आयुर्वेद

YOGA PRACTICE EFFECTS AND HEALTH CONDITION CAN BE MEASURED BY E.T.G. AYURVEDASCAN AND OTHER MACHINES TECHNOLOGIES


After the invention of AYURVEDA only existing Diagnosis and monitoring of whole body scanning systems , now presently in EIGHT sections, it is possible now to measure and monitor the current effects of YOGA exercises impacts falling on the body and its systems, working during the exercises of YOGA done at anywhere.

In our research center we are using the latest and highest equipments for examining whole body in AYURVEDA views. We are practicing the tech

Email001 004

[ matter to be loaded soon]

योग और योग दिवस पर ; २१ जून २०१५


iso001 001

सन १९७३ मे मै होम्योपैथी के अध्ध्य्यन के लिये जरमनी देश के म्यूनिख शहर मे मी के महीने मे पहुन्चा था / मै अपने साथ होम्योपैथी की मटेरिया मेडिका और अन्य जरूरी किताबे लेकर गया था /
मेरे पास पैसा नही था लेकिन विदेशो मे जाकर शिक्षा प्राप्त करने का हौसला जरूर था / सन १९७२ मे बेचलर आफ मेडिसिन अन्ड सर्जरी का  कोर्स पूरा करने के बाद मेरे मित्र ने कहा कि जरमनी जाकर होम्योपैथी पढना चाहिये और / कुछ छात्रो का सन्गम बना और एद्मीशन लेने के लिये मेरे ऊपर जिम्मेदारी डाल दी गयी /

मैने कई देशो से समपर्क किया / इन्ग्लन्ड ने एद्मीशन देने से मना कर दिया और कहा कि हमारे यहा केवक एम०डि० या इसके समक्छ डिग्री वाले ही प्रवेश पा सकये है /

कुछ देशो मे भाषा की समस्या थी /

अन्त मे जरमनी के म्यूनिख शहर मे होम्योपैय्ही जहा पढाई जाती है वहा एड्मीशन मिल गया /  जरमन भाश्गा मे पढाई के लिये बताया ग्या / इसलिये कानपुर मे जर्मन भाषा पढना शुरू किया / मैक्स मूलर भवन दिल्ली से एक वर्ष मे छह माह के दो कोर्स किये /  अब मै जरमन भाषा बहुत फर्राटे से बोलने लगा /

मेरे पास धन नही था लेकिन हौसला बहुत था / इसलिये फैसला किया कि दिल्ली से अम्रत्सर होते हुय्ये काबुल चला जाय और फिर वहा से  अफगानिस्यान  और ईरान और टर्की को पार करते हुये यूरोप इस्ताम्बूल होते हुये पहुन्चा जाय /

मैने अपनी जाने की योजना अपने साथ जाने वाले दोस्भातो और साथियो को बतायी / लेकिन एक एक करके सभी दोस्त जो पहले साथ जाकर पढाई करने का वादा कर रहे थे एक एक करके सब पीछे हट गये . अब मै अकेला रह गया /

मैन्र पास्पोर्ट का आवेदन किया / मुझे कुछ महीनो मे पास्पोर्ट मिल गया . मैने फैसला किया कि कोई जाये या न जाये मै अवश्य जाउन्गा / पिआ जी ने ब-मुश्किल मुझे तीन हजार रुपये दिते और कहा कि इसी से ज्यादा नही दे सकता .

मेरी किसी ने भी मदद नही की यह बदे अफ्सोस की बात थी / अपने ही दोस्त और रिश्ते दार पीछे हट गये  / किसी तरह से एक पुराना स्लीपिन्ग बैग और एक रैक सैक का इन्ताम किया /  और कुच लोगो ने  मुझे यह सलाह दी कि योग का जर्मनी मे नडा क्रेज है इसलिये अगर आप योग सीखकर जाते है और योग जानते है यो यह आपके लिये नहुत लाभकारी होगा /

मै बचपन से अखाडे जाता था पहलवानी करता था और इसके साथ योगाभ्यास भी करता थ जो मैने आपने एक रिश्तेदार से सीखा था /

मै अकेला ही जरमनी जाने के लिये कमर कसे बैठा था / तभी मुझे एक सज्जन मिल गये जो मेरे छोटे भाई के परिचित थे / उन्होने यूरोप घूमने का कई साल पहले प्लान बनाया था लेकिन किसी कारण से नही जा पाये थे / अचानक मेरी मुलाकत उनसे हुयी मैने अपनी सारी व्यथा उनको बतायी / वह सज्जन भी घूमने जाना चाहते थे मै पढने के लिये जाना चाहता था / म्यूनिख यक साथ साथ जाने का कार्यक्रम तय हो गया /  एक से भले दो हो गये /

उन्होने अपना पास्पोर्ट अप्लायी किया . कुछ दिनो की दौड धूप के बाद उनको पास्पोर्ट मिल गया /

हम दोनो ने  म्यूनिख तक जाने का प्लान बनाया कि किस तरह से जयेन्गे /

उनके पास पैसा थ मेरे पास पैसा नही था / अन्त मे मैने उनसे कहा कि अच्छा यही होगा कि इसी कसम्कस मे एशिया के देशो को पार करके यूरोप तक पहुन्च्र्न्गे और फिर यूरोप के देशो को लान्घते हुये जरमनी पहुन्चेन्गे फिर वहा देखा जायेहा /

अच्छि बात यह हुयी कि इन सज्जन के कई जानने वाले जरमनी और यूरोप के देशो मे पहले से ही मौजूद थे / इसलिये हमारी एक चिन्ता यह दूर हुयी कि  हमारी जान पहचान नही है .

दिल्ली से वीसा की सभी औपचारिकताये पूरी करने के बाद हम लोग दिल्ली से अमृत्सर गये  और वहा से राजा सान्सी एयर्पोत्य़ से काबुल के लिये रवाना हुये /

एरियाना अफगान अयर्लाइन की इस फ्लाईट से जब लाहोरे हवाई अड्डे पहुचे तो हमे वहा बाहर उतरने की इजाजत नही दी गयी / हमरा प्लेन लाहोरे एयर्पोर्ट की बिल्डिन्म्ग के सामने खड़ा था ताकि पाकिस्तान के यात्रियो को वहा से जहाज पर क्प्बोर्ड किया जा सके / अवानक मेरी निगाह एहत्पोर्ट की बिल्डिन्ग के बगल के हिस्से मे पड़ी जहा भारतीय झन्डा के निशान वाला एक फोकर फ्रेन्डशिप जहाज खडा था . पहले तो मै चौन्का कि यह जहाज कैसे यहा आ गया ?

फिर तुरन्त मेरी समझ मे आया कि यह वही हई जैक करके लाया गया जहाज है तिसे आतन्कवादी लाहोरे ले आये थे और जिसमे एक महिला भारतीय अयर हिस्टेस मारी गयी थी /

यहा से  काबुल आ गये /  लेकिन जगह जगह टैन्क और लम्बे लम्बे सलवार कुर्ताधारी अफगान सैनिको को देखकर मै तो घबरा गया / जगह जगह टैन्क लगे हुते थे  और मिलिय़री मार्च कर रही थी /

दरासल कु हफ्ते कहले वहा सरकार बदली थी / अच्छायी यह रही कि भारत ने सबसे पहले इस सरकार को मन्यता दी थी इसलिये प्रधान मन्त्री इन्दिरा गन्धी  को वहा समान से  देखा गया था . इसीकारण हम भारतीयो के  लो उदारता दे समझ रहे थे / ःओटल अटलान्टिक  मे हम ठरे थे  जो अफघान न्यूज सर्विस के कार्यालय के सामने थी / पास मे ही काबुल नदी बहती थी और वही पर पोस्ट आफिस था /  पोस्ट आफिस जाकर वहा से मैने घरो को मस्सगे किये /

काबुल्से  से कन्धार और हैरात होते हुये इस्लाम किला बार्डर पार करके ईरान के बार्डर को पार करके मशद  होते हुये तेअहरान की तरफ बढ चले / मशद वह शहर है जहा से नादिर शाह भारत की तरफ  लूटने के इरादे से आया था /  तेहरान से  तुर्की की तरफ चक्ले  और तुर्की के इर्ज रुम  बार्डर को पार करके अन्कारा होते हुये हैदर पाशा  रेलवे स्टेशन की तरफ बढे यहा से काला सागर जहाज से पार करके इस्ताम्बूल आ गये जहा तुर्की का यह हिस्साअ यूरोप मे आता है / बुल्गारिया और यूगोस्लोवियाहगरी पार करके जर्मनी  पहुब्चे और फिर यहा से म्यूनिख शह्र / म्यूनिख मे एक परिचित थे उनको पहले सूचना देदी थी / सुबह भोर का समय था हम पूछते हुये फाली स्ट्रासे पहुचे  जहा हमारे परिचित मिल गये /

कानपुर से म्यूनिख का सफर ५० दिन मे पूरा हुआ / मै हवाइ जहाज और ऊन्ट गाड़ी और घोडा गाड़ी और गधा गाड़ी और साइकिल और तानगा और टैक्सी और गस और रेल  यानी जितने भी साधन आने जाने के हो सकते है सबका उपयोग करके यहा तक पहुन्चा था /

अब जो कुछ हुआ सो हुआ / योग की बात कर रहे थे तो अब योग के बारे मे बताता  हू /

surya namaskaar001 012

एक दिन मेरे एक जानकार मुझे म्यूनिख के किसी उपनगर मे जहां योग सिखाने के लिये सापताहिक कछाये लगती थी वहां ले गये / यह रविवार का दिन था / / कोई जरमन जो भारत आकर योग सीख गया था वही वहां योग की कछाये चलाता था / मेरे जानकार कई सालो से जरमनी मे रह रहे थे  उहोने मुझे सुबह योग करते हुये देखा  था / एक दिन उन्होने मुझसे उस योग केन्फ़्र मे आने के लिये निमन्त्रित किया / मै उनके साथ गया था /

जरमनी मे योग को YOGA PRAXIS  योगा प्राक्सिस  के नाम से ज्यादा जानते है /

सुबह ९ या १० के आस पास का समय था . जरमन लड़्के और लड़्किया योग क्र रहे थे / उनका इन्स्ट्रक्टर उनको समझा रहा था /

जरमन लोगो के ह्सारीरिक बनावट के मुकाबले मै बहुत दुबला पतला था / तुलनात्मक्ता मे मै दुगला ही कहा जाऊन्गा /

वे सभी शुरुआत के ही साधारण वाले आसन कर रहे थे /

मुझसे निवेदन किया गया कि मै उनको कुछ आसन बताऊ और उनको कुछ टिप्स दूं /

मैने कठीन आसन जैसे मयूरासन और मत्सयेन्द्रासन और सर्वान्गासन  और  कन्द पीडासन  और दूसरे आसन दिखाये /

मयूरासन  देखकर सब लोगो ने तालिया बजायी / बाद  मे कई लोगो ने मयूरासन करने की कोशिश की लेकिन सफल नही हुये /

मैने उनको जिस तरह की टिप्स दी थी वह इस प्रकार थी /

१- योग के आसन जो भी किये जाये वे शरीर की बनावट के हिस्सो की कसरत के साथ जुडे होने चाहिये / २- कोशिश करके योग के आसनो का चुनाव इस तरह होना जिससे  रीढ से जुडे  मान्स पेशियो और नसि तथा नाडियो और इस सबसे जुड़ने वाले लीगामेन्ट्स और टेन्डन्स की भी कसरत हो /

३- आसन अगर एक बार सामने झुकने वाले किजाते है तो इसके उलट पीछे झुक कर करने वाले  आसन करने चाहिये , यह इसलिये जरूरी है कि शरीर की माश्पेशियो का बैलेन्स बराबर बना रहे अन्यथ मान्श्पेशियो और जोदओ मे दर्द होने की सम्भावना होती है / वहां उपस्तिथि कुछ लोगो ने इसकी शिकायत की थी कि आसन करने के बाद उनको पीठ या कमर मे दर्द होने लगता है /

४-अधिकतर आसन रीढ की हड्डी के आगे और पीछे यानी सामने और पीछे की तरफ करने वाले होते है /श्रीर मे पूर्णता बनाये रखने के लिये रीढ के हड्डी के दाये और बाये और दाहिने या बाये शरीर को मोड़ने वाले आसन करने चाहिये  / इससे शरीर मे मान्श्पेशियो का बैलेन्स और रक्त सन्चार मे एक तूपता बही होती है /

५- जब आसन करते है तब शरीर की स्तिथि अधिकतर  लम्बवत अथवा वर्टिकल स्तिथि मे होती है / शरीर जब वर्टिकल स्तिथि मे होता है ब  शरीर के विसेराज सुकड़ते है और ग्रेवीटेशन के कारण लम्बे होते है / इनके आकार मे  परिवर्तन होता है /  इसलिये जब सभी आसन समाप्त हो जाये तब “शवासन” अवश्य करे / शवासन करने से शरीर के लम्बवत स्तिथि के होने से  जो असर शरीर के बिसेराअ मे पड़ता है वह शवासन करने से ठीक होता है और उनके  अन्दर की रक्त सन्चार प्रणाली अधिक सक्रिय होती है /  शवासन करने से शरीर का आकार “लम्बवत” यानी हारीजेन्टल पोजीशन मे हो जाता है और ग्रेवीटेशन के कारण शरी के विसेरा लम्बवत फैलते है / इस यरह से वरटिकल और हारीजेन्टल पोजीशन का स्मन्वय शरीर के लिये लाभ कारी सिध्ध होता है /

मै प्रतिदिन और आज भी योग करता हू  और इस वात का ध्यान रखता हू कि शरीर के सभी अन्गो का व्यायाम हो जाते /

६- प्राणायाम अथवा गहरी गहरी सान्से लेना बहुत लाभकारी है / जिन्हे सान्स की तकलीफ हो या फेफड़ो से समब्नधित रोग हो वे केवल खुली हवा मे बैठे और जितनी गहरी ताकत के अनुसार सान्स ले सकते हो करे /

७= आसन की शुरुआत तडासन से करे फिर पश्चिमोत्तानासन करे फिर चन्द्रासन करे  फिर ताडासन करे और बाद मे शवासन करे / इतने सरल आसन करने से शरीर की अधिकान्श मान्स पेशियो और रीध का व्याम तथा शरीर के विसेर का व्यायाम हो जाता है /  इसमे कुल १० मिनट लगये है /

सासन अपने शरीर की क्षमया के अनुसार करना चाहिये /

मेरी इस तरह की टिप्स से जरमन लोग प्रभावित हुये /  जब उनको पता चला कि मै एक डाक्टर हू और उनको बता रहा हू तो वे सभी बहुत प्रभावित हुये /

मैने उनको आयुर्वेद के बारे मे बताया / मै अपने साथ कुछ चूर्ण यथा लवण भासकर और हिग्वास्टक चूर्ण का स्वाद चखाया / महायोग्राज गूगल  और दूसरी आयुर्वेदिक दवओ के बारे मे बताया / उनमे से किसी को भी नही पता था कि आयुर्वेद क्या है और इसकी द्वाये देखने मे कैसी होती है और उनका स्वाद कैसा है ?

जहां मै होम्योपैथ्य़ी  पढता था यह जगह harlaching  मे  ISSAR RIVER  के किनारे बना अस्पताल KRANKENHAUSE FUER NATURHEILWEISSEN [ [HOSPITAL FOR NATURE CURE METHODS] था /

मुझे डा० अब्बी  इन्स्ट्रक्ट करते थे / इस अस्पताल मे होम्योपैथी के साथ साथ वे सभी चिकित्सा विधिया इलाज मे काम लायी जाती थी  तो बिना केमिकल द्वाओ की होती थी / निदान और रोगो की जान्च के लिये  उस समय प्राप्त सभी  निदान की विधियो को अप्नाया गया था / जैसे उस समय एक्स रे जिसे जरमन मे रोयेम्न्ट्जेन कहते है , ई०सी०जी० और रक्त की जान्चे आदि आदि जो भी समभव था /

डा० अब्बी मुझे बताते रहते थे कि  जिन मरीजो को मैने उनके साथ जाकर चेक किया है वे किस तरह की बीमारी से सफर कर रहे है और उनके क्या निदान निकले / वे यह सब एक्स रे ईसीजी और खून की जान्च करके देखते थे /

मुझे ई०सी०जी० का ग्यान और उसका इन्टर प्रिटेशन डा० अब्बी एम०डी० ने बताया था / मुझसे वही के डा० क्लाउस क्रिस्टॊफ शीम्मेल एम०डी० जो उस समय acting CHEFARZT  थे क्योन्कि  शेफार्त्स  डा० वाल्टर त्सीमर्मान एम०डी० उन दिनो छुट्टी पर थे / डा० षीमेल ने मुझसे कहा कि खूब मेहनत करके पढिये ताकि लोगो को यह न लगे कि हमने आप् की अच्छी पढायी और दीक्षा नही मुहैया करायी है .ऐसा सन्देश नही जाना चाहिये /

३२ साल पहले मैने ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की कल्पना करके आज इसी सिस्टम को एक पूरा आयुर्वेद का निदान्ग्यान करने का साधन बना दिया है /  जब मै २००९ मे डा० प्रत्यून्स्टेक डायरेक्टर , सेन्ट जान अस्पताल, बोषुम युनीवर्सिटी, बोशुम, जरमनी से दिल्ली मे स्वास्थय मन्त्रालय मे मिला तो मैने यह सब उनको बताया था और मैने यह भी कहा कि यह सब तो आप्के परशिक्षण की देन है जिसका यह रिजलय़ मिला /

निसन्देह मै जरमन सरकार का हमेशा आभारी रहून्गा जिन्होने मुझे मुफ्त शिक्षा दी / मेरा वहा होम्योपैथी पढने मे एक भी पैसा नही खर्चा हुआ उलटे मुझे वहा से १० मार्क प्रतिदिन के हिसाब से मेनह्न्ताना मिलता था /

आज जब मै इतने वर्षो के बाद उन दिनो को याद करया हू तो मै सोचता हू कि अगर मै जरमनी जाकर शिक्षा न ग्रहण करता तो शायद ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन जैसी तकनी का जन्म भी होना नामुमकिन था /

मै जरमन सरकार और जरमन लोगो का आभार प्रकट करता हू /

किडनी या गुर्दा के फेल होने अथवा क्रियेटिनिन के बढने के कारण क्या हो सकते है ????? WHAT COULD BE THE REASONS OF KIDNEY FAILURE OR INCREASING HIGH LEVEL CREATININE ?????


iso001

किडनी या गुर्दा के फेल होने की बीमारी अथवा क्रियेटिनिन स्तर के अधिक अधिक बढने के बारे मे और इस तरह के रोगियो के इलाज करने मे कुछ ऐसे तथय सामने आये है जिनके बारे मे चिकित्सक समुदाय को विचार करना चाहिये /

मै पहले कुछ रोगियो के रोग इतिहास पर बयान करना चाहून्गा /

रोगी नम्बर एक – १ – महिला आयु ५८ साल ; इस महिला का गुर्दा फेल होने की जानकारी इसके रक्त के टेस्ट करने के बाद पता चला था / इसको क्रियेटिनीन लेवल का पता चला जब इसे वमन यानी VOMITTING और NAUSEA जी मिचलाने की शिकायत हुयी / जब यह किसी दवा से नही ठीक हुयी तो चिकित्सक ने इसकी रक्त की जान्च करवायी तब जाकर पता चला

कि मतीज का क्रियेटिनीन लेवल सामान्य से अधिक हो गया है / सामान्य क्रियेटिनीन स्तर रक्त मे .8 से लेकर1.4 ml/ dl होता है / कई लैबोरेटरी के सामान्य स्तर मे कुछ फर्क भी होता है ऐसा देखने मे आया है /
इस महिला का क्रियेटिनीन लेवल 3.9 mg/dl निकला जिससे पता चला कि इसकी किडनी खराब हो रही है /
मेरे पास जब यह महिला अपनी शिकायत लेकर आयी तो मैने इसकी बीमारी की तह मे जाने के लिये पुरा रोग इस्य्हास समझने की कोशिश की /

महिला ने बताया कि वह दिल्ली मे अपने बच्चो के पास रह रही थी / एक दिन उसको बुखार आया . यह वायरस बुखार था जैसा कि डाक्टरो ने बताया जब वह इलाज के लिये किसी नजदीक के डाकटर के पास इलाज के लिये गयी / डाक्टर ने उसे कुछ एन्टीबायोटिक दवाये के साथ साथ बदन दर्द दूर क्रने की दवाये दी / तीन दिन के उपचार से वह महिला ठीक हुयी / दो यीन दिन के बास इस महिला को फिर बुखार आ गया और बह दुबारा उसी चिकित्सक के पास दवा के लिये गयी /

डाक्टर ने फिर दवाये दी और बुखार फिर उतरा लेकिन एक दो दिन बाद फिर आ अगया / यह सिल सिला कुछ दिन यक चला / बाद मे लगभग दो हफ्ते के बाद बुखार बराबर बना रहने लगा और किसी भी तरह की एन्टी बायोटिक और अन्य दवाओ के उअप्योग से भी नही कम हुआ /

महिला लगभग छह माह तक इसी आसरे मे इलाज कराती रही कि एक न एक दिन यह बुखार ठीक हो जायेगा जैसा कि उअस्क इलाज करने वाला डाकटर समझा रहा था /

पान्च छह महीने बीतने के बाद जब बुखार नही उअतरा तो वह लखनऊ एतिथि अपने रिश्तेदार के पास आयी / लकहनू मे किसी डाक्टर को प्रामर्श किया / कई तरह के टेस्ट हुये तब जाकर पता चला कि महिला का क्रियेटिनीन लेवल बढा हुआ है /

रोगी नमबर दो – २ . पुरुष मरीज उमर ६२ साल ; मरीज को कई साल पहले डायबिटीज हुयी / आगरा के किसी डाक्टर से इलाज कराते रहे / नही ठीक होने पर कानपुर के की डाक्टरो को दिखाया / डायबिटीज कुछ नियन्त्रण मे रही लेकिन रोगी का बल्ड प्रेशर अधिक होने लगा / डायबिटीज के साथ साथ अब बल्ड प्रेशर का भी इलाज शुरु हो गया /

बल्ड प्रेशर की दवा खाने के बाद भी ब्ल्ड प्रेशर नही कम हुआ और यह बराबर बढता रहा और कम होने का नाम नही लेता रहा /

डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की द्वाये साथ साथ चलती रही / लम्बे समय तक दवाये खाने के बाद जब कुछ भी नही आराम मिली तो मरीज अपने एक दोस्त के कहने पर किसी दूसरे शहर के डाक्टर को दिकुआया और उससे परामर्श लिया /

इस चिकित्सक ने उसकी रक्त की जान्च करायी जिससे पता चला कि उअसका क्रियेटिनीन लेवल 6.2 mg.dl हो गया है / डाक्टर ने कहा कि अब आप डायलिसिस या गुर्दा प्रत्यारोपड़ की तैयारी करिये / मरीज ने मुझसे समपर्क किया . मैने भी अपने हाथ खडे पर दिये और उससे यही कहा कि आप्का डाक्य़र जो कह रहा है वही करिये /

३-  मेरे पास कुछ साल पहले एक १४ साल का लडका  जिसे गुर्दा फेल होने की शिकायत हो गयी थी इलाज के लिये आया / मैने उससे यह जानकारी लेने का प्रयास किया कि इतनी छोटी उमर के लडके के कैसे गुर्दा फेल हुये ??

 

उसके पिता ने बताया कि कुछ दिन पहले यह लद़्का क्रिकेट खेलने कानपुर की किसी ग्राउन्ड मे गया था / उस समय मई का महीना था और गर्मी बहुत पड़ रही थी . दिन भर क्रिकेट खेल्कने के बाद वह घर आया और उसके कुच देर बाद पेट मे दर्द होने लगा /

घर के लोगो ने इसे पेट दर्द की मामुली शिकायत समझा  और पास के डाक्टर से दवा लेक्र वास घर आ गये / रात मे इस लदके के  फिर तेज दर्द हुआ और सारी रात होता रहा /  सुनह फिर डाक्टर के पास गये / उसने कुछ ज्काऩे करायी  / जिनसे पता चला कि इसका क्रियेटिनाइन लेवल हाई हो गया है / धीरे धीरे यह बढता चला गया और ५०५ मिलीग्राम से अधिक होने लगा / लदके को लेक्र उसके पिता लखनऊ पी झी अस्पताल ले गये / वहा डायलीसिस की सलह दी गयी /

डायलीसिस के श्रू होने के पहले इस लदके के पैरेन्ट्स मेरे पास लेकर आये /  मैने यह जानए की कोशिश्स की कि आखिर इतनी छोटी उमर के लद्के को क्यो ऐसी तकलीफ पैदा हुयी ???

मुझे बताय गया कि लदके को कुछ दिन पहले बुखार आया था और उसका अन्ग्रेजी इलाज किया गया था /  इसके आलावा कोइ खस बात नही हुयी /

मेरी समझ मे कोई कारण खास तरह का तो नही समझ मे आया / लडके से बात करने पर मुझे जिस तरह का कारण समझ मे आया वह कुछ ऐसा था /

बुखार डाक्टर द्वारा टायफायद का बताया गया / घर वलो ने खन पान का कोई बिशेश ध्यान नही रखा / लद़्अका भि लापत्वाह रहा / दो चार दिन के बाद क्रिकेट खेलना था / गर्मी के दिन थे / क्रिकेट खेलते समय भुखा रह्जा और खाना तथा पानी भी नही मिला / मई माह की तप

ती दोपहर मे वह क्रिकेट खेलता रहा / भूख प्यास के लिये उसने कोई इन्तजाम नही किया /

surya namaskaar001 013

मुझे लगता है कि गर्मी और इससे पहले उसको हुये बुखार के कारण तथा पानी न मिलने के कारण और खान पान नही होने के कारण ही गुर्दे की तकलीफ हुयी /

१४ साल जे किशोर बालक के अन्दर स्तैमिना होने का गलत नतीजा समझने का इसे दुष्परिणाम कह सकते है और इसी कारण से उसके गुर्दे फेल हुये .  ऐसा मेरी समझ मे आता है /

 

ऊपर कुछ उदाहरण दिये गये है  कि क्या कारण होते है जिनसे गुर्दा फेल होये है /

तमाम गुर्दा फेल गोने के रोगियो मे एक कारण यह उभर कर आया है कि अधिक एन्टी-बायोटिक्स और दर्द दूर करने वाली दवाये  का अधिक उपयोग गुर्दा रोग को पैदा होने की दावत देता है / मेरी बात की पुष्टि फीजियोलाजी की पुस्तक मे दिये गये उध्धरण से भी तस्दीक होती है /

गुर्दा फेल होने के कारणो को होम्योस्टैस्टिकली देखा जाना चाहिये /  मेरा माना है कि  गुर्दा फेल होने के कारणो मे मूल रूप से तीन बाते शीर्ष पर  होना चाहिये / १-

 

 

 

 

[matter to be loaded soon]

EPILEPSY AND SEIZERS AND MIRGI / TOTAL CURE BY AYURVEDA .AYUSH DIAGNOSIS AND TREATMENT


angrejiepilepsiu001

With the invention of ETG AyurvedaScan technology, the Ayurveda Only existeing and practicing Diagnosis technique, treatment of EPILEPSY / SEIXERS / MIRGI is now 100% curative by using Ayurveda Classical remedies .

In our research center we only examining and diagnosing patient in Ayurvedic view and suggest classical AYURVEDA /AYUSH remedies according to the rules as mentioned in Ayurveda.

We prescribe remedies only and do not supply any kind of remedies from our side. All medications are to be purchased from open market  anywhere .

Electro Tridosha Graphy  AyurvedaScan and its supplementary examinations provides data  and on the basis of the data remedies are prescribed.

Most of the Recently attacked EPILEPSY patient got complete cure within  120 days. Patient are  need not to take remedies for whole life. Some very chronic cases  needs to take few months Ayurveda and Ayush remedies . Followup is needed for review py condition time to time to change the prescription as and when requirer.

We every day examine a very few patient  and in limited numbers. Therefore an appointment is necessary when visit to our clinic.

………..
FOR AYURVEDIC AND AYUSH DIAGNOSIS AND TREATMENT OF
YOUR PHYSICAL AND MENTAL AILMENTS AND PROBLEM’S SOLUTIONS

KINDLY CONSULT ON THE FOLLOWING PHONE NUMBERS

LEAVE YOUR NAME AND PHONE NUMBER WITH MASSAGE

0 80 90 32 77 28
FOR VITILIGO / LEUCODERMA
;IN HINDI]
0 51 22 36 77 73
FOR EPILEPSY AND SEIZERS
; IN HINDI]
0 93 36 23 89 94
[IN HINDI]
FOR ALL INCURABLE DISEASE CONDITIONS
मिर्गी या EPILEPSY या SEIZER रोग के इलाज के लिये
आयुर्वेद आयुष की जान्च
ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन
और आयुर्वेद की अन्य सुपर स्पेशियलिटी के परीक्षण आधारित आयुर्वेद इलाज की जानकारी के लिये फोन नम्बर
05122367773
पर सम्पर्क करे और आप जो भी पूछना चाहते है वह सदेश सुनने के बाद आखिर मे दिये गये सुझाव के अनुसार रिकार्ड कराये

सफेद दाग य़ा LEUCODERMA
रोग के इलाज के लिये
आयुर्वेद आयुष की जान्च
ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन
और आयुर्वेद की अन्य सुपर स्पेशियलिटी परीक्षण आधारित आयुर्वेद इलाज की जानकारी के लिये
फोन नम्बर
08090327728
पर सम्पर्क करे और आप जो भी पूछना चाहते है वह सदेश सुनने के बाद आखिर मे दिये गये सुझाव के अनुसार रिकार्ड कराये

Contact;
Dr. D.B.Bajpai
KANAK AYURVEA RESEARCH CENTER
AN ISO 9001 – 2008 certified research center
67 – 70, BHUSATOLI ROAD, BARTAN BAZAR,
KANPUR UTTAR PRADESH
WEB SITE ; ayurvedaintro.wordpress.com
EMAIL ; drdbbajpai@gmail.com
ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन फीस की जानकारी के लिये हमारा डाट फोन नम्बर 0512 2367773 पर काल करे / कम्प्य़ूटर रिकार्डेड सन्देश जैसे ही सुनना शुरू करे उसी समय अपने मोबाइल या फोन से * [स्टार] बटब दबाकर फौरन 1 नम्बर बटन दबायें / आपको ई०टी०जी आयुर्वेदास्कैन और इसके अन्य परीक्षणो की फीस के बारे मे जानकारी सन्देश के द्वारा मिल जायेगी

FOR AYURVEDIC AND AYUSH DIAGNOSIS AND TREATMENT OF
YOUR PHYSICAL AND MENTAL AILMENTS AND PROBLEM’S SOLUTIONS

KINDLY CONSULT ON THE FOLLOWING PHONE NUMBERS

LEAVE YOUR NAME AND PHONE NUMBER WITH MASSAGE

0 80 90 32 77 28
FOR VITILIGO / LEUCODERMA
;IN HINDI]
0 51 22 36 77 73
FOR EPILEPSY AND SEIZERS
; IN HINDI]
0 93 36 23 89 94
[IN HINDI]
FOR ALL INCURABLE DISEASE CONDITIONS
मिर्गी या EPILEPSY या SEIZER रोग के इलाज के लिये
आयुर्वेद आयुष की जान्च
ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन
और आयुर्वेद की अन्य सुपर स्पेशियलिटी के परीक्षण आधारित आयुर्वेद इलाज की जानकारी के लिये फोन नम्बर
05122367773
पर सम्पर्क करे और आप जो भी पूछना चाहते है वह सदेश सुनने के बाद आखिर मे दिये गये सुझाव के अनुसार रिकार्ड कराये

पर सम्पर्क करे और आप जो भी पूछना चाहते है वह सदेश सुनने के बाद आखिर मे दिये गये सुझाव के अनुसार रिकार्ड कराये

Contact;
Dr. D.B.Bajpai
KANAK AYURVEA RESEARCH CENTER
AN ISO 9001 – 2008 certified research center
67 – 70, BHUSATOLI ROAD, BARTAN BAZAR,
KANPUR UTTAR PRADESH
WEB SITE ; ayurvedaintro.wordpress.com
EMAIL ; drdbbajpai@gmail.com
ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन फीस की जानकारी के लिये हमारा डाट फोन नम्बर 0512 2367773 पर काल करे / कम्प्य़ूटर रिकार्डेड सन्देश जैसे ही सुनना शुरू करे उसी समय अपने मोबाइल या फोन से * [स्टार] बटब दबाकर फौरन 1 नम्बर बटन दबायें / आपको ई०टी०जी आयुर्वेदास्कैन और इसके अन्य परीक्षणो की फीस के बारे मे जानकारी सन्देश के द्वारा मिल जायेगी /

बीमारियो के  इलाज के ठीक होने के समय के बारे मे जाना चाहते है तो ०५१२२३६७७७३ पर फोन करके जैसे ही मैसेज शुरु हो उसके तुरन्त बाद अपने मोनाइल फोन से स्टार  * बटन दबाकर नम्बर 2 बटन दबाये

 

आपरेशन कराने जा रहे है  या आपके डाक्टर ने आप्को आपरेशन बताया हओ तो सही जानकारी के लिये 05122367773  नमबर मिलाकर जैसे ही  मैसेज सुनना शुरू करे तुरन्त अपने मोबाइल से स्टार * बटन दबाकर नमबर 3 बटन दबादे  तो इससे आपको इलाज के बारे मे जानकारी हो जायेगी  / 

/

“yoga” ;in view of scientific evaluation “योग ” विग्यान की वैग्यानिक विवेचना


Yoga , the oldest Induvaslley science of personality development,  was seemsan Thousands and hundreds years of the practice results of human beings and our ancestors.

It can be well presumed chronologically, if we see on the past and the era when written alphabats were not in existence and only knowledge was shifting to the further generation on bases of the meory and memorising the events to generation to generation .

Knowledge was not on the papaer bacause at that time paper was not invented and so gettign the knowledge and developing the mental skills and to explore the hidden aspects of nature , dependency was on only on the faculties and abiulity of minds and thoughts depyjes.

For these exercises, some disciplined charecteristics were framed and thus slowly and gradually TOGA came in existence.

In my opinion this is not the work of one day, It is got after a continuous practice and ftaming the rules of eight parts of the YOGA which was for the achieving of the knowledge.

PATANJALI was the first person who flamed a disciplinary rules for exercising toga in eight sections.

1- Yam that means certain daily activities  which are to be adopted  for example waking early in the morning and early to bed, regulate daily routines for stool evacuation, timely food intake etc etc

2- Niyam ; this is for the self discipline and self controle  to develop the personality both mentally and physically and intellectually etc etc

3- ASAN; This is related to  posturs  in which body organs  are exercised  manually.

4- PRANAYAM ; Breathing exercises of various kinds with the purpose of holding more and more oxygen for body

5- PRATYAHAR ; Eating habits and food and drinks intake  regulations imposing for themselves to maintain the health condition in normal stayes

6- Dharana ; Choosing a subject for mental analysis and for deep percep[tions

7- DHYAN ; Holding and making envitonment for mental applications and mental faculty  for example calkm place without any disturbances from outside  selected subjects mental conception and perceptions for observations

8- SAMADHI ; Mental thinking  and mental analysis of the subject matters  in deep and deepest points probing on metal basis to find out the conclusion  of the subjects matter choosen in DHARANA level

Thus we see that YOGA is only for the increasing mental ability of intellectual level, when we have no script and alphabates  or any process of writting was invented.

Perhaps PATANJALI was the first p[erson who arranges systematiacally YOGA process when writting came in existence and in scripts.

We can only assume that before PATANJALI yoga was in practice and was traditionally transferred knowledge by practice  and memorising and transferring the knowledge generation to generation.

The need of this process is seems that seldom persons who are mentally very innovative have founded the wat  for increasing mental ability.

Whatever Philosophies we are enjoying today by reading books are a result of this yoga based process.

Many Oriental Indian branches of Philosophy are bases on this wat .

But today we uinderstand YOGA as a science of exercise. as it is taken and concieved.

We wonder when we see the politicising YOGA .

21st JUNE 2015 is a YOGA DAY and will be celebrate all over the world. We presume that YOGA day will be celebrated with great enthusiast and passion.

Regarding YODA scientific evaluation, I have found that Dr AK Jain of  Department of Physiology, Maulana Azad Medical College, New Delhi  have done tremendous and excellent work on the scirntific studies on YOGA. In my opinion this is the p[erhaps first dtudy and inclusion about yoga in any Physiology books so far in existence in the entire world.

Dr AKJain have given a scientic apptoach  and effects on the body with its physiological actions and impacts on human body as best as possible given in details.

Below is the photocopy of the bokk parts  for readers.

 

 

surya namaskaar001

………………………………..

surya namaskaar001 001

……………………………

surya namaskaar001 002

//////////////////////////////////////////

surya namaskaar001 003

///////////////////////////////////////////////////////

surya namaskaar001 004

……………………………

surya namaskaar001 005

/////////////////////////////////////

surya namaskaar001 006

/////////////////////////////////

surya namaskaar001 007

//////////

Regarding SURYA NAMASKAR , in my opinion it is a set of continuous and innovative process of yoga exercises put in sequence for ease and regular exercise procesure and nothin else.

Years back I have practised Surya Namaskar  after reading book  in Sansakrit written and compiled by Raja AUNDH STATE. I have purchased this book SURYA NAMASKAR title fro Chaukhamba Sansakrit series office, Godauliya, Varanasi . I have gone through the book and the version of King AUNDH Srate why he adopted this series of Yoga exersise in sequence. He admitted that he innovated the way for exercising purposes and for any other purposes.

SURYA NAMASKAR  in not a classical yoga exercise as is concieved and percieved. It is a fabrication  of several yoga postures in one clutch to complete the exercise for ease and more effective.

surya namaskaar001 008

//////

surya namaskaar001 009

///////////////

surya namaskaar001 010

///////////

surya namaskaar001 011

///////

योग विग्यान हिन्दुस्तान की ek प्राचीन ग्यान  विवेचना करने की पध्यति  जो उच्चकोटि के मानसिक विकास और उच्च्कोटि के परनलिटी सेवेलोपमेन्ट और उच्चकोटि की मानसिक सोच को बधाने वाली वैग्यानिक और विग्यान सम्मत विधि है /

यो एक प्रकार की जीवन शैली कि देवेलप करने की पध्यति है जो मानसिक विकास के साथ साथ शारीरिक विकास और बौध्धिक विकास को देवेलप करने मे मदद करता है /

मेरा मानना है कि योग एक तरह खि जीवन शैली है  और जीवन जीने का तरीका है / यह व्यक्ति के दैनिक कारय कलापो और उसकी तमाम जरूरतो को पूरा करने हेतु डिसिप्लिन्ड वे मे बनाया फ़या नियम और शर्त बध्ध एक ऐसा जीवनोपयोगी विधान है जिसे लम्बी उम्र पाने के उद्देश्य से रचिय किया गया है / हमारे पूर्वजो ने  मनुष्य की आयु कम से कम एक सौ साल जीवित रहने की कल्पना की है /  प्राचीन काल मे  यही काम्ना हर मनुष्य की होती थी कि वह शतायु हो यानी वह एक सौ साल की उम्र तक जीये /

इस धारणा को मूर्त रूप देने के लिये  तरह तरह के उपाउ किये गये और  तमाम तरह के विचार कि कैसे १०० साल तक जीने की युक्ति की जाय जिससे ओम्र के सौ साल पाने मे सहायता मिले / इसके लिये हमारे पूर्वजो ने  नित्य कुछ न कुछ अवश्य किया होगा / आज जिस स्वरूप मे  योग को पाते है वह एक दिन की कसरत से नही बना है / इसे बनये बनते बनते सैक्ड़ो और सजारो वर्ष देवेलप हो गये होन्गे तब जाकर यह इस स्वरूप मे मिला है जो आअज हम देख रहे है /

एक एक करके जब देखा गया और उसे एसेम्बल किया गया तो जो कान्सेप्ट मिला वह फाइनल स्वतूप मे महर्षि पातन्जलि ने इस दुनिया को कल्याण करने हेतु  लिपि बध्ध किया और योग के रुफ ंऎ फाआश्टूट खीय़ाआ /

 

 

//////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////

[to be loaded soon]