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कमर दर्द अथवा Lumber region pain or Back ache ; Ayurvedic Homoeopathic treatment


Back ache तकलीफ देने वाला रोग है / अपने अध्ध्य्यन मे मैने observe किया है कि यह कई कारणों से होता है और जब तक कारण का निवारण नही हो जाता , यह बहुत मुश्किल से ठीक हो पाता है /

कमर दर्द के होने के बहुत से कारण होते हैं / लिन्ग के अनुसार इसके कारंण भी बहुत अजीबो गरीब से है /

पुरुषों में इसका कारण मुख्य रूप से कार्य विभाजन के साथ जुड़ा हुआ है / जैसे आजकल मोटर साइकिल या स्कूटर चलाने वाले लोगों को गलत posture के कारण नवयुवक इसके शिकार होते हैं / ऐसा होना मॊटर साइकिल चलाने और सड़्क की स्तिथि और स्पीड और उम्र और दूरी तथा बीच बीच में विश्राम कितना करते है , आदि आदि इन सभी फैक्टर्स पर आधारित होता है /  एयर कन्डीशनिन्ग के अन्दर काम करने वाले लोगों को ठन्डक की वजह से शरीर की काम करने वाली मेजर मान्श्पेशियां  अकड़्ती हैं / बैअठे बैठे काम करने से यह मान्श्पेशियां एक निश्चित movement  मे कार्य करने की आदी हो जाती हैं और यह एक लिमिट सेट हो जाती है / अचानक उठने बैठने से यह limit टूटती है इसलिये मान्श्पेशियों के टीश्यूज में अचानक बदलाव आ जाते हैं , जिससे दर्द होना शुरू हो जाता है / ऐसा बदलाव हल्के से लेकर अधिक गहरायी तक हो सकता है / जैसे superficial skin से मान्शपेशी और मान्शपेशी से लीगामेन्ट्स और टेन्डन्स  तक , फिर यहां से रीढ की हड्डियों को जोड़ने वाले अन्य अवयव तक affected हो जाते हैं /

ऐसा प्राय: विकृति या pathological phenomenon सभी तरह के कमर दर्द में होता है / दूसरे अन्य कारण भी है जैसे कमर के हिस्से में thrust या injury या किसी चीज या वस्तु से hit हो जाना या गिर जाना या कोई accident हो जाना , इनसे भी होता है और यह एक कारण है / कभी कभी बवासीर के रोगियों मे या भगन्दर के रोगियों में कमर का दर्द हो जाता है / कमर की मान्शपेशियों के सिकुड़ने के कारण यह तकलीफ हो जाती है /

महिलाओं में यह तकलीफ बहुधा देखी जाती है / ऐसा इसलिये है, क्योंकि महिलायें गर्भावस्था के समय में गर्भाशय में पल रहे और दिन प्रतिदिन भ्रूण के साइज के बढते रहने की वजह से पेट तथा spine तथा कमर की हड्डी यानी pelvis bone का आकार सामन्य  से अधिक होता है जिसके कारण इन अन्गों मे आवश्यकता से अधिक जोर पड़्ता है और आकार भी ब्ढ जाता है / बच्चा पैदा होने के बाद यह धीरे धीरे सामन्य अवस्था में आते है और मान्स्पेशियों का ढीलापन धीरे धीरे दूर होता है / अगर किसी कारण से यूटेरस या मासिक की कोई विकृत बची रह जाती है तो यह सब विकृति मिलकर PID पी०आई०डी० यानी Pelvic Inflammatory Disorders पैदा कर देते है / इस कारण से कमर में दर्द होने लगता है /

बृध्धावस्था में कमर का दर्द मान्स्पेशियों की कार्य क्षमता का कम हो जाने, मान्श्पेशियों में कुदरती सिकुड़न होने यानी contraction Tendency पैदा होने के कारण होती है  /

कुल मिलाकर कहने का तात्पर्य यह है कि कमर का दर्द एक प्रकार की Musculo-skeletal problem है और इसे इसी सन्दर्भ में देखा जाना चाहिये /

आयुर्वेद में कमर दर्द का सही और सटीक और परिपूर्ण इलाज है / आयुर्वेद की औषधियां, management, पन्चकर्म की विधियां, पथ्य , परहेज, रहन सहन  और जीवन शैली में बदलाव आदि के धारण करने से कमर दर्द ठीक हो जाता है /

अगर ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की सहायता लेकर रोग निदान और मौलिक सिद्धान्तों का आन्कलन करके इलाज किया जाय तो कमर दर्द मे शीघ्र फायदा होता है /

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Electro Tridosha Graphy ETG AyurvedaScan Report’s Eighth page


The Eighth page of the ETG Report presents the following features;

 

  • Evaluation SECTORWISE SCANNED AREAS FROM Head to Feet
  • Evaluation BODY SIDES – RIGHT SIDE &  LEFT SIDE
  • Evaluation  UPPER PARTS OF BODY
  • Evaluation LOWER PARTS OF BODY

 

 

The presentation is shown in a sketch of body for easy understanding.

 The Obtained Data are very important in view of establishing diagnosis &  establishing undeviated treatment and finally to understand, which part of the body is creating most problems.

 

Electro Tridosha Graphy ETG AyurcedScan Report’s Eighth page

Electro Tridosha Graphy ETG AyurcedScan Report’s Eighth page