muscular dystrophy case ayurveda cures

MUSCULAR DYSTROPHY CASE; AYURVEDA DIAGNOSIS BASES COMBINATION / INTEGRATED AYUSH TREATMENT AND MANAGEMENT RELIEVED AND COMFORTED PHYSICALLY AND MENTALY PATIENT HEALTH CONDITION ; मस्कुलर डिस्ट्राफी का एक केस ; आयुर्वेद की डायगनोसिस और आयुष के मिलेजुले इलाज के द्वारा मरीज को मानसिक और शारीरिक दोनो ही तरह से आराम मिला


३० साल के एक पुरुष मरीज , जिसे मस्कुलर डिस्ट्राफी MUSCULAR DYSTROPHY  का रोग कई साल पहले हुआ था जिसके कारण मरीज चल फिर नही सकता था और मरीज को कई लोग सहारा देकर उठाते बैठाते थे / एलोपैथी के डाक्टरो ने इस बीमारी को लाइलाज बता दिया था / एलोपैथी का इलाज कराने के साथ साथ इसकी हालत बिगड़्ती चली जा रही थी /

यह मरीज मेरे यहा पिछले साल सितम्बर २०१६ को इलाज के लिये हमारे केन्द्र मे ३५० किलोमीटर दूर से आया था / इसे कई लोग सहारा देकर और हाथो मे उठाकर examination table पर लिटाने की स्तिथि मे आया था / यह मरीज अपने पैरो पर चल फिर नही सकता था और बिना सहारे के चल फिर भी नही सकता था /

MUSCULAR DYSTROPHY मस्कुलर डिस्ट्राफी एक ऐसी बीमारी है जिसमे शरीर की सभी मान्शपेशियां मोटी होने लगती है और भारी होने लगती है / किसी किसी को हाथ और पैर की मान्शपेशियां मोटी होती है जो बेडौल दिखायी देती है / मान्शपेशिया मोटी हो जाने के कारण रोगी को उठने बैठने मे बहुत परेशानी होती है और चल फिर नही पाता है यहा तक कि अपने दैनिक काम भी नही कर पाता है /

उक्त रोगी जब पहली बात हमारे केन्द्र मे चिकित्सा के लिये आया था तो इसे कई लोग हाथो मे टान्गकर  टेस्ट करने वाली कोच पर लेकर आये थे / यह रोगी पिछले आठ महीने से इलाज कर रहा है /

आठ अम्हीने के इलाज से इसको यह आराम मिली है कि यह चल फिर लेता है और पना दैनिक काम कर लेता है  / इसके हाथ बहुत मोटे हो गये थे जो इलाज के बाद अपने समान्य आकार मे आने लगे है /

मरीज कॊ काफ मान्शपेशी मे अधिक सूजन होने के कारण यह चलने मे जयादा दूर तक नही जा पाता है /

यह एक तरह की लाइलाज बीमारी है और इसका कोई इलाज नही है यह बात सही है लेकिन आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन और मरीज के रक्त परीक्षण से प्राप्त रिपोर्टो को समजह्ने के बाद मिली हुयी कमियो को जब जड़ मूल से इलाज करते है तो ऐसी बीमारिया मे जरूर आराम मिलती है /

ऊपर की  आयुर्वेद की रक्त परीक्षण रिपोर्ट से पता चला कि इसे ”वात-कफ” दोश है और सप्त धातुओ मे मान्स और मेद धातु की विकृति है / इस रोगी को दोष और धातु सुधार के लिये आयुर्वेदिक औषधियो को सेवन करने के लिये बताया गया और िलेक्ट्रोलाइट्स और मिनरल्स को कमी को दूर करने के लिये कया करना चाहिये यह सब बताया गया /

इस तरह के मैनेज्मेन्ट करने से ”लाइलाज”बता दी गयी बीमारियो के इलाज और मरीजो के मैनेजम्न्ट को  एडजस्ट करने  से ही लाइलाज कही जाने वाली बीमारियो का इलाज किया जा स्कता है / हमे यह कहने मे कतई सन्कोच नही है कि लाइलाज बता दी गयी बीमारियो का इलाज आयुर्वेदास्कैन और रक्त परीक्षण की फाइन्डिन्ग्स द्वारा सम्भव हो सकता है  /