Homoeopathy

मै डा० हाहनेमान के डिफेन्स में ; In Defence of Dr Hahanemann


आज होम्योपैथी के जन्म दाता डा० सैमुअल हहनेमान का जन्म दिन है / हर साल होम्योपैथी के फालोवर १० अप्रैल को होम्योपैथी दिवस मनाते है / हलान्कि मै होम्योपैथों के किसी कार्यक्रम मे शिरकत कतई नहीं करता, क्योन्कि इसके पीछे का कारण यह है कि मै होम्योपैथों के बीच में व्याप्त राज्नीति को कतई कतई पसन्द नहीं करता / दूसरे लगभग सभी होम्योपैथ एक दूसरे को नीचा दिखाने मे हमेशा लगे रहते है और मौका पड़ने पर एक दूसरे की टान्ग घसीटने से भी गूरेज नहीं करते / तीसरे एकाडेमिक स्तर हर होम्योपैथ का बहुत कमजोर है, और वह आधुनिक चिकित्सकों के सामने कही भी नहीं टिकता / चौथी बात यह कि रिसर्च के नाम पर कुछ भी नहीं है, जो भी है उसे स्तर हीन ही कहा जायेगा / पान्चवा यह कि होम्योपैथी किसी तरह से घिसट घिसट कर सरकार की कृपा और उसके चरणों मे चिरौरी करके जिन्दा रखी जा रही है /

बहुत सी और बाते है , जिनका मै जिक्र फिर कभी करून्गा /

आज मै हाहनेमान के बारे मे अपने विचार बताने का प्रयास करून्गा, जो मै उनके बारे में सोचता हूं /

हाहनेमान ने होम्योपैथी के बारे मे अप्ना दृश्टीकोण समय समय पर बदला है, यह बदलाव उन्होने अपने आबजरवेशन के बदलते स्वरूप के अनुसार किया है / यह कैसे हुआ, इसे मै इस नजरिये से देखता हू /

जब Dr Hahanemann ने Medicine of Experience लेख में अपने द्वारा किये गये observations को एक लेख द्वारा प्रकशित करके सारी दुनिया को यह बताया कि क्विनीन खाने से उन्होने क्या क्या अनुभव किया और किस प्रकार उन्होने क्विनीन के कुछ लक्शणों को लिपिबध्ध किया और इस ए़क्सपेरिमेन्ट से उन्होने क्या नतीजा निकाला ? तब लोगों का ध्यान उनके इस नवीन चिकित्सा शोध की ओर गया / यह कहा जाता है कि जिस समय यह लेख लिखा गया , उस समय हाह्नेमान रोगियों को Mother tincture के रूप में दवाओं का उपयोग कराते थे / बहुत सीमित सन्ख्या में दवाओं का यथा Pulsatilla, Sepia, Bryonia, Rhustox कुछ ऐसी दवाये थीं, जो vegetable और animal sources से थीं / ऐसा लगता है कि हहनेमान को पता चला होगा कि कुछ vegetable और animal सोर्स कि दवायें कम या अधिक toxic होन्गी और उनको कितनी मात्रा में रोगियों को देना चाहिये /

Arsenic, Sulphur, Mercurius, Phosphorus आदि दवाओं के बारे मे उनको स्वयम ही इतना ग्यान था कि ये सब दवाये कितनी जहरीली किस्म की है, इसलिये इन minerals के लिये उन्होने यह विचार जरूर किया होगा कि ऐसे द्रव्यों को मानव उपयोग के लिये क्या तरकीब हो सकती है ?

यह उनकी सकारात्मक सोच का ही परिणाम निकला, जिसे Potentization के नाम से सभी जानते है / शुरू शुरू मे बहुत कम शक्ति की दवाओं का उपयोग किया गया था, ऐसा Organon के प्रथम सन्सकरण मे देखने में आता है /

बाद मे उच्च शक्ति और Organon के छठे सन्सकरण में ५० मिलिस्मल पोटेन्सी का हहनेमान द्वारा बताना , उनके सतत इनोवेशन का परिणाम है /

हहनेमान और होम्योपैथी को यदि समझना है तो हर होम्योपैथ को medicine of experiences लेख से लेकर Organon के सभी सन्सकर्णॊं को बहुत गम्भीरता के साथ पढना चाहिये और समझना चाहिये / इन सभी सनसकर्णों को पढते समय इस बात का तुलनातमक अध्ध्यन करना आवश्यक है कि हाहनेमान ने क्यों और किसलिये अपने ही लिखे पूर्व सिध्धन्तों को बदल दिया और इसकी क्या वजहें या कारण रहे ?

हाह्नेमान की Organon को सभी को इस कोण से देखना और पढना चाहिये कि उनके द्वारा किया गया शोध कार्य समय समय पर Innovate क्यों किया गया और इसके पीचे के क्या कारण हो सकते है ?

सही मायने में यदि हाह्नेमान को और होम्योपैथी की आत्मा को समझना है तो सबसे पहले हाहनेमान को समझना होगा /

Advertisements

आयुर्वेद और ह्रूदय की बीमारियां : Ayurveda and Cardiac disorders


आयुर्वेद हर व्यक्ति को यह बताता है कि शरीर को स्वस्थ्य कैसे बनाये रखना चाहिये । इस शिक्षा के बाद आयुर्वेद यह बताता है कि यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाय तो उसे क्या सावधानी बरतना चाहिये, क्या दवायें उपयोग करना चाहिये जिससे बीमार व्यक्ति शीघ्र स्वास्थय प्राप्त कर ले । पुन: स्वस्थय हो जाये ।

यह नियम सभी प्रकार के बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों के लिये है ।

आयुर्वेद बताता है कि गलत रहन सहन और आद्तों से ओयक्ति बीमार होता है । इसलिये दिल के बीमारों को इस बात का विशेष खयाल करना चाहिये ताकि वे स्वस्थय बनें रहें ।

आयुर्वेद में दिल के रोगों की चिकित्सा के लिये बहुत सी औषधियां हैं जिनके सेवन से दिल के रोगों से बचा जा सकता है और यदि दिल के रोग हो जायें तो उनकी चिकित्सा भी की जा सकती है ।

Regular intake of Ayurvedic medicines LOHASAVA & KUMARIASAV can prevent Cardiac disorders. These medicines can be taken by all heart problem’s sufferers.

कुदरती खानपान और बताये गये तौर तरीकों के अपनानें से दिल के रोगॊं से बचा जा सकता है ।

Constipation यानी कब्ज यानी पेट का साफ न होना


सभी लोग जब सुबह सोकर उठ्ते हैं तो इस बात कि तमन्ना जरुर होती है कि कब उनको जल्दी से मल की हाजत लगे और कब वे Toilet में जाकर पाखाना करें और जितनी जल्दी हो सके , उतनी जल्दी धड़ाम से एक ही झट्के में सारा का सारा मल बाहर निकल आवे । पेट साफ करने के चक्कर में लोग कई कई बार toilet जाते है, इसके बाव्जूद भी उनको लगता है कि पेट अभी साफ़ नहीं हुआ है ।

लेकिन ऐसा सबके साथ होता हो, यह सच्चाई तब सामने आ जाती है, जब करीब करीब ९५ प्रतिशत शहरी लोग यह शिकायत करते है कि उनको सुबह पखाना साफ न होने की शिकायत है । ऐसा नहीं है कि यह शिकायत सिर्फ़ शहर के लोगों को है, ग्रामीण क्षेत्रॊं में भी लगभग १० प्रतिशत लोग शिकायत करते हैं कि उनका पेट सुबह साफ़ नहीं होता ।

दरअसल कब्ज होने की यह शिकायत सभी व्यक्तियों के खान पान, रहन सहन, आचार विचार, मानसिक स्तिथि, श्रम, मौसम, कार्य की परिस्तिथियां आदि आदि से जुड़ी हुयी है । हमारी बड़ी आंत क्रमश: Ascending colon, Transverse colon, Decending colon, Sigmoid colon और Rectum आदि के हिस्सों से मिलकर बनी है । शरीर का Autonomic Nervous System इसकी गतिविधियों को control करता है और काफी कुछ इसकी कार्य प्रणाली इसी सिस्ट्म पर अधारित है । पाखाना होने की तेज हाजत लगना या न लगना या कम लगना , सब कुछ कई एक समीकरणों पर आधारित है ।

कई बीमारियां होती हैं , जिनमें रोगी को बहुत तगड़ा कब्ज होता है, ये स्तिथि निम्न बीमारियॊं कि अवस्थाओं में अधिक होता है ।

1- Brain stroke
2- Brain Heamorrhage
3- Paralysis
4- Intestinal Tuberculosis
5- Intestinal cancer
6- Liver cancer
7- Cancer of digestive system
8- Loss of parestalitic movement of intestines
9- Any other complaints, which is related to Large intestine as often seen in Viral infection and its syndromes

इस प्रकार की तकलीफों में कब्ज मरीज को बहुत परेशान करता है ।

क्या करें ?

१- साधारण कब्ज में खान् पान के उपर ध्यान देना चाहिये । खान पान ठीक कर लेने से हल्के किस्म की कब्जियत की बीमारी जड़ से ठीक हो जाती है । इसमे दवा खाने की जरूरत भी नही पड़्ती है ।
२- सभी प्रकार के कब्ज अमरूद, पपीता और गाजर खाने से चले जाते हैं । लेकिन यह सबको माफ़िक आ जायें , यह नही कहा जा सकता है । हो सकता है अमरूद किसी को नुकसान करे और किसी दूसरे को फायदा, यही बात पपीता और गाजर के लिये कही जा सकती है । जिन लोगों को यह मुआफ़िक लगे, वे जरूर खायें, उनका कब्ज अवश्य ठीक होगा । इन तीनॊं फलों की सलाद बनाकर खाने के साथ खाने से अधिक फायदा होता है । कम से कम १०० से २५० ग्राम सलाद खाना चाहिये ।

३- एरन्ड तेल, एक चाय के चम्मच बराबर लेकर , आधा कप या एक कप गुन्गुने दूध में मिलाकर रात को सोते समय पीने से सुबह पाखाना साफ़ होता है ।

४- किसमिस और अन्जीर को रात में भिगो दें, सुबह अच्छी तरह चबाकर खायें , उपर से दो कप दूध पी लें ।

५- ईसबगोल का उपयोग सोच समझ कर करें । किसी किसी को यह बजाय पेट साफ करने के उल्टे कब्ज करता है । यही हाल बेल के चूर्ण का है, इसका भी असर ईसब्गोल की तरह होता है ।

६- कब्ज की बीमारी का इलाज आयुर्वेद या होम्योपॆथी या प्राक्रूतिक चिकित्सा से एकल या सम्मिलित चिकित्सा व्यवस्था से करें ।

क्या न करें ?

१- जिनको hard constipation की शिकायत है, वे बेहतर है किसी चिकित्सक की सलाह लेकर दवा का सेवन करें, अपने आप या विज्ञापन देखकर या सुनकर कोई दवा न ले । ऐसी सभी दवायें सुरक्षित नहीं होती हैं ।

२- बहुत से लोग enima का उपयोग बार बार करते है, कोइ कोइ तॊ रोजाना एनीमा लिया करते हैं , यह नुकसान्देह साबित होता है ।

३- कोई भी Laxative या purgative दवा न लें ।

Homoeopathy aajmaiye ; Barsaat ki bimarion se bachav aur ilaj ke liye


Homoeopathy chikitsa vigyan mein bahut si khubiyan hain, lekin saath saath kamiyan bhi hain. Hamein kamiyan na dekhakar is chikitsa vigyan ki khubiyan ya achchaiyan dekhani chahiye. Mere Baba ji Bengal mein rahakar Homoeopathic chikitsa vigyan tatha mere pita ji ne Calcutta mein Homoeopathy ka prashikshshan liya tha. Ham jab chchote the to ve gaon mein logon ko dawaiyan dete the. Main us samay logon ko theek hote dekhakar bahut achambhit hota tha.

 

Ab jab main swayam Homoeopathic ka doctor ho gaya to chikitsa mein aise ashcharya janak cure dekhane ko mile, jinhein main sirf yaad kar sakata hun, aap logon ko bhi bataunga taki sabhi log isase labhanvit hon.

Barsaat ke dinon mein bahut se logon ko paani mein bhig jane , thandi hava lagane, ardta ke karan , humidity ke karan takalifein ho  jati hain, jinhein kaha jata hai ki WET EXPOSER ho gaya hai ya Cold exposure ho gaya hai, kuchch bhi kah sakatey hain.

 

In sabki Homoeopathy mein bahut achchi aur safal dawayein hain, in dawaon ko “seasonal medicine” bhi kahatey hain, koi bhi rog ho agar “Barasat” usaka karan hai, to niche likhi dwayein dein, jarur aaram milega.

1- Belladonna  30 ya  200

2- Bryonia 30 ya 200

3- Rhustox 30 ya 200

In teeno dwaon ko ek ek ghantey ya do do ghantey se , jaisi aawashyakta ho , us hisaab se repeat krein, yah repeatition Tonsillitis, Muscular pain, joints pain, rigidity of muscles, headache, cervical spondylitis, abdominal pain, cough, throat problems, swellings aadi aadi takalifon ko door karan mein ramban ki tarah hai.

 

Yah bilkul surakshit aushadhiyan hain aur koi bhi side effects nahin hain.

 

Yah teenon dwayein har grahasth ko apane paas rakhani chahiye. Koi bhi bimari ho, ise prathamik chikitsa ke taur par de sakatey hain.

 

Jaise hi takalif mein aaram milane lage, in dawaon ka repitition ka samay badha dena chahiye, 2 ghantey se char ghante ya chchah ghantey ya phir ek khurak pratidin khilakar dawayein band kar dena chahiye.

Baadh ke baad failane wale infection


Barasati nadiyon mein barasat ke dinon mein pani uphan marta hua jab jamin par failata hai , bahut kuchch nukasan karake jata hai, saath hi bahut si swasthya samabndhi samasyayein apane pichche chchod jata hai.

 

Yah samasyayein Pachan sansathan se sambandhit sabase adhik hoti hain, jinamein Diarrhoe, Vomitting, Cholera, Indigestion aur doosare digestive disorders hote hain, inase bahane ke liye sabase badhiya upay hai- bimari se bachav aur ise hone na dena.

 

Ayurveda is tarah ki bimariyon ki rok tham ke liye AMRIT DHARA  ka upayog karane ki salah deta hai, yah bahut saral aur karagar dava hai. Ise teen dwaon ke mishran se bana sakatey hai.

 

Barabar barabar matra mein [a] PIPPERMINT,[b] SAT AJAWAIN, [c] KAPOOR [CAMPHOR] le lein, in teenon ko ek kanch ki ya plastik ki shishi mein daal dein. Kuchch der baad yah teeno gal jayeinge aur liquid swaroop mein ho jayeinge. Is dava ki ek bund se teen bund [ 01 drop to 03 drops] shakkar, biscuite, roti ke ek chchote tukade ya saaf pani mein , ya doodh ya sidehe sidhe jaban par dal kar nigal jayein, yah cholera tatha upar batayi gayi bimarion ki ram ban dava hai. Yadi ise din mein ek ya do baar lya jaye to upar batayi gayi takalifein hongi hi nahin , lekin saaf pani aur gandagi se bachana jaroori hai.

 

Homoeopathy ki dava “Camphor Mother Tincture” Cholera aur isi prakar ki doosari bimariyon ke liye achchi dava hai. Isaki 5 se 10 bund saaf pani mein milakar sevan karane se bhi Cholera se bachav ho jata hai, Upayog ke drashtikon se AMRIT DHARA jyada achchi hai, chahein to  dono hi dawayein subah sham ek ek khurak le sakatey hain.

Homoeopathy ke baare mein


Main Ayurveda , Homoeopathy aur Allopathy ka snatak hun aur in teeno chikitsa vidhiyon se jahan jaisi jaroorat hoti hai marijon ka ilaj karata hun. Main apane 45 saal ke chikitsa anubhavon ko aap sab logon ko batana chahata hun taki naye logon ko kuchch naya gyan mile. Isase unhe kuchch naya prayog karane ka mauka milega.

 

Aaj main Homoeopathy ke baare mein bataunga.

 

Homoeopathy  jitana asan aur saral samjhi jati hai yah vastava mein itani hai nahin. Jyada tar log ise samajh nahin paate hain aur isaka upayog ke badale duruoyog adhik hota hai. Hota kya hai, jab Homoeopathic store wale hi dawa bechane lage hain, dawai marijon ko dene lage hain,  to kisi bhi marij ko yah ummid nahin karani chahoiye ki wah jo bhi dawa le raha hai usake apekshit parinam use mil nahin sakatey. Yah bahut gudha vishaya hai aur ise samajhane ke liye bahut dimagi kasarat ki jaroorat hoti hai. Ajakal bazar mein petent aushadhiyon ka bol bala hai, jidhar dekho har pharmacy wala har marz ki dava banaye daal raha hai. Sabase badi kami yah hai ki in dawaon ke koi test nahin huye hain aur na hi inake kahin trial huye hain. Ye sab roprietory meidicne hoti hai aur inaka takalif se koi lena dena nahin hota, in dawaon ka bahut bada bazar hai. isi bazar ke karan yah sab chal rahi hain.

 

AAm nagarikon ko Homoeopathy chikitsa ke baare mein pata hi nahin hain. Mujhe roj hi marij aakar batate hain ki unhone kaun kaun si dawayen khayi hain aur unake kya parinam mile. Jo is tarah ki dawaiyon ka upayog karate hain , ve apane swasthaya ke saath khilwad karane ke aur kuchch nahin kar rahe hain.

 

Durbhagya se sahi Homoeopathy ka doctor milana bhi bahut mushkil hai. Yah ek bahut badi vidambana hai, ki nai nai umar ke Homoeopathy ke chikitsak , jo naye naye padha kar nikale hain, unhe bhi koi  santosh janak janakari nahin milati. Mujhe inake sabak gyan ke baare mein pata hai, kyonki  main kuchch varshon tak kuchch universities ka examiner raha hun, aur BHMS ke ladakon ko examine kar chuka hun.

 

Meri yahi salah hai, agar halki phulkai takalif hai to kisi bhi naye homoeopathic doctor ke paas beshak ilaj ke liye jayen , lekin gambhir kism ki takalif ho to kisi  purane aur umra daraz doctor ko dikhayen, isi mein bimar ka bhala hai.

 

Ab to ELECTRO-HOMOEO-GRAPHY Technology aa chuki hai, isake parikshan bhi ho rahe hain. Yadi is takanik ke baare mein jyada janana chahtey hai to yahan log on karein.

 

www. electrohomoeography.wordpress.com