The Ultimate Ayurvedic Dagnosis Solutions

Tribhuvan Kirti Ras ; an Ayurvedic classical remedy for Winter Season


Every year winter season comes and while its commencement, it brings many health problems with the persons almost every one of all ages. Those who are living in those areas, where almost all months of a year, winter or winter like atmosphere persists, they also feel problems from more cold.

In those countries, where atmosphere of winter is persists around the year, in this region the skin of the person becomes more harder than comparatively to person of the tropical region. The persons, who are living in a cold atmosphere, their skin quality is somehow changed comparatively to those who are living in tropical regions and where cold or winter persists only few days or few months.

Case studies with the help of ETG AyurvedaScan system reveals that traces recorded from European countries and Tropical regions patients are differs from elevation , which is due to hard and soft skin of the patient belongs to specific regions. Where cold season is very prominent the skin of the person are thick and deposition of fat layer in under skin persists.

Although the diagnosis of disorders are same, ayurvedic fundamentals evaluations are same and no differences seen in between the results except the hights and longitudinal appearence of traces, which is due to skin of the subjects undergone for the test.

However, this dose not matter. Here TRIBHUVAN KIRTI RAS is beneficial in the following ailing conditions;

1- Cures exposure of cold either from cold of winter or wetting in rain
2- Used in almost all kinds of FEVER of any origin, whatever they may be.
3- Lower down HIGH FEVER just like PARACETAMOL do in feverish conditions.
4- suppressed sweat comes out after use of this remedy
5-= Very fast acts in Just appeared fever
6- acts fast in Phlegm-cough-Fever conditions
7- Useful in Pneumonia and Pneumonia like syndromes
8- Influenza of any origin and anywhere
9- Useful in small pox and measles and like syndromes

Doses; One /two tablets should be taken four hourly with tea or warm water or Ginger Tulasi tea

Ayurveda have many remedies for winter ailing conditions, TRIBHUVAN KIRTI RAS is one of them. Those who desire they should use this safe remedy.

दान्तों तथा मसूढों और मुख के अन्दर के तमाम विकारों के लिये आयुर्वेद का दन्त मन्जन ; Ayurvedic Tooth Powder for Dental and Oral Problems


आयुर्वेद पूर्ण चिकित्सा विग्यान है / आदि काल से हमारे चिकित्सा पूर्वजों ने समाज को स्वस्थय बनाये रखने के लिये बहुत से नुस्खे लिपिबध्ध करके दिये है , जो आज भी उसी तरह से कारगर और प्रभावशाली है, जैसे उस समय थे /

दान्तों के रोगों के उपचार के लिये आयुर्वेद के शास्त्रीय ग्रन्थों में प्राय:
सभी आचार्यों ने जितना भी अनुभव और ग्यान प्राप्त किया था , उसका वर्णन बहुत सूच्छमता के साथ किया है /

चिकित्सा चन्द्रोदय़ चिकित्सा ग्रन्थ में दान्त के रोगों के लिये एक नुस्खा दिया गया गया है, जो दान्त की बहुत सी बीमारियों में बहुत प्रभाव शाली साबित हुआ है / यह बहुत सरल और सफल योग है /

योग मे निम्न काष्ठौशधियों का मिश्रण है /

मिश्रन; हरड़, बहेडा, आमला, सोन्ठ, काली मिर्च, छोटी पीपल, शोधित तुथ्थ, सेन्धा नमक, रूचक नमक, विड नमक, पतन्ग, माजूफल , ये सब द्रव्य बराबर बराबर मात्रा मे लेना चाहिये / इन सभी द्रव्यों को महीन कूट पीसकर पाउडर जैसा बना लेना चाहिये और बाद में मैदा छानने वाली चलनी से छान लेना चाहिये और किसी एयर टाइट डिब्बे में बन्द करके रख लेना चाहिए /

उपयोग के लिये किसी छोटे प्लास्टिक के डिब्बे या कान्च की शीशी में इस चूरन को रख लेना चाहिये /

एक ग्राम चुर्ण को लेकर दान्तों में मलना चाहिये / जो ब्रश से इस मन्जन को लेकर उपयोग करना चाहे वे ब्रश के साथ इसे दान्तों में मल सकते है / जिन्हें दान्तों मे दर्द हो, मसूढों मे दर्द हो, जिनके दान्त सेन्सिटिव हो गये हों, ठन्डा या गरम पानी लगता हो, या हवा या छूने से दर्द होता हो या दान्तों की अन्य कोई तकलीफ हो , उन सबमे यह दन्त मन्जन असर करक है /

मन्जन करते समय यदि इसमें एक बून्द “नीम का तेल” मिला लें और फिर मन्जन करें तो मुख रोग के लिये यह एक उत्कृष्ठ औषधि हो जाती है /

जिनके दान्त कमजोर हो गये हैं , मसूढॊ के विकर हों, पायरिया से पीडित हों , दान्त हिलने लगे हों और जड़ से कमजोर हो रहे हों, उनको यह मन्जन अवश्य उपयोग में लेना चाहिये /

नीम के तेल को इस मन्जन में मिला लेने से यह मन्जन दान्तों के सभी प्रकार के infection को दूर कर देता है, दान्तों में लगे हुये कीड़ों को यह नष्ट कर देता है /

इस मन्जन को ब्रश से न लगाकर यदि उन्गलियों से मन्जन करते है तो अधिक फायदा करता है और शीघ्र लाभकारी है /

A FEMALE case of HYPER-THYROIDISM with other gyneacological disorders एक महिला रोगी की हाइपेर-थायरायड के साथ साथ अन्य गायनोकोलाजिकल बीमारी की समस्या



यह केस एक ३५ साल की महिला का है , जिसको Hyper Thyroidism की शिकायत कई साल से थी / मरीजा ने दिनान्क २६.०६.२०१० को परामर्श किया था /

महिला को निम्न शिकायते थी, जिनके लिये वह परामर्श के लिये आयी थी /

१- अनियमित मासिक धर्म
२- मासिक होने से १० दिन पहले से मानसिक तनाव , अत्यधिक गुस्सा, झगड़ालू प्रवृति
३- मासिक के समय अत्यधिक रक्त श्राव, जिसके कारण रोगिणी बहुत कमजोर हो जाती थी
४- रोगिणी के स्तनॊं में सूजन और गान्ठे पड़ जाती है
५- पेट में सूजन

रोगिणी एलोपैथी का बहुत इलाज करा चुकी थी, उसको एलोपैथी के इलाज से कोई आराम नही मिला / मैने उसको सलाह दी कि अगर वह आयुर्वेदिक इलाज कराना चाहिती है तो वह एक ई०टी० जी० आयुर्वेदस्कैन का परीक्षण करा ले तो उसके सारे शरीर की बीमारियों के बारे मे पता चल जायेगा / दूसरा ऐसा कोई सरल तरीका नहीं है, जिससे उसकी बीमारी के बारे मे पता लगाया जा सके /

रोगिणी ने अपना ई०टी०जी० परीक्षण कराया, जिसकी फाइन्डिन्ग्स निम्न प्रकार से थी /

[अ] त्रिदोष;

कफ १३७.५२
पित्त ६८.७६
वात ५८.१५

[ब] सप्त धातु ;

मान्स १०२.०३
मेद ८१.००

[स] शरीर मे व्याप्त तकलीफॊं का अन्कलन

Mammery Glands 134.00
Lumber spine 122.22
Urinary Bladder 112.50
Mental/emotional/intellect 110.00
Sinusitis 110.00
Thyroid Pathophysiology 106.67
Uterus anomalies 88.50
Pelvic inflammatory disease 88.50
Renal anomalies 80.00
Menstrual anomalies 46.67

[द] रोग निदान ;

Bowel’s pathophysiology
Cervical spondylitis with Lymphadenitis
Epigastritis
Hormonal anomaly
Inflammatory and irritable bowel syndromes
Large intestines anomalies
Lumber pain
Mammary glands anomalies
Nervous temperaments
Tachycardia

इस रोगुणी को बताया गया कि उसे उक्त बीमारियां है / यह देखकर वह घबरा गयी कि इतनी बीमारियां एक साथ हो गयीं है / मैने उसको बताया कि ई०टी०जी० सिस्टम चूंकि सारे शरीर का स्कैन करता है इसलिये जो भी बीमारी या कार्य विकृति होती वह यह सब बता देता है / आयुर्वेद में सम्पूर्ण शरीर की चिकित्सा करने का विधान है, इसलिये जो भी फाइन्डिन्ग्स है उन सबका इलाज एक साथ होगा और आपको सारी तकलीफॊं में एक साथ आराम मिलेगा /

यह सुनकर मरीजा आश्वस्त हो गयी और उसको निम्न चिकित्सा व्यवस्था दी गयी /

अ- कान्चनार गुग्गुल १ गोली ; गले की गान्ठ के लिये
रज: प्रवर्तिनी वटी १ गोली ; मासिक धर्म की अनियमितता के लिये
ब्राम्ही वटी १ गोली ; नरवस्नेस और धड़कन के लिये
पुष्य्यानुग चूर्ण २ ग्राम के साथ दिन में दो बार सादे पानी से

ब- दश्मूलारिष्ट १० मिलीलीटर
कुमारीआसव १० मिलीलीटर
भोजन करने के बाद दोनों समय

मरीजा को १२० दिन दवा सेवन करायी गयी / दवा सेवनोपरान्त वह पूर्ण स्वस्थय है और उसे मासिक सम्बन्धी कोई तकलीफ नहीं है / उसकी थायरायड भी अब सामान्य कार्य कर रही है /

LEUCODERMA CURE of a Medical Student [Allopathy] ; ETG AyurvedaScan report based AYURVEDIC Treatment relieved her other complaints including VITILIGO


 
================================================
An Allopathy Medical student consulted me for her LEUCODERMA problem on 6th February 2011. I recorded her ETG AyurvedaScan and the treatment was given her on the basis of the findings of the ETG report. The same day a Photo of the one part of the VITILIGO was taken by me for record purposes. The following PHOTO shows the anomaly.

She was having white patches on both the Lower Extremeties and some smaller ones on her back , Torso and her genital parts etc etc

See, observe and compare the PHOTOS taken after a few months period.

This Photo was taken on 6th February 2011 on her first visite to clinic. This is the Right Lower Extremity -  Right Leg white patches

This Photo was taken on 6th February 2011 on her first visite to clinic. This is the Right Lower Extremity - Right Leg white patches

COMPARE PHOTO RIGHT LEG White PATCHES from below PHOTO;

This Photo was taken on  29th May 2011 on her follow-up visite to clinic. This is the  RIGHT  Lower Extremity -  Leg white patches, see the changes in color of white patches

This Photo was taken on 29th May 2011 on her follow-up visite to clinic. This is the RIGHT Lower Extremity - Leg white patches, see the changes in color of white patches

 LEFT LEG Comparison ;

This Photo was taken on 6th February 2011 on her first visite to clinic. This is the  Left  Lower Extremity -  LEFT Leg white patches

This Photo was taken on 6th February 2011 on her first visite to clinic. This is the Left Lower Extremity - LEFT Leg white patches

This Photo was taken on 29th MAY 2011 on her follow-up visite to clinic. This is the  LEFT  Lower Extremity -  Leg white patches, see and compare the changes in colour of white patches

This Photo was taken on 29th MAY 2011 on her follow-up visite to clinic. This is the LEFT Lower Extremity - Leg white patches, see and compare the changes in colour of white patches

 
CONCLUSION; Leucoderma and all disease conditions can be well treated with expertise way, if the AYURVEDIC Treatment is taken after ETG AyurvedaScan findings. Cure can be asured af all the bodily ailments, whatever they may be lebelled or nomenclature.
 
===========================================
 
 
============================================== 

ETG AyurvedaScan recorded traces of a case of CARDIAC SURGERY including grafting of arteries ; Impacts on body due to changes of Electrical behaviour


This is a case of Open Heart CARDIAC SURGERY including grafting of arteries, done eight years back.

The patient originally belongs to Ahamadabad , Gujarat and he came to his relative  at Kanpur during HOLI vacation, , where he heared about the newly invented Ayurveda technology ETG AyurvedScan by his relations.

When I recorded his ETG traces, it was an amazing  and wonderful experience to me at academic level in view of research , which  is unusual, rare and very peculiar.

OBSERVATION of the recorded traces;

1- See minutely the recorded traces and observe the ELECTRICAL BEHAVIOUR  of the patient, which is very peculiar

2- The ELECTRICAL BEHAVIOUR  is not met with the parameters of general recorded traces and in view of NORMAL ELECTRICAL BEHAVIOUR  of human body. 

3- In this case, we have observed that in every second and in every heart beat in “e” recorded trace, the waves “c” “d” “e” “s” are at one time in ‘upward’ [positive] direction and at the immediate next movement in  ‘downward’ [negative] defelection shows.

 4- The same lead shows absence of “c” wave in upward trace and “e” wave in down trace.

 5- The electrical behaviour of this patient is in ‘clock like direction’ that means the flow of body current is from right to left in circular nature. 

6- Due to frequentaly and second to second, electrical behaviour changes in body , patient have sudden HIGH and sudden LOW Blood pressure, which causes him uneasiness and uncomfort in his daily work. He is not able to sleep well in night and move in nightoff and on, when all members of his family sleeps.

 Many more anomalies have developed with the patient, which was not to patient earlier.

Below is the followup ETG AyurvedaScan , recorded on 20 / 08 /2011. See and observe the changes in Electrical Behaviour of the patient.

 Obsrvation with the comparision of the earlier recorded trace shows tremendous changes in the traces recorded afterwards.

First Follow-up ETG AyurvedaScan , recorded on 20 / 08 /2011. See and observe the changes in Electrical Behaviour of the patient.

First Follow-up ETG AyurvedaScan , recorded on 20 / 08 /2011. See and observe the changes in Electrical Behaviour of the patient.

 Obsrvation with the comparision of the earlier recorded trace shows tremendous changes in the traces recorded afterwards.

On 20 March 2011, when patient first visited in clinic , he gave the following complaints, which developed  after cardiac surgery . 

  1. 1.     Fever always persisted in between 99 F to 100 F degree.  After five months Ayurvedic treatment , fever is cured. No problem again reappeared.
  2. 2.     Rapid respiration , severe Dyspnea on least movement, even moving body and changing postures. After five months Ayurvedic treatment , resoiratory problem is cured. No problem again reappeared.
  3. 3.     Lumber pain since 7 years, now cured
  4. 4.     Gaining weight after cardiac surgery , which was 90 kgs on 20/08/2011. Now after five month the weight is 83 kgs.
  5. 5.     Swelling in whole body, now he have no swelling in his body
  6. 6.     Severe constipation and goes for stool after two / three days, now he is going daily stool. No constipation.
  7. 7.     Infection in blood was present before five months, now presently have no infection

 On 20th August 2011, patient followup was recorded. Patient belongs to Ahamadabad , Gujarat. He was happy with his progress of his problem aroused after grafting of artery in his heart.

 Conclusion; In conclusion, it shows that ETG AyurvedaScan system is beneficial on those disease conditions , where it is supposed no treatment. The patient is again given a fresh prescription on the new findings of the ETG report.

A case of Chronic THROMBOCYTOPENIA ; Reduced Platelet production ; Treated successfully by Ayurvedic medicines on basis of the findings of Electro Tridosha Graphy; ETG AyurvedaScan Report


This is a case of an Allopathic physician aged 60 years, who suffered from Viral Dengue hyperpyrexia and allied syndromes like Muscular-skeletal joints and articulation problems in August, 2006. He took allopathic medicines for his ailments, which relieved his Dengue problem but he suffered from joints and other syndromes.

After Blood pathological examination , this came in his notice that his platelets counts became down upto 15 thousands, a normal count is 1 lack 50 thousands to 4 lack 50 thousand, that created an agony to physician. His Hemoglobin became 6 mg% and for that he required to transfuse blood. He was advised to take 40 milligrams STEROID daily. He was admitted SGPGI Lucknow for three months. The practice of treatment was in run throughout four and half years.

One patient of mine asked the Physician, that Dr DBBajpai is treating patient on the basis of the findings of a newly invented technology ETG, if he desire for Ayurvedic treatment, he should go to Dr Bajpai and consult him.

The physician came to me and narrated his all story, I suggested him to go for an ETG examination.

The following wordsheet will provide all the data.

On the basis of the data, it is concluded that the patient is having , three main problems;

1- Bowel’s pathophysiology is present
2- Hepatospleenomegaly is present
3- Blood anomaly is present

The following Ayurvedic medicines were prescribed;

a- Kutajghan vati one pills
b- Arogyavardhini vati one pills
c- Gandhak Rasaayan one pills

To be taken Morning and Evening one dose daily with plain water

d- Sarivadyaasav 20 milliliters with equal quantity of water after Lunch and after Dinner

Patient was advised to carry treatment 90 days continuous.

On 6th January 2011 , pt came and told me that he is not taking STEROID from last two months and his swelling of whole body is vanished and other syndromes are relieved. His Blood platelets count is now 80 Thousand and he is feeling well than before.

I advised him to carry similar medicines for again 60 days. I told him that medicines will be changed after second ETG AyurvedaScan findings.

Comments; Ayurvedic treatment based on the findings of ETG AyurvedaScan is always fruitful and result oriented, which we have experienced after treating thousands of cases in our practice.

ई०टी०जी० आधारित एक आरोग्य प्राप्ति का केस ; रक्त की प्लेट्लेट्स का अत्यधिक कम हो जाने की बीमारी ; A case of 15000 Fifteen Thousand PLATELETS Blood counts


यह केस एक एलोपैथी के ६० साल की उम्र के चिकित्सक का है, जिनको साढे चार साल पहले अगस्त, सन २००६ में “वाइरल डेन्गू बुखार” हुआ था / इनका कई माह तक एलोपैथी का इलाज चला, जिससे डेन्गू बुखार तो चला गया लेकिन जोड़ो और मान्स्पेशियों का दर्द तथा दूसरी शिकायतें बनी रही /

रक्त की जान्च करने पर पता चला कि इनके रक्त की प्लेट्लेट्स १५ हजार और हीमोग्लोबिन ६ मिलीग्राम प्रतिशत तक पहुन्च गया है / इस हालत में इनको रक्त चढवाना पड़ा और चिकित्सकों ने इनको ४० मिलीग्राम स्टेरायड प्रतिदिन लेते रहने के लिये कहा / लगभग चार साल से रक्त चढवाने और Steroid खाने का सिल्सिला चल रहा था / SGPGI, Lucknow मे तीन माह भर्ती रह कर इलाज करवाया लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ /

किसी मरीज ने इन डाक्टर साहब को आयुर्वेद की नई आविष्कृत की गयी तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के बारे मे बताया / दिनान्क ०६ अक्टूबर २०१० को यह चिकित्सक महोदय मेरे पास consultation के लिये आये / मैने उनसे कहा कि आपको एक ई०टी०जी० परीक्षण करना पड़ेगा तभी पता चल पायेगा कि आपके शरीर के अन्दर क्या गड़्बड़ी है /

उनका परीक्षण इसी दिन किया गया जिसमें निम्न फाइन्डिन्ग्स आयीं /

[१] त्रिदोष ; [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]

कफ १३४.३१ ई०वी० प्रतिशत
पित्त १११.०९ ” ”
वात ६३.५६ ” ”

[२] त्रिदोष भेद ; [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]

{सभी मान ई०वी० में e.v. means ETG value}

भ्राजक पित्त १४५.८७
लोचक पित्त १०४.८६
पाचक पित्त ८५.५५
साधक पित्त ८३.९४
अवलम्बन कफ ७८.०५
रन्जक पित्त ७६.१९
रसन कफ ७१.४४
उदान वात ६९.५९
श्लेष्मन कफ ६४.१७
व्यान वात ५९.२२
समान वात ४०.१५

[समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]

[3] सप्त धातुये ; [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]
मेद १२२.१३
मान्स १२०.९३
रस ११४.८०
शुक्र १११.१३
मज्जा १०८.३४
रक्त १०५.८२
अस्थि १०४.५३

[४] शरीर में व्याप्त कार्य विकृति Pathophysiology और विकृति Pathology की उपस्तिथि की स्तिथियां [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]
Autonomic Nervous system 157.14
Thoracic region/spine/cage 140.00
Body Fat 122.13
Liver/Pancrease/spleen 117.50
Metabolism 114.00
Blood Anomalies 105.80
Skin ailments 106.00
Thyroid pathophysiology 61.67
Spleen pathophysiology 60.00
Thymus pathophysiology 57.14
Liver pathophysiology 54.00
Epigastrium pathophysio 46.00
Abdomen/Intestines/colon 44.00
Prostate pathophysio 37.21
Intestines pathophysiology 35.56

[5] रोग निदान / Diagnosis of disease conditions
a- Blood anomaly
b- Bowel’s pathophysiology
c- Colon Inflammatory condition with swelling and hardness
d- Dull mental behaviour
e- Enlarged Liver with poor function
f- Hormonal anomalies
g- Pancreatic pathophysiology
h- Renal anomalies
i- Spleenomegaly ? Hepatospleenomegaly
j- Swelling in whole body

ई०टी० जी० आधारित रोग निर्धारण और औषधियों का चयन

रोगी जब परामर्श और चिकित्सा व्यवस्था के लिये आया तो ई०टी०जी० रिपोर्ट के आधार पर निष्कर्श निकाला गया कि इस रोगी को “कफ़ज पित्तज” व्याधि है / त्रिदोष भेद में यही बात सामने आयी /

सप्त धातुयें भी सामान्य से अधिक की ओर अपना झुकाव दर्शा रहीं है / इसका अर्थ यह निकला कि इस रोगी का मेटाबालिज्म की प्रक्रिया अधिक की ओर और तेज है / यह मरीज की Pathological condition को इन्गित कर रहा है /

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी की पुरी रिपोर्ट का अध्ध्यन करने के पश्चात conclusion में तीन बातें समझ में आयी/

१- मरीज की आन्तों में सूजन है यानी Bowel’s Pathophysiology है /

२- यकृत और प्लीहा दोनों का बढा होना

३- रक्त की दुष्टि यानी Blood Anomaly

उक्त निष्कर्ष को ध्यान में रखते हुये इस मरीज को निम्न औषधियां prescribe की गयी /

अ- कुटज घन वटी १ गोली ; आन्तों की सूजन और विकृति के लिये
आरोग्य वर्धिनी वटी १ गोली ; यकृत प्लीहा के विकार के लिये
गन्धक रसायन १ गोली ; रक्त दुष्टि के लिये

सभी गोलियां एक साथ सुबह और शाम दिन में दो बार सादे पानी से खाने के लिये निर्देशित किया गया /

ब- सारिवद्यासव २५ मिलीलीटर बराबर पानी मिलाकर दोपहर और रात भोजन करने के बाद ; सप्त धातुओं की पुष्टि के लिये

रोगी से कहा गया कि वह इन सब दवाओं को लगातार ९० दिन तक सेवन करे , बाद मे प्रामर्श करे /

दिनान्क ०६ जनवरी २०११ को मरीज दिखाने आया / उसके सारे शरीर की सूजन एक्दम ठीक थी / मरीज रोजाना ४० मिलीग्राम steroid खाता था, वह अब उसने खाना बन्द कर दिया है , क्योंकि उसको steroid खाने की अब जरूरत नही लगी / उसका platelets count १५ हजार से बढ कर ८० हजार हो गया है, सामन्य तया शरीर में platelets की सन्ख्या रक्त में १ लाख पचास हजार से लेकर ४ लाख तक होती है / उसे बार बार हर पन्द्रह दिनों में रक्त चढवाना पड़्ता था, वह दो महीने से नही करना पड़ा / जो अन्य तकलीफें थी जैसे शरीर में फुन्सियां निकलना और शरीर में काले चकत्ते पड़ना, वह सब ठीक है /

चिकित्सक महोदय से मैने कहा कि आप अभि यही दवा खाते रहिये और मार्च २०११ में एक दूसरा ई०टी०जी० परीक्शण करा ले, उसके बाद जो भी फाइन्डिन्ग्स आयेंगी , तदनुसार दवा परिवर्तन कर दिया जायेगा /

Comments; आधुनिक चिकित्सा विग्यान में इस बीमारी  के इलाज के लिये केवल Steroid दवा के अलावा अन्य कोई दूसरी दवा है ही नहीं / सभी को पता है कि Steroid  का उपयोग शरीर के लिये कितना खतरनाक है / आयुर्वेद के इलाज के लिये ई०टी०जी० तकनीक आधारित चिकित्सा हमेशा फायदा देती है / 

SEXUAL POWER ; Confirmation of Sexual Power intensity of a Human being by Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan system


Many persons are willing to know the intensity of their SEXUAL POWER by any source. Till today no machine and mechanical parameters are available to establish sexual power by any technology.

But it is possible today and sexual power can be measured by mechanical means. By virtue of Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan system, now it is possible to establish the SEXUAL POWER of any human being in measured intensity.

The ETG system measures many parameters systemwise, sectorwise, traces wise, ayurvedic fundamental-wise and so on . PROSTATE health condition is scanned by ETG system. So is of the SAPTA dhatu.

 The SAPTA DHATU of Ayurveda is considered , similar to PATHOLOGY of Modern western medicine. Intensity of Prostate value shows the Sexual Power intensity of a human being, how is the person’s sexual drive. One of the Sapta Dhatu SHUKRA is evaluated and this shows the Quality and quantity of Semen. The passion of sexual ability and erotic sensibility can be measured by correlating to Autonomic nervous system and Brain faculties evaluation. .

In our studies, we have found that persons, which have very low intensity of PROSTATE pathophysiology, say below 30 e.v. , they are almost IMPOTENT and have no sexual desire. Upper signification of the above said parameters, shows intensity of Sexual desire in increasing level upto 90 e.v., which we consider a normal level. Sexual potency increases according to touch level of Normal parameters.

Strong sexual passion and erotic sensibility is seen in those persons, who have 95 e.v. to 99 e.v.

Excessive sexual passion and erotism is seen in those , who have beyond the above said parameter. Those who have 120 e.v. to more upper limit causes more passion to sexual behaviour.

We have seen that some persons have temporary IMPOTENCY, Their above given parameters , when comes in normal limit and when we see that person says that he have no sexual desire, we consider it a temporary and circumstantial problem with the person. It may be happen due to long travels by Railway, by Car or by any means. We have observed that some persons are impotent due to their workings both physical and mental. The re is other reasons, which are varying from person to person.

In these persons we have given Ayurvedic medicine and their impotency is restablished and as usual as it was in earliest forms. Now it is possible to treat either less sexual desire or excessive desire for sexual intercourses by Ayurveda.

जब ब्लड प्रेसर की दवा खाते रहने के बाद भी ब्लड प्रेसर समान्य न हो तब क्या करे…………


बहुत से ऐसे मरीजों को देखा है जिनको एलोपैथी की ब्लड प्रेसर की दवा खाने के बाद भी उनका ब्लड प्रेसर सामान्य नहीं होता, जबकि उनकी सभी तरह की आधुनिक जान्च कर ली गयीं और सब कुछ समान्य निकला या सामान्य निकलता है /

मैने ऐसे मरीजों को काफी समय तक Monitor किया है, बिना कोई अतिरिक्त दवा के / वे जो भी Allopathy की दवा खा रहे थे, मैने उनको वही दवा , जिस Doctor ने prescribe की थी, Doctor की सलाह लेकर लगातार लेने की सलाह दी / लेकिन इस सबके बाव्जूद उनका Blood Pressure कम नहीं हुआ /

ऐसे बहुत से लोग हैं जिनको इस तरह की परेशानी बनी रहती है, उनको मै कुछ सुझाव दे रहा हू, जिन पर अमल करने से फायदा हो सकता है /

आयोडीन जैसे नमक और सादा समुद्री नमक खाना बन्द कर दें और इसकी जगह सेन्धा नमक का प्रयोग करना शुरू कर दें / घर के सभी लोग सेन्धा नमक खाने से बहुत सी आये दिन की बीमारियों से निजात पा जायेन्गे / सेन्धा नमक खने से Blood Pressure कम होने लगता है /
अपना पेट साफ रखे / परन्तु इसके लिये कोई विरेचक चूर्ण या दस्त साफ़ लाने वाला प्दार्थ न ले / ज्यादा कब्ज की हालत में अमल्तास को पानी में भिगोकर खाने के पहले सेवन करें / अमल्तास की मात्रा कितनी लेनी है , बेह्तर है , अपने नजदीक के किसी वैद्य या हकीम से पूछ लें / हलका विरेचन के लिये त्रिफला चूर्ण का प्रयोग कर सकते है /
सुबह का नश्ता बन्द कर दें और केवल एक गिलास फलों का रस या सादा दूध सेवन करें /
दोपहर में हल्का भोजन लें और अपनी भूख से कम खायें /
अचार, दाल मोठ, नमकीन सब बन्द कर दें / जब भुख लगे तब फल या फलों का रस लें /
जिनका ब्लड प्रेसर बढा हुआ रहता है उनका इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ परीक्षण में कई तरह की कार्य विकृतियां मिलती है, जिनमें Hydro Musculosis, Epigastritis, swelling bowels pathophysiology इत्यादि बातें शामिल होती है / इन कारणॊं का इलाज कर देने से बढा हुआ blood pressure कम होने लगता है /
जब allopathy दवा खाने के बाद भी blood pressure कम नही होता तो चिकित्सक दवा की मात्रा बढा देते है / ऐसा करना ठीक नहीं होता / इससे अछ्छा है कि allopathy दवा खाने के साथ साथ यदि आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवा खाये तो अधिक फायदा उठा सकते है / अपने नजदीक के किसी वैद्य या होम्योपैथिक चिकित्सक से सम्पर्क करें /
मान्सिक तनाव से दूर रहें और कोशिश करें कि मन को शान्त रखें / आपकी किसी समस्या का हल नही हो रहा है तो उस समस्या के हल के लिये प्रयास करे और सब कुछ ईश्वर के ऊपर छोड दें / यह बात हमेशा ध्यान में रखें कि सब कुछ और बहुत कुछ हम नही कर सकते / मन में इस बात का विश्वास करें और हमेशा POSITIVE THINKING को दिशा दें /

अपने सभी कार्य नियमित करें / कम से कम ७ घन्टा आराम करेम / मश्तिष्क यदि ज्यादा काम करने से थक जाये तो बीच बीच में थोड़ी थोड़ॊ देर के लिये आराम दे /

इन सब उपायों को करने से blood pressure अवश्य सामान्य होगा, इसका विश्वास करें / जब ऐसे उपाय करने से सैकड़ॊ लोगो के blood pressure सामान्य हो गये है तो उन सबका भि सामन्य होगा , जो यह सलाह अपनायेन्गे /

BRAIN TUMOUR CASE ; Recording of the ETG AyurvedaScan Tracings of a patient, suffering from ‘’ BRAIN TUMOUR ‘’ for the observation to Ayurvedic and other system’s practitioners……..treatment based on the data of ETG AyurvedaScan and Ayurvedic remedies saved the life of patient..


Below is the trace record of a BRAIN TUMOUR patient , done by the Electro Tridosha Graphy ETG AyurvedaScan system.

Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan  trace record of a BRAIN TUMOUR Patient

Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan trace record of a BRAIN TUMOUR Patient

The trace record no. 1 is showing the tendency of HIGH BLOOD PRESSURE, which was confirmed after Blood pressure reading.

The trace record no.3 is showing the presence of BRAIN ANOMALY. All the elven waves , a,b,c,d,e,s,h,l,m,n,o both vertically and Horizontally are depressed and not well elevated.

The trace record no.3 is badly bending towards clockwise direction and is filing wide gap in between d & e waves, The interpretation is showing inflammatory condition of the BRAIN PARTS.

The ETG report data of NERVOUS SYSTEM is ;
• Autonomous Nervous system 364.29
• Cerebral medulla brain 90.00
• Temporal Brain 90.00
• Frontal Brain 66.67
• Pareital Brain 45.00
• Occipital Brain 58.33

CTScan and MRI scan confirmed the diagnosis of the BRAIN TUMOUR.

Below is the reports of the patient, done by the physician.

The Nerosurgeons left the case untreated and then patient came to me for his treatment.

FOLLOW-UP;

On request of patient’s  family members, I took  this case for treatment. Though  Allopathic Doctors said them that they have no treatment for this condition.

Now I am giving him AYURVEDIC MEDICINES. The patient condition improved after  one week treatment. Earlier he could not walk smoothly, on walk , his lower limbs was not coordinating and goes to either sides. His appetite was not well. He could not sleep well.

After one week of Ayurvedic treatment , he improoved in these problems. I have given him another one week medicines. I am collecting data, how he got this condition?

FOLLOW-UP ;  on date 05,09,2010

Patient well responded with the Ayurvedic medicine. His General physical condition improved well. Generally he have no problem and doing his routine work well. He is a shop keeper and he is doing his routine work as usual.

I instructed him , to not to do any vigourous work and he should take  sufficient rest both physical and mental.

His blood pressure is comming down slowly and gradually and is 135/98 mm Hg, which was earlier 198/124 mmHg,  his pulse rate was high but  now it is 92 per minute.

His physical condition is better comparatively than before at present. He is advised to continue Ayurvedic medicine.

FOLLOW-UP OF THE CASE / on  dated 18.09.2001

Patient  is not feeling any physical or mental  problem. He is carrying AYURVEDIC MEDICINE regularly. I have instructed him that he should change his life style and should not wake in night. He should take atleast 7 hours complete sleep. He should keep his diet acording to the diet Card, which I provide to patient. He should avoide strictly copulation at least six month.

SPECIAL NOTES TO DOCTORS / COLLEAGUES ;

Any Physican , Ayurvedic doctors, any branch of Medical practitioner, if want to see or check the patient, they can go directly to patient’s home  and they can examine the patient in his home. I will provide the address of the patient on request.

Any person, any similar patient, if desire to see and like to meet the patient in treatment in his home for query, the address of the patient is available on request.