आयुर्वेद

OPHTHALMIC DISORDERS CURABLE BY AYURVEDA AND AYUSH THERAPIES / नेत्र अथवा आन्खो के रोगो का इलाज आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा द्वारा आरोग्य दायक


आन्खो अथवा नेत्र रोग वर्तमान युग मे बहुत अधिक देखने मे आरहे है /
आज से कई साल पहले तक आन्खो के रोग और नेत्रो के रोगी देखने के लिये बहुत कम मिलते थे / लेकिन जब से सिनेमा और टेलीविजन और कम्प्यूट्र का उपयोग होने लगा है तब से आन्खो के रोग बहुत बडी सम्ख्या मे पैदा हो रहे है /

ऐसा नही है कि पहले कभी आन्खो रोग जैसा कि आजकल देखने मे आ रहे है , पूर्व मे कभी नही होते थे / यह सभी रोग ठीक उसी तरह से अपैदा हो तहे है जैसा कि हजारो साल से आन्खो के रोग पैदा होते चले आ रहे है /

पहले हमारा ग्यान कम य्जा लेकिन इतना भी कम नही कि उसका कोई उपयोग न हो / आज हमारा ग्यान बहुय अधिक बढ गया है / और अधिक से अधिक जान लेने की चाहत ने जितना भी अधिक से अधिक ग्यान प्राप्त कर रहे है उसके कारण इलाज की स्तिथिया आसान होती जा रही है /

आयुर्वेद मे नेत्र रोगो का बहुत सटीक और पुख्ता इलाज मौजूद है /

आयुर्वेद मे जिस तरह से रोग निदान के लिये लक्षणो का सन्ग्रह करक्वे रोग की पहचान करने के लिये माधव निदान जैसे ग्रन्थो मे बताया गया है और इस तरह से निदान करके उसकी चिकित्सा केव बारे मे  चरक और अन्य द्य़्सरे आयुर्वेद के शास्त्रोक्त ग्रब्थो मे  उपचार बताया गया है वह यह बताता है कि आयुर्वेद के चिकित्सक किस तरह से मान्व के शरीर की समस्या का समाधान धूब्ढने मे कामयाब रहे थे /

यह केवल नेत्र रोगो मे ही नही है बल्कि अन्य शरीर की सभी बीमारियो के लिये भी है /

आयुर्वेद मे जिस तरह से आयुर्वेद मे मनीषियो ने नेत्र की रचना का उल्लेख किया है और उसकी अनाटामी और फीजियोलाजी को बताया है वह मूल रूप से उसी प्रकार से है जैसा कि आज का चिकिय्सा वैग्यानिक बताता है / फर्क सिर्फ इतना है कि nomenclatures  आधुनिक भाषा मे है और मेडिकल  भाषा मे है /

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[अभी बाकी है ]

0512 2367773 TELEPHONE NUMBER ; ANY ONE CAN RECORD HIS MASSAGE ABOUT ANY QUERY REGARDING AYURVEDA AND AYUSH TREAT,ENT AND EXAMINATION DONE AT OUR CLINIC ; 0512 2367773 फोन नम्बर पर कोई भी व्यक्ति जो हमारे सन्स्थान से इलाज करना चाहता है , फोन द्वारा जानकारी प्राप्त कर सकते है


ANY PERSON WHO DESIRE FOR OUR AYURVEDA DIAGNOSIS SERVICES AND ABOUT OUR  AYURVEDA AYUSH TREATMENT AND WANTS TO KNOW AND CONVEY HIS COMPLAINTS AND MASSAGE TO

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DR D.B.BAJPAI WILL  SEE AND LISTEN PERSONALLY THE INDIVIDUAL COMPLAINTS AND WILL CONTACT THE PERSON FOR SOLUTION AS EARLY AS POSSIBLE.

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खुजली या खारिश या त्वचा मे खुजलाहट होकर दाने पड़्ना किसी खतरनाक बीमारी का लक्षण हो सकता है / ITCHING AND DERMATITIS MAY BE SYNDROME OF ANY HIDDEN BODY DISORDERS


खाज खुजली या त्वचा मे ददोरे पड़्ना या सूखी खुजली होना और खुजलाते खुजलाते खून निकल आना या सारे शरीर मे खुजली के दाने पड़ जाना आदि आदि त्वचा के लक्षन पैदा हो गये हो तो इसे साधारण बीमारी नही समझना चाहिये , बल्कि यह शरीर के नदर की छुपी हुयी किसी गम्भीर बीमारी का लक्षन हो सकता है /

साधारण तौर पर आम जन यही समझते है कि त्वचा पर निकलने वाले दाने बहुत मामूल;ई और साधारण किस्म की  तकलीफ है /  यह एक साधारण किस्म की भी तकलीफ हो सकती है क्योन्कि मौसम के बदलने के साथ साथ खुजली या खारिस हो सकती है और दाने निकल सकते है जो खुजलाते भी है और जलन भी पैदा करते है /

इस तरह की खुजली सधारण तौर पर एक सप्ताह के अन्दर चिकित्सा करने से   ठीक हो जाती है / दुबारा नही होती है / इस तरह की खुजली साधारण किस्म की समजःइ जाती है जो मौसम के साथ किसी बदलाव के कारण पैदा हो जाती है और यह आयुर्वेदिक या आयुष द्वाओ के सेवन से ठीक हो जाती है /

लेकिन कुछ अलग तरह की खुजली जब शरीर मे पैदा हो जाती है जो किसी शरीर के अंग की विकृति के कारण पैदा हो जाती है /

खुजलीके इन लक्षणो से बीमारी के निदान करने मे सअलता मिलती है  और दवओ का जब इलाज किया जाता है तो खुजली के कम या ज्यादा होने कीमिकदार मे पता चलता है कि बीमारी ठीऊक भी हो रही है अथवा नही /

  • डायबीटीज के रोगी के श्रीर मे दाद के जैसे चकत्ते पड़ने लगते है  और ऐसा लगता है कि गीली और पानी जैसी discharge  वाली दाद हो गयी है / लेकिन ऐसा डायबिटीज के होने के कारण होता है /
  • सूखी खुजली जैसा हो और सारा शरीर छॊटे छोटे दानो जैसा भर जाय / किसी भी समय खुजली हो और यह खुजलाने पर त्वचा मे जलन पैदा करने लगे तो इस तरह की खुजली किसी भी द्वा के करने न ठीक हो तो यह खुजली खतरनाक होती है / ऐसी खुजली अधिकतर GALL BADDER  अथवा पित्त की ठैली मे सूजन  अथवा पित्त की थैली मे किसी तरह की रुकावट अथवा पित्त की ठैली की पथरी के कारण होता है  /
  • रक्त मे किसी कारण से पित्त के कण अधिक मात्रा मे रुक जाते है तब बहुत खुजली होती है / इस तरह की खुजली मे खुजलाते खुजलाते खून तक निकल आता है /
  • गुर्दे की किसी बीमारी के कारण खुजली होती है तो ऐसी खुजली को खुजलाने मे बहुत मजा आता है और तबियत ऐसी करती है जैसे ्खुजलाते जाओ खुजलाते जाओ ऐसी इच्छा होती है / मूत्र सन्स्थान के किसि बी हिस्से मे अगर कैल्सियम की पथरी होगी या कैल्सियम के कण जमा होन्गे तो इससे खुजली होने लगती है /
  • लीवर की तकलीफ मे खुजली होती है / अगर लीवर का साइज बड़ा हो  या लीवर के स्पाइक मे कोई तकलीफ हो तो इससे खुजली होती है अहुर त्वचा पर एलत्जी जैसे ददोरे कड़ते है /
  • केटबालिक या मेटाबालिक या अनाबालिक प्रक्रिय और शरीर के केमिकल बदलाव की रासायनिक प्रक्रिया मे अगर किसी तरह का व्यवधान पैदा होता है तो इससे भी खुजली पैदा हो जाती है / उदाहरण के लिये अगर यूरिक एसिड का बदलाव यूरिया मे कन्वर्ट नही होता है तो रक्त मे अधिक मात्रा मे यूरिक असिड बढने से खुजली पैदा हो जाती है /
  • रक्त मे कोलेस्टेराल अथवा क्रियेटिनाइन अथवा सोडियम अथवा पोटैसियम अथवा बिलीरूबिन अथवा नाइट्रिजिनस सब्स्टेन्स की मात्राये अथवा दूसरे अन्य केमिकल केमिस्ट्री मे बदलाव आते है तो इससे भी खुजली होने लगती गै /

हलाकि खुजली होने के अन्य बहुत से कारण होते है जिनमे इनएक्शन होना भी शामिल या किसी खान पान की चीज से भी खुजली होती है तो इसमे सावधानी से चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक होया है /

बार बार होने वाली खुजली किसी बीमारी का सन्केत होती है इसलिये इसका निदान ग्यान मे महत्व है /

जब कभी बार बार खुजली की बीमारी हो और किसी दव के करने से ठीक हो जाये लेकिन फिर बार बार होने लगे तब इसे गम्भीर समस्या मानक्र पुख्ता इलाज करना चाहिये और किसी तरह की लापर्वाही नही करनी चाहिये /

आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा से सभी तरह की खुजली की बईमारी ठीक होती है लेकिन इसके लिये किसी एक्स्पर्ट डाक्टर से सलाह लेना चाहिये /

यह रोगी की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह किस तरह का इलाज कराना चाहता है  / लेकिन यह जरूर है कि किसी तरह की लापरवाही नही करना चाहिये और औषधोपचार अव्श्य करना चाहिये /

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SWINE FLU ; AYURVEDA SUCCESSFUL TREATMENT ; स्वाइन फ्लू का सुरक्षित आयुर्वेदिक इलाज


स्वाइन प्लू के लक्षणो पर आधारित सभी रोगियो का आयुर्वेदिक इलाज करने के बाद यह अनुभव मे आया है कि  महामारी की तरह फैल रही बीमारी का बहुत सटीक और अचूक इलाज आयुर्वेद मे है /
वायरल / अथवा स्वाइन फ्लू के रोगियो के इलाज मे मैने निम्न दवाये दी है उन्हे मै  सार्वजनिक तौर पर  देश के सभी नागरिको के लिये यहा बता रहा हू /

स्वाइन फ्लू या इस जैसी बीमारी के इलाज के लिये मेरा नुस्खा इस तरह है /

  • महामृत्युन्जय रस  दो गोली

  • कफ कुठार रस   चार गोली

  • सुदर्शन घन वटी  दो गोली

  • सप्त पर्ण घन वटी दो गोली

वयस्क व्यक्ति के लिये यह एक खुराक है /

सभी ऊपर लिखी गयी  दवओ की गोलियो को गुन्गुने पानी से तीन तीन घन्टे के अन्तर से खिलाना चाहिये three hourly a with lukwarm water

कम उम्र के  किशोरो को  ऊपर लिखी दवाओ की एक एक गोली मिलाकर खिलाना चाहिये

बहुत छोटे बच्चो को ऊपर लिखी दवाओ की आधी आधी गोली शहद के साथ या खासी के किसी  मीठे आयुर्वेदिक सिरप मे मिलाकर या जैसे भी और जिस तरह से  दवा का सेवन कर सके वैसे ही उनको खिलाना चाहिये

सभी दवये तीन  तीन घन्टे के अन्तर से देना चाहिये / जब तकलीफ कम होने लगे तो दवा का रिफीटीशन के लिये घन्टे का अनतर बढा देना चाहिये /

पान्च या छह दिन के उपचार से स्वाइन फ्लू ठीक हो जाता है और व्यक्ति सामान्य स्वास्थय की अवस्था मे आ जाता है /

हमारे रिसर्च केन्द्र मे जितने भी स्वाइन प्लू के रोगी आये है उन्हे इसी द्वा के द्वारा अधिकान्श्त त्सेवन कराकर रिग मुक्त किया जा चुका है /

द्चावा के सेवन काल मे हल्हिका भोजन खना चाहिये तथा स्येवास्थय साबन्धि आचरण उपयोग मे लाना चाहिये /

स्वाइन प्लू के लिये उप्रोक्त बताया गया फार्मूला अचूक है और यह अवश्य लाभ करता है /

मुझे पूरे देश से मोबाइल और फोन पर बहुत बड़ी सन्ख्या मे लोगो ने अनुरोध किया था कि स्वाइन प्लू के उपचार के लिये आयुर्वेद की औषधियो का फार्मूला क्या है ?

आप सभी लोग इसका उपयोग करे और स्वाइन प्लु के रोग से मुक्ति पाय

SWINE FLU is a curable disease condition , if treated by AYURVEDIC Classical Remedies. Many successfully cases of SWINE FLU / Viral Infections have been cured by the remedies very safely within six days.

Majority of the patients have the following syndromes of this disorders ;

  1. Nervousness feelings
  2. fears feeling
  3. Some thing will be bad having with their liuves
  4. Shivering
  5. Chilliness
  6. Internal heat / temparature feelings
  7. Difficulty in Breathing
  8. Some patient have cough / COPD like symptoms
  9. Body ache
  10. Sneezing and cold
  11. Running nose
  12. Loss of appetite
  13. Tase of mouth is bad
  14. some feels vomitting/ nausea sensations
  15. some feels difficulty in breathing with chest mscles pain

AYURVEDA treatment is successfully eradicate these syndromes within six days , if treatment is taken immediately after one or two symptoms persists

The successful formula of Ayurvedic combination of remedies are given below, is used in majority of patients.

  • MAHAMARANTYUNJAY RAS  TWO PILLS

  • SUDARSHAN GHAN VATI   TWO PILLS

  • SAPTAPARN  GHAN VATI TWO PILLS

  • KAF KETU RAS   FOUR PILLS

tHIS COMBINATION OF PILLS IS ONE DOSE FOR AN adult PATIENT.

aDOLESCENCE AGED SHOULD HALF THE DOSE

CHILDREMS SHOULD BE GIVEN SMALL DOSES OF THE ABOVE REMEDIES

Remedies can be taken with lukwarm water in three hours interval.

Diets shuold be given easily diagestibles and incluse milk and fruit juices.

Virals / other infections raised the pH of Blood , say towards acidic reactions, and therefore an Alkaline diet is necessary to minimise the Ph of Blood for maintaining to normal level.

We have treated successfully almost majority of the infectious patients by using the combination of above mentioned remedies.

This is a curable condition , if treated Ayurvedically.

Homoeopathic preventives remedies are also very useful to prevent with the disorders and almost keep safe with the dreaded disease.

I* will draw kind attention of the  physicians freternity that during studies in medical college [1970], it was a matter of discussions among the seniors doctors , which seasons , faces which types of disorders ? This was necessary to understand the nature of patients complaints, in view of diagnosis.

When January passes, it is presumed that the season will become of Chicken pox and small pox and measles and Typhoid and Typhus fever mainly and some kind of Skin disorders and pulmonary complaints etc etc .

Now I am watching since many years that these disorders and classical disease conditions are almost vanished away and new formations od disoders are comming befoe.

In my opinion these viral conditions have changed their nature and manifestations and syndromes and comming in a new shape before us.

This couild be a matter of investigation, why this is happening ?

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AYURVEDA  DIAGNOSIS FOR ALL DISEASE CONDITIONS AND AYURVEDA TREATMENT AND MANAGEMENT SOLUTION FOR ALL AILMENTS AND CONDITIONS 

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KANAK POLYTHERAPY CLINIC AND RESEARCH CENTER ,KANPUR , UTTAR PRADESH, INDIA IS NOW ISO 9001 – 2008 ACCREDITED AND CERTIFIED AYURVEDA RESEARCH CENTER ; कनक पालीथेरापी क्लीनिक एवं रिसर्च सेन्टर , कानपुर उत्तर प्रदेश, भारत अब आई०एस०ओ० 9001 – 2008 सर्टीफिकेट प्राप्त प्रमाणिक आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा विग्यान का रिसर्च सन्स्थान


KANAK POLYTHERAPY CLINIC AND RESEARCH CENTER is now accredited and certified AYURVEDA RESEARCH CENTER and AYURVEDA SUPER-SPECIALTY CENTER ALL OVER THE GLOBE .

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कनक पालीथेरपी क्लीनिक एवं रिसर्च सेन्टर , ६७/७०, भूसाटोली रोड, बरतन बाज़ार , कानपुर  २०८००१ उत्तर प्रदेश अब आई०एस०ओ० 9001 – 2008 सर्टीफिकेट प्राप्त  आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा मे रिसर्च के लिये प्रमाणित सन्स्थान हो गया है /

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HYPER-HYDRIOSIS ; EXCESSIVE SWEATING FROM HAND PALMS AND LEG SOLES ; 100 % CURE ON BASE OF E.T.G. AYURVEDASCAN AYURVEDA TREATMENT हाथ की हथेली और पैर के तलवों से बहुत अधिक पसीना निकलना और पानी निकलना ; ई०टी०जी० आयुर्वेदा स्कैन आधारित इलाज से शत प्रतिशत १००% ठीक होते है


HYPER-HYDROSIS , excessive sweating from palm and sole is 100 % curable by Ayurveda  latest technology E.T.G. AyurvedaScan based  Ayurveda Ayush treatment .

हाथ की हथेली  और पैर के तलवो से बहुत अधिक मात्रा मे पसीना निकलना और पानी निकलना की बीमारी आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज कराने से शत प्रतिशत १००% ठीक हो जाती है /

हमारे सन्स्थान “कनक पालीथेरापी क्ळीनिक और रिसर्च सन्स्थान , 67/70, भूसाटोली रोड, बरतन बाज़ार, कानपुर , उत्तर प्रदेश ” से समपर्क करे /

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KANAK  POLYTHERAPY CLINIC AND RESEARCH CENTER ,

67 / 70, BHUSATOLI ROAD, BARATAN BAZAR,

KANPUR-208001 , U.P.

INDIA  

is  an ISO 9001 – 2008 certified AYURVEDA RESEARCH CENTER

BOTH KNEE JOINT’S ARTHRITIS PATIENT MONITORED SEVERAL HOURS FOR COLLECTION OF BIO-PHYSIOLOGICAL DATA ON BASIS OF E.T.G. AYURVEDASCAN MONITORING LINES ; ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन मानीतरिन्ग लाइन्स पर आधारित घुटने की आर्थराइटिस के रोगी का बायो-फीजियोलाजिकल डाटा निदान ग्यान को ध्यान मे रखते हुये कई घन्टे तक का सनकलन


घुटने की आर्थराइटिस जिसे आर्थराइटिस अथवा घूतने का वात या गठिया वात भी कहते है शरीर की एक बहुत ही कठिन किस्म की बीमारी है / इस बीमारी की सबसे बड़ी खराबी इस बात की है कि जिसे भी यह बीमारी हो जाती है उससे चलने फिरने और श्रीर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने मे बहुत ही तकलीफ होती है / लोग खते पीते रहते जरूर है लेकिन चलने फिरने के लिये मोहताज हो जाते है यानी वे स्वयम अपना शरीर लेकर चल नही सकते है न सीढियां चढ सकते है , न ऊन्ची जगह से नीचे उतर स्कते है /

अच्छे अचॆ शूरमाऔर बहुत शकतिशाली लोग और ताकतवर शरीर वाले भी इस बीमारी के जोर से ढेर हो जाते है / भले ही उनका अना जाना किसी सहारे से भले ही चलता फिरता रहे लेकि घूतने मोड़ने और पैर के किसी भी तरह के movement  और motion  से होने वाले कष्ट से पुरखे तक याद आ जाते है /

आयुर्वेद की चिकित्सा द्वारा यह बीमारी दूर की जा सकती है / भले ही वह किसी भी स्तर की हो /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज से सभी तरह की arthritis  ठीक हो जाती है और वकति सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है /

नीचे दिये गये चित्र मे एक रोगी के पैर के घुटने का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन मानीतरिन्ग लाइन्स पर आधारित निदान ग्यान के लिये कई घन्टे तक्  रोगी के बायो-फीजियोलाजिकल डाटा को एकत्र करके जान्ने और समझने के लिये कोशिश की गयी कि लम्बे समय तक आराम करने के बाद क्या और किस तरह के परिवर्तन उन अन्गो पर होते है जहां पर आयुर्वेद के सिध्धन्त वात और पित्त और कफ के presence  के बारे मे etiological intensity level कैसा और किस तरह का है ??

जिस रोगी का परीक्षण किया जा रहा है उसका सारे शरीर मे स्कैनर एलेक्ट्रोड्स लगाये गये थे और विशेष तौर पर उन हिस्सो पर लगाये गये थे जहा पर उसे बहुत ज्यादा तकलीफ थी / नीचे रोगी के सूजन वाले घूटने दिखाई दे रह है /

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.इस रोगी के  पैरा मीटर्स को देखिये / इसकी नाड़ी की स्पीड ६६ पल्केस प्रति मिनट के करीब है / इसका बलड प्रेशर  हाई लेवल का है  और डायस्टोलिक प्रेशर अधिक की तरफ का है / इसका रक्त आक्सीजन सैचुरेशन  सामन्य स्तर का हओ / लेकिन इसका रिस्पाइरेशन रेट सामान्य से अधिक है यानी ५५ के करीब है /इस रोगी का टेम्पेरेचर सामान्य से कम है /

इस रोगी के घूतने मे लगाये गये एलेक्ट्रोड्स  द्वारा रिकार्ड किये गये ट्रेसेस का अध्ध्य्यन करने के बाद यह पता चला कि घूतने मे [1] Inflammation [2] swelling [3] hardness/rigidity [4] electrolytic imbalances  उपस्तिथि है /

[मैटर लोड करना बाकी है ]   ………………………………………………..

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