LEUCODERMA ; सफेद दाग ; WHITE SPOTS ; VITILIGO

सफेद दाग के रोगी की ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन डाटा आधारित व्याख्या ; ANALYSIS OF A VITILIGO / LEUCODERMA PATIENT IN VIEW OF AYURVEDA FUNDAMENTALS WITH DIAGNOSIS AND MANAGEMENT AND TREATMENT DATA BASED ON E.T.G. AYURVEDASCAN FINDINGS


सफेद दाग के एक रोगी का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन डाटा की व्याख्या की जा रही है , जिसके आधार पर सम्पूर्ण वैग्यानिक आधार आश्रित आयुर्वेदिक औषधियो का चुनाव और पथ्य परहेज के लिये रोगी को बताया गया / डाटा देखने और अध्ध्य्यन करने पर पता चलता है कि उसके शरीर के किन अन्गो मे विकृति हुयी और इसके परिणाम स्वरूप उसको सफेद दाग की स्तिथि पैदा हुयी /

इस मरीज की original report  की कापी यहा दी जा रही है /

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मरीज कई सालो से सफेव्द दाग की बीमारी से परेशान था / इसने काफी इलाज कराया पर कोई फायदा नही हुआ / उल्टे इसकी तकलीफ  बढती चली गयी / मरीज ने कई साल एलोपैथी का इलाज कराया उससे जब नही ठीक हुआ तो फिर होम्योपैथी का इलाज कई साल तक कराता रहा जब होम्योपैथी से कॊइ आराम नही मिला तो फिर आयुर्वेद का इलाज कराता रहा , लेकिन इसे आराम मिलने की बजाय इसकी तकलीफ दिनो दिन बढती चली गयी /

मरीज मूल रूप से दक्षिण भारत SOUTH INDIA  का रहने वाला है  और वही इसका निवास स्थान है / कानपुर मे इसकी  ससुराल है यानी इसकी पत्नी कानपुर की है लेकिन है south indian /

कानपुर के रिश्ते दारो को किसी सफेद दाग के मेरे द्वारा ठीक हो चुके पूर्व मरीज ने बताया कि मै सफेद दाग के मरीजो का इलाज करता हूं इस पर मरीज के रिश्तेदारो ने मुझसे सम्पर्क साधा और परीक्शण के लिये समय appointment मान्गा /

रिपोर्ट फाइनल बन जाने के बाद सार  रूप मे पता चला कि इसका PIGMENTATION  LEVEL   सामान्य ९१ से १०५ ई०वी० निर्धारित लेवल से ४० प्रतिशत कम है / इसके साथ इसके cumulative LIVER -PANCREAS – SPLEEN  की pathophysiology बहुत अधिक स्तर की मौजूद है /

मरीज की छॊटी आन्त और बड़ी आन्त का आन्कड़ा भी बढा हुआ निकला /

सबसे बड़ी बात यह कि इस मरीज का PULSE RATE  कम निकला /

इसके अलावा और भी बह्त सी anomalies  निकली है /

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SKIN DATA  से प्ता चलता है कि यह सामान्य से बहुत अधिक है इसका मतलब यह है कि त्वचा की सामान्य physiology अव्यवस्तिथि है और त्वचा से समबन्धित सभी channels  सामान्य कार्य नही कर रहे है /

पित्त दोष के पान्च भेदो मे से एक भेद भ्राजक पित्त है जो सारे शरीर को  एक रन्ग मे  बनाये रखता है /  रूप रन्ग sensations आदि का अनुभव भ्राजक पित्त कराता है / भ्राजक पित्त का प्राप्त डाटा लेवल ३९ ई०वी० है यह सामन्य बताये गये लेवल से काफी कम है /

रोगी को पसीना बहुत आता है / पसीना अधिक आने का मतलब यह है कि शरीर की मेटाबालिक प्रक्रिया मे कही गड़बडी है और इससे electrolytic imbalances अधिक बढते है /

शरीर के electrolytes  की अनियमितता से बहुत से ailments  पैदा हो जाते है / जैसे sodium की कमी से चक्कर आने लगना और दिल की धड़कन के gap  मे कमी या अधिक होना यानी rhythmic effects या पोत्तस्सिउम सल्त का कम ज्यादा होने से PULSE RATE का घत्ना अथवा बढना / पसीना ज्यादा अयेगा तो इस तरह की दिक्कते बढती है /

भ्राजक पित्त की कमी की वजह से त्वचा के नीचे अधिक गर्मी भर जाती है जिसको release  करने के लिये त्वचा को अपने रोम कूप को अधिक विस्तारित करने की जरूरत होती है ताकि शरीर की गरमी न अधिक हो और न कम हो /

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मरीज की आन्तो का आन्कलन देखिये / यह सामान्य से अधिक है / LIVER   और PANCREAS और SPLEEN  और SMAAL INTESTINES तथा LARGE INTESTINES  के अलावा आयुर्वेद के मौलिक सध्धान्त यथा अपान वायु और रन्जक पित्त का डाटा  देखिये / अपान वायु कितनी कम लेवल की है और रन्जक पित्त कितने हाई लेवल का है /

कम स्तर की अपान वायु अगर अधिक स्तर के रन्जक पित्त के आन्कड़े के साथ हो तो ऐसा देखा गया है कि मरीज को गुदा से सम्बन्धित बीमारी अवश्य होती है / यह ववासीर तथा गुदा पाक अथवा  गुदा का बाहर निकला इस तीन अवस्थाओ मे मिलता है / लेकिन बड़ी आन्त के तीन हिस्से यथा ASCENDING COLON य़ा TRANSVERSE COLON य़ा DECENDING COLON / SIGMOID COLON / RECTUM इनका आन्कड़ा अगर अधिक या सामन्य से कम हो तो बवासीर PILES / HEMORRHOIDS   रोगी को अवश्य होती है /

रोगी से पूछने पर मरीज ने बताया कि उसे १० पन्द्रह साल से बवासीर की तकलीफ है / इसने बबासीर के इलाज के लिये सभी तरह की दवाओ के हथकन्डे उपयोग किये लेकिन इसकी बवासीर नही दूर हुयी /

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ऊपर के डाटा शीट मे ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक के  द्वारा प्राप्त आन्कड़ा से short out  करने के बाद जब डाटा  narrow down  किये जाते है तो असली तस्वीर मरीज की बीमारी के बारे मे समझ मे आती है कि शरीर के किस अन्ग मे और कहां और किस  किस अन्ग मे किस intensity level  की तकलीफ उपस्तिथि है /

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ऊपर की डाटा शीट मे आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तो का अधिक तम लेवल से लेकर कम से कम लेवल तक का डाटा दिया हुआ है / रन्जक पित्त का डाटा सबसे ऊपर है और अपान वायु का सबसे नीचे है /

इसी तरह शुक्र कफ  सप्त धातु सबसे ऊपर के लेवल पर है और रस धातु सबसे नीचे लेवल पर है / इसका तात्पर्य यह है कि रस धातु की गड़बडी है जो ANABOLIC  >>>>>>>> METABOLIC प्रक्रिया को सुचारु रूप से नही सम्पादित कर पा रही है /

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उपरोक्त डाटा शीट से gastro intestinal system और  integumentary system  के बारे मे प्राप्त आनकड़ो को बताता है / दोनो आन्कड़ो को एक साथ analysis  करके मरीज की बीमारी की picture  बहुत कुछ साफ और स्पष्ट होने लगी है कि इसे किस तरह की combined integrated problems of body systems  की पैदा हो रही है /

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अब आइये देखा जाय कि इस मरीज के शरीर के अन्दर आयुर्वेदिक मौलिक सिध्धान्त किस intensity level  के   मौजूद है /

त्रिदोष  उपस्तिथि का लेवल वात सामन्य लेवल की और पित्त सामान्य से अधिक स्तर का और कफ सामान्य से कम लेवल का पाया गया है /

अपान और व्यान वायु के भेद सामान्य से बहुत कम पाये गये है /

रन्जक पित्त सामान्य से अधिक और भ्राजक पित्त भेद सामान्य से कम प्राप्त हुये है /

श्लेष्मन कफ सामान्य से अधिक और रसन कफ सामान्य से कम प्राप्त हुआ है /

 

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समपूर्ण सप्त धातुओ का आनकलन करने पर पता चलता है कि मान्स धातु सामान्य से बहुत अधिक है /

सप्त धातु अगर वात से प्रभावित है तो रस धातु सामान्य से बहुत कम है और पित्त से प्रभावित रस  धातु भी सामान्य से अभुत कम है तथा  कफ दोष से प्रभावित सप्त धातु सामान्य से बहुत अधिक है /

इस रोगी को पेट मे गैस बहुत बनती है यह शिकायत उसने बतायी है जिसका वह कई साल से इलाज कर रहा है लेकिन पेट की गैस मे उसको कोई आराम नही मिला/

 

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अब श्रोतो दुष्टि का विवेचन करते है

मरीज के कई श्रोतों मे  anomalies  प्राप्त हुयी है /

रस वह श्रोत सामान्य से अधिक है / यह श्रोत हृदय  और धमनियो के श्रोत पर अधिकार करता है / इस व्यक्ति का BLOOD PRESSURE  सामान्य से कम है और इसका PULSE RATE   सामान्य से कम है /

मान्स वह श्रोत के मूल मे स्नायु और त्वचा है / यह बाहर से ही देखने मे पता चल जाता है कि इसे त्वचा का रोग है / इसके कमर से नीचे की मान्स पेशियो खिचती है जिससे यह ठीक से चल नही पाता , यह muscula0-ligamntous-skeletal anomalies  मौजूद होने का सन्केत है / पूर्वोक्त डाटा शीट के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि यह सही है /

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इस मरीज का पाचन बहुत खराब है जो कई साल से है / यह बहुत भयानक पेट गैस बनने की शिकायत से परेशान है / पेट की .गैस का इलाज बहुत किया गया लेकिन कोई सफलता नही मिली / इस रोगी के अन्न वह श्रोत तथा पुरीष वह श्रोत तथा स्वेद वह श्रोत सामान्य से अधिक है, इसलिये यह बिन्दु स्थापित हुआ कि यह तीन श्रोत सामान्य कार्य अवस्था मे नही है /

इसकी पुष्टि अन्य डाटा शीट को देखने से confirm  हो जाती है /

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उक्त डाटा शीट के अवलोकन से यह पता चलता है कि पित्त दोष stronger  अवस्था मे है और यह २++ स्तर का है जब्कि कफ दोष weak स्तर का है और १- [एक माइनस] स्तर का है /

जबकि वायु दोष सामान्य स्तर का है /

इसका मतलब यह हुआ कि वायु दोष तो सामान्य है लेकिन पित्त कुपित अवस्था मे है और इस वजह से पित्त ने कफ को कमजोर बना दिया / यह imbalance  दोष की स्तिथि है /

इस तरह के combinations  की चर्चा आयुर्वेद के शास्त्रोक्त ग्रन्थ “माधव निदान”  मे की गयी है /  वाग भट्ट ने भी अपने ग्रन्थ मे भी ऐसे  combinations  की निदानात्मक चर्चा की है /

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महर्षी चरक ने रचित  ग्रन्थ चरक सम्हिता मे त्रिदोषो के सन्निपातज दोषो के ६३ के लगभग combinations  बताये है / इस combinations  का विस्तार से वर्णन चरक सम्हिता मे ही ्देखने चाहिये /

यहा ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक से मरीज का डाटा लेकर जिस तरह का सन्निपातज  combination  बना है , उसे ही प्रस्तुत किया जा रहा है /

इस  combination  मे वात और पित्त १- और १- [एक माइनस] अवस्था मे है और पित्त  २++ अवस्था मे है / इससे पता चलता है कि रोगी को पित्त दोष को बढाने मे शारीरिक वायु का कम्जोर अवस्था मे हो जाना है /

जब शरीर मे वायु कमजोर होगी तो दोष का imbalance होना लाजिमी है / यही रोग की अवस्था है /

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रोगी के हाथो के अलावा अन्य कुछ स्थानो पर सफेद दाग है जिनका चित्र future reference  के लिये रख लिया गया है /

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CONCLUSION  ;  निष्कर्ष

ऊपर दिये गये सभी प्राप्त आन्कड़ो से इस मरीज के सभी आयामो से देखने के बाद जिस तरह का निदान CHIEF COMPLAINTS   मे वर्णित किया गया है उसकी पुष्टि होती है /

पित्त दोष की प्रधानता

वायु दोष का कम होना

पित्त भेद और वायु के भेदो का न्यूनाधिक होना

रोग निदान मे यकृत तथा पैन्क्रियाज और spleen  की pathophysiology का उपस्तिथि होना

छोटी आन्त और बड़ी आन्त  की pathophysiology  का मौजूद होना

Anabolic >>>>>>metabolic functional anomalies  के कारण blood chemical chemistry का imbalance  होना

इन सभी imbalances  से जब ionic changes  होते है तो शरीर की सामान्य electrical diffusion मे बाधा आती है और cellular metabolism  की प्रक्रिया सामान्य से असामान्य अवस्था की ओर बढती है/

यह अवस्था LYMPHATIC SYSTEM के लिये मुफीद साबित होती है और melanin का सारे शरीर मे कम होने का  cellular massage जहा तहा पहुचाने का काम lymph glands  के जरिये होने लगता है / जहां जहां शरीर के हिस्से मे ऐसा सन्देश पहुन्चता है , वहीं वही सफेद  दाग / white spots / leucoderma / vitiligo  SPOTS पैदा होने शुरू हो जाते है /

सफेद दाग के बारे मे मेरा जितना अध्ध्य्यन है मैने इसे बहुत ही सूच्छ्म रूप मे देने का प्रयास किया है / यह मेरा अपना विचार है और स्व-अध्ध्य्यन पर आधारित है / यह स्व अध्ध्य्यन ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के सभी जान्चो के निष्कर्ष और आयुर्वेद के रक्त परीक्शन तथा आयुर्वेद के मूत्र परिक्षण पर आधारित  है /

चिकित्सा के लिये जिस बिन्दु का सबसे पहले सन्ग्यान लिया गया वह “पित्त” दोष है क्योन्कि पित्त दोष के कुपित होने के कारण ही यह तकलीफ हो रही है /

पित्त दोष की शान्ति और अन्य दूसरी तकलीफो के लिये आयुर्वेदिक दवाओ का चयन युक्ति पूर्वक किया गया /

मरीज को आयुर्वेदिक दवाओ का PRESCRIPTION   दे दिया गया है और उसको क्या खाना है और कया नही करना है यह सब भी बता दिया गया है /

दवाओ के सार्वजनिक दुरुप्योग को रोकने के लिये PRESCRIBE  की गयी पर्चे की दवाओ को काट कर छिपा दिया गया है /

मरीज को १२० दिन दवा खाने के लिये कहा गया है , उसे परहेज भी बता दिया गया है और जीवन शैली किस तरह की अपनानी चाहिये उसका management भी  बता दिया गया है /

LEUCODERMA  एक बहुत sensitive  रोग है. यह बहुत तेजी से बढता है / आधुनिक चिकित्सा मे इस बीमारी का  कोई इलाज नही है /

लेकिन ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित आयुर्वेद्क और आयुष इलाज करने से leucoderma सफेद दाग   की बीमारी अवश्य ठीक होती है /

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नेउरोलोगिचल पैन 009

 

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LEUCODERMA ; सफेद दाग ; WHITE SPOTS ; VITILIGO ; WHO SAYS “IS NOT CURABLE ?” ; LEUCODERMA IS 100% CURABLE, IF TREATED BY AYURVEDA – AYUSH AT AN EARLY STAGE, BASING ON THE FINDINGS OF THE AYURVEDA ETG AYURVEDASCAN TECHNOLOGY & AYURVEDA BLOOD EXAMINATION & AYURVEDA URINE EXAMINATION & AYURVEDA THERMAL SCANNINGS


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LEUCODERMA is 100 % curable, if treated by AYURVEDA -AYUSH HIGH SPECIALITY DIAGNOSIS PROCEDURE , basing on the findings of the ETG AyurvedaScan technology including AYURVEDA BLOOD EXAMINATION , which is about 50 in numbers and AYURVEDA URINE EXAMINATION , which is also about 50 in numbers and AYURVEDA THERMAL SCANNING.

The COMBINED AYURVEDA Diagnosis proviudes correct diagnosis in THREE DIMENSIONS.

The First Dimension is to find and establish the ROOT PROBLEM OF THE BODY ORGANS OR PARTS, from where the problem is GENERATING.

The second Dimension is the path-way, which carries the “generating problems”

The Third Dimension is the FINAL APPEARANCE of the problem REFELECTION.

When these three dimnesions are diagnosed, AYURVEDIC TREATMENT becomes fool-proof and is result oriented.

We have treated successfully LEUCODERMA PATIENT in this way with best results, which we have already years and years experienced.

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LEUCODERMA PATIENT is being examined by ELECTRO-TRIDOSHA GRAPH : E.T.G. AyurvedaScan Scanner procedure.