वैज्ञानिक आयुर्वेद

“आयुर्वेद का इलाज कितने दिन तक करना चाहिये या किया जाये”,यह सवाल हर मरीज पूछता है What is duration of Ayurvedic Treatment ?


आज से लगभग चालिस पचास साल पहले तक लोग यह सब जानते थे कि आयुर्वेद का इलाज कितने दिन तक किया जाये, क्योंकि उस समय तक चिकित्सा के लिये केवल यही एक्मात्र चिकित्सा विग्यान था , जिसका लगभग सभी भारतीय परिवार उपयोग करते थे / होम्योपैथी अधिक उन्नत अवस्था में नहीं थी और इसे केवल बच्चों के इलाज तक ही सीमित था / यह इसलिये कि बच्चे एलोपैथी या आयुर्वेद की कड़वी दवा खाना पसन्द नहीं करते थे / मजबूरन बच्चों के इलाज के लिये होम्योपैथी की दवाओं का उपयोग करना पड़्ता था /

पुराने समय मे लोग आयुर्वेद के महत्व को समझते थे / इसलिये उनको जानकारी थी कि बीमारी के इलाज में कितना समय लगेगा , बड़े बूढे भी अपने अनुभव से बता देते थे और बता देते थे कि ” हर मर्ज के ठीक होने की एक मियाद होती है” या ” ये तो असाध्य या कष्ट साध्य या याप्य रोग है” या ” यह तो जिन्दगी भर चलने वाला रोग है और अब तो दवाओं के सहारे ही जीवन बिताना पड़ेगा” /

आज के जमाने में यह बताने वाला कोई है ही नहीं, न समझाने वाला कोई है, वजह साफ है , इन सब बातों के बारे मे ग्यान रखने वालों का एक दम अभाव / नतीजा अब यह है कि लोगो को पता ही नहीं कि जब वे बीमार हों तो उनको क्या करना चाहिये ?

मेरे यहां आने वाले मरीज मुझसे पूछते है कि वे कितने दिन आयुर्वेदिक दवा खायें , जिनसे उनकी बीमारी का ठीक ठीक इलाज हो सके / सवाल हर मरीज पूछता है और उसका सवाल पूछना भी जायज है /

आयुर्वेद का इस सम्बन्ध में क्या कहना है, उसे मै सार भाग में और अपने अनुभव को जोड़ कर आप सबके साथ अपने अनुभव को जोड़ने की कोशिश कर रहा हूं /

आयुर्वेद में ऐसा निर्देशित किया गया है कि किसी भी बीमारी का इलाज उसके पैदा होने, देश, काल और वातावरण तथा अन्य अनुकूल या प्रतिकूल परिस्तिथियों के ऊपर निर्भर करता है / इसलिये किसी भी बीमारी का इलाज कुछ घन्टे से लेकर एक दिन या कुछ दिन तक की मियाद मे हो सकता है और कुछ अन्य बीमारियां कुछ दिन से लेकर कई महीने या कई कई साल तक हो सकती है या फिर जीवन पर्यन्त तक /

मैने मानव शरीर में होने वाली बीमारियों का वर्गीकरण निम्न सात कैटेगरी में किया है / मेरे हिसाब से सारी दुनिया के लोग इन्ही सात कारणो से बीमार होते है / ये कारण है ;

१- भौतिक यानी Physical
२- मानसिक यानी Mental
३- इन्फेक्सियस यानी Infections
४- जेनेटिक यानी Genetics
५- ट्राउमैटिक यानी Traumatic
६- ईयट्रोगेनिक यानी Iatrogenic
७- अन्य कारण Others

उपरोक्त श्रेणी को देखने के बाद इस बात का अन्दाजा लगाया जा सकता है कि बीमारियों का निदान किस श्रेणी के अन्तरगत आता है / फिर इसमें यह तलाश करनी होगी कि जो भी बीमारिया है वे [a] Acute है या [b] Semi acute है या [c] Chronic है या [d] Long lasting Disease condition है /

कितने समय तक आयुर्वेद का इलाज कराना चाहिये, यह इस बात पर निर्भर करता है कि तकलीफ कैसी है /

१- अगर तकलीफ acute है तो यह कुछ घन्टे में ही दवाओं से response कर जाती है जैसे पेट का दर्द, सिर का दर्द, दान्त का दर्द, वमन होना, हिचकी आना, पेट में ऐठन होना आदि / लेकिन यहां इन सबमे एक फर्क है / अगर दर्द कैन्सर का है, अगर सिर दर्द स्पान्दिलाइटिस या माइग्रेन का है, अगर दान्त का दर्द सड़े  हुये दान्त का है तो फिर मूल रोग की चिकित्सा ही करना एक मात्र उपाय है, / अब इसमे कितना समय लगेगा यह बताना बहुत मुश्किल होता है /

२- अन्य सभी बीमारियों मे आयुर्वेद का निर्देश है कि कम से कम ३० दिन तक दवा करना चाहिये / अगर ३० दिन में लाभ न मिले तो ४० दिन या ६० दिन या ९० दिन या १२० दिन या १८० दिन तक इलाज कराना चाहिये /

३- कुछ बीमारियों ऐसी होती हैं जिनमे समय सीमा सही सही निर्धारित नहीं की जा सकती / इसलिये इनमे देश , काल, परिस्तिथि के अनुसार दवाओं तथा परहेज का निर्धारण किया जाता है, जिसे वैद्य / आयुर्वेदिक चिकित्सक के बिना करना सम्भव नहीं होता है / इस श्रेणी में कष्ट साध्य, अति कष्ट साध्य रोग और असाध्य रोग आते है /

४- सुख साध्य रोग के लिये ऊपर बताई गयी [कालम सन्ख्या -२ ] समय सीमा ठीक और सही अन्कित की गयी है / 

कुछ हद तक Homoeopathic चिकित्सा में भी यही समय सीमा तथा बतायी गयी परिस्तिथियां लागू होती है,  ऐसा मैने अनुभव किया है /

A case of Chronic THROMBOCYTOPENIA ; Reduced Platelet production ; Treated successfully by Ayurvedic medicines on basis of the findings of Electro Tridosha Graphy; ETG AyurvedaScan Report


This is a case of an Allopathic physician aged 60 years, who suffered from Viral Dengue hyperpyrexia and allied syndromes like Muscular-skeletal joints and articulation problems in August, 2006. He took allopathic medicines for his ailments, which relieved his Dengue problem but he suffered from joints and other syndromes.

After Blood pathological examination , this came in his notice that his platelets counts became down upto 15 thousands, a normal count is 1 lack 50 thousands to 4 lack 50 thousand, that created an agony to physician. His Hemoglobin became 6 mg% and for that he required to transfuse blood. He was advised to take 40 milligrams STEROID daily. He was admitted SGPGI Lucknow for three months. The practice of treatment was in run throughout four and half years.

One patient of mine asked the Physician, that Dr DBBajpai is treating patient on the basis of the findings of a newly invented technology ETG, if he desire for Ayurvedic treatment, he should go to Dr Bajpai and consult him.

The physician came to me and narrated his all story, I suggested him to go for an ETG examination.

The following wordsheet will provide all the data.

On the basis of the data, it is concluded that the patient is having , three main problems;

1- Bowel’s pathophysiology is present
2- Hepatospleenomegaly is present
3- Blood anomaly is present

The following Ayurvedic medicines were prescribed;

a- Kutajghan vati one pills
b- Arogyavardhini vati one pills
c- Gandhak Rasaayan one pills

To be taken Morning and Evening one dose daily with plain water

d- Sarivadyaasav 20 milliliters with equal quantity of water after Lunch and after Dinner

Patient was advised to carry treatment 90 days continuous.

On 6th January 2011 , pt came and told me that he is not taking STEROID from last two months and his swelling of whole body is vanished and other syndromes are relieved. His Blood platelets count is now 80 Thousand and he is feeling well than before.

I advised him to carry similar medicines for again 60 days. I told him that medicines will be changed after second ETG AyurvedaScan findings.

Comments; Ayurvedic treatment based on the findings of ETG AyurvedaScan is always fruitful and result oriented, which we have experienced after treating thousands of cases in our practice.

ई०टी०जी० आधारित एक आरोग्य प्राप्ति का केस ; रक्त की प्लेट्लेट्स का अत्यधिक कम हो जाने की बीमारी ; A case of 15000 Fifteen Thousand PLATELETS Blood counts


यह केस एक एलोपैथी के ६० साल की उम्र के चिकित्सक का है, जिनको साढे चार साल पहले अगस्त, सन २००६ में “वाइरल डेन्गू बुखार” हुआ था / इनका कई माह तक एलोपैथी का इलाज चला, जिससे डेन्गू बुखार तो चला गया लेकिन जोड़ो और मान्स्पेशियों का दर्द तथा दूसरी शिकायतें बनी रही /

रक्त की जान्च करने पर पता चला कि इनके रक्त की प्लेट्लेट्स १५ हजार और हीमोग्लोबिन ६ मिलीग्राम प्रतिशत तक पहुन्च गया है / इस हालत में इनको रक्त चढवाना पड़ा और चिकित्सकों ने इनको ४० मिलीग्राम स्टेरायड प्रतिदिन लेते रहने के लिये कहा / लगभग चार साल से रक्त चढवाने और Steroid खाने का सिल्सिला चल रहा था / SGPGI, Lucknow मे तीन माह भर्ती रह कर इलाज करवाया लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ /

किसी मरीज ने इन डाक्टर साहब को आयुर्वेद की नई आविष्कृत की गयी तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के बारे मे बताया / दिनान्क ०६ अक्टूबर २०१० को यह चिकित्सक महोदय मेरे पास consultation के लिये आये / मैने उनसे कहा कि आपको एक ई०टी०जी० परीक्षण करना पड़ेगा तभी पता चल पायेगा कि आपके शरीर के अन्दर क्या गड़्बड़ी है /

उनका परीक्षण इसी दिन किया गया जिसमें निम्न फाइन्डिन्ग्स आयीं /

[१] त्रिदोष ; [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]

कफ १३४.३१ ई०वी० प्रतिशत
पित्त १११.०९ ” ”
वात ६३.५६ ” ”

[२] त्रिदोष भेद ; [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]

{सभी मान ई०वी० में e.v. means ETG value}

भ्राजक पित्त १४५.८७
लोचक पित्त १०४.८६
पाचक पित्त ८५.५५
साधक पित्त ८३.९४
अवलम्बन कफ ७८.०५
रन्जक पित्त ७६.१९
रसन कफ ७१.४४
उदान वात ६९.५९
श्लेष्मन कफ ६४.१७
व्यान वात ५९.२२
समान वात ४०.१५

[समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]

[3] सप्त धातुये ; [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]
मेद १२२.१३
मान्स १२०.९३
रस ११४.८०
शुक्र १११.१३
मज्जा १०८.३४
रक्त १०५.८२
अस्थि १०४.५३

[४] शरीर में व्याप्त कार्य विकृति Pathophysiology और विकृति Pathology की उपस्तिथि की स्तिथियां [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]
Autonomic Nervous system 157.14
Thoracic region/spine/cage 140.00
Body Fat 122.13
Liver/Pancrease/spleen 117.50
Metabolism 114.00
Blood Anomalies 105.80
Skin ailments 106.00
Thyroid pathophysiology 61.67
Spleen pathophysiology 60.00
Thymus pathophysiology 57.14
Liver pathophysiology 54.00
Epigastrium pathophysio 46.00
Abdomen/Intestines/colon 44.00
Prostate pathophysio 37.21
Intestines pathophysiology 35.56

[5] रोग निदान / Diagnosis of disease conditions
a- Blood anomaly
b- Bowel’s pathophysiology
c- Colon Inflammatory condition with swelling and hardness
d- Dull mental behaviour
e- Enlarged Liver with poor function
f- Hormonal anomalies
g- Pancreatic pathophysiology
h- Renal anomalies
i- Spleenomegaly ? Hepatospleenomegaly
j- Swelling in whole body

ई०टी० जी० आधारित रोग निर्धारण और औषधियों का चयन

रोगी जब परामर्श और चिकित्सा व्यवस्था के लिये आया तो ई०टी०जी० रिपोर्ट के आधार पर निष्कर्श निकाला गया कि इस रोगी को “कफ़ज पित्तज” व्याधि है / त्रिदोष भेद में यही बात सामने आयी /

सप्त धातुयें भी सामान्य से अधिक की ओर अपना झुकाव दर्शा रहीं है / इसका अर्थ यह निकला कि इस रोगी का मेटाबालिज्म की प्रक्रिया अधिक की ओर और तेज है / यह मरीज की Pathological condition को इन्गित कर रहा है /

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी की पुरी रिपोर्ट का अध्ध्यन करने के पश्चात conclusion में तीन बातें समझ में आयी/

१- मरीज की आन्तों में सूजन है यानी Bowel’s Pathophysiology है /

२- यकृत और प्लीहा दोनों का बढा होना

३- रक्त की दुष्टि यानी Blood Anomaly

उक्त निष्कर्ष को ध्यान में रखते हुये इस मरीज को निम्न औषधियां prescribe की गयी /

अ- कुटज घन वटी १ गोली ; आन्तों की सूजन और विकृति के लिये
आरोग्य वर्धिनी वटी १ गोली ; यकृत प्लीहा के विकार के लिये
गन्धक रसायन १ गोली ; रक्त दुष्टि के लिये

सभी गोलियां एक साथ सुबह और शाम दिन में दो बार सादे पानी से खाने के लिये निर्देशित किया गया /

ब- सारिवद्यासव २५ मिलीलीटर बराबर पानी मिलाकर दोपहर और रात भोजन करने के बाद ; सप्त धातुओं की पुष्टि के लिये

रोगी से कहा गया कि वह इन सब दवाओं को लगातार ९० दिन तक सेवन करे , बाद मे प्रामर्श करे /

दिनान्क ०६ जनवरी २०११ को मरीज दिखाने आया / उसके सारे शरीर की सूजन एक्दम ठीक थी / मरीज रोजाना ४० मिलीग्राम steroid खाता था, वह अब उसने खाना बन्द कर दिया है , क्योंकि उसको steroid खाने की अब जरूरत नही लगी / उसका platelets count १५ हजार से बढ कर ८० हजार हो गया है, सामन्य तया शरीर में platelets की सन्ख्या रक्त में १ लाख पचास हजार से लेकर ४ लाख तक होती है / उसे बार बार हर पन्द्रह दिनों में रक्त चढवाना पड़्ता था, वह दो महीने से नही करना पड़ा / जो अन्य तकलीफें थी जैसे शरीर में फुन्सियां निकलना और शरीर में काले चकत्ते पड़ना, वह सब ठीक है /

चिकित्सक महोदय से मैने कहा कि आप अभि यही दवा खाते रहिये और मार्च २०११ में एक दूसरा ई०टी०जी० परीक्शण करा ले, उसके बाद जो भी फाइन्डिन्ग्स आयेंगी , तदनुसार दवा परिवर्तन कर दिया जायेगा /

Comments; आधुनिक चिकित्सा विग्यान में इस बीमारी  के इलाज के लिये केवल Steroid दवा के अलावा अन्य कोई दूसरी दवा है ही नहीं / सभी को पता है कि Steroid  का उपयोग शरीर के लिये कितना खतरनाक है / आयुर्वेद के इलाज के लिये ई०टी०जी० तकनीक आधारित चिकित्सा हमेशा फायदा देती है / 

SEXUAL POWER ; Confirmation of Sexual Power intensity of a Human being by Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan system


Many persons are willing to know the intensity of their SEXUAL POWER by any source. Till today no machine and mechanical parameters are available to establish sexual power by any technology.

But it is possible today and sexual power can be measured by mechanical means. By virtue of Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan system, now it is possible to establish the SEXUAL POWER of any human being in measured intensity.

The ETG system measures many parameters systemwise, sectorwise, traces wise, ayurvedic fundamental-wise and so on . PROSTATE health condition is scanned by ETG system. So is of the SAPTA dhatu.

 The SAPTA DHATU of Ayurveda is considered , similar to PATHOLOGY of Modern western medicine. Intensity of Prostate value shows the Sexual Power intensity of a human being, how is the person’s sexual drive. One of the Sapta Dhatu SHUKRA is evaluated and this shows the Quality and quantity of Semen. The passion of sexual ability and erotic sensibility can be measured by correlating to Autonomic nervous system and Brain faculties evaluation. .

In our studies, we have found that persons, which have very low intensity of PROSTATE pathophysiology, say below 30 e.v. , they are almost IMPOTENT and have no sexual desire. Upper signification of the above said parameters, shows intensity of Sexual desire in increasing level upto 90 e.v., which we consider a normal level. Sexual potency increases according to touch level of Normal parameters.

Strong sexual passion and erotic sensibility is seen in those persons, who have 95 e.v. to 99 e.v.

Excessive sexual passion and erotism is seen in those , who have beyond the above said parameter. Those who have 120 e.v. to more upper limit causes more passion to sexual behaviour.

We have seen that some persons have temporary IMPOTENCY, Their above given parameters , when comes in normal limit and when we see that person says that he have no sexual desire, we consider it a temporary and circumstantial problem with the person. It may be happen due to long travels by Railway, by Car or by any means. We have observed that some persons are impotent due to their workings both physical and mental. The re is other reasons, which are varying from person to person.

In these persons we have given Ayurvedic medicine and their impotency is restablished and as usual as it was in earliest forms. Now it is possible to treat either less sexual desire or excessive desire for sexual intercourses by Ayurveda.

आयुर्वेदीय पन्चकर्म के नकारात्मक पहलू ; Negative Aspect of AYURVEDIC PACHAKARMA


आजकल आयुर्वेदीय पन्चकर्म की बड़ी चर्चा हो रही है / जिस आयुर्वेद के स्नातक को देखो वही पन्चकर्म की चिकित्सा का ढिन्ढोरा पीटे चला जा रहा है / जैसे कि कोई कारूं का खजाना हाथ लग गया हो कि बस अब सब कोई पन्चकर्म कराये और अपने सारे शरीर की तकलीफ से मुक्ती मिल जाये /

यह सब बेकार की सोच है / मुझे सैकड़ों की सन्ख्या मे ऐसे मरीज मिले है जिन्होने पन्चकर्म चिकित्सा करायी और उनको कोई भी लाभ नहीं मिला, उलटे उनकी तकलीफ और अधिक जटिल हो गयी और रोग की जड़े और ज्यादा मजबूत हो गयी /

मैने एक सर्वे करके यह निचोड़ निकाला है / कानपुर शहर के अन्दर के कुछ पन्चकर्म केन्द्र, उत्तर प्रदेश राज्य के अन्य शहरों मे कार्य रत पन्चकर्म केन्द्र और भारत के कई अन्य राज्यों के पन्चकर्म केन्द्रों से इलाज कराकर लौटे मरीजों से प्राप्त जानकारी के आधार पर जो जानकारी उभर कर सामने आयी है, उससे यही निष्कर्स निकला कि पन्चकर्म चिकित्सा व्यवस्था के नाम पर आयुर्वेद के नाम से केवल दुकाने चलायी जा रही है, जिनसे न केवल इस आयुर्वेद की इस चिकित्सा विधि का व्यवसायी करण होने का सच सामने आ गया है /

किसी जमाने में केरल के पन्चकर्म का जिक्र इस बात के लिये किया जाता था कि केरलीय पन्चकर्म के उपयोग के द्वारा शरीर का सुन्दरीकरण किया जा सकता है / केरल का पन्चकर्म विग्यान और पन्चकर्म प्रथा शास्त्रोक्त आयुर्वेद की प्रथा से थोड़ा अलग है / इसका कारण है कि आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान जितना उत्तरीय भारत मे विकसित हुआ , वह दक्षिण भारत में नही हुआ / केरलीय पन्चकर्म परमपरागत शरीर सौस्ठव को बढाने और शरीर को मजबूत बनाने की प्रक्रिया का एक भाग मात्र था / यह केरल की मार्शल आर्ट “उट्टापट्टु” से सम्बन्धित हो सकता है / केरल की मार्शल आर्ट को अपनाने वाले अपने शरीर को स्वस्थ, मजबूत और ठोस बनाने के लिये तथा मार्शल आर्ट की प्रैक्टिस से उतपन्न थकावट को दूर करने के लिये पन्चकर्म का सहारा लेते होन्गे / इस प्रकार कालान्तर में यह विधि प्रचिलित होते होते अपने मूल उद्देश्य से भटग गयी और व्यवसायी करण की स्तिथि में आ गयी /

उत्तरीय भारत में शास्त्रीय आयुर्वेद की चिकित्सा का विकास हुआ / इस विकास मे ऐसा लगता है कि आयुर्वेद के तत्कालीन चिकित्सकों को इस बात का पता चला हो कि कफ दोष को वमन द्वारा ठीक किया जा सकता है या कफ दोष कुपित अवस्था को कम अथवा समान्य किया जा सकता है / इसीलिये वमन का उपयोग अनुकूल लगा होगा / चूकि पित्त के स्थान शरीर के एक्दम मिडिल मे होते है, इसलिये आयुर्वेद के चिकित्सकों की धारणा बनी होगी कि इस स्थान से दोष निकालने की प्रक्रिया सहज नही होगी क्योंकि वमन कराना आसान है , जिससे कफ दोष शान्त होगा लेकिन पित्त दोष को निकालने के लिये उनको यही समझ में आया होगा कि विरेचन के द्वारा ही पित्त दोष को शान्त किया जा सकता है, इसलिये विरेचन द्रव्यों का उपयोग विकसित किया गया होगा / वात दोष की शान्ति के लिये वस्ति यन्त्रों का आविस्कार किया गया होगा और इस प्रकार से दो प्रकार की वस्तियों का प्रचलन आयुर्वेद में हुआ होगा / कुल मिलाकर यह चार कर्म हुये / इसमें आयुर्वेद के मनीषियों ने एक कर्म और जोड़ दिया जिसे नस्य कहते है / इसका कारण यह समझ में आता है कि उर्ध्व जत्रु रोगों की शान्ति के लिये तथा कफ दोष के पान्च भेदों में से कुछ की शान्ति के लिये नस्य की प्रक्रिया अपनायी होगी / इस नस्य विधान का एक कारण और समझ में आता है कि जव वमन, विरेचन, वस्ति द्वारा शरीर की शुध्धि कर दी गयी तो यह शुद्धि तो शरीर की हुयी लेकिन मन और विचारों तथा मस्तिष्क की शुध्धि के लिये क्या किया गया ? यह एक यक्ष प्रश्न आयुर्वेदग्यों के सामने आया होगा क्योंकि सत्व, रज और तम इन तीन गुणों को समान्य रखने के लिये क्या किया गया ? इसलिये आयुर्वेद के मनीषियों नें नस्य विधि का विकास किया होगा, जो सर्वथा उचित लगता है / इस नस्य को मिलाकर आयुर्वेद का पन्चकर्म विधान बनता है /

आयुर्वेद कहता है कि सभी बीमारियों और सभी अवस्था या उम्र के लोगों का पन्चकर्म नहीं करना चाहिये / केवल चुने हुये रोगियों का पन्चकर्म किया जाना चाहिये / किन किन लोगों का पन्चकर्म किया जा सकता है यह आयुर्वेद की शाश्त्रीय पुस्तकों में बतलाया गया है /

खेद की बात यह है कि पन्चकर्म का व्यवसायी करण हो गया है,इसका एक मात्र कारण यह है कि इस तरह के पन्चकर्म प्रलोभन से चिकित्सक को मोटी रकम मिलती है जो साधारण तौर पर सामान्य प्रैक्टिस करके कोई भी आयुर्वेदिक चिकित्सक नहीं कमा सकता /

पन्चकर्म का एक एक पैकेज हजारों रुपये का होता है जिसे कोई भी गरीब आदमी अफोर्ड नहीं कर सकता है / इस प्रकार से यह चिकित्सा केवल अमीरों और पैसे वालो के स्तर के लोगों तक सीमित रह जाती है /

Ayurveda Eight fold’s among is RASAYANA ; an overview of this THERAPY


AYURVEDA is divided in eight folds to understand and cover over all in view of every corner coverage of the treatment. The olden practitioners never left any corner that could be said uncover the treatment of diseases. These eight folds are ;

1- Shalya that means Surgery. The Surgical procedures are narrated in classical books of Ayurveda
2- Salaakya that means Treatment including surgical procedures of ENT Ophthalmology etc.
3- Kaumar Bhritya that means Midwifery, Gynecology and pediatric
4- Kaay chikitsa that means General and specific practice of medicine
5- Agad tantra that means Toxicological treatment including environment, infections etc
6- Bhut vidya that means Psychiatry and mental health
7- Rasayan that means treatment of pathological disorders originated disease conditions, Geriatric, maintenance of health conditions etc etc
8- Bajikaran that means maintenance of health physically and mentally to achieve the goal of Long life

Here RASAYANA part is taken for discussion. The fact is that Rasayan is closely related to one of the fundamental basics of Ayurveda medical system SAPTA DHATU.. Sapta dhatus are seven in numbers and are recognized below;

1- RAS
2- RAKTA
3- MANS
4- MED
5- ASTHI
6- MAJJA
7- SHUKRA

The above mentioned titles are closely related with the PATHOLOGY of the Modern Western Medicine. It seems to us that our ancestors had recognized and perceived the disease phenomenon right from the beginning to the end. That’s why it looks they had categorized the pathology in seven section as they had conceived.

RAS dhatu is actually closely related to METABOLIC DISORDERS. RASAYANA word is divided in two words RAS + AYAN. If we see Charak samhita and read the RASAYANA chapter, we observe that this chapter covers the over all seven segments of SAPTA DHATU. The mentioned medications and formulae are covering the RAS and other anomalies of AYURVEDIC PATHOLOGY.

Ancestor Practitioner of Ayurveda observed that whatever we eat that is digested and assimilated and thus makes BLOOD, again this blood nourishes FLESH and FAT and BONES and BONE MARROW and lastly the vital part SEMEN, which provides body building and stamina. The systematic evaluation like this, can be treated easily by RASAYANA medicine, mentioned in the classical books of AYURVEDA.

We have evaluated the above mentioned statements in the light of Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan system’s findings and we have perceived that certain medicine work satisfactorily. We are working on this line and we are getting good results. Further research work is still in progress.

OBESITY ; A case of OBESITY treated on the line of the findings of ETG AyurvedaScan ; Patient’s weight reduces from “102” KILLOGRAMS to “72” KILLOGRAMS ; A detailed study of the case


पिछले साल फरवरी माह मे एक १६ साल का लड़्का अपने मोटापे का इलाज कराने हमारे केन्द्र में आया, जिसका वजन एक सॊ दो किलो [102 Kilo] था / लड़्के के साथ उसके माता पिता भी थे /

This is the first ETG AyurvedaScan record.

मरीज का उस समय का फोटॊग्राफ , जब वह हमारे पास अपनी चिकित्सा कराने आया था/ यह फोटॊ फरवरी २००९ की है , जब इस मरीज का वजन १०२ किलो था /

नीचे दिया फोटॊग्राफ उस समय का है, जब उसकी चिकित्सा की गयी और उसका वजन ७२ किलो तक आ गया है / यह फोटॊ नबम्बर २०१० की है /

This is the second ETG AyurvedaScan record.

इस मरीज के दूसरे और अन्य एलोपैथिक चिकित्सकों द्वारा किये गये इलाज के दरमियान , कराये गये पैथोलाजिकल परीक्षण की रिपोर्ट्स /

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This is the  third recorded on the 30th October 2010.

लड़्के के मातापिता उसके मोटापे से परेशान थे / उन्होने पहले तीन साल तक कानपुर के नामी गिरामी एलोपैथी के चिकित्सकों से इलाज कराया, जिसका उनको कोई फायदा नहीं मिला, बल्कि इलाज करते करते उसका वजन और अधिक बढ गया / लड़्के के माता पिता आयुर्वेद और होम्योपैथी का इलाज कराना नहीं चाहते थे, क्योकि उन्को इन चिकित्सा पद्ध्यतियों पर विश्वास नहीं था /

जब तीन साल से अधिक एलोपैथिक चिकित्सा का प्रयोग कर चुके और उससे कोई लाभ नही मिला और उनके पास कोई अन्य उपाय नहीं बचा और एलोपैथिक चिकित्सा से उनका विश्वास डगमगाने लगा ्तो “मरता क्या न करता वाली स्तिथि मे आ गये /

उनके एक रिश्ते दार ने सलाह दी कि आयुर्वेदिक इलाज कराना चाहें तो डा० डी०बी० बाजपेयी के पास चले / कोई और रास्ता जब नहीं बचा तो हमारे पास आ गये /

जब हमारे पास आये तो हमने सलाह दी कि पहले एक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परिक्षण कराये तभी पता चलेगा कि शरीर के अन्दर क्या गड़बड़ हो रही है ? बिना इसके पता नही चलेगा कि शरीर का कौन सा भाग बवाल पैदा कर रहा है /

लड़्के का ई०टी०जी० परिक्शण किया गया जिसकी findings नीचे लिखी हुयी है /

[यह रिपोर्ट समय के अभाव के कारण अधुरी है और पूरी नहीं है / इस मरीज की रिपोट तथा अन्य तथ्य समय समय पर प्रस्तुत किये जायेन्गे]

SPORT’S INJURIES and HOMOEOPATHIC REMEDIES


Homoeopathic medical sciemce have tremendous collection of remedies for Sport’s Injuries.

Some of the remedies can be used very safely in the following injuries conditions.

1- Homoeopathic medicine  – Bellis perrenis 200 – can be used in Injuries of the deeper nature , deeper tissues damages and after major surgical works

2- Concieled Injuries- Arnica montana 200 & 1000

3- Lacerated injuries – Calendula External and Calendula 200 internally

4- Sprained injuries – Rhustox External and Rhus tox internal in 200 potency

5- Bone Injuries – Symphytum 200 & in 1000 potency

6-Nerve Injury – Hypericum 200 & 1000

7- Glandular injury – Conium 200

8- Punctured injury – Ledum Pal 200 and 1000

9- Capillary injury – Hammamellis 200 and 1000

10- Incised Injury – Staphysagria 200 and 1000 and 10M potency

11-Rubbing in juries- Allium cepa 200 and 1000

12- Burn injury – Cantharis external and cantharis 200 internal


13- After operation , much oozing of Blood and for shock after surgical operation – Strontia 6x and 30 or 200

I have used these medicine in injuries with confident and are totally safe. Repeatition of the doses are required frequently in acute stage.

These medicines have no side or adverse effects of any kind and totally safe.

To avoid fatigue  & muscular strain, ARNICA 200 one dose daily is recommended  for ease.

जब ब्लड प्रेसर की दवा खाते रहने के बाद भी ब्लड प्रेसर समान्य न हो तब क्या करे…………


बहुत से ऐसे मरीजों को देखा है जिनको एलोपैथी की ब्लड प्रेसर की दवा खाने के बाद भी उनका ब्लड प्रेसर सामान्य नहीं होता, जबकि उनकी सभी तरह की आधुनिक जान्च कर ली गयीं और सब कुछ समान्य निकला या सामान्य निकलता है /

मैने ऐसे मरीजों को काफी समय तक Monitor किया है, बिना कोई अतिरिक्त दवा के / वे जो भी Allopathy की दवा खा रहे थे, मैने उनको वही दवा , जिस Doctor ने prescribe की थी, Doctor की सलाह लेकर लगातार लेने की सलाह दी / लेकिन इस सबके बाव्जूद उनका Blood Pressure कम नहीं हुआ /

ऐसे बहुत से लोग हैं जिनको इस तरह की परेशानी बनी रहती है, उनको मै कुछ सुझाव दे रहा हू, जिन पर अमल करने से फायदा हो सकता है /

आयोडीन जैसे नमक और सादा समुद्री नमक खाना बन्द कर दें और इसकी जगह सेन्धा नमक का प्रयोग करना शुरू कर दें / घर के सभी लोग सेन्धा नमक खाने से बहुत सी आये दिन की बीमारियों से निजात पा जायेन्गे / सेन्धा नमक खने से Blood Pressure कम होने लगता है /
अपना पेट साफ रखे / परन्तु इसके लिये कोई विरेचक चूर्ण या दस्त साफ़ लाने वाला प्दार्थ न ले / ज्यादा कब्ज की हालत में अमल्तास को पानी में भिगोकर खाने के पहले सेवन करें / अमल्तास की मात्रा कितनी लेनी है , बेह्तर है , अपने नजदीक के किसी वैद्य या हकीम से पूछ लें / हलका विरेचन के लिये त्रिफला चूर्ण का प्रयोग कर सकते है /
सुबह का नश्ता बन्द कर दें और केवल एक गिलास फलों का रस या सादा दूध सेवन करें /
दोपहर में हल्का भोजन लें और अपनी भूख से कम खायें /
अचार, दाल मोठ, नमकीन सब बन्द कर दें / जब भुख लगे तब फल या फलों का रस लें /
जिनका ब्लड प्रेसर बढा हुआ रहता है उनका इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ परीक्षण में कई तरह की कार्य विकृतियां मिलती है, जिनमें Hydro Musculosis, Epigastritis, swelling bowels pathophysiology इत्यादि बातें शामिल होती है / इन कारणॊं का इलाज कर देने से बढा हुआ blood pressure कम होने लगता है /
जब allopathy दवा खाने के बाद भी blood pressure कम नही होता तो चिकित्सक दवा की मात्रा बढा देते है / ऐसा करना ठीक नहीं होता / इससे अछ्छा है कि allopathy दवा खाने के साथ साथ यदि आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवा खाये तो अधिक फायदा उठा सकते है / अपने नजदीक के किसी वैद्य या होम्योपैथिक चिकित्सक से सम्पर्क करें /
मान्सिक तनाव से दूर रहें और कोशिश करें कि मन को शान्त रखें / आपकी किसी समस्या का हल नही हो रहा है तो उस समस्या के हल के लिये प्रयास करे और सब कुछ ईश्वर के ऊपर छोड दें / यह बात हमेशा ध्यान में रखें कि सब कुछ और बहुत कुछ हम नही कर सकते / मन में इस बात का विश्वास करें और हमेशा POSITIVE THINKING को दिशा दें /

अपने सभी कार्य नियमित करें / कम से कम ७ घन्टा आराम करेम / मश्तिष्क यदि ज्यादा काम करने से थक जाये तो बीच बीच में थोड़ी थोड़ॊ देर के लिये आराम दे /

इन सब उपायों को करने से blood pressure अवश्य सामान्य होगा, इसका विश्वास करें / जब ऐसे उपाय करने से सैकड़ॊ लोगो के blood pressure सामान्य हो गये है तो उन सबका भि सामन्य होगा , जो यह सलाह अपनायेन्गे /

BRAIN TUMOUR CASE ; Recording of the ETG AyurvedaScan Tracings of a patient, suffering from ‘’ BRAIN TUMOUR ‘’ for the observation to Ayurvedic and other system’s practitioners……..treatment based on the data of ETG AyurvedaScan and Ayurvedic remedies saved the life of patient..


Below is the trace record of a BRAIN TUMOUR patient , done by the Electro Tridosha Graphy ETG AyurvedaScan system.

Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan  trace record of a BRAIN TUMOUR Patient

Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan trace record of a BRAIN TUMOUR Patient

The trace record no. 1 is showing the tendency of HIGH BLOOD PRESSURE, which was confirmed after Blood pressure reading.

The trace record no.3 is showing the presence of BRAIN ANOMALY. All the elven waves , a,b,c,d,e,s,h,l,m,n,o both vertically and Horizontally are depressed and not well elevated.

The trace record no.3 is badly bending towards clockwise direction and is filing wide gap in between d & e waves, The interpretation is showing inflammatory condition of the BRAIN PARTS.

The ETG report data of NERVOUS SYSTEM is ;
• Autonomous Nervous system 364.29
• Cerebral medulla brain 90.00
• Temporal Brain 90.00
• Frontal Brain 66.67
• Pareital Brain 45.00
• Occipital Brain 58.33

CTScan and MRI scan confirmed the diagnosis of the BRAIN TUMOUR.

Below is the reports of the patient, done by the physician.

The Nerosurgeons left the case untreated and then patient came to me for his treatment.

FOLLOW-UP;

On request of patient’s  family members, I took  this case for treatment. Though  Allopathic Doctors said them that they have no treatment for this condition.

Now I am giving him AYURVEDIC MEDICINES. The patient condition improved after  one week treatment. Earlier he could not walk smoothly, on walk , his lower limbs was not coordinating and goes to either sides. His appetite was not well. He could not sleep well.

After one week of Ayurvedic treatment , he improoved in these problems. I have given him another one week medicines. I am collecting data, how he got this condition?

FOLLOW-UP ;  on date 05,09,2010

Patient well responded with the Ayurvedic medicine. His General physical condition improved well. Generally he have no problem and doing his routine work well. He is a shop keeper and he is doing his routine work as usual.

I instructed him , to not to do any vigourous work and he should take  sufficient rest both physical and mental.

His blood pressure is comming down slowly and gradually and is 135/98 mm Hg, which was earlier 198/124 mmHg,  his pulse rate was high but  now it is 92 per minute.

His physical condition is better comparatively than before at present. He is advised to continue Ayurvedic medicine.

FOLLOW-UP OF THE CASE / on  dated 18.09.2001

Patient  is not feeling any physical or mental  problem. He is carrying AYURVEDIC MEDICINE regularly. I have instructed him that he should change his life style and should not wake in night. He should take atleast 7 hours complete sleep. He should keep his diet acording to the diet Card, which I provide to patient. He should avoide strictly copulation at least six month.

SPECIAL NOTES TO DOCTORS / COLLEAGUES ;

Any Physican , Ayurvedic doctors, any branch of Medical practitioner, if want to see or check the patient, they can go directly to patient’s home  and they can examine the patient in his home. I will provide the address of the patient on request.

Any person, any similar patient, if desire to see and like to meet the patient in treatment in his home for query, the address of the patient is available on request.