Sterility

Infertility / Sterility यानी महिलाओं में बन्ध्यत्व या बच्चे पैदा न होने की क्षमता


uterus

प्रत्येक महिला और प्रत्येक विवाहित पुरुष का सपना होता है कि विवाह के बाद के कुछ वर्षों के भीतर उनके परिवार में बच्चे पैदा हों । यह कामना करना स्वाभाविक है, क्योंकि हर कोई चाहता है कि उसके परिवार में अगली पीढी का आगमन हो । लेकिन इन सब काम्नाओं पर तब तुषारापात हो जाता है , जब विवाह के कई साल बीत जाने के बाद बच्चे नहीं होते । बस यहीं से समस्या की शुरुआत होने लगती है ।

मेरे पास बहुत से मरीज आये, लेकिन इनमें केवल कुछ ही सौभाग्यशाली रहे जिनको उपचार के बाद बच्चे हुये । ऐसे मैने अपने साथी डाक्टरों के मरीजों को भी देखा है । मैने पाया कि जिन विवाहित जोड़ों ने एलोपैथी का उपचार लिया तथा जिन महिलाओं ने डी० एंड सी० कि प्रक्रिया अपनाई , उनको तो Permanent Sterility / Infertility हो गयी और उनके बच्चे ही नहीं हुये । जिन महिलाओं के जननान्गों में किसी प्रकार की छेडछाड़ या अनावश्यक बिला जरूरी सर्जरी की गयी, उनको भी स्थायी बन्ध्यत्व की तकलीफ हो गयी, और फिर कभी बच्चे नहीं हुये ।

इसके विपरीत जिन महिलाओं ने यह सब नहीं कराया और इन सब प्रक्रियाओं से दूर रहीं, उनको देर सबेर बच्चे जरूर हुये । इन्हीं मरीजों के बच्चे हुये जिन्होनें अपने जननान्गों को कुदरती तरीके से सुरक्षित रक्खा । एक महिला को तो शादी के 17 सत्रह साल बाद लड़्का हुआ । एक महिला को शादी के सात साल बाद लड़्की हुयी । एक महिला के शादी के १२ साल बाद जुड़्वां लडके हुये । इन सभी महिलाओं ने अपने जननान्गों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़ाछाड़ी नहीं की । इसके विपरीत जिन्होंने कार्य किया , उनको बन्ध्यत्व की शिकायत हो गयी ।

जिन्हें बन्ध्यत्व की तकलीफ़ का जैसे ही पता चले, सबसे अच्छा है कि ऐसी महिलायें अपना उपचार आयुर्वेद से ही करायें । होम्योपैथी के उपचार का भी सहारा ले सकती हैं । लेकिन मेरे हिसाब से प्राथमिकता आयुर्वेद उपचार को ही देना चाहिये । जिन महिलाओं के बच्चे नहीं हैं , वे आयुर्वेद की शरण में जायें और इधर उधर न भटकें ।

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