मानसिक रोग

SCHIZOPHRENIA WITH MANIACAL NATURE PATIENT’S CASE CONCLUSIVELY ANALYSED AYURVEDICALLY BY E.T.G. AYURVEDASCAN AND OTHER TESTS ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और दूसरे समबन्धित टेस्ट द्वारा आयुर्वेदिक रोग निदान एक सनकी और उन्मादित और आधे पागल मरीज का रोग विवेचनाऔर रोग कारण और रोग निदान


३३ साल के एक विवाहित नवयुवक ने अपनी तकलीफ के लिये कुछ दिन पहले मेरी क्लीनिक मे आकर अपना परीक्षण कराया है /

इस नवयुवक के साथ जिस तरह खि समस्या है वह मै अपके साथ शेयर कर रहा हू /

यह नवयुवक तेलन्गाना राज्य से आया है / उस समय रात के आठ बज रहे थे  और मै अपने काम मे व्यस्त था / यह युवक मेरी क्लीनिक मे आया और अपना परिचय दिया कि मै अभी अभी रेल से सफर करके आपके पास इलाज के, लिये आ रहा हूं /  मैने बताया कि इस समय रात को किसी तरह का परीक्षण नही किये जाते है  और सभी ई०टी०जी० परीक्शण सुबह किये जाते है जिनमे बीमारी की जान्च के हिसाब से समय लगता है / यह समय एक दिन से लेकर तीन अथवा चार दिन का हो सकता है /

मैने उसे आराम करने की सलाह दी और स्थानीय हॊटल मे जगह दिलाने लिये अपने अक सहयोगी को साथ मे भेज दिया /

बात आयी गयी हो गयी / सुबह मेरा सहयोगी मुझे जब मिला तो वह बहुत आग-बबूला होने लगा / उसने कहा कि रात को एक बजे तक वह उसे परेशान करता रहा और इस होटल से दूसरे होटल और तीसरे होटल और चौथे होटल का चक्कर लग वाता रहा , अन्त मे वह म्रीज को बीच मे ही  छॊड़्कर वापस घर चला आया /

सुबह ९ बजे के लगभग मरीज जान्च कराने के लिये आया / जैसे जैसे जान्च होने लगी मुझे यह तो पता चल गया कि इसे मानसिक बीमारी है और इसके साथ साथ इसे शारीरिक भी तकलीफे है /

मानसिक  बीमारी  होने का शक मुझे तब पता चला जब वह टेस्ट करने के दरमियान रोकने के बाद भी बार बार करवट बदलने और बार बार पेशाब करने के लिये कहने लगा / मेरे डाटने और डपटने के बाद भी वह नही माना तो मै समझ गय कि यह सनकी मरीज है और इसे दिमाग की बीमारी है /

मरीज बताने लगा कि उसके अन्दर बाहर की घूम रही आत्माये उसके शरीर मे प्रवेश करती है , ये आतमाये उससे बाते करती है और यही आत्मायें उसको बताती है कि उसे क्या करना चाहिये / उसके शरीर मे घुस गयी आत्माये उसको आध्य्यात्म की शिक्षा देती है और उसको मानव जीवन का दर्शन पढाती है / ये आत्माये उसके शरीर मे घुस जाती है और प्रवेश करके उसको रात और दिन मे उसके मन को नियन्त्र्त कर लेती है और वह उसी प्रकार से काम करने लगता है जैसा कि ये आत्माये उसको गाइड करती है / उसने और भी बहुत सी बाते बतायी जैसे कि वह झाड़ फून्क वालो के पास गया / मौलवियो के पास गया / तान्त्रिको के पास गया और उनसे इन आत्माओ के बारे मे बताया कि के ये किस तरह से उसके शरीर मे प्रवेश करके उसको नियन्त्रित करती है /

ऐसे बहुत से रोगियो का इलाज पहले भी किया है और अभी भी कर रहा हू / मै समझ गया कि इसे कोई शारीरिक तकलीफ धीरे धीरे develop  हुयी है जिसके कारण से इसे प्रेशानी हो रही है /

बहरहाल इसके परीक्षण किये गये और यह परिणाम निकाला गया कि इसे क्यो इस तरह की दिक्कत हो रही है ?

मान००१

आयुर्वेदा थेर्मल स्कैनिन्ग और ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण और ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन कन्टीनुअस ट्रेस रिकार्डर द्वारा रिकार्ड किये गये लगभग दो घन्टे के परीक्षण करने के बाद और इसके साथ साथ आयुर्वेद रक्त परीक्षण और आयुर्वेद मूत्र परीक्षण और दूसरे परीक्षण करने के बाद जब निष्कर्ष निकाला ग्या कि इस रोगी को क्यो और किस तरह से तकलीफ पैदा हुयी और इस बीमारी के पैदा होने की असली वजह क्या है ??

यह जानना बहुत जरूरी है क्योकि अगर जड़ बुनियाद की बात रोगी के सम्बन्ध मे पहचानी जायगी तभी इलाज बहुत सटीक और अचूक होता है /

मान००१ 001.

ऊपर gist सवरूप मे रोगी की तकलीफ के बारे मे nutshell diagnosis दी गयी है जिनका इलाज किया जाना है /

[१] इस मरीज का BLOOD PRESSURE सामन्य निकला जो ११३/७२ mm/hg था

[२] इस मरीज की PULS variation मे count की गयी / यह variation 76 puls per minute से लेकर 96 pulse per minute तक का निकला /

[३] इस मरीज का खून मे Oxygen level 96% निकला है

[४] इस मरीज का BODY FAT LEVEL सामन्य से अधिक निकला है यानी इसके शरीर मे चर्बी की मात्रा सामन्य मात्रा से अधिक निकली है /

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उक्त डाटा को देखने से पता चलता है कि इस रोगी का FRONTAL BRAIN का हिस्सा बहुत उत्तेजित अवस्था का है / सामान्य स्तर पर इस हिस्से का लेवल 91 to 105 e.v. होता है /  इस मरीज का यह लेवल ४२५ ई०वी० के आस्पास का है जो सामन्य से बहुत अधिक है / इसका मतलब है कि इस मरीज का फ्रन्टल ब्रेन का हिस्सा अति सक्रिय स्तर का है / इसीलिये इसे self control  की faculties  की कार्य विकृति के कारण भूत प्रेत और आत्माये नजर आती है / यानी इस्का Imagination बहुत अधिक है / इस स्तर के FRONTAL BRAIN  की  patho-physiology  measurment  से मश्तिष्क की कार्य शीलता का अत्यधिक होना बताता है कि इस रोगी का आत्म कन्ट्रोल बहुत कच्चे किस्म का है / यह भी पता चलता है कि रासायनिक समीकरण जो मस्तिष्क के अन्दर होते है वे भी कितने विकृति स्तिथि के है /

मष्तिष्क की अक और विकृति सामने आयी है कि इस रोगी का PAREITAL BRAIN और TEMPORAL BRAIN  ये दोनो सामन्य से कम कार्य कर रहे है / दिमाग के इन दोनो हिस्सो का कार्य मश्तिष्क को सामन्य रूप से सक्रिय करने का है / सामान्य से कम होने की स्तिथि मे इन दोनो भागो की कार्य क्षमता प्रभावित होती है / उदाहरण के लिये pareital brain  का काम शरीर का तप्मान बर्दाश्त करने की क्षमता बताता है / कम होने से मरीज को बहुत गर्मी लगती है जब दिन का तापमान अधिक होता है और यह क्ड़ी धूप मे बाहर निकलने से घबराता है / Temporal lobe का लेवेल कम होने से यह IMAGINATION   और HOLLUCINATION को बढाता है / इस तरह के perception  बढने से भूत प्रेत और आत्माओ की शरीर के अन्दर प्रविष्ट होने की थवा शरीर के अन्दर घुसने की कलपना बढती है और यह इसलिये control  नही हो पाता क्योन्कि FRONTAL BRAIN की स्तिथि अति उत्तेजित अवस्था मे है /

मान००१ 004

मरीज को जब बताया कि उसकी SEXUAL DESIRE   बहुत अधिक है और वह हर समय जैसा कि आनकड़े बताते है कि हर समय SEX  के बारे मे सोचते है तो वह हसने लगा और पूछने लगा कि “आपको यह सब कैसे पता लगा , मुझे वास्तव मे हर समय से़ करने की इछ्छा होती है और मै बहुत शीघ्र किसी भी महिला को देखते ही उत्तेजि हो जाता हू”

मैने उसको reproductive organs  का डाटा दिखाया जो ऊपर है, यह डाटा देखकर उसने कहा कि यह सब बिलकुल सही है और मेरी सेक्स से सम्बन्धित आपकी रिपोर्ट बिल्कुल सही है /

मान००१ 005

आयुर्वेद के त्रिदोष के हिसाब से इस मरीज का पित्त दोष बहुत प्रबल है / इसका शारीरिक बनावट और अन्य बाते “पित्त” दोष का निर्धारण कर रही है / ऊपर की डाटा शीट मे पित्त दोष 170 e.v.  है जो सामन्य ९१ -१०५ ई०वी० के लेवल से बहुत अधिक है /

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.त्रिदोषो की सन्निपातिक अवस्था के हिसाब से वात दोष सबसे अधिक है बाकी दोनो दोष यथा पित्त और कफ दोनो कमजोर स्तिथि के है /

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रक्त की परीक्षा से पता चलता है कि इसका कफ दोष सामन्य से कम है /

नीचे की डाटा शीट मे बताया गया है कि किस प्रकार से रक्त की रासायनिक रचनाकिस तरह की उभर कर सामने आयी है / क्रियेटिन कम होने से इसके दिमाग और गुर्दे तथा नसो की खास तरह की चर्बी कम स्तर की है / मैग्नेशियन और अमोनिया का स्तर कम होने से इसे पाचन और पाचन तन्त्र की शिकायते है जैसे खट्टी डकारे आना , पेट मे गैस बनना, आन्तो की सूजन , पाखाना साफ न होना, कई कई बार पाखाना जाना, मल के साथ आंव आना आदि आदि दिक्कते है / कैल्सियम लेवल अधिक है क्योन्कि यह रोगी केल्सियम की गोलिया खा रहा है / आयोदीन कम लेवल का होने से इसका hormonal imbalance  पैदा हो गया है / पोटैशियम और सोडियम लेवल कम होने से इसके दिमाग का कन्सन्ट्रेशन बिगड़ा हुआ है /

इस रोगी का फास्फेट और कापर [ताम्बा] का लेवल कम है जो यह बताता है कि इसका यकृत यानी लीवर विकार युक्त है / क्रियेटिन कम होने से यह पता चलता है कि लीवर चर्बी युक्त है / यह ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और अन्य दूसरे परीक्षणो के रिजल्ट से मेल खाता है / अत: निदान यह कि इस मरीज का ळीवर बढा हुआ है / मरीज ने अपना Ultra Sound examination  अपने शहर मे करा चुका है और उसने बताया कि अल्ट्रा साउन्ड परीक्षण मे उसका लीवर बढा हुआ बताया गया है /

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E.T.G. AYURVEDASCAN  की रिकार्ड की गयी उपरोक्त ट्रेस मे मरीज का BLOOD CIRCULATION  सिर की ओर अधिक है / जिन व्यक्तियो मे सिर की ओर रक्त प्रवाह अधिक होता है , उनको दिमाग के तनाव की बीमारी अपने आप पैदा हो जाती है / लेकिन इस मरीज का TENSION LEVEL  बहुत अधिक है /

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“पित्त” स्थान की रिकार्डिन्ग से पता चलता है कि मरीज का लीवर चर्बी युक्त है और बढा हुआ है /

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ऊपर की रिपोर्ट मे शरीर के channels का detail बताया गया है, कौन कौन से CHANNELS   है जो विकृत अवस्था मे कार्य कर रहे है, यह समझना बहुत जरूरी है क्योन्कि चैनल जब तक सही सही काम नही करेन्गे , आरोग्य का शीघ्रता से प्राप्त करना कठिन कार्य है /

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ऊपर की डाटा शीट मे दो CHANNELS   विशेष रूप से विकृत अवस्था मे है , ऐसा उपस्तिथि है / पाण वह चैनल्स मे हृदय / मष्तिष्क / रक्त सन्चार की प्रमुखता है / सामान्य से अधिक होने के कारण यह चैनल विकृत अवस्था का पाया गया है /

स्वेद वह चैनल भी सामन्य् से अधिक है , यह चैनल चर्बी / स्वेद / बालो / सिर के बालो  आदि के कार्यो से सम्बन्धित है / यह अधिक है / इस रोगी के सिर के बाल बहुत तेजी से गिर रहे है और सिर का गन्जापन बढ रहा है /

निष्कर्ष;

इस रोगी को सम्स्याओ का निदान सावधानी पूर्वक किया गया और इसे

[१] आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाओ को सेवन करने के लिये PRESCRIPTION  लिखकर दिया गया कि उसे कौन कौन सी आयुर्वेदिक द्वाये खानी है और किस समय खानी है /

[२] इस रोगी को पथ्य और परहेज और जीवन शैली तथा अन्य प्रकार के management के लिये exercises  और अन्य उपाय बताये गये

[३] इसको क्या खाना है और क्या नही कहाना है इसके लिये पूरी फाइल दी गयी और follow  करने की सलाह दी गयी

[४] अन्य हिदायते जो इसके रोगो से और अन्य प्रकार से सम्बन्धित थी वे बतायी गयी

जब इस तरह का COMPREHENSIVE MANAGEMENT  तथा  TREATMENT  किया जाता है तो मानसिक

विकार के रोगी अवश्य ठीक होते है चाहे उनकी मानसिक बीमारी का कोई भी नाम दिया गया हो और वे कैसी भी स्तिथि के हो /

वास्तविकता यह है कि मानसिक बीमारियो के नाम केवल ACADEMIC उद्देश्य के लिये होते है जो DIFFERENTIAL DIAGNOSIS  मे मदद करते है, लेकिन चिकित्सा मे इनका कोई विषेश महत्व नही होता है / क्योन्कि जुमला यही है कि infection  चाहे UPPER RESPIRATORY TRACT का हो या LOWER RESPIRATORY TRACT  का देना तो Tetracycline ही  है /

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सिर की तरफ या सिर की ओर रक्त प्रवाह होने का क्या मतलब ? ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्वारा किये गये अध्ध्यन का निष्कर्ष ; What is meant, if Blood Circulation is towards Head ? An E.T.G. AyurvedaScan based studies conclusion.


सिर की ओर रक्त प्रवाह अथवा BLOOD CIRCULATION होने से क्या और किस तरह की तकलीफे और क्या क्या बीमारिया हो जाती है, इसका investigation सबसे पहले ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के परीक्षनो और उसके बाद किये गये  अ ध्धयनो से  highlighted  हुआ /

ई०टीजी० आयुर्वेदास्कैन के अध्ध्य्यनो से सिर की ओर रक्त प्रवाह होने के कारण से क्या क्या बीमारियां detect  और  diagnose होती है, इनके बारे मे नीचे लिखा जा रहा है /

  1. यह शत प्रतिशत १००%  पाया गया है कि “मानसिक बीमारियों ” MENTAL PROBLEMS मे  सिर की ओर Blood circulation  होता है  यानी PSYCHOLOGICAL DISORDERS मे ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की traces ,  जिन्हे  कफ स्थान से रिकार्ड किया जा्ता हैं , वे traces  उर्ध्वाकार होती है /
  2. यह शत प्रतिशत पाया गया है कि जो व्यक्ति मानसिक श्रम अधिक करते है  या मानसिक कार्य कलाप अधिक है   या MENTAL WORK  related  कार्य करते हैं तो ऐसे लोगो की ” कफ स्थान ” की traces  उर्धवाकार होती है /
  3. EPILEPSY  या मिर्गी या अपस्मार के सभी मरीजों में traces POSITIVE  रिकार्ड होती है  यानी recorded traces उर्ध्वाकार होती है /
  4. जिन  रोगियों मे traces positive प्राप्त होती है या record  होती हैं,  ऐसे रोगियो को मानसिक तनाव अपने आप होता रह्ता है लेकिन हकीकत मे उनको मान्सिक तनाव की वजह नही पता होती है कि वे क्यो मानसिक तनाव झेल रहे है और इसके कया कारण है, ऐसा वे स्वय्म नही समझ पाते है  / ये रोगी मानसिक तनाव करते नही लेकिन इनको मानसिक तनाव कुदरती तौर पर बना रहता है /
  5. Positive traces  के रोगी मे एक और बात पैदा होती है कि वे जिस एक बिन्दु पर सोचते है या जो idea या सोच एक बार उनके दिमाग मे बैठ जाती है , वह idea  या विचार बिन्दु या सोचा गया जुमला बार बार हर सेकन्ड उनके दिमाग मे घूमता रहता है / हलान्कि ऐसे रोगी बार बार होने वाले विचारों को दिमाग से ह्टाना चाहते है , लेकिन  वे कोशिश करके भी ऐसे विचारों को हटा नही पाते /
  1. ANAND001 001

“K” leveled trace को कफ स्थान से रिकार्ड किया गया है /

ऊपर प्रस्तुत किया गया trace record यह एक मिर्गी EPILEPSY  के मरीज का trace record  है / जिसमे ट्रेसेस उर्ध्वाकार रिकार्ड हुयी हैं  यानी रिकार्ड  ऊपर की ओर पाजिटिव लेवल की हैं  /

नीचे एक कैन्सर के रोगी का रिकार्ड दिया जा रहा है जिसे lumpho Sarcoma  है और जिसे chemotherapy और radiation  दोनो का इलाज दिया जा चुका है लेकिन उसकी तकलीफ नही ठीक हुयी बल्कि और अधिक बढ गयी, इससे घबराकर वह आयुर्वेद का इलाज कराना चाहता था/ यह व्यक्ति किसी अच्छे आयुर्वेद  चिकित्सक की तलाश मे था / यह रोगी भारत सरकार की सेवा कर चुका है और रिटायर्ड हैं /

इस रोगी का Trace record नीचे दिया जा रहा है /

इस रोगी को PENIS  का  कैन्सर हुआ है  और इसकी केमोथेरपी तथा रेडियेशन कई कई बार हो चुका है लेकिन इसको कोई आराम नही मिली , बल्कि इस मरीज की तकलीफ और ज्यादा बढ गयी है / इस मरीज को मेरे इलाज करने के तौर तरीके के बारे मे एक अन्य इलाज करा चुके मरीज ने बताया था /

कन्स००१

इस Trace record  मे “d” waves और “e”  waves ऊर्धवगामी है यानी positive level  की है / लेकिन इसके साथ साथ “e” waves बहुत नीचे तक negative direction  मे पहुन्च रही है / इसके साथ साथ  “s” waves सामान्य से बहुत  अधिक  हो गयी हैं तथा “h” waves  नही बन रही हैं / “s” waves सीधे सीधे “k” waves  से मिल गयी है /

इस तरक के trace record तभी मिलते है . जब रोगी को SOMATO-PSYCHIC DISORDERS  पैदा हो जाते है / लम्बी  “k” waves  तभी प्राप्त होती है जब रोगी को CERVICAL SPINE  अथवा cervical spondylitis जैसी कोई बीमारी हो /

इस रोगी का E.T.G AYURVEDASCAN द्वारा किये गये रोग निदान तथा AYURVDA BLOOD EXAMINATION की रि्पोर्ट नीचे दी गयी है /

कन्स००१ 001

मरीज का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन कराने के बाद उक्त तकलीफो का समूह सामने आया है / इसमे सबसे प्रमुख   SPLEENOMEGALY  उभर कर सामने आयी है /  PHYSICAL EXAMINATION जान्च करने पर इस रोगी की  SPLEEN  बढी हुयी पायी गयी /

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ऊपर दी गयी सभी रिपोर्ट का observation करने  के बाद मरीज की तकलीफ का three dimensional diagnosis  की गयी और इस तरह की गयी diagnosis के  अनुसार उसे  आयुर्वेदिक दवाये लेने के लिये AYURVEDIC MEDICINE PRESCRIBE  की गयी /

कैन्सर से ग्रस्त इसी तरह के मरीजों मे ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और इसके आनुसान्गिक supplementary & allied परीक्षणो के आधार पर इलाज करने से अवश्य सफलता मिलती है और रोगी की तकलीफें कम होती है और रोगी को अधिक  उम्र  मिलती है या उम्र बढने की सम्भावनाये होती है , ऐसी धारणा  हमारे रिसर्च सेन्टर मे कैन्सर के मरीजों के आयुर्वेदिक इलाज करने के बाद मान्य किये गये हैं /

आयुर्वेदिक इलाज करने से POSITIVE TRACES  यानी उर्ध्वागामी रिकार्ड ट्रेस पुन:  NEGATIVE SIDE  यानी नीचे की ओर धीरे धीरे आने लगती है और जिस  गति से ट्रेसेस नीचे कुदरती यानी प्राकृतिक अवस्था को प्राप्त करने लगती है अथवा रिकार्ड करने पर सामान्य की तरफ आने लगती हैं , वैसे वैसे मरीज के भी रोग और रोग-लक्षण ठीक होने लगते है और रोगी अपने स्वास्थ्य को प्राप्त कर लेता है /