Viral Fever

ऐसा क्यॊं है?


पिछले कई महीनों से कानपुर शहर में वाइरल बुखार का प्रकोप बना रहा / इस तरह के वाइरल इन्फेक्सन हर साल बरसात के मौसम में होते ही है / पिछले ४० साल से मै वाइरल इन्फेक्सन का इलाज करता चला आ रहा हूं / वाइरल इन्फेक्सन हर साल अपना मिजाज बदल देता है, अपनी पहचान बदल देता है, अपने प्रभाव को कभी बहुत नरम और कभी बहुत गरम बना लेता है / यानी कभी इस वाइरल का प्रभाव फैटल होता है और कभी तकलीफ्देह और कभी साधारण तकलीफ देकर जल्द ही छोड़ देता है / ऐसा मेरा अनुभव रहा / सबसे सुखद बात यह रही की , पिछले ४० साल में वाइरल बुखार का एक भी रोगी मेरे इलाज से मरा नही और सबके सब ठीक और आरोग्य प्राप्त करके, स्वस्थ्य होकर गये और आज भी जिन्दा है /

एलोपैथी चिकित्सा के मुकाबले में मेरे द्वारा आयुर्वेदिक और होम्योपैथी दवाओं द्वारा इलाज किये गये रोगी जल्दी और सुरक्षित ठीक हुये / यह मै इसलिये कह रहा हूं क्योंकि मै रोजाना अखबारों में प्रकशित खबरें पढा करता हूं कि ” आम जनता महीनों से बुखार से पीड़ित है और बुखार ठीक नहीं हो रहा है “, यह सब पढकर जब मै अपना अनुभव देखता और समझता हूं तो मै इस सोच में पड़ जाता हू कि जब हमारे पास बुखार से निपटने के लिये “बेहतर” उपाय मौजूद है तब यह स्तिथि क्यों है ?

मैने आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाओं का उपयोग किया है / किसी किसी रोगी में बुखार न बढने पाये और यदि मरीज चाहता है कि बुखार बढने से उसे तकलीफ होगी , तो मै उसे Paracetamol tab केवल बुखार का जोर कम करने के लिये कहता हूं / चिकित्सक और चिकित्सा का उद्देश्य ही यही है कि रोगी को उसकी तकलीफ से राहत दिलाई जाय और रोगी के शारीरिक कष्टॊं को दूर किया जाय, चाहे जो भी उपाय करना पड़े /

फिर ऐसा क्यॊ है कि वाइरल बुखार से निपटने के लिये जब बेहतर उपाय उपलब्ध है तो लोग क्यों मर रहे है और तकलीफ भोग रहे है ?

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