दिल की धड़कन के घटने और बढने की बीमारी ; Tachycardia and Bradycardia


अन्गरेजी मे Rapid Puls और Low Puls rate तथा  मेडिकल साइन्स में Tachycardia and Bradycardia जैसे शब्द नब्ज की गति को पहचानने के लिये उपयोग करते है /

लाखों की सन्ख्या में रिकार्ड किये गये ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के परीक्षण करते समय यह आदत पड़ गयी है कि जैसे ही पहली ट्रेस रिकार्ड होती है , मरीज के बारे में काफी कुछ समझ में आ जाता है कि इसे क्या बीमारी है ? सबसे पहले आबजर्वेशन में यह बात आती है कि इसकी धड़कन प्रति मिनट कितनी है और इसकी रिदम कैसी है/ धड़कन के कम होने से यानी ६० धड़कन से कम बीट होने पर यह मान लिया जाता है कि इस व्यक्ति को ध्ड़कन कम होने की tendency  है अथवा ८५ से अधिक धड़्कन होने पर यह अन्दाजा लग जाता है कि इसे  धड़्कन अधिक होने की Tendency है /  इसके साथ रिदम यानी नाड़ी की चाल अगर घटती बढ़ती है तो इसका मतलब यह होता है कि इसे electrolytic imbalances  की प्रोब्लेम्स है /

आयुर्वेद की निदान ग्यान की इस मेकेनिकल तकनीक से इस पहली ट्रेस के रिकार्ड से ही प्रारम्भिक तौर पर मरीज के बारे मे बहुत कुछ पता चल जाता है , जैसे कि वात पित्त कफ की उपस्तिथि और शरीर में मौजूद intensity की सप्त धातुओं की स्तिथि और आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तों से जुड़ी बहुत सी जानकारियां /

हलान्कि पूरे निदान ग्यान और इलाज के लिये ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की पूरी रिपोर्ट बहुत जरूरी है, लेकिन emergent condition मे तुरत फुरत चिकित्सा व्यवस्था के लिये प्रारम्भिक इलाज और केस के मैनेज्मेन्ट के लिये पहली ट्रेस से ही इलाज कन्फर्म करके Ayurvedic Emergency Treatment with management की व्यवस्था शुरू कर सकते हैं /

कम धड़कन में और अधिक धड़कन में जवाहर मोहरा, याकूती और योगेन्द्र रस का उपयोग महत्व पूर्ण है, emergent condition में इसके एक या दो खुराक खिलाने से मरीज की स्तिथि सम्भल जाती है और सामान्य होने लगता है / साथ साथ यदि रिपोर्ट पर आधारित इलाज करते हैं तो शीघ्र लाभ होता है /

ऊपरोक्त बतायी गयी औषधियों में electrolytic imbalance को सुधारने के लिये बहुत कीमती दवाओं का उपयोग किया जाता है, जिससे सोडियम, पोटैसियम, कैल्सियम, आयरन, मैग्नेसियम, सेलेनियम, फास्फेट्स आदि की पूर्ति हो जाती है जिससे दिल की धड़कन कम या अधिक होने वाले फिजियोलाजिकल फेनामेनान को सामान्य स्तर पर ला देती है / इसी स्तर पर आकर मरीज अपने को स्वस्थय समझने लगता है और उसका Basic Metabolic rate भी सुधर जाता है /

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