैथी के साथ साथ वे सभी चिकित्सा विधिया इलाज मे काम लायी जाती थी  तो बिना केमिकल द्वाओ की होती थी / निदान और रोगो की जान्च के लिये  उस समय प्राप्त सभी  निदान की विधियो को अप्नाया गया था / जैसे उस समय एक्स रे जिसे जरमन मे रोयेम्न्ट्जेन कहते है , ई०सी०जी० और रक्त की जान्चे आदि आदि जो भी समभव था /

डा० अब्बी मुझे बताते रहते थे कि  जिन मरीजो को मैने उनके साथ जाकर चेक किया है वे किस तरह की बीमारी से सफर कर रहे है और उनके क्या निदान निकले / वे यह सब एक्स रे ईसीजी और खून की जान्च करके देखते थे /

मुझे ई०सी०जी० का ग्यान और उसका इन्टर प्रिटेशन डा० अब्बी एम०डी० ने बताया था / मुझसे वही के डा० क्लाउस क्रिस्टॊफ शीम्मेल एम०डी० जो उस समय acting CHEFARZT  थे क्योन्कि  शेफार्त्स  डा० वाल्टर त्सीमर्मान एम०डी० उन दिनो छुट्टी पर थे / डा० षीमेल ने मुझसे कहा कि खूब मेहनत करके पढिये ताकि लोगो को यह न लगे कि हमने आप् की अच्छी पढायी और दीक्षा नही मुहैया करायी है .ऐसा सन्देश नही जाना चाहिये /

३२ साल पहले मैने ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की कल्पना करके आज इसी सिस्टम को एक पूरा आयुर्वेद का निदान्ग्यान करने का साधन बना दिया है /  जब मै २००९ मे डा० प्रत्यून्स्टेक डायरेक्टर , सेन्ट जान अस्पताल, बोषुम युनीवर्सिटी, बोशुम, जरमनी से दिल्ली मे स्वास्थय मन्त्रालय मे मिला तो मैने यह सब उनको बताया था और मैने यह भी कहा कि यह सब तो आप्के परशिक्षण की देन है जिसका यह रिजलय़ मिला /

निसन्देह मै जरमन सरकार का हमेशा आभारी रहून्गा जिन्होने मुझे मुफ्त शिक्षा दी / मेरा वहा होम्योपैथी पढने मे एक भी पैसा नही खर्चा हुआ उलटे मुझे वहा से १० मार्क प्रतिदिन के हिसाब से मेनह्न्ताना मिलता था /

आज जब मै इतने वर्षो के बाद उन दिनो को याद करया हू तो मै सोचता हू कि अगर मै जरमनी जाकर शिक्षा न ग्रहण करता तो शायद ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन जैसी तकनी का जन्म भी होना नामुमकिन था /

मै जरमन सरकार और जरमन लोगो का आभार प्रकट करता हू /