SINUSITIS

SINUSITIS ; NASO-FACIAL DISEASE CONDITION ; सायनुसायटिस ; नाक और गले तथा कान और अन्दरूनी गला को एक साथ तकलीफ देने वाली बीमारी


सायनुसाइटिस को नाक से सम्बन्धित बीमारी समझा जाता है लेकिन इस बीमारी के रिफ्लेक्टिव सिन्ड्रोम्स पूरी नाक और कान और गला तथा ग्र्दन के अन्य भागो को भी विकार युक्त बना देती है / फेसियल न्य़ुरैल्जिया इसी बीमारी की देन है / अधिक एन्टीबायोटिक दवाओ के खाने से इसका असर मष्तिष्क के भागो पर भी पड़ता है ऐसा भी देखने मे आया है /

इसलिये इस बीमारी को हल्के मे नही लेना चाहिये /

यह बीमारी आयुर्वेद और आयुष की दवा करने से अव्श्य ठीक हो जाती है / जड़ बुनियाद से बीमारी को ठीक करने के लिये आयुर्वेद का इलाज करना बहुत फाय्देमन्द है /

जब सायनिसाइटिस की  बीमारी बेकाबू हो जाये और कोई भी इलाज कारगर न हो तो आयुर्वेद की आधुनिक तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेद स्कैन परीक्षण आधारित इलाज करना चाहिये / आयुर्वेद के रक्त परीक्षण और आयुर्वेद के मूत्र परीक्षण से तथा अन्य जान्चो से यह पता चल जाता है कि शरीर के अन्दर क्या गड़्बड़ी है और सायनुसायटिस की तकलीफ किस वजह से हो रही है ?

इस तरह से बीमारी का निदान हो जाने से इसका इलाज सटीक और अचूक  सम्भव हो जाता है / यह शत प्रतिशत ठीक होने वाली बीमारी है / यह बीमारी शरीर के नर्वस सिस्टम को और दूसरे सिस्टम को बहुत सेन्सिटिव बना देती है / यह ठन्डक से बढने वाली बीमारी है क्योन्कि जब यह बीमारी होती है तो शरीर की रेजिस्टेन्स पावर घटती है / रेजिस्टेन्स के घटने के कारण सायनुसायटिस के रोगी को बहुत शीघ्रता के साथ ठन्डक का एक्स्पोजर होता है इसीलिये यह बीमारी उनको ज्यादा होती है जो या तो दिन भर ए०सी० मे बैठते हैं या गर्मी से बचने के लिये  ठन्डक के लिये स्थान बदला करते है /

कहने का तात्पर्य यह कि सायनुसायटिस बीमारी ठन्डक से बढती है और इससे बचना चाहिये  / ऐसा न करने पर यह बीमारी बहुत जोर मारती है और ठीक होने का नाम नही लेती है /

 

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