jade ka mausam

जाड़े के दिनों अथवा ठन्डक के मौसम में बरतनी जाने वाली सावधानियां ; Winter Season’s precautions


प्राचीन काल से लेकर आज तक बदलते समय और समाज तथा व्याप्त रीति रिवाज तथा रहन सहन को लेकर भले ही जीवन शैली में परिवर्तन आने की बात सभी कर रहे हों लेकिन यह सच नहीं है / सत्य यह है कि हर शताब्दी में भारतीय जीवन शैली में परिवर्तन आते रहे हैं और भारतीय समाज ने अपने आपको उसी तरह की परिस्तिथियों में ढालने की कोशिश की , ऐसा ता्लमेल बैठाने की कोशिश की, जैसा वे चाहते थे / यह परिवर्तन का सिलसिला आज भी चल रहा है /

लेकिन मूल और जड़ की बात सभी लोगों नें एक जैसी ही पकड़ रखी है और वह है व्यक्तिगत / कोई भी व्यक्ति अपने आपको स्वस्थ्य रखने के लिये खुद ही अपने norms तय कर लेता है कि उसे कब क्या करना है ? कब क्या खाना है ? क्या खाना है और क्या नहीं खाना है आदि आदि / यह वह व्यक्ति स्वयम ही तय करता है कि किस समय उसे क्या करना चाहिये, इसलिये सब्के लिये एक जैसा नियम बना दिया जाये यह सम्भव नहीं है /

फिर भी कुछ बाते ऐसी हैं जिन्हे सबके लिये पालन कराना आवश्यक होता है और वह है मौसम में होने वाले बदलाव से बचने का /

ठन्डक यानी जाड़े के मौसम में क्या ऐसा करें जिससे शरीर को अस्वस्थता से बचाव कर सकें /

१- यह मौसम स्वास्थय के निर्माण के लिये सबसे अच्छा माना गया है / इसका कारण यह है कि इस मौसम में पाचन शक्ति बढ जाती है,जिससे खाया पिया हुआ जल्दी पच जाता है / इसलिये खाने पीने में कुछ अधिक खा पी सकते है और पौष्टिक पदार्थ ले सकते हैं /

२- जाड़े की रातें लम्बी होती हैं इसलिये रात का भोजन पचने के लिये अधिक समय मिल जाता है /

३- जिन्हे दूध मफिक आता हो, उनको सुबह नाश्ते में हलुवा, जलेबी, पाक, अवलेह, प्राश, लड्डू आदि पौष्टिक चीजें खाकर ऊपर से दूध पीना चाहिये / मान्साहारी खूब उबले अन्डे, अन्डे आमलेट तथा अन्डे के अन्य व्यन्जन ले सकते है /

४- जाडे के मौसम में खुले स्थान में व्यायाम करना लाभ प्रद है / जो व्यायाम नहीं कर सकते , उन्हे पैदल चलने का या टहलने का विचार करना चाहिये / खुले स्थान में बैठकर गहरी सान्स लेना फायदा पहुचाता है / जिन्हे सर्दी जल्दी लग जाती हो वे सावधान रहे / उन्हे व्यायाम इत्यादि सूर्योदय के पश्चात करना चाहिये जब आबहवा में थोड़ी गर्मी आ जाये /

५- सुबह शरीर में तेल चुपड़ना अथवा हल्की मालिश करना लाभ्दायक है /

६- इस मौसम में ऐसा खान पान अपनाना चाहिये जिससे शरीर में गर्मी बनी रहे / ठन्डे पेय पदार्थ शरीर की उष्मा को कम करते है जो फायदेमन्द नही है /

७- शरीर को ठन्ड से बचाने के लिये गर्म कपडे पहना चाहिये और मोजे तथा मफलर या टोपी से सिर ढका होना चहिये /

८- जिन लोगों को “सर्वाइकल स्पान्डिलाइटिस” सिर के रोग, सिर दर्द, मस्तिष्क के रोग, पैरालाइसिस, मास्पेशियों के रोग, रीढ की हड्डी के रोग, हृदय रोग आदि गम्भीर रोग हों उनको ठन्डक से बचने के लिये विषेश सावधानी रखनी चाहिये / ठन्डक ऐसे रोगियों के लिये खतरनाक साबित हो सकती है /

९- रात के समय , जब सोते हैं , तब शरीर की conditioning होती है, इसमें मान्स्पेशियों मे relax होने की प्रक्रिया में शरीर के सभी अन्ग प्रत्यन्ग हिस्सा लेते है जिससे बहुत से केमिकल परिवर्तन होते हैं / इसके लिये अबाधित ताप की आवश्यकता होती है / इस ताप को मेन्टेन करने के लिये रजाई अथवा कम्बल की जब भी आवश्यकता हो, उपयोग करें /

१०- अधिक ठन्डे पानी से स्नान करना शरीर को shocked कर सकता है / वैसे भी अधिक ठन्डे पानी से स्नान करना खतरनाक साबित हो सकता है / इसलिये स्नान करने के पानी को हलका गुनगुना कर लेना चाहिये ताकि शरीर को स्नान की सुखमय अनुभूति हो /

प्रकृति ने मनुष्यों को शीत रितु का वरदान शरीर को स्वस्थय बनाये रखने के लिये दिया है / इसका सभी को भरपूर उपयोग करना चाहिये /

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