बवासीर

काशीसादि तैल ; बवासीर के लिये अक्सीर आयुर्वेदिक औषधि ; KASHISADI TAIL ; A VALUABLE Remedy for Heamorrhoids and Ano-rectal problems


बवासीर या अर्श या Piles या Heamorrhoids, कुछ भी बता लीजिये, यह सब गुदा से सम्बन्धित रोग है यानी इन्हे Ano-rectal problems कह सकते है /

आयुर्वेद इस रोग की व्याख्या बहुत logic तरीके से करता है, जो मोटा मोटी ठीक समझ में आती है , यदि इसे आधुनिक चिकित्सा विग्यान के डृष्टिकोण से देखे / विग्यान सम्मत बात यह है कि यदि साइन्स के गूढ पचडे मे न पडे तो यह तकलीफ बड़ी आन्त के अन्तिम हिस्से की यानी गुदा की मान्स्पेशियों की जो मल त्याग के समय में खुल जाती है और मल त्याग के बाद सिकुड़ जाती हैं / बड़ी आन्त के किसी हिस्से यानी ascending colon अथवा decending colon अथवा transversecolon में होने वाले किसी तरह के inflammatory condition की inflammatory metastasis के कारण यह गुदा की मान्स्पेशियों को प्रभावित करती है और फिर इस मान्सपेशी का एक लम्बवत छोटा हिस्सा सूजन से आक्रान्त होता है , जो पहले हल्का सा दर्द करता है , वह भी मल त्याग के समय , जिसमें कान्टा जैसा चुभने, बार बार खुजली होना, खुजलाने मे बहुत आनन्द आना, गुदा में हल्का दर्द आदि sensations होते है /

कुछ अवस्थाये ऐसी होती है जिनमें मुख्य रोग के साथ बवासीर एक associate disorders बन कर पैदा हो जाती है / जैसे during preganancy अथवा hard constipation के कारण मल का आन्तों के

अन्दर सूख जाना या बहुत कड़ा हो जाना और फिर मल त्याग के समय बहुत जोत लगाकर पाखाना बाहर निकालने की कोशिश करना, कभी कभी पतले दस्त, आंव आना और इसके कारण गुदा में जलन आदि पैदा होकर गुदा की गोलाई के किनारे किनारे बहुत छोटे छोटे मस्से पैदा हो जाना, जो बाद में बढते रहते हैं /

इस प्रकार की अनुभूति वाले लक्षण की प्रारम्भिक रोग की अवस्था मे यदि पथ्य परहेज और आयुर्वेदिक या होम्योपैथी की दवओं का इलाज किया जाता है तो बवासीर की यह बीमारी जड़ मूल से समाप्त हो जाती है और तब तक नही होती जब तक रोग पैदा होने वाले similar cicumstances उतनी ही intensity मे नही बन जाते /

रोग की अन्देखी करने और इलाज न करने या रोग के प्रति लापरवाही बरतने और समय पर इलाज न करने के कारण यह बराबर बढती रहती है और दिनो दिन prograssive condition की तरफ बढती जाती है, जिससे यह बाद में जटिल रोग मे तब्दील हो जाती है और आपरेशन कराने की नौबत आ जाती है या गुदा के Cancer की रूप रेखा बन जाती है /

एक साधारण सी तकलीफ जो श्रुआत के इलाज में care के साथ इलाज करने से ठीक हो सकती है , वह कैसे लापरवाही के कारण गुदा के कैन्सर में तब्दील हो जाती है और फिर ला-इलाज बन जाती है /

आयुर्वेद की शास्त्रोक्त दवा “काशीसादि तैल” KASHSADI TAIL बवासीर रोग को दूर करने के लिये बहुत महत्व पूर्ण औषधि है / इस दवा की सबसे अच्छी खूबी यही है कि यह दवा बवासीर की सभी अवस्थाओं में उतनी ही कारगर है और प्रभावशाली है जितनी बवासीर की छोटी से छोटी stage से लेकर बड़ी से बड़ी अवस्था हो अथवा cancerous stage पैदा हो गयी हो / यह बवासीर के मस्सों को छोटा करती है, सिकोड़्ती है और उन्हे वापस कुदरती अवस्था में ला देती है / अगर गुदा में घाव हो गये हों या मस्से फटकर खून बह रहा हो , ऐसा गुदा के बाहर हो या गुदा के अन्दर, इसके उपयोग से घाव भरकर खून बहना बन्द हो जाता है और बढे हुये मस्से सूखने लगते हैं /

इसे पखाना और आब-दस्त कर लेने के बाद उन्गली से गुदा के बाहर और अन्दर भरपूर लगाना चाहिये / जिन्हे ज्यादा तकलीफ हो वे इस तेल को दिन में कई बार और सोते समय अवश्य उपयोग करना चाहिये / रोग की बढी हुयी अवस्था में कई बार लगाना चाहिये /

साधारण बवासीर इसी तेल के उपयोग से ही ठीक हो जाती है / यदि रोग बहुत बढा हो तो आयुर्वेद की दवाओं का आनतरिक सेवन करना आवश्यक है / इसके साथ यदि पथ्य परहेज कर ले तो रोग बहुत शीघ्रता से ठीक होता है /

आयुर्वेदिक चिकित्सा कराने के लिये हमेशा किसी expert ayurvedicians से सलाह लेना चाहिये /

जड़ जमायी हुयी और न ठीक होने वाली कठिन से कठिन बवासीर का इलाज यदि आयुर्वेद की क्रान्तिकारी निदान ग्यान की तकनीक ETG AyurvedaScan का आधार लेकर किया जाता है, तो अवश्य रोग निर्मूल होता है और बवासीर रोग में आरोग्य प्राप्त होता है /

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बवासीर, अर्श, Piles या Hemorrhoids ; Curable by Ayurvedic treatment


 

Piles अथवा बवासीर का मर्ज जिसके होता है, उससे पूछिये कि उसका सुबह पाखाना करते समय अथवा उसके बाद उसका क्या हाल होता है ?

यह बहुत ही लापरवाह बीमारी है, जिसके हो जाती है , वह यह रोगी की लापरवाही का फायदा उठाकर बेपरवाह तरीके से बढती है और फिर जिन्दगी भर परेशान करती है /

आधुनिक चिकित्सा विग्यान में इस रोग का कोई सटीक इलाज नही है / अधिक बढ जाने पर आपरेशन कराना ही एक मात्र उपाय बच जाता है , लेकिन खान पान और जीवन शैली में परहेज न करने से यह फिर उसी स्वरूप में हो जाता है जैसा कि आपरेशन कराने के पहले था /

प्राकृतिक चिकित्सा, होम्योपैथी दोनों चिकित्सा विग्यान में इस रोग का अच्छा इलाज है / यदि रोग की प्रारम्भिक अवस्था हो तो इन दोनों चिकित्सा विग्यान की औषधियों का उपयोग करने से रोग का निर्मूलन अथवा रोग शान्ति अवश्य हो जाती है /

रोग के अधिक बढ जाने की अवस्था में प्राकृतिक उपचार के साथ साथ यदि होम्योपैथी की दवायें सेवन करता रहे तो बवासीर का रोग काबू में आ जाता है / लेकिन इसके लिये अपने नजदीक के किसी अधिक expert qualified physician के पास जाकर अथवा प्राकृतिक चिकित्सालय में रहकर इलाज कुछ दिन तक कराना चाहिये / बाद में जीवन शैली को लम्बे समय तक अपनाना चाहिये /

आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान में बवासीर रोग के इलाज के लिये हजारों योग और औषधियां और पन्चकर्म की विधियां दी गयी हैं , जिनके द्वारा रोगी का इलाज करके उसे आरोग्य प्रदान किया जा सकता है / किसी किसी को सम्पूर्ण ९९.९९ प्रतिशत और किसी को ९५ प्रतिशत तक आरोग्य प्राप्त हो जाता है, लेकिन सभी रोगी ठीक हो जाते है / यहां भी वही बात दोहराना चाहून्गा कि यह सब कुछ expert qualified Ayurvedic Physician की काबीलियत पर आधारित होता है कि इलाज करने वाला वैद्य कितना निपुण है /

मै यहां सामान्य और विशेष दोनों प्रकार की बवासीर के लिये tips और दवायें बता रहा हूं, जिनके उपयोग से बवासीर की चाहे जैसी तकलीफ हो अवश्य ठीक हो जाती है /

१- पहला प्रयोग “स्वमूत्र चिकित्सा” से सम्बन्धित है / रोजाना सुबह सबेरे उठकर पहले अपने पेशाब / मूत्र को किसी शीशे के बर्तन या प्लास्टिक के बर्तन मे इकठ्ठा करके सन्चित कर लें / जितना अधिक मात्रा में मूत्र का सन्चय कर लेन्गे उतना ही ठीक होगा / इसके लिये चाहे आपको सुबह काफी मात्रा में अतिरिक्त सादा पानी क्यों न पीना पडे, क्योंकि जब आप अतिरिक्त पानी पियेन्गे तो पेशाब भी ज्यादा होगी / आपको जब पाखाना की हाजत लगे तब पाखाना कर लें , लेकिन गुदा ANUS / RECTUM को सादे पानी से धोने की बजाय आप इसी एकत्र किये गये मूत्र से गुदा को धो डालिये / मूत्र से गुदा को धोने के बाद , गुदा को सादे पानी से मत धोइयेगा / अगर धोने का या साफ करने का मन करे तो एक या दो घन्टे बाद सादे पानी से गुदा को धो डालिये / वैसे सबसे अच्छा है , इसे न धोयें / इससे बवासीर बहुत शीघ्रता से ठीक होती है और इस प्रयोग से असाध्य से असाध्य बवासीर ठीक हो चुकी हैं /

२- आयुर्वेद की औषधि “अर्श कुठार रस” की दो गोली सुबह और शाम मठे के साथ अथवा दही की पतली नमकीन लस्सी के साथ रोजाना १२० दिन तक ले अथवा सेवन करें /

३- भोजन के बाद आयुर्वेद की शास्त्रोक्त दवा ” अभयारिष्ट” और “रोहितिकारिष्ट” चार चम्म्च लेकर इसके बराबर चार चम्मच सादा पानी मिलाकर lunch और dinner के बाद दोनों समय सेवन करें /

भोजन में परहेज करें / परहेज के लिये अपने नजदीक के किसी आयुर्वेद के चिकित्सक से सम्पर्क करें क्योंकि वही आपको सही सही बता सकता है कि आपको क्या खाना चाहिये और क्या नहीं ?

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित आयुर्वेद चिकित्सा करने से बवासीर के रोगी अवश्य ठीक होते हैं , चाहे उनकी कैसी भी स्तिथि हो / आधुनिक मशीन और विकसित किये गये ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन साफ्ट्वेयर की मदद से अब ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन की रिपोर्ट १५ मिनट के अन्दर बन कर मरीज को दे दी जाती है /