Infertility

Women’s Infertility cases are increasing in large numbers ; what is the reason behind it ? ; महिलाओं में बच्चा पैदा करने की क्षमता यानी बन्ध्यत्व के केसेस बहुत बड़ी सन्खया में क्यो और किस कारण से बढ रहे है ????


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पिछले कुछ वर्षों से मेरे पास महिलाओं के बन्ध्यत्व यानी Infertility के बहुत से केसेस आये / मैने अपने डाक्टर मित्रों के साथ इस विषय पर चर्चा की और उनके अनुभव share किये / मैने इस विषय पर जैसा कि मेरी कुदरती आदत है , गहन छान बीन करने का मन बनाया और जहां भी जैसा भी मौका जानने और समझने का मिला, उसे भरपूर भुनाने की कोश्सिश की और ज्यादा से ज्यादा जानने की उत्सुकता हमेशा बनी रही /

महिलाओं मे बध्यत्व अथवा Infertility से अर्थ अथवा मतलब यह है कि ” वे महिलायें जो बच्चे पैदा करने मे असमर्थ हो चुकी है अथवा महिलाये बच्चे पैदा करने मे समर्थ नही है यानी incapable or unable to bear pregnency or difficult to pregnent से है / ”

बन्ध्यत्व की स्तिथि क्यों आई है ? इसको समझना बहुत जरूरी है / इसके कारणों को समझना और उन कारणों का निवारण करना ही बन्ध्यत्व से बचने का उपाय हो सकता है /

इन कारणो को समझने के लिये बहुत से चिकित्सकों से बात चीत की , उनके अनुभव शेयर किये / हमारे यहां आये हुये बहुत से बनध्यत्व के केसेस की शुरुआत से History और sequential analysis करने के बाद दो बातें सामने मुख्य रूप से आयी /

कारण ; १- ऐसे बन्ध्यत्व के केसेस जो कुदरती तौर पर किसी un-known phenomenon से ग्रस्त रहे

कारण ; २- ऐसे बन्ध्यत्व केसेस जो मरीज की अपनी गलती या चिकित्सकों के गलत सलाह के कारण से हुये

पहले कारण से ग्रसित महिलाओं में बन्ध्यत्व की वजह में [अ] अनियमित मासिक धर्म का होना [ब] मासिक धर्म की विकृतियां [स] हारमोन्स प्रणाली की अनियमित कार्य विधियां [द] गर्भाशय का छोटा होना या पूर्ण विकसित न होना [य] गर्भाधान के लिये जरूरी डिम्ब का निर्माण न होना [र] ओवरी की नलिका की विकृतियां यथा नलिका का बन्द होना अथवा बन्द होना [ल] योनि पथ की pH value का अनुकूल न होना [व] योनि पथ का सन्क्रमण होना जिससे पुरुष के शुक्राणु जीवित न बच पाये / इसके अलावा अन्य कारण भी होते है, जो हर मरीज में विशेष रूप से अलग अलग पाये जाते है, जो उनकी personality तथा individual charecteristics से जुडे हुये होते हैं /

दूसरा कारण man made कहा जा सकता है / ऐसे बन्ध्यत्व के केसेस मरीज की अपनी गलती से मरीज खुद पैदा कर लेते है या चिकित्सकों की गलती या लापरवाही और किसी वजह से चिकित्सक के निर्णय से जुड़ा हुआ होता है / इन कारणों में [अ] बार बार गर्भपात या abortion कराना [ब] गर्भाधान रोकने के लिये गोलियों का सेवन करना [स] family planning के लिये लूप अथवा पेसरी का उपयोग [द] गर्भाशय का मुख बड़ा करने के नाम पर Dilation and Curation विधि का उपयोग [य] किसी भी तरह का छोटा अथवा बड़ा Operation ्करा लेना [र] अन्य इन्ही बताये गये कारणो से जुड़े किये गय़ॆ कार्य कलाप / इन्ही कारणों से permanent Infertility पैदा हो जाती है /

पहले कारण से जुड़ी समस्यायों का समाधान आयुर्वेद अथवा होम्योपैथी अथवा यूनानी की दवाओं द्वारा ९९.९ % सम्भव हुआ और चिकित्सा करने से बन्ध्या महिलाओं में pregnency होकर बच्चे जरूर पैदा हुये और महिलाओं की जननान्गो से समबन्धित मूल समस्याये भी ठीक हुयी /

लेकिन दूसरे कारण से पैदा हुआ बन्ध्यत्व किसी भी महिला नही ठीक हुआ और इस तरह से इन महिलाओं को permanent infertility का शिकार होना पड़ा है / इन महिलाओं मे बहुतों ने कृत्तिम गर्भाधान भी कराया लेकिन इसमे से किसी को भी १% एक प्रतिशत भी सफलता मिली हो, ऐसा मेरी जानकारी मे नही आया है / यद्यपि कुछ लोगों ने बताया कि अमुक दम्पत्ति को कृत्तिम गर्भाधान से सफलता मिली है , लेकिन साक्षात और वास्तविक और व्यक्तिगत सम्पर्क स्वरूप में मुझे कोई नही मिला, इस लिये मै इसके बारे मे authantically बता नही सकता /

यहां उन कुछ कारणों का उल्लेख किया गया है , जिनसे infertility की समस्या पैदा होती है /

मैने कई ऐसे infertility के केसेस का इलाज किया है जिन्होने किसी प्रकार का कोई सर्जिकल आप्रेशन छोटा अथवा बड़ा किसी भी किस्म का नही कराया था और ये महिलायें अक्दम सिरे से ही और शुरू से ही आयुर्वेदिक या होम्योपैथी का इलाज करती रहीं / ऐसी महिलाओं के जननान्ग कुदरती अवस्था मे रहे / ऐसी महिलाओं को इलाज करने के साथ साथ preganancy हुयी और उनके बच्चे पैदा हुये /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तथा अन्य आयुर्वेद के विकसित निदान ग्यान की तकनीक यथा आयुर्वेद रक्त परीक्षण और आयुर्वेदा मूत्र परीक्षण तथा आयुर्वेदा थेर्मल परीक्षण आदि रोग निदान ग्यान तकनीक द्वारा अध्य्यन करने के बाद ऐसी महिलाओं मे यह पाया गया कि ;

१- आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्तों के अनुसार कफ और वात के मिलित दोष मिले /
२- त्रिदोष भेद के अनुसार वात भेद मे अपान वायु और समान वायु के दोष, पित्त भेद के पाचक और कफ दोष के श्लेष्मन दोष की प्रमुखता मिली /
३- सप्त धातुओं में रस धातु, मेद धातु, मज्जा धातु और शुक्र धातु के दोष प्राप्त हुये / सप्त धातुये वात, पित्त और कफ के दोषो की प्रमुखता के साथ साथ individual to individual intensity level मे मौजूद रहे हैं /

४- Pathophysiology और pathology के हिसाब से Uterus, mammery glands, thyroid और Autonomic Nervous system के साथ साथ बड़ी और छोटी आन्तों की कार्य विकृति तथा Liver, Spleen और Pancreas की pathophysiology और pathology मौजूद रही है /

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Infertility / Sterility यानी महिलाओं में बन्ध्यत्व या बच्चे पैदा न होने की क्षमता


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प्रत्येक महिला और प्रत्येक विवाहित पुरुष का सपना होता है कि विवाह के बाद के कुछ वर्षों के भीतर उनके परिवार में बच्चे पैदा हों । यह कामना करना स्वाभाविक है, क्योंकि हर कोई चाहता है कि उसके परिवार में अगली पीढी का आगमन हो । लेकिन इन सब काम्नाओं पर तब तुषारापात हो जाता है , जब विवाह के कई साल बीत जाने के बाद बच्चे नहीं होते । बस यहीं से समस्या की शुरुआत होने लगती है ।

मेरे पास बहुत से मरीज आये, लेकिन इनमें केवल कुछ ही सौभाग्यशाली रहे जिनको उपचार के बाद बच्चे हुये । ऐसे मैने अपने साथी डाक्टरों के मरीजों को भी देखा है । मैने पाया कि जिन विवाहित जोड़ों ने एलोपैथी का उपचार लिया तथा जिन महिलाओं ने डी० एंड सी० कि प्रक्रिया अपनाई , उनको तो Permanent Sterility / Infertility हो गयी और उनके बच्चे ही नहीं हुये । जिन महिलाओं के जननान्गों में किसी प्रकार की छेडछाड़ या अनावश्यक बिला जरूरी सर्जरी की गयी, उनको भी स्थायी बन्ध्यत्व की तकलीफ हो गयी, और फिर कभी बच्चे नहीं हुये ।

इसके विपरीत जिन महिलाओं ने यह सब नहीं कराया और इन सब प्रक्रियाओं से दूर रहीं, उनको देर सबेर बच्चे जरूर हुये । इन्हीं मरीजों के बच्चे हुये जिन्होनें अपने जननान्गों को कुदरती तरीके से सुरक्षित रक्खा । एक महिला को तो शादी के 17 सत्रह साल बाद लड़्का हुआ । एक महिला को शादी के सात साल बाद लड़्की हुयी । एक महिला के शादी के १२ साल बाद जुड़्वां लडके हुये । इन सभी महिलाओं ने अपने जननान्गों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़ाछाड़ी नहीं की । इसके विपरीत जिन्होंने कार्य किया , उनको बन्ध्यत्व की शिकायत हो गयी ।

जिन्हें बन्ध्यत्व की तकलीफ़ का जैसे ही पता चले, सबसे अच्छा है कि ऐसी महिलायें अपना उपचार आयुर्वेद से ही करायें । होम्योपैथी के उपचार का भी सहारा ले सकती हैं । लेकिन मेरे हिसाब से प्राथमिकता आयुर्वेद उपचार को ही देना चाहिये । जिन महिलाओं के बच्चे नहीं हैं , वे आयुर्वेद की शरण में जायें और इधर उधर न भटकें ।