Ghost attack

GHOST ATTACKS ; SHAITAN ATTACK ; IMPURE SOUL’S ATTACK PATIENTS ; भूत प्रेत के चढ जाने से पीड़ित रोगी


                      

Since many years, I saw a number of patient, in which GHOSTS and evil sprits were intered and was affected by the impression of the reaction of ghosts and evil spirit. The family of these victims was disturbed due to the reaction and behaviour of patient. They could not understand , what to do ?

The Psychologist Practitioner prescribes tranquelisers and hypnotic drugs and the patient becomes slugiss under the impression of the drugs. Their mental capacity becomes down and thus they were not ina position to do their own jobs and work. If they left medicine, the condition becomes worse, so they have to start again the similar treatment.

पिछले कई  सालों  में मुझे ऐसे रोगी देखने को मिले, जिनके भूत और प्रेत शरीर में घुस गये थे और वे रोगी भूत की वजह से परेशान हाल थे । मरीज तो परेशान था ही, सबसे ज्यादा मरीज के तीमार दार और घर वाले परेशान थे । उनकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्य़ा किया जाय ? मनोरोग चिकित्सक उन्हें जो भी दवा देता था, उसको खाने से वे दिन भर सोते थे और सुस्ती भरी रहती थी । दवा छोड़ देने के बाद उनकी फिर वैसी ही हालत हो जाती थी । यही हाल कमी वेशी सभी मरीजों का था ।

Bychance some patients of GHOST ATTACK and EVIL SPIRIT ATTACK, who have taken my treatment earlier and was alright physically, when came i contact of these victimised patient , they recommended for the treatment to my concerns.

सन्योग से जो रोगी अपना इलाज कराकर मेरे यहां से गये थे या उनको ठीक होते हुये दूसरे मरीजों या लोगों ने देखा था, उन्होए मेरे पास भेज दिया ।

When I see these patients, I first recommend an Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan examination. The reason is behind the examination is, that ETG examination provides the physical and mental data of the patient concerned in individual way. It provides the data of the Ayurvedic fundamentals and their status inside the body. It also provides the sensitive parts of the body and organs and their pathophysiology and pathology.

जब भी मै ऐसे मरीजों को देखता हूं तो उनको ETG परीक्षण करा लेने की सलाह अवश्य देता हूं । इसकी वजह है । ETG परीक्षण से यह पता चल जाता है कि आयुर्वेद के दोषादि की क्या स्तिथ है और दूसरे शरीर के कौन कौन से हिस्से sensitive हैं या उनमें किस तरह की और कैसी विकृति है ?

It is observed that many patients are automatically tensive , without any reasons. Some students were in trouble with their studies. They wake in the night and study, therefore the ratio in between mind and body functions disturbes them and could not be maintained. Due to this reason ,  the imbalance was regular and they have got the attack of the ghosts. Mostly in all patients one thing was common that they were suffered from Tachycardia in continuty.

अधिकान्श रोगियों में देखा है कि उन्हें न चाह्ते हुये अपने आप ही Tension बना रहता है । कुछ छात्र अपनी पढाई करने की वजह से परेशान रहते थे, रात रात में जाग कर पढाई किया करते थे, इससे उनके दिमाग और शरीर के बीच का सन्तुलन जिस अनुपात में होना चाहिये था , वह बरकरार नही रह पाया । इस कारण से ठीक नींद और आराम न कर पाने से उन्हें इस तरह के दौरे पड़ गये । लगभग सभी मरीजों मे Tachycardia की शिकायत मौजूद रही ।

When ETG is done , most of the anomalies present in the body comes out. Ayurvedic treatment is a way of the comprehensive treatment and mostly all the complaints are treated simultaneously.

जब ETG परीक्षण कर लेते है तो इसमें जहां जहां विकृतियां शरीर में पायी जाती हैं , उन सभी विकृतियों का इलाज एक साथ करते हैं । इस बात का conclusion निकालते हैं कि वर्तमान में हो रही तकलीफ का कारण क्या है ? इसका phenomenon समझने के बाद औषधियों का चुनाव करते हैं ।

मै ऐसे मरीजों को, यदि मेरी समझ में आता है , तो Homoeopathic medicines के मदर टिक्चर के mixture का उपयोग करता हूं । अन्यथा आयुर्वेदिक दवाओं के प्रयोग से ही कुछ दिनों में आरोग्य प्राप्त हो जाता है । रोगी को मानसिक श्रम कम से कम करना चाहिये, यदि वह विद्यार्थी है, तो सुबह जल्दी उठकर अद्ध्यन करे और दिन २ बजे के बाद कुछ भी न पढे और न मान्सिक श्रम करे । भोजन जल्दी रात ८ बजे तक कर ले, हल्का भोजन करे और १० बजे तक सो जाये । रात मे न जागे और न घर वालों को उसको सोते से जगाना चाहिये । यदि सोते से जगा देंगें तो फिर अटॆक पड़्ने की सम्भावना होती है । जब तक पूरी तरह से न ठीक हो, यह दिन चर्या अपनानी चाहिये ।

भूत और प्रेत भगाने के लिये किसी जन्तर मन्तर वाले के पास, या झाड़ फूंक वाले बाबा या औलिया के पास नहीं जाना चाहिये । आज तक ना तो कोई ठीक हुआ है, ऐसा मुझे देखने में नहीं आया है । हलांकि लोग बताते बहुत हैं लेकिन इसकी कोई scientific evidence मुझे देखने को नहीं मिली ।

भूत प्रेत बाधा से ग्रसित रोगी आयुर्वेद का उपचार लें, उनकी तकलीफ अवश्य दूर होगी ।

      

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