आयुर्वेद

ENLARGED LIVER ; tOTAL CURE BY AYURVEDA AYUSH TREATMENT ; लीवर का आकार बढ जाना ; आयुर्वेद और आयुष इलाज से ठीक होता है /


ENLARGED LIVER AND RELATED PROBLEMS ; CURE BY AYURVEDA AND AYUSH TREATMENT; लीवर यानी यकृत का साइज या आकार बढ जाना ; आयुर्वेद और आयुष इलाज द्वारा बीमारी ठीक हो जाती है

ENLARGED LIVER is a condition of disease related to the Liver. Liver is the biggest organ of body where many functions are controlled or supported or performed. There is many reasons, which are responsible to create the disorder.

The diagnosis of the disorder can be done by the Ultrasound or CT Scan or MRI examination or Ayurveda Latest diagnosis system ETG AyurvedaScan. Pathological Blood examination or Ayurveda Blood Test and Ayurveda Urine Test can help in diagnosis of the disorders intensity.

This is a curable condition in Ayurveda and Ayush therapies. A large number of remedies are available to meet the cure of this disorder.

लीवर के आह्कार के बढ जाने का बहुत बेहतर इलाज आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा मे मौजूद है / अगर इस बीमारी का इलाज आयुर्वेद की नई तकनीक के रिपोर्ट और आयुर्वेद के रक्त परीक्षण और आयुर्वेद के मूत्र परीक्षण के जान्च रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है तो यह बीमारी अव्श्य ठीक होती है /

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Contact; Dr ABBajpai
MOBILE NUMBER ; 08604629190
KANAK POLYTHERAPY CLINIC AND RESEARCH CENTER
67/70. BHUSATOLI ROAD, BARTAN BAZAR,
KANPUR SHAHAR, U.P., INDIA

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KIDNEY STONE ; RENAL STONE ; TOTAL CURE BY AYURVEDA & AYUSH TREATMENT AND MANAGEMENT


KIDNEY STONES AND RENAL STONES are totally curable by Ayurveda and Ayush treatment. In general and particular cases of Renal stones are curable by Ayurveda and Ayush combination and integrated treatment. Yet there is no need of any kind of Surgical interventions up to the size of Calculus beginning from tiny to 15 millimeters and above and in numbers. The phyto-chemicals and Chemical substances containing anti-calculus properties remedies of Ayurveda and Homoeopathy and Unani works against the formation of calculus and melting them slowly and gradually with inhibiting the HYDRONEPHROSIS and renal pain.

In Ayurveda and in Homoeopathy and in Unani a large number of remedies persists to cure the condition. It is often seen that after removal of ..Calculus by Surgical interventions, calculus again reappears. By allowing Ayurveda and Ayush treatment repetition of the formation of calculus is not seen often…Once it is cured , it is been cured for all time…………..

किडनी यानी गुर्दा यानी रीनल स्टोन्स यानी पथरी अथवा ज्यादा सन्ख्या की छोटी अथवा बड़ी पथरियां जो गुर्दे के अन्दर हो जाती है ऐसी पतहरियों का इलाज आयुर्वेद और होम्योपैथी औए यूनानी दवाओं के काम्बीनेशन अथवा इन्टीग्रेटेद स्वरूप मे किया जाता है तो सभी प्रकार की गुर्दे की पथरिया धीरे धीरे मेल्ट होकर निकल जाती है /

गुर्दे की पथरियों का पता अल्ट्रासाउन्ड अथवा एक्स-रे अथवा सी०टी०स्कैन अथवा एम०आर०आई० से पता चलता है / हाइड्रोनेफ्रोसिस और पथरियो का पता आयुर्वेद की नई तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन से पता चल जाता है लेकिन नई तकनीक मे पथरियों का साइज ठीक ठीक नही पता चल पाता है इसलिये अल्ट्रासाउन्ड पथरियो के साइज को जानने के लिये सबसे बेहतर तरीका है /

यहां इसका उल्लेख इस्लिये कर रहा हू कि आयुर्वेद और आयुष  के इलाज के लिये ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन सबसे बेहतर डायग्नोसिस विधि है / जब पथरी का इलाज करते है तो पथरी की जेनेसिस और उसका पाथ-वे जानना जरूरी होता है / लेकिन इलाज करते रहने के दरमियान मानीटरिन्ग के लिये यानी इलाज करने के कुछ हफ्ते बाद अल्ट्रासाउन्ड द्वारा यह पता लगाना जरूरी होता है कि पथरियो के साइज मे क्या और किस तरह के परिवर्तन आये हैं / इसी पर द्वाओ की डोज और अन्य बाते निर्भर करती है /

गुर्दे के अन्दर और मूत्राशय मे कुछ मरीजो मे एक्स रे और अल्ट्रा साउन्ड कराने के बाद पता चलता है कि उनके गुर्दे और मूत्राशय मे बहुत बड़ी बड़ी पथरिया मौजूद है / कभी कभी इस तरह की तकलीफ गलत साबित होती है / ऐसा इसलिये क्योन्कि गुर्दे अथवा मूत्राशय के अन्दर कैल्सियम और दूसरे मिनरल्स अन्दरूनी दीवार मे एक मोटी पर्त बना देते हैं जो एक मिलीमीटर से लेकर २ या ३ या अधिक मिलीमीटर की मोटाई की परत जमा देते है / एक्स रे मे यह अन्कित हो जाता है क्योन्कि एक्स रे की किरणे इस पर्त के कारण रुकती है जिससे एक भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है / यही अल्ट्रासाउन्ड मे भी होता है / जब अल्ट्रासाउन्ड को प्रोब के द्वारा  गुर्दे की ओर छोड़ते है तो इन पर्तो से टकरा कर आने वाले ध्वनि सन्केत पथरी का सन्केत देते है / इसलिये भ्रम की स्तिथि बनती है /

गुर्दे की पथरी एक पुरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है / ई०टि)जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज और आयुर्वेद के मूत्र और रक्त परीक्षण आधारित इलाज कर्ने से यह बीमारी शत प्रतिशत ठीक हो जाती है / इस बीमारी मे आनन फानन मे आपरेशन नही करना चाहिये / आपरेशन अति इमर्जेन्सी की अवस्था मे ही कराना ठीक होता है /

SINUSITIS ; NASO-FACIAL DISEASE CONDITION ; सायनुसायटिस ; नाक और गले तथा कान और अन्दरूनी गला को एक साथ तकलीफ देने वाली बीमारी


सायनुसाइटिस को नाक से सम्बन्धित बीमारी समझा जाता है लेकिन इस बीमारी के रिफ्लेक्टिव सिन्ड्रोम्स पूरी नाक और कान और गला तथा ग्र्दन के अन्य भागो को भी विकार युक्त बना देती है / फेसियल न्य़ुरैल्जिया इसी बीमारी की देन है / अधिक एन्टीबायोटिक दवाओ के खाने से इसका असर मष्तिष्क के भागो पर भी पड़ता है ऐसा भी देखने मे आया है /

इसलिये इस बीमारी को हल्के मे नही लेना चाहिये /

यह बीमारी आयुर्वेद और आयुष की दवा करने से अव्श्य ठीक हो जाती है / जड़ बुनियाद से बीमारी को ठीक करने के लिये आयुर्वेद का इलाज करना बहुत फाय्देमन्द है /

जब सायनिसाइटिस की  बीमारी बेकाबू हो जाये और कोई भी इलाज कारगर न हो तो आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेद स्कैन परीक्षण आधारित इलाज करना चाहिये / आयुर्वेद के रक्त परीक्षण और आयुर्वेद के मूत्र परीक्षण से तथा अन्य जान्चो से यह पता चल जाता है कि शरीर के अन्दर क्या गड़्बड़ी है और सायनुसायटिस की तकलीफ किस वजह से हो रही है ?

इस तरह से बीमारी का निदान हो जाने से इसका इलाज सटीक और अचूक  सम्भव हो जाता है / यह शत प्रतिशत ठीक होने वाली बीमारी है / यह बीमारी शरीर के नर्वस सिस्टम को और दूसरे सिस्टम को बहुत सेन्सिटिव बना देती है / यह ठन्डक से बढने वाली बीमारी है क्योन्कि जब यह बीमारी होती है तो शरीर की रेजिस्टेन्स पावर घटती है / रेजिस्टेन्स के घटने के कारण सायनुसायटिस के रोगी को बहुत शीघ्रता के साथ ठन्डक का एक्स्पोजर होता है इसीलिये यह बीमारी उनको ज्यादा होती है जो या तो दिन भर ए०सी० मे बैठते हैं या गर्मी से बचने के लिये  ठन्डक के लिये स्थान बदला करते है /

कहने का तात्पर्य यह कि सायनुसायटिस बीमारी ठन्डक से बढती है और इससे बचना चाहिये  / ऐसा न करने पर यह बीमारी बहुत जोर मारती है और ठीक होने का नाम नही लेती है /

 

DIABETES ; डायबिटीज ; AYURVEDA – AYUSH CURE ;आयुर्वेद – आयुष चिकित्सा क्योर


Diabetes is spreading in large number patient due to many reasons, which could be only find out by the Ayurveda Whole body Scanner ETG AyurvedaScan and its supplementary examinations, which are possible at our outdoor hospital. Ayurveda and Ayush combined and integrated treatment and diagnosis provides a complete cure to the patient who just diagnosed at an early stage.

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डायबिटीज एक लाइलाज बीमारी है ऐसा सम्झा जाता है / लेकिन ऐसा है नही और यह कुछ डाक्टरो द्वारा फैलाया गया प्रोपागन्डा है / हमारे सन्स्थान मे डायबिटीज के जितने भी मरीज आये है सब के सब ठीक हुये है और वे केवल आयुर्वेद के मैनेज्मेन्ट पर आधारित जीवन शैली और खान पान को अपनाकर शायबिटीज को कन्ट्रोल किये हुये है / जिन मरीजो को शुरुआती डायबिटीज का रोग का पता चला और उन्होने तुरन्त ही इलाज कराया वह ठीक हो गये और वे सामान्य जीवन यापन कर रहे है / जो मरीज इन्सुलीन लग्वा रहे थे उनकी इन्सुलीन छूट गयी और जो अन्य एन्टी-डायबेटिक दवाये ले रहे थे उनकी दवाओं की मात्रा बहुत कम हो गयी अथवा धीरे धीरे छूट गयी /

Pancrease is said to be one of the cause of Diebetis due to pathophysiology or pathology of the organ.But other organic pathophysiology and pathology should not be forgotten like Liver, Gall Bladder, Small Intestines, Large Intestines, Spleen, Kidney, Hormonal imbalances etc etc that affects the body and creates this disorder.

प्रस्तुत वीडियो मे डायबिटीज के बारे मे सुनिये

सम्पर्क करें ;
डा० ए०बी० बाजपेयी मोबाइल नम्बर ; 08604629190

 

PILES ; HEMORRHOIDS ; CURABLE BY AYURVEDA AND AYUSH TREATMENT ; बवासीर की बीमारी का सटीक और अचूक इलाज आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा


Piles and Hemorrhoids are very very ugly disease condition. This is a painful condition, when stool passes from rectum. Piles are divided in two section one is bleeding and other is non-bleeding.

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बवासीर की बीमारी बहुत खराब और गन्दे किस्म की बीमारी है / मरीज अपनी बीमारी के बारे मे दूसरों से कहने सुनने मे हिचकता है / पाखाना करने के बाद यह बीमारी दर्द पैदा करती है और कभी कभी किसी किसी को जलन और मिर्चे जैसी जलन का अहसास होता है /

यह लाइलाज बीमारी नही है और इसका इलाज आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा मे मौजूद है / इलाज करने से यह बीमारी और इसके साथ साथ जुडु हुयी तकलीफे भी कम हो जाती है /

इस आडियो मे डा० देश बन्धु बाजपेयी क्या बता रहे है यह सब सुनिये ………

Listen in Hindi about the disease condition and treatment …………………

http://https://soundcloud.com/drdbbajpai/piles-heamorrhoids-curable-by-ayurveda-and-ayush-treatment

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FISTULA ; OPEN OR BLIND ; TOTALLY CURABLE BY AYURVEDA & AYUSH DIAGNOSIS AND TREATMENT


FISTULA is an VERY VERY UGLY POSITIONED and dreaded disease condition, WHICH IS VERY DIFFICULT TO CURE in Allopathy medical system. The practitioners of Allopathy always sugget an OPERATION in every case of FISTULA.

Experience shows that most of the operations of Fistula are not successful even tried operation several times , say 2 to 11 operations are fail to recover the problem or cure the problem. Opening of Fistula reopen again and again, therefore it can be said that operations are not successful in this disease condition.

Ayurveda Kshar Sutra is also not very successful in many cases. Many patients came to us for treatment after KSHAR SUTRA with failure. We can not say why KHAR SUTRA failes in many  CASES.

क्षार सूत्र के द्वारा फिस्टुला / फिस्चुला क इलाज आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान मे बहु अचूक कहा गया है / लेकिन जब १५ साल पहले फिस्चुला के रोगी जि क्षार सूत्र की चिकित्सा करा चुके थे और इस क्षार सूत्र से नही ठीक हुये थे तब मुझे बहुत हैरानी और आश्चर्य की बात लगी / मै यही समझता था कि क्षार सूत्र द्वारा फिस्चुला रोग का इलाज बहुत सटीक और अचूक है / लेकिन मेरी इस धारणा को धक्का लगा जब एक के बाद एक और फिर कई मरीजो के आने का सिलसिला शुरू हुआ तब मुझे ज्ञात हुआ कि क्षार सूत्र द्वारा  फिस्चुला की चिकित्सा करना फेल साबित भी हो सकता है /

हमारे यहा रिसर्च  केन्द्र मे  जितने भी रोगी फिस्चुला का इलाज करा गये है सब के सब ठीक हुये है / क्योन्कि हमारे चिकित्सा केन्द्र मे सारे शरीर का परीक्षण आधुनिक आयुर्वेद की निदान ज्ञान की तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्वारा परीक्षण किये जाते है और इसके साथ साथ आयुर्वेद का रक्त परीक्षण और आयुर्वेद का मूत्र परीक्षण भी किये जाते है जिससे यह पता चल जाता है कि बीमारी की असली जड़ कहा पर छुपी हुयी है /

बीमारी का कारण तलाश लेने के बाद उसका इलाज करना सरल होता है और सटीक होता है यही कारण है कि हमारे केन्द्र मे फिस्चुला के रोगियो का इलाज करने मे शत प्रतिशत सअलता मिलती है /

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MENTAL DISORDER CASE ; E.T.G. AYURVEDASCAN RECORD ; OBSERVE CHANGES IN ELECTRICAL BEHAVIOR AND RECORDED PATTERN ; PATIENT CONDITION IMPROVED AND PROGRESSES TO NORMALCY


A MENTAL DISORDER case of an adult male visited in last year  2017 in March month and after one year of Ayurveda and Ayush treatment , he visited again after one year for follow up in month of April 2018.

For follow up of any patient , we  record either rest position or record Exercising position with rest and sleep position along with Blood / Urine examination for comparative studies and analysis and synthesis of the case.

Below is given the both recording of last and this year. See and observe the electrical record of the patient and compare it. For comparison, it takes a very very minute analysis of graphical patterns, which have a deep means and sign of pathophysiology or pathological  clues. Thus diagnosis completes in pinpoint way.

Observe the electrical graphical changes in compare to previous records. The very last record patter is showing lower direction / negative waves in previous records, while in present it is upward. The Electrode record -placement is over the Brain and this shows the improvement in the organs compare to previous one.

The over all health  condition of the patient is fine and he joined college for his studies, which was broken in last year, it is now this year continuing. Patient is happy with the treatment and he is advised that he come for followup at least after four to six months to change the prescription.

Mental cases are always responses well by Ayurveda and Ayush treatment. It does not mean what is the title of disease  or what says doctors about the patient problems. We see the previous diagnosis done by the physician but we find out the genesis of the problem and from their to extension of the present complaints. This is a tedious job and not easy to find out the genesis of the problems. Treatment becomes easy when genesis is found and a sample of the treatment provided at the root cause level. A good and perfect diagnosis gives a fruitful results in treatment.

ETG AyurvedaScan examines the whole body and brings out the hidden anomalies of the body systems and organs. Ayurveda have an advantage in treatment perfection basing on the line of diagnosis done by the electrical scanning system.

 

 

 

MALE SEXUAL DISORDERS AND DISEASES ARE CURABLE BY AYURVEDA AND AYUSH DIAGNOSIS AND TREATMENT


MALE SEXUAL DISORDERS can be treated perfectly by Ayurveda and Ayush therapies treatment and via diagnosis.

In general the complaints is spreading day by day in male youngsters along with the aged personals, seeking the taste of sex with their partners bu fails to do the necessary acts.

Treating a large number of patient of this kind, we have found that every individual have its own problems, which do not equalizes or matches  to others having similar disorders. Therefore the diagnosis and other physical pathology is seen to be unrelated to the several kinds of the unsupported  factors. These factors could be of mental or physical or both.

In this presentation of video one can see how the MALE SEXUAL / REPRODUCTIVE system is complicated and is not easy to come in harmony for sexual acts. SEXUAL Disorders are early ejaculation, loss of erection, loss of sexual desire, Impotency, Testicular diseases, Less Sperm counts, Prostate, Urinary passes and many many sexual organ’s related  accountable disease condition.

Our approach to treat the SEX RELATED  organs is totally dependent on the examination and tests of whole body scanning by Electro Tridosho Graphy, ETG AyurvedaScan and Ayurveda Blood Examination and Ayurveda Urine examination. After the results of done tests and examinations, we try to conclude the problem  of patient  individually in many ways including the chemical and analytical chemistry, which includes over 100 tests of different types, along with the study of systems involved , who creates the problem. In our studies , we have found that one factor is not responsible for the sex related problems. Some factors or many factors are responsible for the genesis of disease.

However this is not an incurable disease condition and can be treated well by AYURVEDA and AYUSH combination and integrated treatment.

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सोरियासिस ; बीमारी लाइलाज नही है ; आयुर्वेद और आयुष मे इसका इलाज सम्भव


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सोरियासिस अब लाइलाज बीमारी नही है इसका इलाज आयुर्वेद चिकित्सा और आयुष चिकित्सा मे सम्भव है /

प्रस्तुत आडियो -वीडियो को सुनिये और जानकारी प्राप्त कर लें /