Fistula

CURED CASE OF FISTULA WITHOUT SURGERY / OPERATION ; फिश्चुला / भगन्दर के एक रोगी के बिना आपरेशन के हमारे यहा से ठीक हो चुके व्यक्ति से सीधे हमारे इलाज के बारे मे जानकारी करे


फिश्चुला यानी भगन्दर एक लाइलाज बीमारी समझी जाती है / ऐसा आधुनिक यानी एलोपैथी के डाकटर समझते है /

लेकिन आयुर्वेद की आधुनिक निदान ग्यान की तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदा स्कैन और इसके अन्य समबन्धित परीक्षणो तथा आयुर्वेदिक रक्त और मूत्र परीक्षणो के परिणामो के बाद प्राप्त डाटा का अध्ध्य्यन करने के बाद आयुर्वेद और होम्योपैथी और यूनानी और अन्य चिकित्सा विधियो के दवाओ और मनेज्मेन्ट तथा जीवन शैली के आपनाने से यह बीमारी बिना आपरेशन के जड़ मूल से समाप्त हो जाती है /

हमारे रिसर्च सेन्टर मे जितने भी फिस्चुला के रोगी इलाज के लिये आये है सभी के सभी ठीक हुये है और उनको तकलीफ मे आराम मिली है /

हमारे यहा से इलाज कराकर ठीक हो चुके फिस्चुला के रोगी श्री कुमार ्से मोबाइल नम्बर 09919477058 पर फोन करके हमारे इलाज के बारे मे पूछ सकते है / कृपया इस रोगी से जानकारी प्राप्त करे और इनको अनावश्यक परेशान मत करे /

fistula

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भगन्दर यानी Fistula ; Curable by Ayurvedic treatment


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गुदा के मुकाम पर या रेक्टम के मुहाने  पर या near to ANUS wall के आस पास  यह बीमारी या तकलीफ होती है / सबसे पहले जब इस तकलीफ का आगाज होता है तो पाखाने के मुकाम पर पहले बड़ी खुजली होती है , जिसे खुजलाने में बड़ा मजा आता है और खुजलाने की न इच्छा होये हुये भी बार बार हाथ गुदा तक खुजलाने के लिये पहुच ही जाता है / कुछ दिन बाद इसी खुजली वाली जगह पर एक छोटी सी फुन्सी हो जाती है , जो पहले लाल हो जाती है फिर पकती है और पस से भरा हुआ एक छोटा सा बिन्दु बन जाता है / इसमे दर्द भी होता है, किसी किसी को दर्द नही होता है / अर्थात यह बिना दर्द के ्भी होता है , लेकिन ऐसा देखने में कम ही आता है /

दर्द के होने पर लोग उपचार लेते हैं और फिर लापरवाह हो जाते हैं , इसलिये यह छोटा सा घाव धीरे धीरे जगह बना हुआ गुदा के अन्दरूनी छोर तक जा पहुचता है और फिर तकलीफ देन शुरु करता है / कई बार यह देखा गया है कि जैसा इस  घाव का मिजाज बाहर से अन्दर के रुख की वजह से बनता है तो ठीक उल्टा यह गुदा से बाहर की तरफ भी बनता है  / लोग इस स्तिथि मे अक्सर भ्रम में पड़ जाते हैं और वे समझते हैं कि शायद गुदा में दर्द अन्दरूनी बवासीर के कारण हो रहा है , जबकि यह भगन्दर के घाव के कारण होता है /

बहर हाल भगन्दर का इलाज जैसे ही पता चले, शुरू कर देना चाहिये / आयुर्वेद का इलाज और Homoeopathy तथा प्राकृतिक उपचार इस तीनों के समन्वित चिकित्सा व्यवस्था से भगन्दर अवश्य ठीक हो जाते हैं / लेकिन इसके लिये चिकित्सक चाहे वह अकेला हो जिसे तीनों चिकित्सा विग्यान का अनुभव हो या यह न हो सके तो  तीनों चिकित्सा विधाओं के experts से तालमेल करके चिकित्सा व्यवस्था अगर करते हैं तो भगन्दर अवश्य ठीक हो जाता है /

Surgical intervention से भगन्दर ठीक भी होते हैं और नही भी / कई बार कुछ साल ठीक होने के बाद फिर दुबारा तकलीफ हो जाती है , इसलिये सरजरी कराने का निर्णय मरीज की अपनी इच्छा पर निर्भर है /

अगर ETG AyurvedaScan परीक्षण रिपोर्ट पर आधारित डाटा को लेकर “भगन्दर” का औषधि और अन्य तरीके को शामिल करके इलाज करते हैं  , तो अव्श्य फायदा होता है /

आयुर्वेद का क्षार सूत्र अथवा क्षार कर्म द्वारा भी भगन्दर का सटीक इलाज हो जाता है, इसके लिये किसी expert क्षार सूत्र चिकित्सक की सेवायें लेना चाहिये